NewsClick

NewsClick
  • English
  • राजनीति
  • अर्थव्यवस्था
  • विज्ञान
  • संस्कृति
  • भारत
  • अंतरराष्ट्रीय
  • हमारे लेख
  • हमारे वीडियो
search
menu

सदस्यता लें, समर्थन करें

image/svg+xml
  • सारे लेख
  • न्यूज़क्लिक लेख
  • सारे वीडियो
  • न्यूज़क्लिक वीडियो
  • राजनीति
  • अर्थव्यवस्था
  • विज्ञान
  • संस्कृति
  • भारत
  • अंतरराष्ट्रीय
  • अफ्रीका
  • लैटिन अमेरिका
  • फिलिस्तीन
  • नेपाल
  • पाकिस्तान
  • श्री लंका
  • अमेरिका
  • एशिया के बाकी
हमारे बारे में
हमसे संपर्क करें
सब्सक्राइब करें
हमारा अनुसरण करो Facebook - Newsclick Twitter - Newsclick RSS - Newsclick
close menu
राजनीति
अंतरराष्ट्रीय
क्या अमेरिका सूडान के ख़िलाफ़ प्रतिबंधों को जारी रखना चाहता है?
जब अमेरिका ने सूडान को पिछले महीने स्टेट स्पॉन्सर ऑफ टेरर (एसएसटी) सूची से हटा दिया था तो यह उम्मीद थी कि इसके ख़िलाफ़ प्रतिबंधों को हटा दिया जाएगा। हालांकि, राष्ट्रपति के अमेरिकी कार्यकारी कार्यालय द्वारा सोमवार को प्रकाशित एक नोटिस कुछ प्रतिबंधों को फिर लागू करता है।
पीपल्स डिस्पैच
04 Nov 2020
सूडान

सोमवार 2 नवंबर को राष्ट्रपति के अमेरिकी कार्यकारी कार्यालय ने सूडान के संबंध में राष्ट्रीय आपातकाल को पुनः प्रारंभ करने को लेकर संघीय रजिस्टर में एक नोटिस प्रकाशित किया। इस नोटिस के अनुसार दो कार्यकारी आदेश जो सूडान पर आतंकवाद से संबंधित प्रतिबंधों की एक सूची लागू करते हैं वे प्रभाव में रहेंगे। सूडान के ख़िलाफ़ ये कार्यकारी आदेश पहली बार वर्ष 1997 में लागू किया गया था और फिर वर्ष 2006 में दारफुर में पूर्व सूडानी सरकार द्वारा किए गए मानव अधिकारों के उल्लंघन को लेकर इसका विस्तार किया गया था।

यह उम्मीद थी कि सूडान के ख़िलाफ़ इन प्रतिबंधों को तब हटा दिया जाएगा जब अमेरिकी प्रशासन ने 23 अक्टूबर को सूडान को स्टेट स्पॉन्सर ऑफ टेरर (एसएसटी) सूची से हटाने के लिए आधिकारिक तौर पर अपने इरादे को जाहिर किया था। ये निर्णय इज़रायल के साथ सूडान की ट्रांजिशनल सरकार द्वारा राजनयिक संबंधों को सामान्य करने पर सहमति व्यक्त करने और आतंकवाद के पीड़ितों के मुआवजे के रूप में 335 मिलियन अमरीकी डॉलर का भुगतान करने के बाद लिया गया था।

अमेरिकी राष्ट्रपति के कार्यालय द्वारा नोटिस में लिखा गया है कि "हाल के सकारात्मक प्रगति के बावजूद" सूडान सरकार की "कार्रवाई और नीतियां संयुक्त राज्य अमेरिका की राष्ट्रीय सुरक्षा और विदेश नीति के लिए असामान्य और असाधारण खतरा पैदा करती हैं।" बयान में कहा गया कि "इसलिए, मैंने सुनिश्चित किया है कि सूडान के संबंध में कार्यकारी आदेश 13067 में घोषित राष्ट्रीय आपातकाल को जारी रखना आवश्यक है जिसे कार्यकारी आदेश 13400 द्वारा विस्तारित किया गया है।"

कार्यकारी आदेश 13067 को बिल क्लिंटन के प्रशासन के अधीन वर्ष 1997 में पारित किया गया था और सूडान को इस्लामी चरमपंथियों को मदद देने के लिए एसएसटी की सूची में पांच साल बाद शामिल किया गया था। "इस ख़तरे से निपटने के लिए राष्ट्रीय आपातकाल" की घोषणा करते हुए क्लिंटन ने सूडान के साथ व्यापार और वित्तीय व्यवहार को प्रतिबंधित करने वाले कई प्रतिबंध लगाए थे।

हालांकि साल 2005 तक यूएस स्टेट विभाग ने स्वीकार किया था कि उनके सरकार की जानकारी में कम से कम साल 2000 के बाद से सूडान में कोई भी अल कायदा का संचालक मौजूद नहीं था। इसके बावजूद अगले वर्ष यानी साल 2006 में तत्कालीन अमेरिकी राष्ट्रपति जॉर्ज बुश ने "सूडान के डारफुर क्षेत्र में हिंसा की निरंतरता" के कारण इन प्रतिबंधों का विस्तार करते हुए कार्यकारी आदेश 13400 पारित किया।

उस समय गृहयुद्ध के बीच सूडान के तानाशाह उमर अल-बशीर पर डारफुर क्षेत्र में नरसंहार करने का आरोप लगाया गया था।

अल-बशीर को अंततः साल 2019 में एक विद्रोह के बाद बेदखल कर दिया गया था जिससे वर्तमान संयुक्त नागरिक-सैन्य ट्रांजिशनल सरकार के गठन का रास्ता साफ हो गया था जिसने उन्हें मुक़दमे के लिए आईसीसी को सौंप दिया था। जिस इस्लामिक पार्टी का उन्होंने नेतृत्व किया था उस पर प्रतिबंध लगा दिया गया है और इस नई सरकार ने अधिकांश सशस्त्र विद्रोही समूहों के साथ शांति समझौते पर बातचीत की है जिनमें डारफुर का भी शामिल है।

23 अक्टूबर को सूडान को इस सूची से हटाने (कांग्रेस की मंजूरी लंबित है) के बाद अमेरिकी प्रतिबंधों की अनुपस्थिति में आर्थिक पुनरुत्थान की संभावना की बहुत उम्मीद थी। हालांकि, यह बयान से स्पष्ट नहीं है कि सूडान को एसएसटी सूची से हटाने के परिणामस्वरूप किस तरह का प्रतिबंध रहेगा और कौन सा हटा दिया जाएगा।

America
Sudan
Donald Trump
usa sanctions on sudan
USA

Related Stories

भारत में धार्मिक असहिष्णुता और पूजा-स्थलों पर हमले को लेकर अमेरिकी रिपोर्ट में फिर उठे सवाल

और फिर अचानक कोई साम्राज्य नहीं बचा था

हिंद-प्रशांत क्षेत्र में शक्ति संतुलन में हो रहा क्रांतिकारी बदलाव

अमेरिकी आधिपत्य का मुकाबला करने के लिए प्रगतिशील नज़रिया देता पीपल्स समिट फ़ॉर डेमोक्रेसी

क्या दुनिया डॉलर की ग़ुलाम है?

छात्रों के ऋण को रद्द करना नस्लीय न्याय की दरकार है

पश्चिम दारफ़ुर में नरसंहार: सूडान की मिलिटरी जुंटा का खनिज समृद्ध भूमि को जनहीन करने का अभियान

अमेरिका ने रूस के ख़िलाफ़ इज़राइल को किया तैनात

यूक्रेन में छिड़े युद्ध और रूस पर लगे प्रतिबंध का मूल्यांकन

पश्चिम बनाम रूस मसले पर भारत की दुविधा


बाकी खबरें

  •  अपनी सहूलियत से इतिहास को बदलते नेता
    न्यूज़क्लिक प्रोडक्शन
    अपनी सहूलियत से इतिहास को बदलते नेता
    09 Jan 2022
    प्रधानमंत्री मोदी अपने भाषण में इतिहास को कई बार अपनी सुविधा से बदलते पाए गए हैं। 'इतिहास के पन्ने मेरी नज़र से' के इस अंक में वरिष्ठ पत्रकार नीलांजन मुखोपाध्याय इस विषय पर इतिहासकार हरबंस मुखिया से…
  • Kejriwal
    अनिल जैन
    ख़बरों के आगे पीछे: हिंदुत्व की प्रयोगशाला से लेकर देशभक्ति सिलेबस तक
    09 Jan 2022
    देश में हर रोज़ हो रहीं घटनाओं के बीच बहुत सी ख़बरें आगे-पीछे हो जाती हैं। ख़बरों के इस राउंड-अप में पुरानी ताजी ख़बरों को एक साथ बताया गया है। जिसमें आर्थिक-राजनीतिक सब तरह की ख़बरें हैं।
  • lynching
    अनिल अंशुमन
    झारखंड: भाजपा कार्यकर्ताओं ने मुस्लिम युवक से की मारपीट, थूक चटवाकर जय श्रीराम के नारे लगवाए
    09 Jan 2022
    मुख्यमंत्री ने पुलिस को जांच के आदेश देते हुए अपने ट्वीट में कहा है, कि अमन चैन से रहने वाले झारखंडवासियों के इस राज्य में वैमनस्य कि कोई जगह नहीं है।
  • cartoon
    न्यूज़क्लिक डेस्क
    बना रहे रस: वे बनारस से उसकी आत्मा छीनना चाहते हैं
    09 Jan 2022
    सुब्ह-ए-बनारस में सूरज की लालिमा के साथ अपनी सांसों को आवाज़ बनाकर शहनाई के जरिए रंग भरने वाले बिस्मिल्लाह खां को गंगा का किनारा आज भी ढूंढता है। बनारस में जो नदी आठों पहर अमनपसंद लोगों का पांव पखारती…
  • राजेंद्र शर्मा
    कटाक्ष: खाली कुर्सियों का डर न कहो इसको!
    09 Jan 2022
    अब यह तो विपक्ष वालों की सरासर बेईमानी है कि पीएम जी के संदेश में से थैंक्यू को छोडक़र, ‘जिंदा लौट आया’ को ही पकडक़र बैठ गए हैं।… और प्लीज, पीएम जी की नहीं हुई सभा में खाली कुर्सियों के ताने मारना बंद…
  • Load More
सब्सक्राइब करें
हमसे जुडे
हमारे बारे में
हमसे संपर्क करें

CC BY-NC-ND This work is licensed under a Creative Commons Attribution-NonCommercial-NoDerivatives 4.0 International License