NewsClick

NewsClick
  • English
  • राजनीति
  • अर्थव्यवस्था
  • विज्ञान
  • संस्कृति
  • भारत
  • अंतरराष्ट्रीय
  • हमारे लेख
  • हमारे वीडियो
search
menu

सदस्यता लें, समर्थन करें

image/svg+xml
  • सारे लेख
  • न्यूज़क्लिक लेख
  • सारे वीडियो
  • न्यूज़क्लिक वीडियो
  • राजनीति
  • अर्थव्यवस्था
  • विज्ञान
  • संस्कृति
  • भारत
  • अंतरराष्ट्रीय
  • अफ्रीका
  • लैटिन अमेरिका
  • फिलिस्तीन
  • नेपाल
  • पाकिस्तान
  • श्री लंका
  • अमेरिका
  • एशिया के बाकी
हमारे बारे में
हमसे संपर्क करें
सब्सक्राइब करें
हमारा अनुसरण करो Facebook - Newsclick Twitter - Newsclick RSS - Newsclick
close menu
भारत
राजनीति
निहंग कौन हैं? क्या निहंगों को आगे कर षड्यंत्र रचा गया है?
निहंग कौन हैं? इनका इतिहास क्या है? हिंसा को ढाल बनाकर क्या भाजपा सरकार ने फिर से कोई चाल तो नहीं चल दी है?
अजय कुमार
20 Oct 2021
nihang

वरिष्ठ पत्रकार त्रिभुवन ने अपनी फेसबुक पोस्ट में बड़े ही मार्के की बात कही है कि ज़िंदगी के सिंघु बॉर्डर पर बेवकूफ़ियों का ऐसा समूह खड़ा है, जिसने अपने आपको निहंग समझ लिया है। हत्यारा कभी निहंग हो ही नहीं सकता। निहंग कभी हत्यारा होगा नहीं। निहंग यानी नि:संग! जो किसी के संग नहीं। जो सबके संग है। जो-जो निर्भय है और लोगों को निर्भय करता है।

किसान आंदोलन पिछले 10 महीने से बड़े शानदार तरीके से चलता आ रहा है। इन 10 महीनों में किसान आंदोलन ने आरोप-प्रत्यारोप को लेकर ढेर सारे उतार-चढ़ाव भी देखे। एक लंबे और बड़े आंदोलन में किसानों की मांग को लेकर सरकार के नजरअंदाज करने वाले रवैये की वजह से यह सब स्वाभाविक भी है। लेकिन 14 अक्टूबर की रात सिख धर्म से जुड़े निहंग संप्रदाय को मानने वाले अनुयायियों ने एक युवक की जिस तरीके से हत्या की वह केवल किसान आंदोलन को ही नहीं बल्कि पूरी मानवता को शर्मसार करने वाली घटना थी।

इस बर्बर हत्या पर निहंग संप्रदाय को शर्मसार होना चाहिए था।  शर्मसार होने की बजाय उलट कर उन्होंने यह कहा है कि लखबीर (युवक) के साथ जो किया गया वह ठीक था। जो भी गुरु शब्द की बेअदबी करेगा उसे ऐसी ही सजा दी जाएगी। उसका अंजाम यही होगा। पंथ जो कर रहा है और आगे भी जो करेगा वह सही है।

खबर यह भी है कि लखबीर सिंह के अंतिम संस्कार में उनके परिवार के सिवाय कोई शामिल नहीं हुआ। एक सभ्य समाज के सदस्य होने के नाते यह हमारी सोच की कुंद हो रही मनोदशा को दर्शाता है।

इसे भी पढ़े :

धार्मिक कट्टरपंथियों का महिमामंडन और समाज की चुप्पी

पवित्र किताब की बेअदबी करना गलत बात है। लेकिन पवित्र किताब इतनी अधिक छोटी नहीं है कि किसी की बेअदबी करने से उसकी पवित्रता खत्म हो जाए। पवित्र किताब में लिखे हुए शब्दों का महत्व इतना कच्चा नहीं कि किसी के नकारने की वजह से वह अर्थहीन बन जाए। निहंग संप्रदाय के लोग किसी की बर्बर हत्या करने के बाद जिस तरीके से पवित्र किताब की बेअदबी को लेकर बयान दे रहे हैं उससे ऐसा लगता है जैसे वह खुद ही पवित्र किताब को छोटा बना रहे हैं। जिस तरीके से केंद्र की सरकार उनकी बातों को सुन रही है इससे ऐसा लगता है जैसे वह संविधान से चलने वाले इस देश की बेअदबी कर रही हो।

जानकार कहते हैं कि निहंग के कई अर्थ है। इसका अर्थ निशंक भी होता है। जो किसी से डरता नहीं जो मोह माया से दूर है। इसके साथ तलवार, घोड़ा, कलम, मगरमच्छ भी निहंग के अर्थ के तौर पर इस्तेमाल किए जाते हैं।

सिख गुरुद्वारा प्रबंधन कमेटी के मुताबिक निहंग शब्द फारसी से लिया गया है जिसका मतलब मगरमच्छ होता है। मुगलों ने निहंग लड़ाकों को यह नाम दिया था। मुगलों का मानना था कि निहंग लड़ाके वैसे ही लड़ते हैं जैसे पानी में मगरमच्छ लड़ते हैं।

नीला चोला पहने जो निहंग दिखते हैं उनकी शुरुआत साल 1699 के आसपास खालसा पंथ के प्रतिपादक दसवें सिख गुरु, गुरु गोविंद सिंह के समय से मानी जाती है। उनकी शुरुआत और पहनावे को लेकर ढेर सारी कहानियां है। जिसमें सबसे प्रमुख कहानी यही है कि गुरु गोविंद सिंह के चार लड़के थे। सबसे छोटे बेटे को बहुत छोटा होने के चलते गुरु गोविंद सिंह ने युद्ध कला सीखने से मना कर दिया। इस पर उनके सबसे छोटे बेटे ने एक तरकीब निकाली। नीला रंग का चोला पहनकर और अपने सर पर बहुत बड़ी पगड़ी बांधकर गुरु गोविंद सिंह के सामने जाकर कहा कि अब वह भी बड़े हो चुके हैं। अब वह युद्ध कला सीख सकते हैं। इस पर गुरु गोविंद सिंह को अपने छोटे बेटे पर बहुत लाड़ उपजा। यहीं से निहंगो की शुरुआत मानी जाती है।

खालसा कॉलेज अमृतसर के हिस्ट्री डिपार्टमेंट के प्रोफेसर कुलदीप सिंह कहते हैं कि उनका काम केवल युद्ध के मैदान में लड़ने जाना नहीं है। बल्कि उनके जीवन के लिए कुछ नियम कानून भी है। जैसे हर वक्त नीला चोला पहनना, गुरबाणी का हर रोज पाठ करना, शस्त्र विद्या में पारंगत होना, शस्त्र लेकर चलना, गरीबों और कमजोरों पर शस्त्र ना उठाना।


निहंग, सिख आदि गुरु ग्रंथ साहिब के अलावा श्री दसम ग्रंथ साहिब और सरब लोह ग्रंथ को पवित्र किताब की तरह मानते हैं। ब्रह्माचार्य अपनाने वाले निहंग भी होते है। और गृहस्थ अपनाने वाले निहंग भी होते हैं। जो गृहस्थ अपनाते हैं उनकी पत्नियां और बच्चे भी निहंग होते हैं।

अपने शुरुआती दौर में इन्होंने खुद को युद्ध समूह के तौर पर रखा। कठोर नियम कानून के सहारे जीवन जीते हुए कई वीरता पूर्ण लड़ाइयां लड़ी। मुगलों से लेकर अंग्रेजो के खिलाफ लड़ाइयां लड़ीं। रोजाना के जीवन से दूर रहे। लेकिन अब जब समय के चक्र में युद्ध ने अपनी प्रासंगिकता खो दी है तो इनकी भी इस तरह की प्रासंगिकता खत्म हो चुकी है।

गुरु नानक यूनिवर्सिटी के समाजशास्त्र के प्रोफेसर परमजीत सिंह जज कहते हैं कि आपराधिक प्रवृत्ति के लोगों के लिए निहंगों का डेरा अब सबसे सुरक्षित ठिकाना बन गया है। पंजाब के जिन निहंगों ने सब इंस्पेक्टर के हाथ काटे थे उनसे अफीम जब्त की गई थी। नीला चोला पहनना और शस्त्र रखना इनके पंथ का नियम है इसलिए इनके पास पंथ की आड़ में परंपरागत शास्त्र से लेकर आधुनिक शस्त्र भी होते हैं।

मौजूदा समय में निहंग बहुत छोटी सी संख्या में मौजूद है। दर्जनभर टुकड़ियों में बंटे हुए है। साल भर अपने डेरे में रहते हैं। लेकिन साल के महत्वपूर्ण सिख उत्सवों के दौरान वे वहां जाते हैं जहां से सिख उत्सव जुड़े होते हैं। वहां पर जाकर अपनी कलाबाजी दिखाते हैं। अपने मार्शल आर्ट्स का प्रदर्शन करते हैं। जैसे जैसे समय आगे बढ़ा है उनके भीतर भी कई तरह के अनैतिक कृत्यों ने अपनी जगह बना ली है। इसीलिए ऐसी वीभत्स घटनाएं सामने देखने को मिली रही हैं। जिसका सबसे दुखदाई पहलू यह है कि सिख समाज का एक धड़ा भी इसका साथ दे रहा है। वह नहीं समझ पा रहा है कि इंसान के जान की कीमत उन्हें तय करने का हक नहीं मिलना चाहिए जिनकी हैसियत धार्मिक पवित्र किताबों में लिखे धर्म के सनातनी मूल्यों को समझने की नहीं है। 

लोगों की इसी मनो भावना का फायदा उठाकर षड्यंत्र रचे जाने की खबरें आ रही है। निहंग संप्रदाय से जुड़े लोग बर्बर हत्या करने के बाद जिस तरह से अपनी बात रख रहे हैं उनके खिलाफ त्वरित  सरकारी कार्रवाई की जानी चाहिए थी। लेकिन त्वरित कार्रवाई से जुड़ी कोई खबर नहीं आ रही है। दैनिक ट्रिब्यून के हवाले से सोशल मीडिया पर कुछ फोटो तेजी से वायरल हो रही हैं। इसमें केंद्रीय कृषि मंत्री नरेंद्र सिंह तोमर सिंघु बॉर्डर पर बैठे निहंग जत्थेबंदियों के प्रमुखों में शामिल बाबा अमन सिंह को सिरोपा पहनाकर उनका सम्मान कर रहे हैं। फोटो में केंद्रीय कृषि एवं किसान कल्याण राज्यमंत्री कैलाश चौधरी और दूसरे BJP नेता भी नजर आ रहे हैं। तस्वीर जुलाई 2021 में कैलाश चौधरी के आवास की है।

संयुक्त किसान मोर्चा ने केंद्रीय कृषि मंत्री नरेंद्र सिंह तोमर और निहंग बाबा अमन सिंह की फोटो ट्वीट की। गौरतलब है कि सिंघु बॉर्डर पर लखबीर सिंह की हत्या करने के आरोप में जिन चार निहंगों सरबजीत सिंह, नारायण सिंह, भगवंत सिंह और गोविंदप्रीत ने सरेंडर किया है, वह चारों ही बाबा अमन सिंह की जत्थेबंदी से ही ताल्लुक रखते हैं। सरबजीत सिंह, भगवंत सिंह और गोविंदप्रीत के सरेंडर के दौरान बाबा अमन सिंह खुद आगे रहे थे।

संयुक्त किसान मोर्चा के नेता और किरती किसान यूनियन के प्रदेश उपाध्यक्ष रजिंदर सिंह दीपसिंहवाला ने कहा कि बाबा अमन सिंह और भाजपा नेताओं के बीच हुई इस मीटिंग के बाद गंदी राजनीति की बू आ रही है।

कई जानकार कह रहे हैं कि हिंसा के माध्यम से आंदोलनों की साख बरबाद करना भाजपा सरकार की हर बार की रणनीति रही है। इस बार भी इस संभावना को नकारा नहीं जा सकता। यह बात सोचने वाली है कि जिस सिंघु बॉर्डर पर हरदम पुलिस मौजूद रहती है। पिछले साल भर से आंदोलन होते जा रहा है इसलिए सादी वर्दी में इंटेलिजेंस वाले लोगों की वहां पर होने की संभावना होती है। कोई भी छोटी मोटी घटना बहुत तेजी से फैलती है। वहां पर सबके सामने किसी एक व्यक्ति के साथ ढाई घंटे तक अमानवीय क्रूरता होती रहे, भला यह बात किसी को पता ना चले यह कैसे संभव है?

: निहंग ऐड सिंघु बॉर्डर
nihang
who is nihang
nihang and farmer movements
nihang and bjp
Singhi border
violence at singhu border
Farm protest
sikha dhar

Related Stories

यूपी चुनाव: पिछले 5 साल के वे मुद्दे, जो योगी सरकार को पलट सकते हैं! 

एमएसपी भविष्य की अराजकता के ख़िलाफ़ बीमा है : अर्थशास्त्री सुखपाल सिंह

कृषि क़ानूनों के वापस होने की यात्रा और MSP की लड़ाई

कभी कृषि, रोज़गार और जलवायु परिवर्तन को आपस में मिलाकर सोचा है?

क्या हम अब षडयंत्रों के आख़िरी संस्करण देख चुके हैं?

क्या मोदी भारत के सबसे कमज़ोर प्रधानमंत्री हैं?


बाकी खबरें

  • कर्मचारी संगठनों ने ई-श्रम पोर्टल का स्वागत किया पर कमियाँ भी बताईं
    रौनक छाबड़ा
    कर्मचारी संगठनों ने ई-श्रम पोर्टल का स्वागत किया पर कमियाँ भी बताईं
    30 Aug 2021
    संगठनों ने कहा है कि रेजिस्ट्रेशन की प्रक्रिया की वजह से कई मज़दूर इसमें शामिल होने में असमर्थ होंगे।
  • काबुल पर अमेरिकी ड्रोन हमले में बच्चों समेत कई नागरिकों की मौत
    पीपल्स डिस्पैच
    काबुल पर अमेरिकी ड्रोन हमले में बच्चों समेत कई नागरिकों की मौत
    30 Aug 2021
    स्थानीय लोग अमेरिका के उस दावे को ख़ारिज करते हैं जिसमें उसने कहा कि उसने काबुल हवाई अड्डे पर फिर से हमला करने के लिए एक कार में विस्फोटक लोड करने की कोशिश कर रहे दो कथित आतंकवादियों पर हमला किया था।
  • क्या श्रम मंत्रालय अपने श्रम सुविधा पोर्टल के जरिये सुप्रीम कोर्ट को ठग रहा है?
    बी. सिवरामन
    क्या श्रम मंत्रालय अपने श्रम सुविधा पोर्टल के जरिये सुप्रीम कोर्ट को ठग रहा है?
    30 Aug 2021
    यह कहना कि सरकार केवल पोर्टल चलाएगी और बाक़ी सिरदर्द श्रमिक का है, अत्यधिक ग़ैर-ज़िम्मेदाराना व्यवहार है।
  • केन्या : वेतन समझौता लागू करने में विफलता पर सरकारी विश्वविद्यालयों के प्रोफ़ेसरों की हड़ताल
    पीपल्स डिस्पैच
    केन्या : वेतन समझौता लागू करने में विफलता पर सरकारी विश्वविद्यालयों के प्रोफ़ेसरों की हड़ताल
    30 Aug 2021
    केन्या में यूनिवर्सिटीज़ एकेडमिक स्टाफ़ यूनियन (यूएएसयू) ने चेतावनी दी है कि हड़ताल तब तक जारी रहेगी जब तक कि वेतन समझौता लागू नहीं हो जाता और लंबित बकाया राशि का भुगतान नहीं कर दिया जाता।
  • जलवायु परिवर्तन पर दुनिया के आदिवासी समूहों के सम्मेलन में क्या कहा गया?
    ट्राईकोंटिनेंटल : सामाजिक शोध संस्थान
    जलवायु परिवर्तन पर दुनिया के आदिवासी समूहों के सम्मेलन में क्या कहा गया?
    30 Aug 2021
    40 अलग-अलग आदिवासी समूहों में से 120 पारंपरिक तौर पर स्वामित्व रखने वालों ने केर्न्स (ऑस्ट्रेलिया) में जलवायु परिवर्तन पर पाँच दिन तक चली नेशनल फ़र्स्ट पीपुल्स गैदरिंग में हिस्सा लिया।
  • Load More
सब्सक्राइब करें
हमसे जुडे
हमारे बारे में
हमसे संपर्क करें

CC BY-NC-ND This work is licensed under a Creative Commons Attribution-NonCommercial-NoDerivatives 4.0 International License