NewsClick

NewsClick
  • English
  • राजनीति
  • अर्थव्यवस्था
  • विज्ञान
  • संस्कृति
  • भारत
  • अंतरराष्ट्रीय
  • हमारे लेख
  • हमारे वीडियो
search
menu

सदस्यता लें, समर्थन करें

image/svg+xml
  • सारे लेख
  • न्यूज़क्लिक लेख
  • सारे वीडियो
  • न्यूज़क्लिक वीडियो
  • राजनीति
  • अर्थव्यवस्था
  • विज्ञान
  • संस्कृति
  • भारत
  • अंतरराष्ट्रीय
  • अफ्रीका
  • लैटिन अमेरिका
  • फिलिस्तीन
  • नेपाल
  • पाकिस्तान
  • श्री लंका
  • अमेरिका
  • एशिया के बाकी
हमारे बारे में
हमसे संपर्क करें
सब्सक्राइब करें
हमारा अनुसरण करो Facebook - Newsclick Twitter - Newsclick RSS - Newsclick
close menu
राजनीति
अंतरराष्ट्रीय
यमन: क्या सऊदी राजतन्त्र के खात्मे की शुरुआत है?
प्रबीर पुरुकायास्थ
09 Apr 2015

पश्चिम एशियाई राजनीति, अधिक से अधिक एक बहुरूपदर्शक होती जा रही है, जहाँ हर झटका एक नया स्वरुप ले लेता है। सबसे महत्वपूर्ण विकास हौथिस का  है, जोकि यमन की नयी उभरती शक्ति है और वह दक्षिण बंदरगाह के शहर एडन पर कब्ज़ा करने के काफी नज़दीक है। सऊदी समर्थित राष्ट्रपति मंसौर हादी देश छोड़कर भाग गया है। सऊदी ने खाड़ी के अन्य राजतंत्रों व मिश्र के साथ मिलकर हौथिस के विरुद्ध और हादी के समर्थन में युद्ध छेड़ दिया है और उनपर हवाई हमले बोल दिए हैं। यह देखना बाकी है क्या वे इस लड़ाई को यमन की धरती को कब्ज़ा करने की स्थिति तक ले जायेंगे? अगर वे ऐसा करते हैं तो यह ज़मीनी युद्ध सऊदी के राजतन्त्र के खात्मे की तरफ बढ़ता कदम होगा। 

एक ओमान ही है जो सऊदी के राजतन्त्र के गठबंधन से बाहर है और जिसकी सीमा यमन से लगी हुई  है।

उत्तर को फतह करने के बाद अब जब हौथिस का काफिला जो अब एडन पहुँच चुका है ने सबको आश्चर्यचकित कर दिया है। हौथिस ज़ाय्दिस शिया हैं और इरानियन शिया से उनका कोई मेल नहीं है। न ही हौथिस को ईरान से कोई मदद मिली है जैसाकि पश्चिमी और सऊदी नियंत्रित मीडिया दावा कर रहा है।

ये वही हौथिस हैं जिन्हें 1960 के दशक में यमन और मिश्र के राष्ट्रवादियों के विरुद्ध सऊदी, इंग्लैंड व अमरीका ने समर्थन दिया था। उस वक्त कम्युनिस्टों व नासिर के समर्थकों के विरुद्ध “अमीर और अल्लाह” का नारा दिया गया था।

हौथिस लड़ाई में निपुण हैं, वे उत्तरी यमन के पर्वतों के क्षेत्र से हैं जोकि सऊदी के दक्षिणी-पश्चिमी सीमा से सटा हुआ है। यमन का सऊदी के दक्षिणी-पश्चिमी प्रांत पर ऐतिहासिक दावा रहा है। उदहारण के तौर पर, 1934 में सऊदी ने यमन से नजरान प्रांत को 20 वर्ष की लीज़ पर लिया था, जिसे उन्होंने कभी वापस नहीं किया। हाउस ऑफ़ सवूद के उभरने से पहले, नाजिद के शासक जोकि यमनी थे वह सऊदी उपद्वीप में मुख्य शक्ति थे। यमन के पास लम्बा तट हैं और वहां पर बड़े महत्त्वपूर्ण बंदरगाह हैं और वह कॉफ़ी का बड़ा निर्यातक है। पसोलिनी की फिल्म थाउजेंड एंड वन नाईट(अरबियन नाईट) में सेन एक प्रमुख लोकेशन थी और इस क्षेत्र के पुराने शहरों में से एक थी। तेल की खोज और उस पर सऊदी के नियंत्रण से जिसे कि पश्चिम का समर्थन हासिल था ने सऊदी अरबिया को इस क्षेत्र की एक प्रख्यात शक्ति बना दिया और यमन को एक गरीब और गैर मुल्क बना दिया।

सऊदी ने तेल के पैसे के बल पर यमन के विभिन्न राजनैतिक धड़ों को खरीदकर अपने नियंत्रण में कर लिया। पहले उन्होंने पूर्व राष्ट्रपति  अली अब्दुल्लाह सलेह को समर्थन दिया, जिसने यमन पर 34 वर्षों तक शासन किया। सलेह के विरुद्ध लोकप्रिय आन्दोलन के उभार के बाद खुद के द्वारा नियंत्रित एक ही उम्मीदवार के चुनाव के तहत 2012 में अब्द रब्बु मंसौर हादी, जोकि वर्तमान में राष्ट्रपति है सत्तासीन

हुए और सलेह की जगह आमद हो गए। यद्दपि सलेह खुद हौथी हैं, उसने उनके खिलाफ 6 साल तक लड़ाई लड़ी जब वे राष्ट्रपति थे। वे अब हौथिस के साथ गठबंधन कर अपनी उस सेना के साथ आ गए जो आज भी अपने आपको उनके करीब पाती है।

येमेनी जनसंख्या काफी हद तक जयदी शियाओं की है, और वहाबी लोग शियाओं से नफरत करते हैं और उन्हें विधर्मी मानते हैं। यही मुख्य आस्था जिसे सऊदी के वाहाबी, इस्लामिक स्टेट व कायदा मानते हैं – वाहाबिवाद के एक ऐसा विश्वास या धर्मपथ से हटनेवाली तक्फिरी इस्लाम के स्वरुप के तौर पर (एक ऐसा विश्वास जिसके मुताबी वहाबी को छोड़कर सब विधर्मी) हैं। यह कोई आश्चर्य की बात नहीं है कि सर कलम करना एक आई.एस और सऊदी में काफी समान है। यह इस्लाम का उग्र तक्फिरी ब्रांड है, जिसे सऊदी पैसे ने समर्थन दिया हुआ है और आहिस्ता-आहिस्ता दुनिया में माने जाने वाले इस्लाम की जगह ले रहा है।

माना जाता है कि अमरीका यमन में अल-कायदा के खिलाफ लड़ रहा है। तो हौथिस भी लड़ रहे हैं। सऊदी का हौथिस पर हमला स्पष्ट कर देता है कि वे किसे असली दुश्मन मानते हैं। सऊदी और खाड़ी के राजतंत्र हमेशा से अल-कायदा और उसके जैसे आतंकावादी संगठनों के समर्थक रहे हैं जो अब सब के सब आई.एस के भीतर आ गए हैं।यमन व सिरिया में सऊदी आधिकारिक तौर पर एक ही तरफ खड़े हैं। आतंकवाद के खिलाफ युद्ध पर अपनी खोखली बयानबाजी कर अमरीका भी उसी तरफ खड़ा है।

हवाई हमलों के जरिए हादी को वापस सत्ता में ले आना शायद मुश्किल है। सऊदी के लिए यमन में एक कठपुतली सरकार बैठाने के लिए उसे ज़मीनी लड़ाई लडनी होगी। इसके लिए उसे पाकिस्तान और मिश्र के सैनिकों की जरूरत पड़ेगी। मिश्र ने अपना समर्थन देने का वायदा किया है, लेकिन उन्हें यमन उस युद्ध की याद होगी जिसमें उन्होंने हौथिस के विरुद्ध लड़ाई में 25,000 सैनिकों को खो दिया था।

यह पहली बार है कि इस क्षेत्र में सऊदी सीधे युद्ध में शामिल हैं, पहले वे सिर्फ फंडिंग दिया करते थे। सऊदी से प्रांत नज़रान में वे पहले भी बड़ा जन-उभार देख चुके हैं। दक्षिण-पश्चिम सऊदी अरबिया जिसमें नज़रान भी शामिल है, इसमें खास तौर पर शिया बहुल आबादी है और वे पहले भी इस क्षेत्र में अरब स्प्रिंग के समय व्यापक विरोध देख चुके हैं। यह संभावना है कि नज्द का वाहबी राजतंत्र जिसके कब्ज़े में मक्का व मदीना है और यमन का कुछ हिस्सा, अपनी यमन की पहुँच के चलते, उसे ऐसा सबक सिखने को मिलेगा शायद इससे पहले कभी न मिला हो: एक सीधा ज़मीनी युद्ध जो उनकी आर्मी को रेडिकल बना देगा जो आगे चलकर उनके ही राजतंत्र के लिए ख़तरा साबित होगी। युद्ध लड़ना और कठपुतलियाँ नचाने में बड़ा फर्क होता है, और वह भी विदेशी ज़मीन पर। यह सबक पहले औपनिवेशिक ताकतों को भी सीखने को मिला जो सबक अब सऊदी रॉयल्स को यमन में सीखने को मिलेगा।

(अनुवाद: महेश कुमार)

 

डिस्क्लेमर:- उपर्युक्त लेख मे व्यक्त किए गए विचार लेखक के व्यक्तिगत हैं, और आवश्यक तौर पर न्यूज़क्लिक के विचारो को नहीं दर्शाते ।

 

हौथिस
अल कायदा
आईएसआईएस
सऊदी अरब
यमन
वहाबी इस्लाम

Related Stories

अमेरिका और सऊदी अरब के खिलाफ यमन में हज़ारों लोग सडकों पर उतरे

संदर्भ पेरिस हमला – खून और लूट पर टिका है फ्रांसीसी तिलिस्म

ईरान-अमरीका परमाणु संधि और पश्चिम एशिया की राजनीति

क्या अब हम सब चार्ली हेब्दो हैं?

कोबानी पर कब्ज़ा और मूक दर्शक तुर्की

ओबामा का नया मकसद: सीरिया को इराक बनाना

आई.एस.आई.एस. और अल क़ायदा : समानता और भिन्नता

आईएसआईएस,इराक,सीरिया,और अमरीका का मकसद


बाकी खबरें

  • Harnaaz Sandhu
    भाषा
    भारत की हरनाज संधू ने मिस यूनिवर्स 2021 का ख़िताब जीता
    13 Dec 2021
    संधू से पहले सिर्फ दो भारतीय महिलाओं ने मिस यूनिवर्स का खिताब जीता है। अभिनेत्री सुष्मिता सेन को 1994 में और लारा दत्ता को 2000 में यह ताज पहनाया गया था।
  • Madras High Court
    गौरी आनंद
    ट्रांसजेंडर लोगों के समावेश पर बनाए गए मॉड्यूल को वापस लेने पर मद्रास हाई कोर्ट ने सीबीएसई को फटकार लगाई
    13 Dec 2021
    पिछले दिनों सीबीएसई ने अपनी वेबसाइट से ट्रांसजेंडर बच्चों की शिक्षा से संबंधित एक शिक्षक प्रशिक्षण नियमावली को हटा दिया था, मद्रास हाईकोर्ट ने इसपर चिंता जताई है।
  • Julian Assange
    जॉन पिल्गेर
    जूलियन असांज का न्यायिक अपहरण
    13 Dec 2021
    हम में से कौन-कौन जूलियन असांज के साथ लम्बे समय तक चल रहे न्यायिक उपहास जैसे इस न्यायिक अपहरण के सिलसिले में महज़ तमाशाई बने रहने के बजाय उनके साथ खड़े होने के लिए तैयार हैं?
  • property card
    अनिल अंशुमन
    झारखंड: ‘स्वामित्व योजना’ लागू होने से आशंकित आदिवासी, गांव-गांव किए जा रहे ड्रोन सर्वे का विरोध
    13 Dec 2021
    आदिवासी समाज बनाम प्रशासन के इस तनाव का मूल कारण बन रहा है, प्रधानमंत्री द्वारा घोषित ‘स्वामित्व योजना’ लागू किये जाने के लिए पूरे इलाके के लोगों के गांव-घरों का ड्रोन से सर्वे कराया जाना। प्रशासन के…
  • jobs
    सुबोध वर्मा
    मोदी जी, शहरों में नौकरियों का क्या?
    13 Dec 2021
    पिछले कुछ वर्षों से 7-8 प्रतिशत की बेरोज़गारी दर के चलते शहरों में नौकरी चाहने वाले असहाय और निराश हैं।
  • Load More
सब्सक्राइब करें
हमसे जुडे
हमारे बारे में
हमसे संपर्क करें

CC BY-NC-ND This work is licensed under a Creative Commons Attribution-NonCommercial-NoDerivatives 4.0 International License