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वाडा ने भारत की राष्ट्रीय डोप टेस्ट लेबोरेटरी को निलंबित किया
भारत की लेबोरेटरी को 2008 में ही वाडा से मान्यता मिली थी। अब यहां पर नमूनों की जांच नहीं हो सकेगी और यह निलंबन 20 अगस्त से प्रभावी होगा। टोक्यो ओलंपिक में अब एक साल से भी कम समय रह गया है और यह फैसला भारत के लिये बेहद निराशाजनक है।
भाषा
23 Aug 2019
WADA
फोटो साभार : india today

दिल्ली :  भारत के डोपिंग निरोधक कार्यक्रम को करारा झटका देते हुए विश्व डोपिंग निरोधक एजेंसी (वाडा) ने भारत की राष्ट्रीय डोप टेस्ट लेबोरेटरी (एनडीटीएल) को छह महीने के लिये निलंबित कर दिया।

इस लेबोरेटरी को 2008 में ही वाडा से मान्यता मिली थी। अब यहां पर नमूनों की जांच नहीं हो सकेगी और यह निलंबन 20 अगस्त से प्रभावी होगा। टोक्यो ओलंपिक में अब एक साल से भी कम समय रह गया है और यह फैसला भारत के लिये बेहद निराशाजनक है।

नाडा खून और मूत्र के नमूने एकत्र कर सकता है लेकिन उसे भारत के बाहर वाडा की मान्यता प्राप्त लेबोरेटरी से जांच करानी होगी।

वाडा ने एक विज्ञप्ति में कहा ,‘‘ वाडा के दौरे में हमारी लेबोरेटरी को अंतरराष्ट्रीय मानकों (आईएसएल) के अनुरूप नहीं पाया गया और उसी वजह से निलंबन का यह फैसला लिया गया है।’’

वाडा की जांच में पाया गया कि एनडीटीएल का नमूनों के विश्लेषण का तरीका सही नहीं था। एनडीटीएल इस निलंबन के खिलाफ अगले 21 दिन में लुसाने स्थित खेल पंचाट में अपील कर सकता है ।

नाडा के महानिदेशक नवीन अग्रवाल ने कहा, ‘‘ एनडीटीएल नाडा से अलग है, हम परीक्षण नहीं करते, हम केवल नमूने एकत्र करते हैं।’’

भारतीय ओलंपिक संघ ने कहा कि भारत दूसरे देशों (अमूमन थाईलैंड के बैंकाक स्थित वाडा लैब) में नमूने भेजने का अतिरिक्त खर्च वहन नहीं कर सकता।

ऐसी आशंका है कि लागत बढने से नमूनों की संख्या में भारी गिरावट आ जायेगी जिससे डोपिंग निरोधक कार्यक्रम को झटका लगेगा।

आईओए अध्यक्ष नरिंदर बत्रा ने कहा ,‘‘ यह भारत में ओलंपिक आंदोलन के लिये बड़ा झटका है जबकि ओलंपिक सिर्फ 11 महीने दूर है। भारतीय राष्ट्रीय खेल महासंघ अतिरिक्त लागत वहन करने की स्थिति में नहीं है ।’’

वाडा ने कहा कि उसके प्रयोगशाला विशेषज्ञ समूह (लैबईजी) ने इस साल मई में वाडा की मान्यता प्राप्त प्रयोगशालाओं के खिलाफ अनुशासनात्मक कार्रवाई शुरू की थी ।

वाडा ने कहा ,‘‘ यह प्रक्रिया अब पूरी हो गई है।’’

इसमें आगे कहा गया ,‘‘20 अगस्त 2019 से प्रभावी निलंबन के तहत एनडीटीएल डोपिंग निरोधक कार्रवाई नहीं की जा सकती जिसमें मूत्र और रक्त के नमूनों का विश्लेषण शामिल है । इस निलंबन के दौरान नमूनों की जांच वाडा से मान्यता प्राप्त दूसरी लैब से करानी होगी ।’’

कहा गया,‘‘ यदि एनडीटीएल लैबईजी को संतुष्ट कर देता है कि उसने कमियों को दुरूस्त कर लिया है तो वह निलंबन की छह महीने की अवधि से पहले बहाली के लिये आवेदन कर सकता है।’’

वाडा ने यह भी कहा, ‘‘ लेकिन छह महीने की निलंबन अवधि समाप्त होने पर भी लैब अंतरराष्ट्रीय मानकों के अनुरूप नहीं बन पाती है तो वाडा अगले छह महीने और इसे निलंबित कर सकता है।’’

खेल मंत्रालय के लिये यह बड़ी पेचीदा स्थिति हो गई है जिसने बमुश्किल बीसीसीआई को नाडा के दायरे में आने के लिये तैयार किया था।

बीसीसीआई के एक वरिष्ठ अधिकारी ने कहा, ‘‘ नाडा नमूनों के परीक्षण के लिए कौन सी मान्यता प्राप्त प्रयोगशाला का उपयोग करेगी यह सोचना हमारा विशेषाधिकार नहीं है। यह उनकी चिंता और सिरदर्द है। हम इस मामले में सिर्फ प्रतीक्षा करेंगे।’’

डोपिंग निरोधक मसलों के विशेषज्ञ तथा खेल मामलों के वकील पार्थ गोस्वामी ने कहा ,‘‘ खेल मंत्रालय और नाडा के लिये यह पेचीदा स्थिति है । वैसे जांच एशिया में ही किसी लैब में होगी लेकिन लागत पर असर पड़ेगा ।’’

नाडा का इरादा टोक्यो ओलंपिक से पहले 5000 के करीब डोप टेस्ट करने का है।

गोस्वामी ने कहा ,‘‘ नाडा को लागत वहन करनी होगी । यह बहुत चिंताजनक स्थिति है।’’

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