NewsClick

NewsClick
  • English
  • राजनीति
  • अर्थव्यवस्था
  • विज्ञान
  • संस्कृति
  • भारत
  • अंतरराष्ट्रीय
  • हमारे लेख
  • हमारे वीडियो
search
menu

सदस्यता लें, समर्थन करें

image/svg+xml
  • सारे लेख
  • न्यूज़क्लिक लेख
  • सारे वीडियो
  • न्यूज़क्लिक वीडियो
  • राजनीति
  • अर्थव्यवस्था
  • विज्ञान
  • संस्कृति
  • भारत
  • अंतरराष्ट्रीय
  • अफ्रीका
  • लैटिन अमेरिका
  • फिलिस्तीन
  • नेपाल
  • पाकिस्तान
  • श्री लंका
  • अमेरिका
  • एशिया के बाकी
हमारे बारे में
हमसे संपर्क करें
सब्सक्राइब करें
हमारा अनुसरण करो Facebook - Newsclick Twitter - Newsclick RSS - Newsclick
close menu
नज़रिया
शिक्षा
समाज
विज्ञान
भारत
विज्ञान के टॉपर बच्चे और बारिश के लिए हवन करता देश
भारत के करोड़ों करोड़ बच्चे, जो किसी न किसी परीक्षा में पास होकर या टॉप करके निकलते रहे हैं उन्होंने ही मिलकर उस भारत को बनाया है जिसमे मंत्री नेता और अधिकारी लोग बारिश लाने के लिए हवन कर रहे हैं। जिसमें आज सीमाओं की रक्षा के लिए राष्ट्र रक्षा महायज्ञ हो रहा है और डिफेंस की टेक्नोलोजी फ्रांस और इजराइल से खरीदी जा रही है।
संजय श्रमण
27 May 2019
सांकेतिक तस्वीर
सांकेतिक तस्वीर। साभार : Swaraj Digital

पिछले साल की बात है, एक मित्र के घर बारहवीं क्लास में टॉप किये एक बच्चे से बात हो रही थी। वो अपना कुत्ता लेकर उसके साथ खेल रहा था, अचानक उसका पैर एक किताब पर लगा और उसने “किताब के पैर छुए” कान भी पकड़े। खेलते हुए उसका पैर कुत्ते को भी लगा, उसने फिर कुत्ते के प्रति भी क्षमा व्यक्त की, मैंने पूछा कि ये क्यों? उसने कहा, “ये कुत्ता नहीं भेरू महाराज है। मैंने एक टीवी सीरियल में देखा था, एक देवता की तस्वीर में भी मैंने कुत्ते देखें हैं।”

मैंने उसकी किताब को गौर से देखा उसकी किताब पर नेम चिट में एक हवा में उड़ने वाले देवता की तस्वीर के बगल से उसका नाम लिखा हुआ था।

मैंने पूछा ये किस तरह का जीव है? उसने कहा ये जीव नहीं भगवान हैं जो हवा में उड़ सकते हैं।

मैंने इस बात को इग्नोर करके उससे गुरुत्वाकर्षण के बारे में पूछा। उसने गुरुत्वाकर्षण का पूरा नियम एक सांस में बोलकर सुना दिया, फिर मैंने उससे पलायन वेग (एस्केप वेलोसिटी) और प्लेनेटरी मोशन पर कुछ पूछा उसने तुरंत दुसरी सांस में इनसे संबंधित सिद्धांत सुना दिए। ये सुनाते हुए वह बहुत प्रसन्न था।

मैंने फिर पूछा कि एक राकेट को उड़ने और जमीन के गुरुत्व क्षेत्र से बाहर जाने में कितना समय और ऊर्जा लगती है? क्या यह ऊर्जा एक इंसान या जानवर में हो सकती है? उसने कहा नहीं इतनी ऊर्जा एक बड़ी मशीन में ही हो सकती है जैसे कि हवाई जहाज या राकेट।

मैंने उससे फिर पूछा कि ये उड़ने वाले देवता कैसे उड़ते होंगे? उसे ये प्रश्न सुनकर बिलकुल आश्चर्य नहीं हुआ। उसने बड़ी सहजता से उत्तर दिया कि वे भगवान हैं और भगवान कुछ भी कर सकते हैं।

मैंने फिर आखिर में पूछा कि क्या भगवान प्रकृति के नियम से भी बड़ा होता है? उसने कहा मुझे ये सब नहीं पता लेकिन भगवान जो चाहे वो कर सकते हैं।

 

अभी देश भर में परीक्षा में टॉप कर रहे बच्चों की खबरें आ रही हैं और हर शहर में जश्न हो रहा है। जिन बच्चों ने टॉप किया है निश्चित ही वे बधाई के पात्र हैं। उन्होंने वास्तव में कड़ी मेहनत की है और जैसी भी शिक्षा उन्हें दी गयी उसमे वे ज्यादा अंक लाकर सफल हुए।

लेकिन इन बच्चों की सफलता का वास्तविक मूल्य क्या है? क्या ये वास्तव में अच्छे इंसान और अच्छे नागरिक बन पाते हैं? क्या इनकी शिक्षा – जो अधिकाँश अवसर पर विज्ञान विषयों के साथ होती है – इन्हें वैज्ञानिक चित्त और सोचने समझने की ताकत देती है?

ये टॉपर बच्चे अक्सर ही रट्टू तोते होते हैं जिन्हें मौलिक चिंतन और विचार नहीं बल्कि विश्वास सिखाये जाते हैं, ये पश्चिमी बॉसेस के लिए अच्छे बाबू, टेक्नीशियनऔर मैनेजर साबित होते हैं ये खुद कुछ मौलिक नही कर पाते।

परीक्षा परिणामों का यह जश्न मैं 20 सालों से देख रहा हूँ, और दावे से कह सकता हूँ कि इन टॉपर्स में से अधिकांश बच्चों को IIT, JEE, AIIMS इत्यादि की स्पेशल कोचिंग वाले भयानक दबाव वाले रट्टू और प्रतियोगी वातावरण में तैयार किया जाता है।

ये बच्चे किसी ख़ास परीक्षा में पास होने के लिए तैयार किये जाते हैं, इनमें ज्ञान के प्रति, सीखने और समझने के प्रति कितना लगाव है ये एक अन्य तथ्य है जिसका कोई सीधा संबंध इन बच्चों की उपलब्धियों से नहीं है। ऐसे अधिकांश बच्चे धर्मभीरु, विचार की क्षमता से हीन, आलोचनात्मक चिंतन से अनजान और समाज, सँस्कृति और धर्म के ज्ञान से शून्य होते हैं।

अधिकतर इन्हें प्रतियोगिता परीक्षाओं की स्पेशल कोचिंग में उच्चतर विज्ञान और गणित इत्यादि घोट घोटकर पिलाये जाते हैं और घर लौटते ही इन्हें मिथकशास्त्र और महाकाव्यों की तोता मैना की कहानियां पिलाई जाती हैं।

न केवल ये मिथकों और महाकाव्यों में श्रद्धा रखते हैं बल्कि स्कूल कालेज या परीक्षा के लिए जाते समय प्रसाद चढ़ाकर या मन्नत मांगकर भी जाते हैं। ये बच्चे एक तरफ ग्रेविटी, एस्केप वेलोसिटी इत्यादि रटते हैं और दुसरीं तरफ आसमान में पहाड़ लेकर उड़ जाने वाले देवताओं की पूजा भी करते हैं।

ये एक भयानक किस्म का सामूहिक स्कीजोफेनिया है जिसमे एक ही तथ्य के प्रति कई विरोधाभासी जानकारियाँ और विश्वास लेकर बच्चे जी रहे हैं, वे ज्ञान के किसी भी आयाम में कुछ मौलिक नहीं खोज पाते। वे सिर्फ पहले से ही खोज ली गयी चीजों के अच्छे प्रबंधक या तकनीशियन या बाबू हो सकते हैं लेकिन विज्ञान, कला, साहित्य, दर्शन इत्यादि में कुछ नया नहीं दे पाते हैं।

इन बच्चों का एक ही लक्ष्य होता है कि किस तरह से कोई परीक्षा पास करके जीवन भर के लिए कोई बड़ी डिग्री हासिल कर ली जाए और एक बड़ी कमाई तय कर ली जाए। इसके आगे पीछे जो कुछ है उससे उन्हें कोई मतलब नहीं होता। अधिकाँश बच्चों में आरंभ में इस तरह की जिज्ञासा होती है लेकिन हमारी शिक्षा व्यवस्था, हमारे परिवारों के अंधविश्वास पूजा पाठ और कर्मकांड इन जिज्ञासाओं को मार डालते हैं।

आप कल्पना कीजिये जिस परिवार में पहाड़ लेकर उड़ जाने वाले देवता की पूजा होती है उस घर का कोई बच्चा गुरुत्वाकर्षण के वर्तमान सिद्धांत में कोई कमी निकालकर उसे कभी चुनौती दे सकेगा? जो बच्चा मन्त्र की शक्ति से विराट रूप धर लिए किसी अवतार की पूजा करता आया है क्या वह जेनेटिक्स या जीव विज्ञान के स्थापित सिद्धांतों के कमियाँ खोजकर कुछ नया और मौलिक प्रपोज कर सकता है?

निश्चित ही ऐसे बच्चे इस दिशा में अधिक सफल नहीं हो सकते। यह संभव भी नहीं है। जो मन आलोचनात्मक चिंतन कर सकता है वह परीलोक की कहानी को जीवन भर धोकर उसकी पूजा नहीं कर सकता। ये दो विपरीत बातें हैं।

इसीलिये भारत के करोड़ों करोड़ बच्चे, जो किसी न किसी परीक्षा में पास होकर या टॉप करके निकलते रहे हैं उन्होंने ही मिलकर उस भारत को बनाया है जिसमे मंत्री नेता और अधिकारी लोग बारिश लाने के लिए हवन कर रहे हैं।

उन्हीं बच्चो ने ये भारत बनाया है जिसमें आज सीमाओं की रक्षा के लिए राष्ट्र रक्षा महायज्ञ हो रहा है और डिफेंस की टेक्नोलोजी फ्रांस और इजराइल से खरीदी जा रही है। उन्ही बच्चों के बावजूद आज वह भारत सामने है जिसमे गाय के नाम पर या लव जिहाद के नाम पर सरेआम लिंचिंग हो रही है।

टॉपर बच्चों के जश्न के बीच इन बातों पर एक बार ज़रूर गौर कीजियेगा।

(लेखक संजय श्रमण सामाजिक कार्यकर्ता हैं और विभिन्न विषयों पर लंबे समय से बेबाक लेखन कर रहे हैं। यह उनके निजी विचार हैं।)

education
Education crises
scientific study
Scientific temper

Related Stories

मध्यप्रदेश: लोकतंत्र वेंटीलेटर पर, भ्रष्टाचार आकाश और शिक्षा, रोज़गार पाताल में

‘सोचता है भारत’- क्या यूपी देश का हिस्सा नहीं है!

अयोध्या के बाद हिंदुस्तानी मुसलमान : भविष्य और चुनौतियां

प्रतियोगी परीक्षाओं में पारदर्शिता के लिए ओएमआर में करना होगा बदलाव

नई शिक्षा नीति से संस्थानों की स्वायत्तता पर खतरा: प्रो. कृष्ण कुमार

कौन से राष्ट्र के निर्माण में पढ़ाई जाएगी आरएसएस की भूमिका?   

जन संघर्षों में साथ देने का संकल्प लिया युवाओं ने

यज्ञ से बारिश!, कितनी दफा हम यही राग सुनेंगे?

चुनाव 2019 : क्या इस बार रोज़गार और पलायन जैसे मुद्दे तय करेंगे बिहार का भविष्य


बाकी खबरें

  • सोनिया यादव
    आंगनवाड़ी की महिलाएं बार-बार सड़कों पर उतरने को क्यों हैं मजबूर?
    23 Feb 2022
    प्रदर्शनकारी कार्यकर्ताओं का कहना है कि केंद्र और राज्य दोनों सरकारों द्वारा घोषणाओं और आश्वासनों के बावजूद उन्हें अभी तक उनका सही बकाया नहीं मिला है। एक ओर दिल्ली सरकार ने उनका मानदेय घटा दिया है तो…
  • nawab malik
    न्यूज़क्लिक रिपोर्ट
    हम लड़ेंगे और जीतेंगे, हम झुकेंगे नहीं: नवाब मलिक ने ईडी द्वारा गिरफ़्तारी पर कहा
    23 Feb 2022
    लगभग आठ घंटे की पूछताछ के बाद दक्षिण मुंबई स्थित ईडी कार्यालय से बाहर निकले मलिक ने मीडिया से कहा, '' हम लड़ेंगे और जीतेंगे। हम झुकेंगे नहीं।'' इसके बाद ईडी अधिकारी मलिक को एक वाहन में बैठाकर मेडिकल…
  • SKM
    न्यूज़क्लिक रिपोर्ट
    बंगाल: बीरभूम के किसानों की ज़मीन हड़पने के ख़िलाफ़ साथ आया SKM, कहा- आजीविका छोड़ने के लिए मजबूर न किया जाए
    23 Feb 2022
    एसकेएम ने पश्चिम बंगाल से आ रही रिपोर्टों को गम्भीरता से नोट किया है कि बीरभूम जिले के देवचा-पंचमी-हरिनसिंह-दीवानगंज क्षेत्र के किसानों को राज्य सरकार द्वारा घोषित "मुआवजे पैकेज" को ही स्वीकार करने…
  • राजस्थान विधानसभा
    न्यूज़क्लिक रिपोर्ट
    राजस्थान में अगले साल सरकारी विभागों में एक लाख पदों पर भर्तियां और पुरानी पेंशन लागू करने की घोषणा
    23 Feb 2022
    मुख्यमंत्री अशोक गहलोत ने बुधवार को वित्तवर्ष 2022-23 का बजट पेश करते हुए 1 जनवरी 2004 और उसके बाद नियुक्त हुए समस्त कर्मचारियों के लिए आगामी वर्ष से पूर्व पेंशन योजना लागू करने की घोषणा की है। इसी…
  • चित्र साभार: द ट्रिब्यून इंडिया
    भाषा
    रामदेव विरोधी लिंक हटाने के आदेश के ख़िलाफ़ सोशल मीडिया की याचिका पर सुनवाई से न्यायाधीश ने खुद को अलग किया
    23 Feb 2022
    फेसबुक, ट्विटर और गूगल ने एकल न्यायाधीश वाली पीठ के 23 अक्टूबर 2019 के उस आदेश को चुनौती दी है, जिसमें उन्हें और गूगल की अनुषंगी कंपनी यूट्यूब को रामदेव के खिलाफ मानहानिकारक आरोपों वाले वीडियो के…
  • Load More
सब्सक्राइब करें
हमसे जुडे
हमारे बारे में
हमसे संपर्क करें

CC BY-NC-ND This work is licensed under a Creative Commons Attribution-NonCommercial-NoDerivatives 4.0 International License