NewsClick

NewsClick
  • English
  • राजनीति
  • अर्थव्यवस्था
  • विज्ञान
  • संस्कृति
  • भारत
  • अंतरराष्ट्रीय
  • हमारे लेख
  • हमारे वीडियो
search
menu

सदस्यता लें, समर्थन करें

image/svg+xml
  • सारे लेख
  • न्यूज़क्लिक लेख
  • सारे वीडियो
  • न्यूज़क्लिक वीडियो
  • राजनीति
  • अर्थव्यवस्था
  • विज्ञान
  • संस्कृति
  • भारत
  • अंतरराष्ट्रीय
  • अफ्रीका
  • लैटिन अमेरिका
  • फिलिस्तीन
  • नेपाल
  • पाकिस्तान
  • श्री लंका
  • अमेरिका
  • एशिया के बाकी
हमारे बारे में
हमसे संपर्क करें
सब्सक्राइब करें
हमारा अनुसरण करो Facebook - Newsclick Twitter - Newsclick RSS - Newsclick
close menu
अपराध
आंदोलन
घटना-दुर्घटना
समाज
भारत
उत्तराखंड के जौनपुर में मासूम बच्ची के साथ हैवानियत, इंसाफ की मांग
पहाड़ पर महिलाओं और दलितों के ख़िलाफ़ हिंसा और भेदभाव लगातार बढ़ रहा है। यहां मीडिया सक्रिय नहीं है, इसलिए इस तरह की घटनाएं सामने नहीं आ पाती हैं। जन आंदोलनों के राष्ट्रीय समन्वय और भीम आर्मी की ओर से इन मामलों में तुरंत कार्रवाई की मांग की गई है।
वर्षा सिंह
01 Jun 2019
Rape Case

घर से टॉफियां लेने निकली छोटी सी बच्ची को नहीं पता था कि वो जिस व्यक्ति को “अंकल टॉफी दे दो” कहकर संबोधित करेगी,वो अपनी कुंठा, बदनीयती और हैवानियत उस छोटी बच्ची पर दिखाएगा। लड़की दलित परिवार से है और आरोपी राजपूत है। घटना टिहरी के जौनपुर क्षेत्र के नैनबाग की है। ये वही जगह है जहां दलित युवक जीतेंद्र को शादी में कुर्सी पर बैठने के लिए सवर्ण समुदाय के लोगों ने पीट-पीट कर मार डाला। ये घटना हैवानियत की ओर एक कदम और बढ़ाती है। जहां छोटी बच्चियां सुरक्षित नहीं। साथ ही इस मिथक से भी परदा उठाती है कि पहाड़ों में महिलाओं से इस तरह के अपराध नहीं होते। पहाड़ों में भी महिलाओं से हिंसा की वारदातें तेजी से बढ़ रही हैं, साथ ही दलित भेदभाव भी।

लड़की की मां के साथ देहरादून के दून अस्पताल में मेडिकल परीक्षण के लिए आए राष्ट्रीय सेवा दल के जबर सिंह बताते हैं कि नौ साल की बच्ची की रात में चीखने-चिल्लाने की आवाज़ गांववालों ने सुनी तो, सबको इस वाकये का पता चला। उन्होंने बताया कि आरोपी उसी गांव का रहने वाला है और 34 साल का है। गांव के लोगों ने पहले गांव में ही फ़ैसला करने का दबाव बनाया ताकि पुलिस तक मामला न पहुंचे। लेकिन लड़की के घरवालों ने इससे इंकार कर दिया। जबर सिंह बताते हैं कि घटना के 24 घंटे बाद 30 मई की रात को पुलिस में रिपोर्ट करायी गई।

कैम्प्टी थाने की पुलिस ने बताया कि पॉक्सो एक्ट के साथ एससी-एसटी धाराओं में मामला दर्ज कर लिया गया है।

दलित उत्पीड़न के मामलों को लेकर सक्रिय जबर सिंह बताते हैं कि चार साल पहले इसी गांव की बालिग लड़की को शाम को करीब 10-12 लड़कों ने उठा लिया था, रात भर उसके साथ गैंगरेप किया और सुबह उसका मर्डर कर दिया गया। लेकिन ये मामला सामने नहीं आया, गांव मे ही मामले को दबा दिया गया।

वे कहते हैं कि पहाड़ में भी इस तरह के मामले लगातार हो रहे हैं। चूंकि यहां मीडिया सक्रिय नहीं है, इसलिए इस तरह की घटनाएं सामने नहीं आ पातीं हैं।

दलितों के हक के लिए आवाज़ उठा रही भीम आर्मी भी घटना की खबर लगते ही सक्रिय हो गई। भीम आर्मी के उत्तराखंड अध्यक्ष सुशील गौतम 31 मई को कैम्प्टी थाने पहुंच गये। आरोपी की गिरफ्तारी नहीं हुई थी, जिसे लेकर सामाजिक संगठनों ने दबाव बनाना शुरू किया। सुशील कहते हैं कि पुलिस मामले में ढिलाई बरतने की पूरी कोशिश कर रही थी। लेकिन जब हम सबने मिलकर दबाव बनाना शुरू किया था, पुलिस को सक्रिय होना ही पड़ा। शुक्रवार शाम आरोपी की गिरफ्तारी कर ली गई।

दून अस्पताल से उपचार के बाद लड़की को उसके परिजनों के साथ घर भेज दिया गया। सुशील गौतम का कहना है कि चूंकि जितेंद्र की हत्या का मामला अभी ठंडा नहीं पड़ा है, इसलिए पुलिस भी गंभीर है। उनका कहना है कि जब उनके संगठन के लोग लड़की के परिजनों से मिलने के लिए दून अस्पताल पहुंचे तो पुलिस ने उन्हें अस्पताल के अंदर दाखिल नहीं होने दिया।

पहाड़ की घटनाओं पर नज़र रखने वाली और महिला सामाख्या की निदेशक रह चुकीं, सामाजिक कार्यकर्ता गीता गैरोला कहती हैं कि लोगों का नज़रिया दलितों को अपनी संपत्ति समझने जैसा रहा है। वे नहीं समझते कि दलित भी इंसान हैं और उनकी भी बहू-बेटियां हैं। वे उन पर शुरू से ही अपना अधिकार जमाते आए हैं। गीता कहती हैं कि पहले लोग सोचते थे कि ये दलित हैं तो प्रशासन इन पर क्या कार्रवाई करेगा। लेकिन आज स्थितियां थोड़ी संभली हैं। उनके मुताबिक पहाड़ों में भी महिलाओं के साथ उतनी ही तीव्रता से अपराध होते हैं जितने मैदानों में। ये पहाड़ और मैदान का मामला नहीं है बल्कि पितृसत्ता और उससे उपजी सोच से जुड़ा हुआ मामला है। गीता अफसोस जताती हैं कि आज के समय में लड़कियां कहीं भी सुरक्षित नहीं हैं। इस तरह की घटनाएं झकझोर देती हैं।

पहाड़ में महिलाओं से अपराध के आंकड़े

पुलिस रिकॉर्ड के मुताबिक राज्य में वर्ष 2019 में अप्रैल महीने तक महिलाओं की हत्या के 13 मामले सामने आए। वर्ष 2018 में ये संख्या 16 थी और वर्ष 2017 में 15.

इसी तरह इस वर्ष के शुरुआती चार महीनों में बलात्कार की घटनाएं दर्ज हुई हैं, जबकि वर्ष 2018 में 137 और वर्ष 2017 में 117 मामले दर्ज किये गये थे।

दहेज के चलते होने वाली मौतों का इस वर्ष अप्रैल तक का आंकड़ा 17 है, वर्ष 2018 में ये 13 था और वर्ष 2017 में 15 मौतें।

लड़कियों के घर से गायब होने या घर छोड़ कर चले जाने के 106 मामले इस वर्ष अप्रैल तक सामने आए हैं। वर्ष 2018 में 124 और वर्ष 2017 में 104 मामले दर्ज किये गये।

छेड़खानी और धारा 354 के तहत इस वर्ष अप्रैल तक 144 मामले दर्ज किये जा किये जा चुके हैं। वर्ष 2018 में 155 और वर्ष 2017 में 132 मामले दर्ज किये गये थे।

दहेज अधिनियम के तहत वर्ष के 4 महीने में 148 मामले दर्ज किये जा चुके हैं। वर्ष 2018 में 168 वर्ष 2017 में 115 मामले दर्ज किये गये।

अनैतिक ट्रैफिकिंग के इस वर्ष 2 मामले दर्ज किये गये हैं। वर्ष 2018 में 10 और वर्ष 2017 में 2 मामले दर्ज हुए थे।

इसके अलावा महिला उत्पीड़न से जुड़े इस वर्ष अप्रैल तक 208 मामले दर्ज किये जा चुके हैं। वर्ष 2018 में 248 और वर्ष 2017 में 159 मामले दर्ज किये गये थे।

इस तरह इस वर्ष अप्रैल तक उत्तराखंड में महिलाओं से अपराध के कुल 804 मामले दर्ज किये जा चुके हैं वर्ष 2018 में इनकी कुल संख्या 871 थी और वर्ष 2017 में 669।

यानी हर रोज महिलाओं से अपराध के 6 से अधिक मामले दर्ज हो रहे हैं। इसके साथ ही वर्ष 2018 और 19 के आंकड़ों की तुलना करें तो इस वर्ष महिलाओं से अपराध की घटनाएं तेज़ी से बढ़ी हैं। यानी कानून-व्यवस्था को संभालने में राज्य की सरकार चूक रही हैं। 

जन आंदोलनों के राष्ट्रीय समन्वय की ओर से मुख्यमंत्री को पत्र

उधर, इसी मामले में जन आंदोलनों के राष्ट्रीय समन्वय की ओर से मुख्यमंत्री त्रिवेंद्र रावत और राज्य महिला आयोग को एक पत्र लिखा है जिसमें कहा गया है कि यह अत्यंत दुखद और शोक का विषय है कि राज्य में लगातार दलितों के साथ अत्याचार और दलित बच्चियों के साथ बलात्कार की घटनाएं बढ़ती जा रही हैं। दलित बच्ची के साथ हुए हैवानियत का जिक्र करते हुए पत्र में कहा गया कि पीड़ित परिवार पर फैसले का भारी दबाव बनाया गया। किसी तरह उसकी मां, समाज के लोगों के साथ अपनी बेटी को बेहोशी की हालत में देहरादून लेकर पहुंची जहां अस्पताल में उसका इलाज चालू है। लेकिन आरोपी फरार है। चार साल पहले भी इसी दलित परिवार की एक युवती के साथ सामूहिक बलात्कार इसी गाँव के सवर्ण युवकों ने किया था और बाद में उसकी हत्या कर दी थी। दबंगों ने मामला दबा दिया था। तर्क दिया गया था कि गांव की बदनामी होगी।  

इसी तरह  हाल ही में कुर्सी पर बैठकर खाना खाने पर दलित जितेंद्र दास की हत्या वाले गाँव की है। इस मामले में भी न्याय का इंतजार है।

इन सब मामलों में प्रशासन व पुलिस की भी निष्क्रियता दिखाई देती है। जन आंदोलनों का राष्ट्रीय समन्वय तथा साथी संगठन,सामाजिक कार्यकर्ता आप से मांग करते हैं और उत्तर की अपेक्षा रखते हैं: 

1-उत्तराखंड के जौनसार क्षेत्र में दलित अत्याचार पर तुरंत एक स्पेशल टास्क फोर्स बनाई जाए।

2- आरोपी की तुरंत गिरफ्तारी करके एसएससी एसटी कानून व प्रोटेक्शन आफ चिल्ड्रेन फ्राम सेक्सुअल अफेंसेस एक्ट 2012 कानून के तहत मुकदमा दायर किया जाए।

(नोट : शुक्रवार शाम आरोपी को गिरफ्तार कर लिया गया।)

3-समय बद्ध रूप में जांच करके समय बाद रूप में ही कानूनी कार्यवाही पूरी की जाए।

4-पीड़िता को कानूनी मुआवजा व परिवारों को समुचित न्यायिक सुरक्षा दी जाए।

NAPM1.jpg

NAPM2.jpg

rape case
UTTARAKHAND
crimes against women
violence against women
Dalit atrocities
dalit rape
Attack on dalits
Dalits Protest
minor girl raped
Sexual Abuse of Minors

Related Stories

हैदराबाद : मर्सिडीज़ गैंगरेप को क्या राजनीतिक कारणों से दबाया जा रहा है?

क्या पुलिस लापरवाही की भेंट चढ़ गई दलित हरियाणवी सिंगर?

तेलंगाना एनकाउंटर की गुत्थी तो सुलझ गई लेकिन अब दोषियों पर कार्रवाई कब होगी?

कॉर्पोरेटी मुनाफ़े के यज्ञ कुंड में आहुति देते 'मनु' के हाथों स्वाहा होते आदिवासी

यूपी : महिलाओं के ख़िलाफ़ बढ़ती हिंसा के विरोध में एकजुट हुए महिला संगठन

दलित किशोर की पिटाई व पैर चटवाने का वीडियो आया सामने, आठ आरोपी गिरफ्तार

हिमाचल प्रदेश के ऊना में 'धर्म संसद', यति नरसिंहानंद सहित हरिद्वार धर्म संसद के मुख्य आरोपी शामिल 

बिहार: आख़िर कब बंद होगा औरतों की अस्मिता की क़ीमत लगाने का सिलसिला?

न्याय के लिए दलित महिलाओं ने खटखटाया राजधानी का दरवाज़ा

उत्तर प्रदेश: योगी के "रामराज्य" में पुलिस पर थाने में दलित औरतों और बच्चियों को निर्वस्त्र कर पीटेने का आरोप


बाकी खबरें

  • russia attack on ukrain
    न्यूज़क्लिक टीम
    यूक्रेन पर हमला, रूस के बड़े गेम प्लान का हिस्सा, बढ़ाएगा तनाव
    25 Feb 2022
    'पड़ताल दुनिया भर की' में वरिष्ठ पत्रकार भाषा सिंह ने बात की न्यूज़क्लिक के प्रधान संपादक प्रबीर पुरकायस्थ से। यूक्रेन पर रूस हमला, जो सरासर अंतर्राष्ट्रीय कानूनों का उल्लंघन है, के पीछे पुतिन द्वारा…
  • News Network
    न्यूज़क्लिक टीम
    आख़िर क्यों हुआ 4PM News Network पर अटैक? बता रहे हैं संजय शर्मा
    25 Feb 2022
    4PM News नामक न्यूज़ पोर्टल को हाल ही में कथित तौर पर हैक कर लिया गया। UP की राजधानी लखनऊ का 4PM News योगी सरकार की नीतियों की आलोचनात्मक रिपोर्टिंग के लिए जाना जाता है। 4PM News का आरोप है कि योगी…
  • Ashok Gehlot
    सोनिया यादव
    राजस्थान : कृषि बजट में योजनाओं का अंबार, लेकिन क़र्ज़माफ़ी न होने से किसान निराश
    25 Feb 2022
    राज्य के बजटीय इतिहास में पहली बार कृषि बजट पेश कर रही गहलोत सरकार जहां इसे किसानों के हित में बता रही है वहीं विपक्ष और किसान नेता इसे खोखला और किसानों के साथ धोखा क़रार दे रहे हैं।
  • ADR Report
    न्यूज़क्लिक रिपोर्ट
    यूपी चुनाव छठा चरणः 27% दाग़ी, 38% उम्मीदवार करोड़पति
    25 Feb 2022
    एडीआर की रिपोर्ट के अनुसार छठे चरण में चुनाव लड़ने वाले 27% (182) उम्मीदवारों पर आपराधिक मामले दर्ज हैं वहीं 23% (151) उम्मीदवारों पर गंभीर प्रकृति के आपराधिक मामले हैं। इस चरण में 253 (38%) प्रत्याशी…
  • up elections
    न्यूज़क्लिक टीम
    यूपी चुनाव 2022: मोदी सभा में खाली कुर्सियां, योगी पर अखिलेश का तंज़!
    25 Feb 2022
    बोल के लब आज़ाद हैं तेरे के इस एपिसोड में वरिष्ठ पत्रकार अभिसार शर्मा बात करेंगे आवारा पशुओं के बढ़ते हुए मुद्दे की, जो यूपी चुनाव में बीजेपी की मुश्किलें बढ़ा सकता है। उसके साथ ही अखिलेश यादव द्वारा…
  • Load More
सब्सक्राइब करें
हमसे जुडे
हमारे बारे में
हमसे संपर्क करें

CC BY-NC-ND This work is licensed under a Creative Commons Attribution-NonCommercial-NoDerivatives 4.0 International License