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ऑटोमोबाइल सेक्टर की मंदी को सरकार क्यों नकार रही है?
वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने ऑटोमोबाइल इंडस्ट्री में सुस्ती के लिए ओला और उबर का हवाला दिया लेकिन 'सियाम' के मुताबिक, घरेलू बाज़ार में इस महीने कारों की बिक्री में 41 फीसदी से ज़्यादा गिरावट दर्ज की गई। जो बीते 21साल में सबसे ज्यादा है।
सोनिया यादव
11 Sep 2019
Indian Auto Industry Crises
Indian Auto Industry Crises

तुम्हारी फाइलों में गांव का मौसम गुलाबी है,
मगर ये आंकड़े झूठे हैं, ये दावा किताबी है।


अदम गोंडवी की लिखी ये पंक्तियां आज भी हमारे देश की अर्थव्यवस्था की हालत बयां करती हैं। अब ये ख़बर आम है कि देश की आर्थिक स्थिति खस्ता है। अर्थव्यवस्था पटरी से उतर चुकी है। कंपनियां मंदी की चपेट में हैं। कॉस्ट कटिंग के नाम पर हजारों लोगों की नौकरियां जा चुकी हैं और कई लोगों की दांव पर लगी हुई हैं।

ऑटोमोबाइल सेक्टर की रफ्तार थम सी गई है। मांग कम होने के कारण कंपनियों ने उत्पादन में कटौती शुरू कर दी है। अगस्त में लगातार दसवें महीने गाड़ियों की बिक्री नीचे गिरी है। वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने 10 सितंबर, मंगलवार को इस संबंध में एक बयान दिया। उन्होंने कहा कि ऑटोमोबाइल इंडस्ट्री पर बीएस6 और लोगों की सोच में आए परिवर्तन का असर पड़ रहा है,लोग अब गाड़ी खरीदने की बजाय ओला और उबर को तरजीह दे रहे हैं।

यह सच है कि भारत में ऑटोमोबाइल सेक्टर मंदी की चपेट में है। लेकिन सरकार इसे लगातार नकार रही है। पिछले महीने बीते 21 साल में सबसे कम कारों की बिक्री हुई। वाहन निर्माताओं के संगठन सियाम (SIAM) के मुताबिक, घरेलू बाज़ार में इस महीने कारों की बिक्री में 41 फीसदी से ज़्यादा गिरावट दर्ज की गई। सियाम के आंकड़ों के मुताबिक अगस्त में यात्री वाहनों की बिक्री एक साल पहले इसी माह की तुलना में 31.57 प्रतिशत घटकर 1,96,524 वाहन रह गई। एक साल पहले अगस्त में 2,87,198 वाहनों की बिक्री हुई थी।

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भारतीय ऑटोमोबाइल विनिर्माता सोसायटी ने 9 सितंबर, सोमवार को आंकड़ें जारी किए। इसके अनुसार अगस्त 2019 में घरेलू बाजार में कारों की बिक्री 41.09 प्रतिशत घटकर 1,15,957 कार रह गई जबकि एक साल पहले अगस्त में 1,96,847 कारें बिकी थी।

इस दौरान दुपहिया वाहनों की बिक्री 22.24 प्रतिशत घटकर 15,14,196 इकाई रह गई जबकि एक साल पहले इसी माह में देश में 19,47,304 दुपहिया वाहनों की बिक्री की गई। इसमें मोटरसाइकिलों की बिक्री 22.33 प्रतिशत घटकर 9,37,486 मोटरसाइकिल रह गई जबकि एक साल पहले इसी माह में 12,07,005 मोटरसाइकिलें बिकी थीं।

सियाम के आंकड़ों के मुताबिक अगस्त माह में वाणिज्यिक वाहनों की बिक्री 38.71 प्रतिशत घटकर 51,897 वाहन रही। कुल मिलाकर यदि सभी तरह के वाहनों की बात की जाये तो अगस्त 2019 में कुल वाहन बिक्री 23.55 प्रतिशत घटकर 18,21,490 वाहन रह गई जबकि एक साल पहले इसी माह में कुल 23,82,436 वाहनों की बिक्री हुई थी।

ऑटोमोबाइल सेक्टर में मंदी के दौर का आलम ये है कि देश की सबसे बड़ी कार निर्माता कंपनी मारुति सुजुकी ने पहली बार बीते हफ्ते अपने गुरुग्राम और मानेसर प्लांट को दो दिन के लिए बंद कर दिया था।

इस संबंध में मानेसर प्लांट में काम कर रहे एक कर्मचारी ने न्यूज़क्लिक को बताया कि कंपनी ने बीते महीने ही कई लोगों को नौकरी से निकाल दिया है और अभी कई लोगों को निकाले जाने की भी ख़बर चल रही है।

बता दें कि मारुति सुजुकी के बाद अब भारी वाहन बनाने वाली अग्रणी कंपनियों में एक अशोक लेलैंड ने भी मांग में कमी चलते अपने पांच संयंत्रों में सितंबर माह के दौरान पांच से लेकर 18 दिन तक 'नो वर्किंग डेज' का ऐलान किया है।
कंपनी ने एक बयान में कहा है कि सबसे अधिक पंतनगर संयंत्र में सितंबर माह के दौरान नो वर्किंग डे रहेगा। सबसे कम होशूर 1,2 और सीपीपीएस में पांच दिन नो वर्किंग डे होगा। एन्नोर संयंत्र में सितम्बर माह के दौरान 16 दिन, अलवर और भंडारा में दस-दस दिन नो वर्किंग डे रहेगा।

अशोक लेलैंड में कार्यरत एक सीनियर इंजीनियर ने न्यूज़क्लिक से बातचीत में कहा कि कंपनी फिलहाल उत्पादन कम करने के बारे में सोच रही है क्योंकि बाजार में जब मांग ही नहीं है तो उत्पादन क्षमता को कम करना ही होगा।
ये पूछे जाने पर कि क्या कंपनी ने लोगों को नौकरी से भी निकाला है, उन्होंने कहा कि कोई भी कंपनी कब तक नुकसान में व्यापार करेगी। कंपनी परोक्ष रूप से कोई न कोई रास्ता निकालती ही है जिससे लगातार हो रहे घाटे को कम किया जा सके।
एक अन्य कर्मचारी ने बताया कि अस्थाई कर्मचारियों को निकाला जा रहा है। साथ ही कई लोगों को कहा गया है कि अगर हालात नहीं सुधरे तो आगे उनकी भी छुट्टी हो सकती है।

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देश भर में ऑटो मोबाइल सेक्टर में आयी बड़ी मंदी से लौहनगरी जमशेदपुर की ऑटो मोबाइल कंपनियों और उस पर आश्रित अनुषंगी इकाइयों पर भी खासा असर पड़ता दिख रहा है। मंदी की मार की चुनौतियों का सामना कर रहे छोटे और मंझोले औधोगिक इकाइयां में से 200 के करीब बंद हो गए हैं।

मंदी की मार में किसी ने नहीं सोचा होगा कि टाटा हिताची जमशेदपुर का प्लांट बंद हो जाएगा। एक अक्तूबर से इसके सभी कर्मचारियों को दूसरे प्लाटों में स्थांतरित किया जा रहा है। शायद आपको याद हो कि यह वही कंपनी है जिसने अपने बेहतर प्रदर्शन से 1997-98 की वैश्विक मंदी में टाटा मोटर्स को सहारा दिया था।

इसमें कोई दो राय नहीं है कि देश के ऑटोमोबाइल सेक्टर का हाल बेहाल है। कई कार कंपनियों ने अपने प्लांट बंद कर दिए हैं। जबकि कुछ ने अस्थायी कर्मचारियों को बाहर का रास्ता दिखा दिया है। जाहिर है सरकार को पांच  ट्रीलियन डॉलर अर्थव्यवस्था के सपने से बाहर आकर जल्द ही कोई कारगार कदम उठाना होगा।

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