NewsClick

NewsClick
  • English
  • राजनीति
  • अर्थव्यवस्था
  • विज्ञान
  • संस्कृति
  • भारत
  • अंतरराष्ट्रीय
  • हमारे लेख
  • हमारे वीडियो
search
menu

सदस्यता लें, समर्थन करें

image/svg+xml
  • सारे लेख
  • न्यूज़क्लिक लेख
  • सारे वीडियो
  • न्यूज़क्लिक वीडियो
  • राजनीति
  • अर्थव्यवस्था
  • विज्ञान
  • संस्कृति
  • भारत
  • अंतरराष्ट्रीय
  • अफ्रीका
  • लैटिन अमेरिका
  • फिलिस्तीन
  • नेपाल
  • पाकिस्तान
  • श्री लंका
  • अमेरिका
  • एशिया के बाकी
हमारे बारे में
हमसे संपर्क करें
सब्सक्राइब करें
हमारा अनुसरण करो Facebook - Newsclick Twitter - Newsclick RSS - Newsclick
close menu
भारत
राजनीति
योगी आदित्यनाथ के खिलाफ़ मामले ख़तम करने की फ़िराक में यूपी सरकार
जहाँ एक तरफ़ योगी अपने खिलाफ केस ख़तम करने की कोशिश कर रहे हैं वहीं दूसरी तरफ़ उनके खिलाफ काफी और केस दर्ज हैं जिनमें 2007 के दो काफी गंभीर मामले शामिल हैं I
न्यूज़क्लिक रिपोर्ट
27 Dec 2017
yogi adityanath

योगी आदित्यनाथ के नेतृत्व वाली उत्तर प्रदेश सरकार ने योगी आदित्यनाथ , शिव प्रताप शुक्ला (केंद्रीय वित्त मंत्रालय में राज्य मंत्री), शिवानी पाण्डेय (बीजेपी विधायक) के साथ 11 और लोगों के खिलाफ़ एक मुकद्दमें को ख़तम करने का आदेश दिया हैI दरअसल 27 मई 1995 को इन सभी लोगों के खिलाफ इलाके में रोक के बावजूद एक बैठक करने के आरोप पर केस दर्ज़ किया गया था I गौरतलब है कि ये आदेश तब आया है जब 21 दिसंबर को योगी सरकार उत्तर प्रदेश ने क्रिमिनल लॉ बिल विधान सभा में पेश किया है I इस बिल के पेश होने से पहले मुख्यमंत्री ने कहा कि प्रदेश में विभिन्न लोगों पर 20000 केस ऐसे हैं जो राजनीति से प्रेरित हैं और जिन्हें इस संशोधन से ख़तम कर दिया जायेगा I

1995 का ये मामला जहाँ रोक के आदेश की अवेहलना पर केस दर्ज किया गया था,काफी समय से कोर्ट में लंबित था I यहाँ तक कि इस मामले में सभी आरोपियों के कोर्ट में पेश न होने पर गैरज़मानती वारंट निकालने का आदेश भी दिया गया था I पर आदेश के बावजूद वारंट नहीं निकाले गए I

20 दिसंबर को क्रिमिनल लॉ बिल के पेश होने के एक दिन पहले राज्य सरकार ने डिसट्रिक्ट मैजिसट्रेट को चिठ्ठी लिखी जिनमें ये कहा गया था कि इस मामले को कोर्ट से वापस ले लिया जाए I सरकार ने अपने आदेश में कहा है कि सभी तथ्यों की जाँच के बाद ये फैसला लिया गया है कि इस केस को वापस के लिया जाय I

इस मामले पर सामाजिक कार्यकर्त्ता और रिहाई मंच के सचिव राजीव यादव ने कहा “योगी आदित्यनाथ अपने ही खिलाफ दर्ज़ हुए केस के जज नहीं बन सकते हैं, साथ ही उनके खिलाफ 2007 के दो केस हाई कोर्ट में अभी पेंडिंग हैं , जिन्हें वह पहले ही रफा दफा करने की कोशिश कर चुके हैं I सवाल ये है कि जब वह सांसद रहते हुए ये कर सकते हैं तो मुख्यमंत्री रहते हुए क्या करेंगे ?” रिहाई मंच एक संस्था है जो 2005 से साम्प्रदायिकता के खिलाफ काम कर रही है I इसी कड़ी में 2011 में इन्होने “सैफरन टेरर” नाम की एक डोक्यूमेंटरी रिलीज़ करी थी जिसमें योगी आदित्यनाथ और बाकी हिन्दू अतिवादी नेताओं के ज़हरीले भाषणों के विडियो फुटेज सम्मलित किये गए थे I

जहाँ एक तरफ़ योगी अपने खिलाफ केस ख़तम करने की कोशिश कर रहे हैं वहीं दूसरी तरफ़ उनके खिलाफ काफी और केस दर्ज हैं जिनमें 2007 के दो काफी गंभीर मामले शामिल हैं I आरोप है कि 27 जनवरी 2007 में योगी आदित्यनाथ और उनके कुछ साथी ने गोरखपुर के खुनीपुर स्थित एक मज़ार और इमाम चौक पर तोड़ फोड़ , धार्मिक पुस्तक का अपमान और आगज़नी करवाई थी I इसी मामले में उन्हें एक हफ्ते के लिए जेल भी जाना पड़ा था I इसके आलावा 2007 में ही आदित्यनाथ पर गोरखपुर रेलवे स्टेशन पर अल्पसंख्यकों के खिलाफ सांप्रदायिक भाषण देने का भी आरोप है , जिसके बाद शहर में दंगे भड़क गए थे I ये दोनों मामले हाई कोर्ट में चल रहे हैं और इनमें योगी आदित्यनाथ को मुख्य आरोपी बनाये जाने पर भी काफी समय से विचार हो रहा हैI

योगी आदित्यनाथ
साम्प्रदायिकता
हिन्दुव
criminal law bill
UP
UP Government

Related Stories

15 राज्यों की 57 सीटों पर राज्यसभा चुनाव; कैसे चुने जाते हैं सांसद, यहां समझिए...

सरकार का दो तरफ़ा खेल... ‘’कोयले की कमी भी नहीं विदेशों से आयात भी करना है’’

इस आग को किसी भी तरह बुझाना ही होगा - क्योंकि, यह सब की बात है दो चार दस की बात नहीं

यूपी: अब झांसी में अवैध खनन की रिपोर्टिंग करने गए पत्रकार पर हमला, कहां है कानून व्यवस्था? 

यूपी: सफ़ाईकर्मियों की मौत का ज़िम्मेदार कौन? पिछले तीन साल में 54 मौतें

मेरठ: वेटरनरी छात्रों को इंटर्नशिप के मिलते हैं मात्र 1000 रुपए, बढ़ाने की मांग को लेकर अनिश्चितकालीन धरने पर बैठे

यूपी: योगी 2.0 में उच्च-जाति के मंत्रियों का दबदबा, दलितों-पिछड़ों और महिलाओं की जगह ख़ानापूर्ति..

लखीमपुर हिंसा:आशीष मिश्रा की जमानत रद्द करने के लिए एसआईटी की रिपोर्ट पर न्यायालय ने उप्र सरकार से मांगा जवाब

ट्रेड यूनियनों की 28-29 मार्च को देशव्यापी हड़ताल, पंजाब, यूपी, बिहार-झारखंड में प्रचार-प्रसार 

विधानसभा चुनाव परिणाम: लोकतंत्र को गूंगा-बहरा बनाने की प्रक्रिया


बाकी खबरें

  • समीना खान
    ज़ैन अब्बास की मौत के साथ थम गया सवालों का एक सिलसिला भी
    16 May 2022
    14 मई 2022 डाक्टर ऑफ़ क्लीनिकल न्यूट्रीशन की पढ़ाई कर रहे डॉक्टर ज़ैन अब्बास ने ख़ुदकुशी कर ली। अपनी मौत से पहले ज़ैन कमरे की दीवार पर बस इतना लिख जाते हैं- ''आज की रात राक़िम की आख़िरी रात है। " (राक़िम-…
  • लाल बहादुर सिंह
    शिक्षा को बचाने की लड़ाई हमारी युवापीढ़ी और लोकतंत्र को बचाने की लड़ाई का ज़रूरी मोर्चा
    16 May 2022
    इस दिशा में 27 मई को सभी वाम-लोकतांत्रिक छात्र-युवा-शिक्षक संगठनों के संयुक्त मंच AIFRTE की ओर से दिल्ली में राष्ट्रीय शिक्षा नीति पर आयोजित कन्वेंशन स्वागत योग्य पहल है।
  • आज का कार्टून
    कार्टून क्लिक: किसानों की दुर्दशा बताने को क्या अब भी फ़िल्म की ज़रूरत है!
    16 May 2022
    फ़िल्म सेंसर बोर्ड के अध्यक्ष प्रसून जोशी का कहना है कि ऐसा माहौल बनाना चाहिए कि किसान का बेटा भी एक फिल्म बना सके।
  • वर्षा सिंह
    उत्तराखंड: क्षमता से अधिक पर्यटक, हिमालयी पारिस्थितकीय के लिए ख़तरा!
    16 May 2022
    “किसी स्थान की वहनीय क्षमता (carrying capacity) को समझना अनिवार्य है। चाहे चार धाम हो या मसूरी-नैनीताल जैसे पर्यटन स्थल। हमें इन जगहों की वहनीय क्षमता के लिहाज से ही पर्यटन करना चाहिए”।
  • बादल सरोज
    कॉर्पोरेटी मुनाफ़े के यज्ञ कुंड में आहुति देते 'मनु' के हाथों स्वाहा होते आदिवासी
    16 May 2022
    2 और 3 मई की दरमियानी रात मध्य प्रदेश के सिवनी ज़िले के गाँव सिमरिया में जो हुआ वह भयानक था। बाहर से गाड़ियों में लदकर पहुंचे बजरंग दल और राम सेना के गुंडा गिरोह ने पहले घर में सोते हुए आदिवासी धनसा…
  • Load More
सब्सक्राइब करें
हमसे जुडे
हमारे बारे में
हमसे संपर्क करें

CC BY-NC-ND This work is licensed under a Creative Commons Attribution-NonCommercial-NoDerivatives 4.0 International License