NewsClick

NewsClick
  • English
  • राजनीति
  • अर्थव्यवस्था
  • विज्ञान
  • संस्कृति
  • भारत
  • अंतरराष्ट्रीय
  • हमारे लेख
  • हमारे वीडियो
search
menu

सदस्यता लें, समर्थन करें

image/svg+xml
  • सारे लेख
  • न्यूज़क्लिक लेख
  • सारे वीडियो
  • न्यूज़क्लिक वीडियो
  • राजनीति
  • अर्थव्यवस्था
  • विज्ञान
  • संस्कृति
  • भारत
  • अंतरराष्ट्रीय
  • अफ्रीका
  • लैटिन अमेरिका
  • फिलिस्तीन
  • नेपाल
  • पाकिस्तान
  • श्री लंका
  • अमेरिका
  • एशिया के बाकी
हमारे बारे में
हमसे संपर्क करें
सब्सक्राइब करें
हमारा अनुसरण करो Facebook - Newsclick Twitter - Newsclick RSS - Newsclick
close menu
भारत
राजनीति
विपक्ष कुत्ता कुत्ती है तो शाह के लिए मोदी कब विकास से विनाश बन गए?
अमित शाह अपनी जीत की सफ़लता में सब कुछ भूलते जा रहे हैं। उनके इस बयान में डर को उभारा गया है। वे डर का उल्लास मना रहे हैं। मोदी अब डर का कारण हैं।
रवीश कुमार
07 Apr 2018
amit shah
image courtesy : Indian Express

“2019 के कार्यक्रम की शुरुआत हो गई है, सारा विपक्ष आह्वान करता है कि इकट्ठा आओ। मैंने एक वार्ता सुनी थी। जब बहुत बाढ़ आती है तो सारे पेड़-पौधे पानी में बह जाते हैं। एक वटवृक्ष अकेले बच जाता है तो सांप भी उस वृक्ष पर चढ़ जाता है, नेवला भी चढ़ जाता है, बिल्ली भी चढ़ जाती है, कुत्ता भी चढ़ जाता है, चीता भी चढ़ जाता है, शेर भी चढ़ जाता है, क्योंकी नीचे पानी का डर है, इसलिए सब एक ही वृक्ष पर इकट्ठा होते हैं। यह मोदी जी की बाढ़ आई हुई है, इसके डर से सांप, नेवला, कुत्ती, कुत्ता, बिल्ली सब इकट्ठा होकर चुनाव लड़ने का काम कर रहे हैं।“

इस विनम्रता और विद्वता से अमित शाह ही विपक्ष को परिभाषित कर सकते हैं। हम नहीं जानते कि उनके मन में किस नेता को देख कर सांप का ख़्याल आता है और किस नेता को देख कर कुत्ती का। विपक्षी खेमे में कई महिला नेता भी हैं, क्या उन्हें सोच कर यह कहा गया है। अमित शाह ने शेर के साथ शेरनी नहीं कहा मगर कुत्ता के साथ कुत्ती कहा है। इससे पहले योगी आदित्यनाथ सपा और बसपा के गठजोड़ को सांप छुछूंदर का मेल कह चुके हैं। उनके पहले लोकसभा चुनावों में मोदी यूपी में कसाब का नारा लाए थे मतलब कांग्रेस, सपा और बसपा। पहले विपक्ष की तुलना आतंकवादी से की, फिर सांप छुछूंदर और उसके बाद कुत्ती और कुत्ता से।

वैसे अमित शाह ने शेर और चीता किसे कहा है पता नहीं क्योंकि ये भी उसी वटवृक्ष पर हैं। 2014 में मोदी जब मंच पर आते थे तो यह नारा भी उठता था कि देखो देखो शेर आया। गुजरात चुनावों में भी नारा लगता था कि देखो देखो गुजरात का शेर आया। शेर मतलब किसी से नहीं डरने वाला। मगर अमित शाह के इस बयान में शेर भी वट वृक्ष पर चढ़ा हुआ है। विपक्ष में कौन शेर हो सकता है ? भारत की राजनीति में अमित शाह और उनके लाखों समर्थक मोदी को ही शेर समझते हैं। यहां तो शेर भी वट वृक्ष पर चढ़ा हुआ है क्योंकि नीचे पानी का डर है। क्या ये शेर मोदी है या राहुल है?

विपक्ष को गाली देने के जोश में उन्हें शेर रूप मोदी को उस पेड़ पर नहीं चढ़ाना चाहिए था, जहां दूसरे जानवर भी बैठे हैं। अगर अमित शाह के अनुसार मोदी की बाढ़ है तो मोदी शेर भी तो हैं। मोदी शेर से बाढ़ कब बन गए? वे तो विकास के प्रतीक हैं, विनाश के प्रतीक कब बन गए? अब कहेंगे कि बाढ़ उर्वर मिट्टी लाती है मगर यहां तो वे तबाही का पक्ष उभार रहे हैं। विनाश का पक्ष उभार रहे हैं। कोई अध्यक्ष अपने नेता को विनाश का प्रतीक बना सकता है, ऐसी विद्वता उन्हीं में हो सकती है। अमित शाह कितनी आसानी से कहानी बदल देते हैं। उन्हें पता है कि शेर भी डरता है। वरना इतिहास बदलने में ज़रा भी संकोच न करने वाले अमित शाह कह देते कि सारे जानवर वट वृक्ष पर हैं मगर एक अकेला शेर तैरता चला जा रहा है। अमित शाह के बयान को ग़ौर से पढ़िए, आपको शेर की हालत भी कुत्ती और कुत्ते की तरह नज़र आएगी। मुझे समझ नहीं आता कि जब कुत्ते के बच्चे के गाड़ी के नीचे आने से मोदी जी को इतनी तकलीफ़ हो गई थी तब उनके अध्यक्ष को क्यों मज़ा आ रहा है कि कुत्ता और कुत्ती बाढ़ से अपनी जान बचाने के लिए पेड़ पर चढ़ गए हैं।

गुजरात में चुनाव से पहले बाढ़ आई थी। बहुत से लोग मर गए थे। उससे पहले हम सबने बिहार में कोसी नदी की तबाही में हज़ारों लोगों को लाश में बदलते देखा है। केदारनाथ में पानी की धार में हज़ारों तीर्थयात्रियों को मलबे में दबते देखा है। बाढ़ की तबाही को कोई हंसते हुए बता सकता है तो इस वक्त सिर्फ अमित शाह ही बता सकते हैं। वो यह भी भूल गए कि जिस मुंबई में बाढ़ की मिसाल दे रहे थे, उस शहर में किसी साल जुलाई के महीने में बाढ़ आई थी और सैंकड़ों लोग मर गए थे। अगर 6 अप्रैल को मुंबई में 26 जुलाई वाली बाढ़ आ जाती तो उस हॉल में जितने भी कार्यकर्ता थे सब भाग खड़े होते और मुझे पूरा भरोसा है कि दस पांच तो ऐसे होते ही जो सबसे पहले अपने अध्यक्ष जी को उठाकर भाग रहे होते। अमित शाह को ही छत पर पहुंचाते ताकि वे सुरक्षित रहे।

26 जुलाई की बाढ़ में मारे गए सैंकड़ों मुंबईवासियों को अगर कोई वटवृक्ष मिल गया होता तो वे भी कुत्ती और कुत्ता के साथ वहां बैठकर अपनी जान बचाने से परहेज़ नहीं करते। शेर तो फिर भी आदमी को मार कर खा जाता लेकिन आदमी को पता है कि कुत्ती और कुत्ता ऐसा नहीं करेंगे। समझ हीं आता है कि अमित शाह को कुत्ती और कुत्ता से इतनी विरक्ति क्यों है? कुत्ते की वफ़ादारी युधिष्ठिर से ही पूछ लेते। स्वर्ग तक जाने के रास्ते में उनका आख़िरी साथी थी। सत्ता की सनक में महाभारत का पाठ भी भूल गए क्या ?

अमित शाह जिन लोगों के बीच यह किस्सा सुनाकर ताली लूट रहे थे, उन्हें पता है कि जब बाढ़ आती है तब आदमी की भी हालत जानवरों की तरह हो जाती है। उसका जीवन ही नहीं, जीवन का सारा संचय तबाह हो जाता है। बीजेपी के कार्यकर्ता उस हॉल में बैठकर हंस भी पाए, ये बात मुझे हैरान करती है। कोई अपने अध्यक्ष के मुंह से अपने प्रिय नेता की तुलना विनाश से करते हुए कैसे ताली बजा सकता है। क्या उन कार्यकर्ताओं की विवेक बुद्धि इतनी भ्रष्ट हो चुकी है कि वे अपने नेता की तुलना विनाश से किए जाने पर खुश थे?

क्या अमित शाह यह बता रहे हैं कि मोदी अब शेर नहीं, बाढ़ हैं। क्या अमित शाह यह बता रहे हैं कि राजनीति में गठबंधन करना, एक साथ आना कुत्ती और कुत्ता का एक साथ आना है। क्या अमित शाह ने अपने एन डी ए के भीतर झांक कर देखा है कि उनमें कौन कौन से दल हैं और वे दल कब कब किन किन दलों के साथ गठबंधन कर चुके हैं। कई दल तो उसी विपक्ष से आए हैं जिन्हें अमित शाह कुत्ती और कुत्ता बता रहे हैं।

विपक्ष भी जनता का प्रतिनिधि होता है। कांग्रेस अगर बीजेपी की विपक्ष है तो बीजेपी भी कांग्रेस की विपक्ष है। कांग्रेस के लिए न तो बीजेपी कुत्ती और कुत्ता है और न ही बीजेपी के लिए कांग्रेस कुत्ती और कुत्ता होनी चाहिए। मगर अमित शाह अपनी जीत की सफ़लता में सब कुछ भूलते जा रहे हैं। उनके इस बयान में डर को उभारा गया है। वे डर का उल्लास मना रहे हैं। मोदी अब डर का कारण हैं। आपको उनसे डरना चाहिए। वे उस जनता को मोदी का डर दिखा रहे हैं जो विपक्ष के साथ है। क्या अब मोदी के पास दिखाने के लिए बाढ़ और डर ही रह गया है? इस सवाल का जवाब हॉल में नहीं मिलेगा, तभी मिलेगा जब बीजेपी का कार्यकर्ता नए बने फाइवस्टार मुख्यालय में तीसरे फ्लोर से ऊपर जाकर अध्यक्ष जी का आलीशान कमरा देख सकेगा। बशर्ते आम कार्यकर्ताओं को अपने अध्यक्ष जी का कमरा देखने को मिल जाए। मोदी जी शेर थे, अब बाढ़ हैं। अमित शाह अब अभी अमित शाह हैं। वेल डन।

अमित शाह
कांग्रेस
रवीश कुमार
बीजेपी
नरेंद्र मोदी

Related Stories

झारखंड चुनाव: 20 सीटों पर मतदान, सिसई में सुरक्षा बलों की गोलीबारी में एक ग्रामीण की मौत, दो घायल

झारखंड की 'वीआईपी' सीट जमशेदपुर पूर्वी : रघुवर को सरयू की चुनौती, गौरव तीसरा कोण

रोज़गार में तेज़ गिरावट जारी है

हमें ‘लिंचिस्तान’ बनने से सिर्फ जन-आन्दोलन ही बचा सकता है

अविश्वास प्रस्ताव: विपक्षी दलों ने उजागर कीं बीजेपी की असफलताएँ

यूपी-बिहार: 2019 की तैयारी, भाजपा और विपक्ष

चुनाव से पहले उद्घाटनों की होड़

अमेरिकी सरकार हर रोज़ 121 बम गिराती हैः रिपोर्ट

असमः नागरिकता छीन जाने के डर लोग कर रहे आत्महत्या, एनआरसी की सूची 30 जुलाई तक होगी जारी

जीएसटी ने छोटे व्यवसाय को बर्बाद कर दिया


बाकी खबरें

  • शशि शेखर
    कांग्रेस का कार्ड, अखिलेश की तस्वीर, लेकिन लाभार्थी सिर्फ़ भाजपा के साथ?
    23 Mar 2022
    मोदी सरकार ने जिस राशन को गरीबों के लिए फ्री किया है, वह राशन पहले से लगभग न के बराबर मूल्य पर गरीबों को मिल रहा था। तो क्या वजह रही कि लाभार्थी समूह सिर्फ़ भाजपा के साथ गया।
  • bhagat singh
    न्यूज़क्लिक डेस्क
    हमें ये शौक़ है देखें सितम की इंतिहा क्या है
    23 Mar 2022
    आज शहीद दिवस है। आज़ादी के मतवाले भगत सिंह, सुखदेव और राजगुरु के बलिदान का दिन। आज ही के दिन 23 मार्च 1931 को इन तीनों क्रांतिकारियों को अंग्रेज़ सरकार ने फांसी दी थी। इन क्रांतिकारियोें को याद करते…
  • नीलांजन मुखोपाध्याय
    सद्भाव बनाम ध्रुवीकरण : नेहरू और मोदी के चुनाव अभियान का फ़र्क़
    23 Mar 2022
    देश के पहले प्रधानमंत्री ने सांप्रदायिक भावनाओं को शांत करने का काम किया था जबकि मौजूदा प्रधानमंत्री धार्मिक नफ़रत को भड़का रहे हैं।
  • Mathura
    मौहम्मद अली, शिवानी
    मथुरा: गौ-रक्षा के नाम पर फिर हमले हुए तेज़, पुलिस पर भी पीड़ितों को ही परेशान करने का आरोप, कई परिवारों ने छोड़े घर
    23 Mar 2022
    मथुरा के जैंत क्षेत्र में कुछ हिंदुत्ववादियों ने एक टैंपो चालक को गोवंश का मांस ले जाने के शक में बेरहमी से पीटा। इसके अलावा मनोहरपुरा सेल्टर हाउस इलाके में आए दिन काफ़ी लोग बड़ी तादाद में इकट्ठा…
  • toffee
    भाषा
    उत्तर प्रदेश: विषाक्त टॉफी खाने से चार बच्चों की मौत
    23 Mar 2022
    ग्रामीणों के मुताबिक टॉफी के रैपर पर बैठने वाली मक्खियों की भी मौत हो गई। एक टॉफी सुरक्षित रखी गई है। पांडेय ने बताया कि मामले की जांच की जा रही है।
  • Load More
सब्सक्राइब करें
हमसे जुडे
हमारे बारे में
हमसे संपर्क करें

CC BY-NC-ND This work is licensed under a Creative Commons Attribution-NonCommercial-NoDerivatives 4.0 International License