NewsClick

NewsClick
  • English
  • राजनीति
  • अर्थव्यवस्था
  • विज्ञान
  • संस्कृति
  • भारत
  • अंतरराष्ट्रीय
  • हमारे लेख
  • हमारे वीडियो
search
menu

सदस्यता लें, समर्थन करें

image/svg+xml
  • सारे लेख
  • न्यूज़क्लिक लेख
  • सारे वीडियो
  • न्यूज़क्लिक वीडियो
  • राजनीति
  • अर्थव्यवस्था
  • विज्ञान
  • संस्कृति
  • भारत
  • अंतरराष्ट्रीय
  • अफ्रीका
  • लैटिन अमेरिका
  • फिलिस्तीन
  • नेपाल
  • पाकिस्तान
  • श्री लंका
  • अमेरिका
  • एशिया के बाकी
हमारे बारे में
हमसे संपर्क करें
सब्सक्राइब करें
हमारा अनुसरण करो Facebook - Newsclick Twitter - Newsclick RSS - Newsclick
close menu
भारत
राजनीति
क्यूबा के प्रति अमेरिका की बीमार मनोग्रंथि 
क्यूबावासियों ने तो इतिहास से सीखा है, लेकिन वाशिंगटन ने कोई सबक नहीं सीखा है। 
रोजा मिरियम एलिजाल्डे
01 Nov 2021
biden
अमेरिकी राष्ट्रपति जोए बाइडेन। छवि सौजन्य: एएफपी 

गुल्लक फिर तोड़ा गया। सितंबर 2021 में, यूनाइटेड स्टेट्स एजेंसी फॉर इंटरनेशनल डेवलपमेंट (USAID) ने क्यूबा में "सत्ता परिवर्तन" के उद्देश्य से चलाई जा रही परियोजनाओं के अनुदान मद में $ 6,669,000 अरब डॉलर दिए थे, जो दरअसल "एक विदेशी शक्ति द्वारा किसी दूसरे देश में सीधे दखल" कहने से बचने का एक आवरण भर है। संयुक्त राज्य अमेरिका के वर्तमान डेमोक्रेटिक प्रशासन ने विशेष रूप से अंतर्राष्ट्रीय रिपब्लिकन संस्थान (IRI) को द्विदलीय दरियादिली के साथ समर्थन दिया है, जो डोनाल्ड ट्रम्प ने नहीं किया था। मियामी, वाशिंगटन और मैड्रिड के अन्य समूह, जिन्हें यह अनुकंपा राशि मिली है, वे क्यूबाई द्वीप के हमलावरों में से हैं। ये समूह अगले साल अधिक से अधिक धन झटकने के लिए हवाना में विनाश का एक पैनोरमा पेश करेंगे। 

लगता है कि संयुक्त राज्य अमेरिका में कास्त्रो विरोधी उद्मम-उपक्रम के लिए सार्वजनिक धन का प्रवाह अब भी अटूट बना हुआ है। पिछले वर्ष, क्यूबा को ध्यान में रख कर अमेरिकी विदेश मंत्रालय से नेशनल एंडोमेंट फॉर डेमोक्रेसी (एनईडी) और यूएसएआईडी कार्यक्रमों के लिए कम से कम 54 संगठनों को लाभ पहुंचाया गया है। इस एजेंसी ने पिछले 20 वर्षों में क्रिएटिव एसोसिएट्स इंटरनेशनल को, जो सीआइए का ही एक मुखौटा फ्रंट है, उसे क्यूबा में जासूसी करने, अमेरिकी हितों-विचारधाराओं के प्रचार-प्रसार करने और द्वीप में "परिवर्तन" के एजेंटों की भर्ती के लिए $1.8 बिलियन डॉलर से अधिक धन दिया है।

इसकी सबसे प्रसिद्ध परियोजनाओं में से एक, तथाकथित "क्यूबन ट्विटर" या ज़ुनज़ुनेओ, की शानदार विफलता ने भ्रष्टाचार की साजिश और अमेरिकी कानून के प्रमुख उल्लंघनों का पर्दाफाश कर दिया था। ज़ुनज़ुनेओ के चलते यूएसएआइडी निदेशक अपनी कुर्सी गंवानी पड़ी, लेकिन क्रिएटिव एसोसिएट्स इंटरनेशनल ने परोक्ष रूप से अपना काम आगे भी जारी रखा।

अमेरिकी शोधकर्ता ट्रेसी ईटन वर्षों से इन फंडों की आवाजाही और उनके उपयोग के मामले पर गहरी नजर रखती रही हैं। उन्होंने हाल ही में एक इंटरव्यू के दौरान कहा था कि क्यूबा में "शासन परिवर्तन" के लिए अमेरिका के कई वित्तपोषण कार्यक्रम इतने गुप्त हैं कि हम शायद कभी नहीं जान पाएंगे कि ये धन पाने वाले कौन हैं या इस मद के तहत कितना धन बांटा जा रहा है। प्रकट रूप से मिलियन डॉलर को देखते हुए इतना अंदाजा लगाया जा सकता है कि यह धन इससे भी कहीं ज्यादा मात्रा में होगा। 

अमेरिका का विदेश मंत्रालय और यूएसएआइडी के पत्रों के अनुसार, जो ईटन को प्राप्त हुए हैं, "लोकतंत्र-निर्माण" रणनीतियों को एक "व्यापार रहस्य" माना जाता है और यूएस फ्रीडम ऑफ इंफॉर्मेशन एक्ट के तहत इसे गुप्त रखने की छूट दी गई है। क्यूबा की स्थानीय राजनीति और ऑनलाइन प्लेटफॉर्म में रूसी, चीनी या इस्लामी की कथित घुसपैठ के संकेत पर संयुक्त राज्य अमेरिका आगबबूला हो जाता है। हालांकि, वह खुद क्यूबा में कठोर हस्तक्षेप करने में एक मिनट के लिए भी संकोच नहीं करता है। डिजिटल दैनिक मिंटप्रेस न्यूज ने साक्ष्यों के साथ किए गए अपने खुलासे में इस बात के सबूत दिए कि निजी फेसबुक समूहों ने 11 जुलाई को क्यूबा के कई शहरों में किस तरह दंगों के लिए लोगों को उकसाया। मिंटप्रेस का कहना है, "क्यूबा के घरेलू मामलों में विदेशी नागरिकों की भागीदारी की परिकल्पना से ही अमेरिका आशंकित हो उठता है।" यह खुलासा किया कि “जिन लोगों ने 11 जुलाई को विरोध प्रदर्शन किए थे, वे अक्टूबर और नवंबर में भी इसे दोहराने की योजना बना रहे हैं।” 

अमेरिका एक सैन्य महाशक्ति है, जिसकी क्यूबा की राजनीतिक उठापटक की योजना में संलिप्तता एक शर्मनाक और निंदनीय कार्य है। फिर इस बात का दूर-दूर तक कोई संकेत नहीं है कि वाशिंगटन अब वह सब हासिल कर लेगा, जो वह पिछले 60 वर्षों में करने में विफल रहा है। वास्तव में, क्यूबा के साथ अमेरिकी सरकार की जीर्ण हो चुकी मनोग्रंथि दो सदी पुरानी है, जैसा कि चैपल हिल में उत्तरी कैरोलिना विश्वविद्यालय के इतिहासकार लुई ए. पेरेज़ ने "क्यूबा एज़ ए ऑब्सेसिव कंपल्सिव डिसऑर्डर"(एक जुनूनी बाध्यकारी विकार के रूप में क्यूबा) नामक एक शानदार निबंध में लिखा है। 

पैरेज लिखते हैं, "क्यूबा तर्कसंगत अधिग्रहण का शायद ही कभी एक विषय रहा हो। यह विषय ऐसा है, जिसकी सरल व्याख्या नहीं की जा सकती, और निश्चित रूप से इस मामले को नीति-गणना के तर्क के दायरे में पूरी तरह से तो क्या मुख्य रूप से भी नहीं समझा जा सकता है, जो कि अन्य अमेरिकी विदेश संबंधों को प्रकट करने का काम करता है, जो ज्यादातर तार्किक नहीं है,”इतिहासकार लिखते हैं। 

क्यूबा के समय में उसकी "वैचारिक अनम्यता" का स्थायित्व मायने रखता है। अर्नेस्टो चे ग्वेरा 1959 की क्रांति के पहले वर्षों में अपने भाषणों में दोहराते थे कि "क्यूबा एक और ग्वाटेमाला नहीं होगा।" दूसरे शब्दों में, अमेरिकी साम्राज्य से इसकी स्वतंत्रता का तिरस्कार पहले मीडिया में दुष्प्रचार की बमबारी, दुष्प्रेरित लामबंदी और सैन्य हमलों से नहीं किया जा सकता। 

स्वतंत्र विकल्पों को उखाड़ फेंकने का अमेरिका का रिवाज काफी पुराना है, और एक भारी सैन्य बल और मीडिया की ताकत से उपजे अहंकार ने उसकी सरकार को अंधा कर दिया है। वह क्यूबा में हुई अपनी लगातार हार का अनुमान नहीं लगा पाई है और न ही उसने “लगभग हमारे तटों की नजर के सामने” विद्रोह में शान से खड़े, जैसा कि जॉन क्विन्सी एडम्स कहते हैं, एक द्वीप से मिले आघात को भुला पाया है। इन सबमें अव्वल तो यह कि "खाड़ी देशों के प्रवेश द्वार और विशाल मिसिसिपी घाटी के बाहर निकलने के बीच एक देश की हम कमी महसूस करते हैं” जबकि क्यूबा को इसके होने में जरा सी भी दिलचस्पी नहीं है।

इन सबमें बड़ा सत्य, जैसा कि लुई ए.पेरेज़ अपने लेख में बुद्धिमत्तापूर्ण टिप्पणी करते हैं, वह यह है कि क्यूबाई लोगों ने तो इतिहास से भरपूर सीखा है, लेकिन वाशिंगटन ने ऐसा कोई सबक नहीं सीखा है।

रोजा मिरियम एलिजाल्डे क्यूबा की पत्रकार हैं और क्यूबडेबेट वेबसाइट की संस्थापक हैं। वे यूनियन ऑफ क्यूबन जर्नलिस्ट्स (UPEC) और लैटिन अमेरिकन फेडरेशन ऑफ जर्नलिस्ट्स (FELAP) दोनों की उपाध्यक्ष हैं। 

स्रोत: यह लेख ग्लोबट्रॉटर द्वारा प्रस्तुत किया गया था। 

अंग्रेजी में मूल रूप से प्रकाशित लेख को पढ़ने के लिए नीचे दिए गए लिंक पर क्लिक करें 

US Has an Unhealthy Obsession with Cuba

USA
cuba
Cuba Sanctions
Biden

Related Stories

भारत में धार्मिक असहिष्णुता और पूजा-स्थलों पर हमले को लेकर अमेरिकी रिपोर्ट में फिर उठे सवाल

हिंद-प्रशांत क्षेत्र में आईपीईएफ़ पर दूसरे देशों को साथ लाना कठिन कार्य होगा

पश्चिम बनाम रूस मसले पर भारत की दुविधा

युद्ध के प्रचारक क्यों बनते रहे हैं पश्चिमी लोकतांत्रिक देश?

पूंजीवाद की अश्लील-अमीरी : एक आलोचना

अमेरिका में नागरिक शिक्षा क़ानूनों से जुड़े सुधार को हम भारतीय कैसे देखें?

भारतीय वामपंथियों ने क्यूबा के क्रांतिकारी फिदेल कास्त्रो की 5वीं पुण्यतिथि पर उनके जीवन को याद किया

भारत को अफ़ग़ानिस्तान पर प्रभाव डालने के लिए स्वतंत्र विदेश नीति अपनाने की ज़रूरत है

'जितनी जल्दी तालिबान को अफ़ग़ानिस्तान को स्थिर करने में मदद मिलेगी, भारत और पश्चिम के लिए उतना ही बेहतर- एड्रियन लेवी

विश्लेषण: मोदी की बेचारगी से भरी अमेरिका यात्रा


बाकी खबरें

  • न्यूज़क्लिक रिपोर्ट
    मध्य प्रदेश पुलिस भर्ती: माकपा ने कहा भ्रष्टाचार की हवस में युवाओं का भविष्य ही बर्बाद करने पर तुली है भाजपा
    31 Mar 2022
    "यह पहली बार हुआ है कि 6000 आरक्षकों की भर्ती में सरकार की ओर से अनुसूचित जाति, जनजाति, पिछड़ा वर्ग, महिलाओं, आर्थिक रूप से पिछड़े वर्ग आदि के लिए न तो आवंटित सीटों की घोषणा की गई है और न ही अंकों की…
  • bhasha singh
    न्यूज़क्लिक टीम
    नये भारत के नये विकास का मॉडल; तीन दिन में 14 सीवर मौतें, नफ़रत को खुला छोड़ा
    31 Mar 2022
    अपने ख़ास कार्यक्रम खोज ख़बर में वरिष्ठ पत्रकार भाषा सिंह ने सीवर में लगातार हो रहीं मौतों का मुद्दा उठाया। साथ ही दिल्ली में हुई जनसुनवाई में यौन हिंसा व बर्बर हिंसा के शिकार दलित महिलाओं की…
  • sonia
    रवि शंकर दुबे
    महाराष्ट्र सरकार पर ख़तरे के बादल? क्यों बाग़ी मूड में नज़र आ रहे हैं कांग्रेस के 25 विधायक
    30 Mar 2022
    महाराष्ट्र की महाविकास अघाड़ी सरकार में सब कुछ ठीक नहीं चल रहा है। गठबंधन में शामिल कांग्रेसी विधायकों ने उन्हें नज़रअंदाज़ करने का आरोप लगाते हुए सोनिया गांधी से मिलने का वक्त मांगा है।
  • urmilesh
    न्यूज़क्लिक टीम
    हार के बाद सपा-बसपा में दिशाहीनता और कांग्रेस खोजे सहारा
    30 Mar 2022
    यूपी सहित पांच राज्यों के चुनाव में पारम्परिक विपक्षी दलों को भारी निराशा हाथ लगी। उत्तर प्रदेश में सपा-बसपा तो सभी पांच प्रदेशों में कांग्रेस को करारी हार मिली। #AajKiBaat के नये एपिसोड में वरिष्ठ…
  • सोनिया यादव
    बीएचयू: 21 घंटे खुलेगी साइबर लाइब्रेरी, छात्र आंदोलन की बड़ी लेकिन अधूरी जीत
    30 Mar 2022
    24 घंटे लाइब्रेरी खोलने की मांग को लेकर साल 2016 में बीएचयू के छात्रों ने जोरदार आंदोलन किया था। इस दौरान भूख हड़ताल कर रहे छात्रों को आधी रात भारी पुलिस बल की मौजूदगी में प्रशासन ने निलंबित कर जेल…
  • Load More
सब्सक्राइब करें
हमसे जुडे
हमारे बारे में
हमसे संपर्क करें

CC BY-NC-ND This work is licensed under a Creative Commons Attribution-NonCommercial-NoDerivatives 4.0 International License