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इराक पर अमेरिकी हमले की बेरहमी को उजागर करने वाले असांजे को सज़ा दिलाने पर अड़ा अमेरिका
जिस मामले पर असांजे की सुनवाई होगी, उसका 11 अप्रैल 2019 को लंदन स्थित इक्वाडोर दूतावास से उनकी गिरफ़्तारी के कारणों से कोई लेना-देना नहीं होगा।
विजय प्रसाद
03 Sep 2020
इराक पर अमेरिकी हमले की बेरहमी

7 सितंबर, 2020 को जूलियन असांजे लंदन की बेल्मार्स जेल के अपने सेल को छोड़ देंगे और एक ऐसी सुनवाई का सामना करेंगे,जो उनकी क़िस्मत तय करेगी। लम्बे समय से अलग रहने के बाद असांजे आख़िरकार 25 अगस्त को अपने साथी स्टेला मोरिस से मिल पाये और अपने दो बेटों-गैब्रियल (उम्र तीन साल) और मैक्स (उम्र एक साल) को देख सके। उस भेंट के बाद मोरिस ने कहा कि असांजे “बहुत दर्द में दिख रहे थे।”

जिस मामले पर असांजे की सुनवाई होनी है,उसका 11 अप्रैल, 2019 को लंदन स्थित इक्वाडोर दूतावास से उनकी गिरफ़्तारी के कारणों से कोई लेना-देना नहीं होगा। 2012 में उन ब्रिटिश अधिकारियों के सामने आत्मसमर्पण नहीं कर पाने के चलते उन्हें उस दिन गिरफ़्तार कर लिया गया था, जो अन्यथा उन्हें स्वीडन में प्रत्यर्पित कर दिये होते; स्वीडन में उस समय असांजे के ख़िलाफ़ यौन अपराधों के आरोप थे, जिन्हें नवंबर 2019 में उठा लिया गया था।

दरअसल, जब स्वीडिश अधिकारियों ने असांजे के ख़िलाफ़ मुकदमा नहीं करने का फ़ैसला किया था, तो उन्हें ब्रिटेन सरकार द्वारा रिहा कर दिया जाना चाहिए था। लेकिन, असांजे को रिहा नहीं किया गया।

गिरफ़्तारी का असली कारण स्वीडन में उनके ख़िलाफ़ आरोप नहीं,बल्कि  अमेरिकी सरकार की वह इच्छा थी कि उन्हें कई आरोपों के आधार पर अमेरिका लाया जाये। 11 अप्रैल, 2019 को यूके होम ऑफ़िस के प्रवक्ता ने कहा, “हम पुष्टि कर सकते हैं कि जूलियन असांजे को संयुक्त राज्य अमेरिका की तरफ़ से किये गये तात्कालिक प्रत्यर्पण अनुरोध के सिलसिले में गिरफ़्तार किया गया था। वह संयुक्त राज्य अमेरिका में कंप्यूटर से जुड़े अपराधों का आरोपी है।”

मैनिंग

असांजे की गिरफ़्तारी के अगले दिन, अभियान समूह,आर्टिकल 19 ने एक बयान दिया था,जिसमें कहा गया था कि जब ब्रिटेन के अधिकारियों ने "प्राथमिक तौर पर" कहा था कि वे स्वीडिश प्रत्यर्पण अनुरोध के चलते 2012 में ज़मानत के लिए भाग रहे असांजे को गिरफ्तार करना चाहते हैं, तो अब यह साफ़ हो गया है कि वह गिरफ़्तारी अमेरिकी न्याय विभाग की तरफ़ से उसकी मांग के चलते हुई थी।

अमेरिका असांजे को "एक गोपनीय अमेरिकी सरकारी कंप्यूटर के पासवर्ड में सेंध लगाने को लेकर सहमत होने को लेकर कंप्यूटर घुसपैठ करने की साजिश के संघीय आरोप के सिलसिले” में लाना चाहता था। असांजे पर 2010 में व्हिसलब्लोअर,चेल्सी मैनिंग की मदद करने का आरोप लगाया गया था, जब मैनिंग ने अमेरिकी सरकार की गोपनीय जानकारी का एक विस्फोटक हिस्सा असांजे के नेतृत्व में विकीलीक्स को दे दिया था,जिसमें युद्ध अपराधों के स्पष्ट सबूत थे। पूर्व अमेरिकी राष्ट्रपति, बराक ओबामा द्वारा सज़ा सुनाये जाने से पहले मैनिंग ने सात साल जेल में बिताये थे।

जिस दौरान असांजे इक्वाडोर के दूतावास में थे और अब जबकि वह बेल्मार्स जेल में बंद हैं, तो अमेरिकी सरकार ने उसी दौरान उनके ख़िलाफ़ एक बेहद मज़बूत केस बनाने की कोशिश की थी। अमेरिकी न्याय विभाग ने असांजे को कम से कम 18 आरोपों में शामिल किया है, जिनमें गोपनीय दस्तावेज़ों को सरेआम करने और मैनिंग को पासवर्ड क्रैक करने और पेंटागन में कंप्यूटर को हैक करने में मदद करने के आरोप भी शामिल हैं। 2018 से इन अभियोगों में से एक अभियोग स्पष्ट रूप से असांजे के ख़िलाफ़ मामला बनाता है।

असांजे पर दस्तावेज़ों को सरेआम करने का जो आरोप लगाया गया है,वह केंद्रीय आरोप नहीं है, क्योंकि उन दस्तावेजों को न्यू यॉर्क टाइम्स और गार्जियन जैसे मीडिया घरानों ने भी प्रकाशित किया था। मुख्य आरोप यह है कि असांजे ने “मैनिंग को और ज़्यादा जानकारी मुहैया कराने के लिए सक्रिय रूप से प्रोत्साहित किया था और अमेरिकी इंटरनेट विभाग (SIPRNet) से जुड़े रक्षा विभाग के कंप्यूटरों में  संग्रहित उस पासवर्ड हैश को ब्रेक करने को लेकर सहमति व्यक्त की गयी थी, जो संयुक्त राज्य सरकार का एक नेटवर्क है और जिसका इस्तेमाल गोपनीय दस्तावेज़ों और संचार के लिए किया जाता है।

असांजे पर उस पासवर्ड हैश को क्रैक करने के लिए सहमत होने के लिए कंप्यूटर घुसपैठ करने की साज़िश का भी आरोप है।” यहां समस्या यह है कि ऐसा लगता है कि अमेरिकी सरकार के पास इस बात का कोई सबूत नहीं है कि असांजे ने मैनिंग के साथ किसी तरह की साठ-गांठ करके यू.एस. प्रणाली में सेंध लगायी थी।

मैनिंग इस बात से इनकार नहीं करती हैं कि उन्होंने सिस्टम को ज़बरदस्ती तोड़ा था, सामग्री डाउनलोड की थी और उन्हें विकीलीक्स के पास भेज दिया था। एक बार ऐसा ज़रूर हुआ था कि विकीलीक्स ने अन्य मीडिया घरानों की तरह उन सामग्रियों को प्रकाशित कर दिया था। मैनिंग को उन सामग्रियों के हस्तांतरण में अपनी भूमिका के लिए बेहद कष्ट भरे सात साल जेल में बिताने पड़े थे।

असांजे के ख़िलाफ़ सबूतों की कमी के चलते मैनिंग को एक बड़ी न्यायपीठ के सामने उनके ख़िलाफ़ गवाही देने के लिए कहा गया था। उन्होंने ऐसा करने से इनकार कर दिया था और अब एक बार फिर वह जेल में है; अमेरिकी अधिकारी उसे जेल में रखने का इस्तेमाल असांजे के ख़िलाफ़ गवाही देने के तरीक़े के तौर पर कर रहे हैं।

मैनिंग ने असांजे को क्या भेजा था

विकीलीक्स ने 8 जनवरी 2010 को इस बात का ऐलान किया था कि उसके पास "नागरिकों पर अमेरिकी बम हमलों के एन्क्रिप्टेड वीडियो" हैं। उस वीडियो को बाद में "कोलैटरल मर्डर" के रूप में जारी किया गया था। वीडियो में दिखाया गया है कि 12 जुलाई 2007 को, यू.एस. ए.एच.-64 अपाचे हेलीकॉप्टरों ने किस तरह न्यू बग़दाद में इराक़ियों के एक समूह पर 30 मिलीमीटर बंदूकें दागीं थीं; मारे गये लोगों में रॉयटर्स के फ़ोटोग्राफ़र,नामिर नूर-एल्डीन और उनके ड्राइवर सईद चामघ भी थे। रायटर ने तुरंत उस हत्या के बारे में जानकारी मांगी थी; उन्हें आधिकारिक कहानी सुनायी गयी थी और बताया गया था कि ऐसा कोई वीडियो ही नहीं था, लेकिन रॉयटर्स उस वीडियो को पाने की निरर्थक कोशिश करता रहा।

2009 में वाशिंगटन पोस्ट के रिपोर्टर, डेविड फिंकेल ने अपनी किताब, द गुड सोल्जर्स प्रकाशित करवाया, जो रिपोर्टिंग के दौरान अमेरिकी सेना की 2-16 बटालियन के साथ उनके बिताये गये समय पर आधारित थी। फिंकेल अल-अमीन के पड़ोस में अमेरिकी सैनिकों के साथ थे,जब उन्होंने अपाचे हेलीकॉप्टरों को गोलीबारी की आवाज़ सुनी थी।

अपनी किताब के लिए फ़िंकेल ने उस टेप को देखा था (यह बात उनकी किताब की पृष्ठ संख्या 96 से 104 तक से स्पष्ट है); उन्होंने अमेरिकी सेना का बचाव करते हुए कहा कि "अपाचे चालक दल ने युद्ध के नियमों का पालन किया था" और यह भी कहा कि "सभी ने उचित तरीक़े से काम किया था।" उन्होंने लिखा, वे सैनिक "अच्छे सैनिक थे और वह समय रात के खाने का समय था।" फ़िंकल ने साफ़ कर दिया था कि एक ऐसा वीडियोद था, भले ही अमेरिकी सरकार ने रायटर के लिए उसके वजूद से इनकार कर दिया था।

वीडियो दिल दहला देने वाला है। यह पायलटों की क्रूरता को दर्शाता है। ज़मीन पर मौजूद लोग किसी पर भी गोली नहीं चला रहे थे। लेकिन, पायलटों ने उनपर अंधाधुंध फ़ायरिंग की थी। नागरिकों पर गोलाबारी करने के बाद उनमें से एक कहता है, "उन मरे हुए हरामियों को देखो," जबकि दूसरा कहता है, "बहुत ख़ूब"। एक वैन को उस नरसंहार वाली जगह तक खींचकर लाया जाता है, और एक व्यक्ति जिन घायलों की मदद करने के लिए उससे बाहर निकलता है,उसमें सईद चामघ भी शामिल हैं। पायलट उस वैन पर फ़ायरिंग करने की अनुमति मांगता है, उतनी ही तेजी से उसे अनुमति मिल भी जाती है और वे वैन पर गोलीबारी कर देते हैं। जिनके साथ फ़िंकल लगाये गये थे,वह 2-16 बटालियन का हिस्सा रहे आर्मी स्पेशलिस्ट,एथन मैककॉर्ड ने ज़मीन पर मिनटों बाद उस दृश्य का मुआयना किया था।

मैककॉर्ड ने जो कुछ देखा था,उसे 2010 में वायर्ड के किम जेट्टर को बताते हुए कहा था, “मैंने इससे पहले कभी किसी को भी 30 मिलीमीटर राउंड से गोली मारते नहीं देखा था। इस मायने में यह हक़ीक़त नहीं लग रहा था कि यह इंसान की तरह तो नहीं दिखता था। वे सबके सब तहस-नहस हो गये थे।”

मैककॉर्ड और अन्य सैनिकों ने उस वैन में बुरी तरह घायल साजाद मुताशर (उम्र 10 साल) और दोहा मुताशर (उम्र पांच साल) को पाया,जिसके पिता सालेह,जिन्होंने सईद चामघ को बचाने की कोशिश की थी,ज़मीन पर मरे पड़े थे। इस वीडियो में पायलट देखता है कि उस वैन में बच्चे थे; वह बेरहमी से कहता हैं,"अरे हां, अपने बच्चों को किसी लड़ाई में लाना तो उनकी अपनी ग़लती है।"

राष्ट्रपति बराक ओबामा के प्रेस सचिव रहे रॉबर्ट गिब्स ने अप्रैल 2010 में कहा था कि इस वीडियो में दिखने वाली वाली घटनायें "बेहद कारुणिक" हैं। लेकिन,राज़ तो अब फ़ाश हो चुका था। इस वीडियो ने दुनिया के सामने इराक़ पर हुए अमेरिकी हमले के उस वास्तविक चरित्र को खोलकर रख दिया था, जिसे संयुक्त राष्ट्र के तत्कालीन महासचिव कोफ़ी अन्नान ने "न्याय-विरुद्ध" कहा था। असांजे और विकीलीक्स द्वारा इस वीडियो को जारी किये जाने से संयुक्त राज्य सरकार को शर्मिंदगी उठानी पड़ी थी। मानवीय युद्ध के इसके सभी दावे अब भरोसेमंद नहीं रह गये थे।

यही वह स्थिति थी,जिसमें असांजे को तबाह करने का अभियान शुरू हो गया था। संयुक्त राज्य की सरकार ने यह साफ़ कर दिया है कि वह असांजे के ख़िलाफ़ राजद्रोह तक की हर चीज को आज़माना चाहती है। असांजे और एडवर्ड स्नोडेन जैसे लोग,जो अमेरिकी सत्ता के इस स्याह पहलू को सामने लाते हैं, उनके लिए अमेरिकी व्यवस्थधा में कोई गुंज़ाइश नहीं दिखती। मैनिंग, जेफ़री स्टर्लिंग, जेम्स हित्सेलबर्गर, जॉन किरियाकौ और रियलिटी विनर जैसे लोगों की एक लंबी सूची है, जो अगर संयुक्त राज्य अमेरिका के निशाने पर रह रहे देशों में रहते हैं, तो उन्हें असंतुष्ट या असहमत कहा जायेगा। मैनिंग तो सही मायने में युद्ध अपराधों को उजागर करने वाली एक बहादुर महिला है; असांजे, जिसने महज़ उनकी सहायता की थी, उन्हें सरेआम सताया जा रहा है।

अमेरिकी सेना द्वारा मारे जाने से कुछ महीने पहले, 28 जनवरी, 2007 को नामिर नूर-एल्डीन ने एक युवा लड़के के बग़दाद में एक फ़ुटबॉल गेंद के साथ उसके चारों ओर बने ख़ून के दरिया के नीचे क़दम रखते हुए एक तस्वीर ली थी। बगल में चमकीले लाल ख़ून के साथ कुछ अस्त-व्यस्त स्कूली किताबें पड़ी हैं। यह नूर-एल्डीन की मानवीय नज़र का कमाल था,जिसने उस तस्वीर को लिया था, जिसमें वह लड़का ख़तरे के चारों ओर ऐसे मंडरा रहा था,मानो कि यह फुटपाथ पर कूड़े से ज्यादा कुछ नहीं हो। यही वह "अमेरिकी" अवैध युद्ध था,जो उसके देश में लड़ा गया था।

इन सब मंज़रों के इतने साल गुज़र जाने के बाद भी यह युद्ध लंदन की एक अदालत में जीवंत है और भलीभांति बना हुआ है; वहां उस नरसंहार की सच्चाई का ख़ुलासा करने वाले जूलियन असांजे इराक़ पर अमेरिकी हमले के एक और शिकार होने के ख़िलाफ़ संघर्ष कर रहे हैं।

विजय प्रसाद एक भारतीय इतिहासकार, संपादक और पत्रकार हैं। वह इंडिपेंडेंट मीडिया इंस्टिट्यूट की परियोजना, ग्लोबट्रॉट्टर में एक राइटिंग फ़ेलो और मुख्य संवाददाता हैं। वे लेफ़्टवर्ड बुक्स के मुख्य संपादक और ट्राईकांटिनेंटल: इंस्टिट्यूट फ़ॉर सोशल रिसर्च के निदेशक हैं।

यह लेख इंडिपेंडेंट मीडिया इंस्टिट्यूट की एक परियोजना, ग्लोबेट्रॉटर द्वारा तैयार किया गया था।

अंग्रेज़ी में प्रकाशित मूल आलेख को पढ़ने के लिए नीचे दिये गये लिंक पर क्लिक करें

The U.S. Is Determined to Make Julian Assange Pay for Exposing the Cruelty of Its War on Iraq

Julian Assange
WikiLeaks co-founder
UK
USA

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