NewsClick

NewsClick
  • English
  • राजनीति
  • अर्थव्यवस्था
  • विज्ञान
  • संस्कृति
  • भारत
  • अंतरराष्ट्रीय
  • हमारे लेख
  • हमारे वीडियो
search
menu

सदस्यता लें, समर्थन करें

image/svg+xml
  • सारे लेख
  • न्यूज़क्लिक लेख
  • सारे वीडियो
  • न्यूज़क्लिक वीडियो
  • राजनीति
  • अर्थव्यवस्था
  • विज्ञान
  • संस्कृति
  • भारत
  • अंतरराष्ट्रीय
  • अफ्रीका
  • लैटिन अमेरिका
  • फिलिस्तीन
  • नेपाल
  • पाकिस्तान
  • श्री लंका
  • अमेरिका
  • एशिया के बाकी
हमारे बारे में
हमसे संपर्क करें
सब्सक्राइब करें
हमारा अनुसरण करो Facebook - Newsclick Twitter - Newsclick RSS - Newsclick
close menu
भारत
राजनीति
वॉर एंड पीस का मराठी में भी अनुवाद हो चुका है
भीमा कोरेगाँव मामले में पुणे पुलिस और बॉम्बे हाई कोर्ट के एक जज ने टॉल्स्टॉय की साहित्यिक कृति 'वॉर एंड पीस' की एक कार्यकर्ता के घर पर मौजूदगी को 'आपत्तिजनक' कहा। जबकि इस पुस्तक का मराठी अनुवाद 1977 में महाराष्ट्र सरकार ने खुद करवाया था। 
अमय तिरोदकर
29 Aug 2019
war and piece

रूसी लेखक लियो टॉल्स्टॉय से राष्ट्रपिता महात्मा गांधी भी गहराई से प्रभावित थे। लेकिन मंगलवार को बॉम्बे हाई कोर्ट में टॉल्स्टॉय की किताब पर जो सवाल उठा, वो समझ के परे था। 2018 के भीमा कोरेगांव दंगों के मामले में आरोपी वर्नोन गोंसाल्वेस द्वारा दायर जमानत याचिका पर सुनवाई के दौरान पुणे पुलिस के वकील अरुणा पई ने वर्नोन के घर से मिली किताब वॉर एंड पीस पर आपत्ति जताई। 'वॉर एंड पीस' के लेखक लियो टॉलस्टॉय थे। इस उपन्यास को विश्व साहित्य की सबसे मशूहर उपन्यासों में से एक माना जाता है। इस उपन्यास के साथ कई और किताबें और कबीर कला मंच से रिलीज़ की गई 'राज्य दमन विरोधी' नामक सीडी भी वर्नोन के घर पर पाई गई। घर से ये सब मिलने की वजह से  सरकार के वकील ने वर्नोन की जमानत याचिका का विरोध किया।  

न्यूज़ एजेंसी पीटीआई के मुताबिक न्यायमूर्ति सारंग कोतवाल ने कहा:  ‘‘सीडी ‘राज्य दमन विरोधी’ का नाम ही अपने आप में कहता है कि इसमें राज्य के खिलाफ कुछ है, वहीं ‘वार एंड पीस’ दूसरे देश में युद्ध के बारे में है। आपके (गोन्जाल्विस) पास घर पर ये किताबें और सीडी क्यों हैं? आपको अदालत को यह स्पष्ट करना होगा।’’

वॉर एंड पीस, पहली बार 1869 में रूसी भाषा में लिखी गई और बाद में 1899 में अंग्रेजी में अनुवाद की गई। इसे विश्व कृति के रूप में जाना जाता है। टॉल्स्टॉय की इस उपन्यास ने पूरे  विश्व को प्रभावित किया है।  किसी ने कल्पना भी नहीं की होगी कि इस पुस्तक को कभी भी कहीं भी 'राज्य विरोधी' सामाग्री भी कहा जाएगा। लेकिन पुणे पुलिस ने ऐसा कर दिया है।

2nd image.PNG
दिलचस्प बात यह है कि पुणे पुलिस इस तथ्य से बिलकुल अनजान है कि इस विश्व कृति का मराठी में भी अनुवाद किया गया था और साल 1871 में महाराष्ट्र सरकार ने इसे प्रकाशित भी किया था। 

न्यूज़क्लिक के पास 'महाराष्ट्र राज्य साहित्य संस्कृत मंडल' द्वारा प्रकाशित इस अनुवाद की एक प्रति है। इस पुस्तक का अनुवाद A.N पेडनेकर द्वारा 1977 में किया गया था। पुस्तक की प्रतिलिपि में स्पष्ट रूप से उल्लेख किया गया है कि इसे उक्त मंच के 'सचिव' द्वारा प्रकाशित किया गया था और राज्य के प्रशासनिक मुख्यालय यानी मुंबई के 'मंत्रालय' में प्रकाशित किया गया था।

इस पुस्तक का परिचय किसी और ने नहीं बल्कि लक्ष्मणशास्त्री जोशी ने लिखा है। जो महाराष्ट्र के राजनीतिक, सामाजिक और सांस्कृतिक जीवन के मशहूर विद्वानों में से एक है और महाराष्ट्र राज्य से निकले सबसे प्रभावशाली विचारकों में से एक हैं। 

जोशी को खुद महात्मा गांधी द्वारा अस्पृश्यता के खिलाफ सलाहकार के रूप में चुना गया था। जब गांधी पुणे में यरवदा जेल में कैद थे, तो जोशी उन्हें अस्पृश्यता के खिलाफ वेद और स्मृति (हिंदू साहित्य) से संदर्भ और इनपुट देते थे। 16 जून, 1977 को अनूदित पुस्तक, युधा अनी शांति, के परिचय में जोशी ने लिखा है  "मराठी भाषा को दुनिया के सर्वश्रेष्ठ साहित्य से समृद्ध बनाने के लिए साहित्य संस्कृति मंच ने दुनिया की 300 सबसे जरूरी पुस्तकों को चुना है। टॉल्स्टॉय का वॉर एन्ड पीस उनमें से एक है। 

इस पुस्तक को रखने पर आपत्ति जताने से पहले पुणे पुलिस को कम से कम इस पुस्तक के बारें में जानकारी  इकठ्ठा कर लेनी चाहिए थी। जान लेना चाहिए था कि यह विश्व साहित्य की सबसे महत्वपूर्ण कृतियों में से एक है। जिसे मराठी में भी सम्मान हासिल है।  

Bhima Koregaon Case
Bombay High Court
'War and Peace'
Russian writer Leo Tolstoy
Mahatma Gandhi
Bhima Koregaon riots
untouchability

Related Stories

विचारों की लड़ाई: पीतल से बना अंबेडकर सिक्का बनाम लोहे से बना स्टैच्यू ऑफ़ यूनिटी

वैष्णव जन: गांधी जी के मनपसंद भजन के मायने

कांग्रेस चिंता शिविर में सोनिया गांधी ने कहा : गांधीजी के हत्यारों का महिमामंडन हो रहा है!

दलितों में वे भी शामिल हैं जो जाति के बावजूद असमानता का विरोध करते हैं : मार्टिन मैकवान

कौन हैं ग़दरी बाबा मांगू राम, जिनके अद-धर्म आंदोलन ने अछूतों को दिखाई थी अलग राह

गाँधी पर देशद्रोह का मामला चलने के सौ साल, क़ानून का ग़लत इस्तेमाल जारी

मैंने क्यों साबरमती आश्रम को बचाने के लिए सुप्रीम कोर्ट में अपील की है?

जाति के सवाल पर भगत सिंह के विचार

प्रधानमंत्री ने गलत समझा : गांधी पर बनी किसी बायोपिक से ज़्यादा शानदार है उनका जीवन 

"गाँधी के हत्यारे को RSS से दूर करने का प्रयास होगा फेल"


बाकी खबरें

  • न्यूज़क्लिक रिपोर्ट
    कोरोना अपडेट: अभी नहीं चौथी लहर की संभावना, फिर भी सावधानी बरतने की ज़रूरत
    14 May 2022
    देश में आज चौथे दिन भी कोरोना के 2,800 से ज़्यादा मामले सामने आए हैं। आईआईटी कानपूर के वरिष्ठ वैज्ञानिक प्रो. मणींद्र अग्रवाल कहा है कि फिलहाल देश में कोरोना की चौथी लहर आने की संभावना नहीं है।
  • afghanistan
    पीपल्स डिस्पैच
    भोजन की भारी क़िल्लत का सामना कर रहे दो करोड़ अफ़ग़ानी : आईपीसी
    14 May 2022
    आईपीसी की पड़ताल में कहा गया है, "लक्ष्य है कि मानवीय खाद्य सहायता 38% आबादी तक पहुंचाई जाये, लेकिन अब भी तक़रीबन दो करोड़ लोग उच्च स्तर की ज़बरदस्त खाद्य असुरक्षा का सामना कर रहे हैं। यह संख्या देश…
  • mundka
    न्यूज़क्लिक रिपोर्ट
    मुंडका अग्निकांड : 27 लोगों की मौत, लेकिन सवाल यही इसका ज़िम्मेदार कौन?
    14 May 2022
    मुंडका स्थित इमारत में लगी आग तो बुझ गई है। लेकिन सवाल बरकरार है कि इन बढ़ती घटनाओं की ज़िम्मेदारी कब तय होगी? दिल्ली में बीते दिनों कई फैक्ट्रियों और कार्यस्थलों में आग लग रही है, जिसमें कई मज़दूरों ने…
  • राज कुमार
    ऑनलाइन सेवाओं में धोखाधड़ी से कैसे बचें?
    14 May 2022
    कंपनियां आपको लालच देती हैं और फंसाने की कोशिश करती हैं। उदाहरण के तौर पर कहेंगी कि आपके लिए ऑफर है, आपको कैशबैक मिलेगा, रेट बहुत कम बताए जाएंगे और आपको बार-बार फोन करके प्रेरित किया जाएगा और दबाव…
  • India ki Baat
    बुलडोज़र की राजनीति, ज्ञानवापी प्रकरण और राजद्रोह कानून
    13 May 2022
    न्यूज़क्लिक के नए प्रोग्राम इंडिया की बात के पहले एपिसोड में अभिसार शर्मा, भाषा सिंह और उर्मिलेश चर्चा कर रहे हैं बुलडोज़र की राजनीति, ज्ञानवापी प्रकरण और राजद्रोह कानून की। आखिर क्यों सरकार अड़ी हुई…
  • Load More
सब्सक्राइब करें
हमसे जुडे
हमारे बारे में
हमसे संपर्क करें

CC BY-NC-ND This work is licensed under a Creative Commons Attribution-NonCommercial-NoDerivatives 4.0 International License