NewsClick

NewsClick
  • English
  • राजनीति
  • अर्थव्यवस्था
  • विज्ञान
  • संस्कृति
  • भारत
  • अंतरराष्ट्रीय
  • हमारे लेख
  • हमारे वीडियो
search
menu

सदस्यता लें, समर्थन करें

image/svg+xml
  • सारे लेख
  • न्यूज़क्लिक लेख
  • सारे वीडियो
  • न्यूज़क्लिक वीडियो
  • राजनीति
  • अर्थव्यवस्था
  • विज्ञान
  • संस्कृति
  • भारत
  • अंतरराष्ट्रीय
  • अफ्रीका
  • लैटिन अमेरिका
  • फिलिस्तीन
  • नेपाल
  • पाकिस्तान
  • श्री लंका
  • अमेरिका
  • एशिया के बाकी
हमारे बारे में
हमसे संपर्क करें
सब्सक्राइब करें
हमारा अनुसरण करो Facebook - Newsclick Twitter - Newsclick RSS - Newsclick
close menu
भारत
राजनीति
उत्तराखंड मुख्य सचिव को सुप्रीम कोर्ट का नोटिस
ऐसे हादसों अपना सब-कुछ गँवा देने वाले लोगों की ज़िन्दगी सिर्फ चंद दिनों या महीनों के लिए प्रभावित नहीं होती बल्कि सालोंसाल या कभी-कभी ताउम्र के लिए बदल जाती है I
न्यूज़क्लिक रिपोर्ट
11 Jan 2018
Uttrakhand flood

प्राकृतिक आपदा से प्रभावित जनता के प्रति सरकार और प्रशासन का रवैया आमतौर पर उदासीन भरा ही होता है I ऐसे हादसों अपना सब-कुछ गँवा देने वाले लोगों की ज़िन्दगी सिर्फ चंद दिनों या महीनों के लिए प्रभावित नहीं होती बल्कि सालोंसाल या कभी-कभी ताउम्र के लिए बदल जाती है I इन आपदाओं को और भी भीषण बनाता है तथाकथित विकास के नाम पर प्रकृति के साथ हो रहा खिलवाड़ I 2013 में श्रीनगर आई बाढ़ के दौरान भी कुछ ऐसा ही हुआ श्रीनगर बाँध आपदा संघर्ष समीति तथा माटू जनसंगठन ने इस मामले को उठायाI उन्होंने दावा किया कि शहर में घुस आया मलबा “अलकनंदा हाइड्रो पावर कंपनी लिमिटेड कंपनी” की वजह से हुआ क्योंकि कंपनी ने नदी के किनारे पर मलबा रखा हुआ था I इस मामले में उन्होंने इस कंपनी पर मुकदमा भी किया हैI इस मुकदमे की अगली तारीख़ 6 हफ्ते बाद की है और साथ ही उच्चतम न्यायालय ने उत्तराखंड के मुख्य सचिव को नोटिस भी भेजा है I इसी सन्दर्भ में श्रीनगर बाँध आपदा संघर्ष समीति तथा माटू जनसंगठन ने एक प्रेस विज्ञप्ति जारी की है I   

माननीय  उच्च न्यायालय ने उत्तराखंड 2013 में आई आपदा में श्रीनगर बांध के कारण प्रभावित हुए परिवारों की ओर से अलकनंदा हाइड्रो पावर कंपनी लिमिटेड पर दाखिल मुआवजे के लिए चल रहे केस में उत्तराखंड के मुख्य सचिव को समुचित शपथ पत्र दाखिल करने के लिए कहा है। अगली तारीख 6 हफ्ते बाद की दी है I 

ज्ञातव्य है कि 2013 में आई आपदा में अलकनंदा गंगा पर बने श्रीनगर बांध कंपनी “अलकनंदा हाइड्रो पावर कंपनी लिमिटेड कंपनी” का नदी किनारे रखा मलबा अलकनंदा नदी में बह गया. इस लाखों टन मलबे के कारण श्रीनगर शहर के निचले हिस्सों में जब पानी भरा तो यह मलवा भी घरों में गैर सरकारी और सरकारी इमारतों में घुस गया. जब पानी धीरे-धीरे नीचे नीचे उतरा तो यह पूरा क्षेत्र लगभग समाधिस्त हो गया था. घरों में 8 फुट मिट्टी तक भर गई थी।

बांध कंपनी द्वारा लाई गई इस आपदा पर “ श्रीनगर बांध आपदा संघर्ष समिति” तथा “माटू जन संगठन” ने 2013 में राष्ट्रीय हरित प्राधिकरण में “अलकनंदा हाइड्रो पावर कंपनी” पर मुआवजे के लिए दावा दायर किया. राष्ट्रीय हरित प्राधिकरण ने 19 अगस्त 2016 में अपने आदेश में वादियों को सही ठहराते हुए 9 करोड़ 27 लाख का मुआवजा मंजूर किया था. बांध कंपनी उसके खिलाफ माननीय उच्चतम न्यायालय में अपील दाखिल की थी. माननीय उच्चतम न्यायालय ने अपने 3 अक्तूबर २०१६ के आदेश में  प्रभावितों को अपने दावे उप जिला अधिकारी के पास जमा करने के लिए और उप जिलाधिकारी द्वारा उस पर अपनी रिपोर्ट न्यायलय में दाखिल करने का आदेश  दिया था।

प्रभावितों के वकील श्री संजय पारीख ने अदालत को बताया की प्रभावितों ने 2016 में अपने विस्तृत दावे उप जिला अधिकारी के समक्ष दायर किए. किंतु 1 साल बीत जाने के बाद भी राज्य सरकार ने अभी तक उस पर अपनी रिपोर्ट दाखिल नहीं की है I माननीय न्यायाधीश श्री मदन लोकुर तथा माननीय न्यायाधीश श्री दीपक गुप्ता की बैंच ने  नाराजगी जताते हुए उत्तराखंड सरकार को अपना शपथ पत्र दाखिल करने के लिए कहा. बैंच 6 हफ्ते बाद पुनः केस की सुनवाई करेगी।

राज्य सरकार इस मसले पर गंभीर होती तो दो-तीन महीने में  ही जांच को पूरा करके अपनी रिपोर्ट दाखिल कर सकती थी. किंतु वादी कई बार उप जिलाधिकारी व जिलाधिकारी महोदय को मिले ओ उन्हें  एनजीटी के आदेश कीप्रतियां, उच्चतम न्यायालय के आदेश की प्रतियां भी दी गई Iकिंतु जांच का काम बहुत ही धीमी गति से चलाया जा रहा है I

हमारी अपेक्षा है कि माननीय उच्चतम न्यायालय के आदेश के बाद संभवत सरकार व स्थानीय प्रशासन मामले की गंभीरता को समझेंगे और तुरंत कार्यवाही करके शपथ पत्र समय पूर्वक दाखिल करेंगे ताकि प्रभावितों को न्याय मिल सके.

-श्रीनगर बाँध आपदा संघर्ष समीति तथा माटू जनसंगठन

Uttrakhand
uttrakhand flood

Related Stories

बच्चों को कौन बता रहा है दलित और सवर्ण में अंतर?

उत्तराखंड: क्षमता से अधिक पर्यटक, हिमालयी पारिस्थितकीय के लिए ख़तरा!

दिल्ली से देहरादून जल्दी पहुंचने के लिए सैकड़ों वर्ष पुराने साल समेत हज़ारों वृक्षों के काटने का विरोध

उत्तराखंड विधानसभा चुनाव परिणाम: हिंदुत्व की लहर या विपक्ष का ढीलापन?

उत्तराखंड में बीजेपी को बहुमत लेकिन मुख्यमंत्री धामी नहीं बचा सके अपनी सीट

EXIT POLL: बिग मीडिया से उलट तस्वीर दिखा रहे हैं स्मॉल मीडिया-सोशल मीडिया

उत्तराखंड चुनाव: एक विश्लेषण: बहुत आसान नहीं रहा चुनाव, भाजपा-कांग्रेस में कांटे की टक्कर

उत्तराखंड चुनाव: भाजपा के घोषणा पत्र में लव-लैंड जिहाद का मुद्दा तो कांग्रेस में सत्ता से दूर रहने की टीस

उत्तराखंड चुनाव: मज़बूत विपक्ष के उद्देश्य से चुनावी रण में डटे हैं वामदल

बजट 2022: क्या मिला चुनावी राज्यों को, क्यों खुश नहीं हैं आम जन


बाकी खबरें

  • नाइश हसन
    मेरे मुसलमान होने की पीड़ा...!
    18 Apr 2022
    जब तक आप कोई घाव न दिखा पाएं तब तक आप की पीड़ा को बहुत कम आंकता है ये समाज, लेकिन कुछ तकलीफ़ों में हम आप कोई घाव नहीं दिखा सकते फिर भी भीतर की दुनिया के हज़ार टुकड़े हो चुके होते हैं।
  • लाल बहादुर सिंह
    किसान-आंदोलन के पुनर्जीवन की तैयारियां तेज़
    18 Apr 2022
    किसानों पर कारपोरेटपरस्त  'सुधारों ' के अगले डोज़ की तलवार लटक रही है। जाहिर है, हाल ही में हुए UP व अन्य विधानसभा चुनावों की तरह आने वाले चुनाव भी भाजपा अगर जीती तो कृषि के कारपोरेटीकरण को रोकना…
  • सुबोध वर्मा
    भारत की राष्ट्रीय संपत्तियों का अधिग्रहण कौन कर रहा है?
    18 Apr 2022
    कुछ वैश्विक पेंशन फंड़, जिनका मक़सद जल्द और स्थिर लाभ कमाना है,  ने कथित तौर पर लगभग 1 लाख करोड़ रुपये की संपत्ति को लीज़ पर ले लिया है।
  • न्यूज़क्लिक रिपोर्ट
    कोरोना अपडेट: देश में 24 घंटों में कोरोना के 2,183 नए मामले, 214 मरीज़ों की मौत हुई
    18 Apr 2022
    देश की राजधानी दिल्ली में कोरोना के मामले बढ़ते जा रहे हैं। दिल्ली में पिछले 24 घंटों में कोरोना के 517 नए मामले सामने आए है |
  • भाषा
    दिल्ली में सीएनजी में सब्सिडी की मांग को लेकर ऑटो, टैक्सी संगठनों की हड़ताल
    18 Apr 2022
    दिल्ली में ऑटो, टैक्सी और कैब चालकों के विभिन्न संगठन ईंधन की बढ़ती कीमतों के मद्देनजर सीएनजी में सब्सिडी और भाढ़े की दरों में बदलाव की मांग को लेकर सोमवार को हड़ताल पर हैं।
  • Load More
सब्सक्राइब करें
हमसे जुडे
हमारे बारे में
हमसे संपर्क करें

CC BY-NC-ND This work is licensed under a Creative Commons Attribution-NonCommercial-NoDerivatives 4.0 International License