NewsClick

NewsClick
  • English
  • राजनीति
  • अर्थव्यवस्था
  • विज्ञान
  • संस्कृति
  • भारत
  • अंतरराष्ट्रीय
  • हमारे लेख
  • हमारे वीडियो
search
menu

सदस्यता लें, समर्थन करें

image/svg+xml
  • सारे लेख
  • न्यूज़क्लिक लेख
  • सारे वीडियो
  • न्यूज़क्लिक वीडियो
  • राजनीति
  • अर्थव्यवस्था
  • विज्ञान
  • संस्कृति
  • भारत
  • अंतरराष्ट्रीय
  • अफ्रीका
  • लैटिन अमेरिका
  • फिलिस्तीन
  • नेपाल
  • पाकिस्तान
  • श्री लंका
  • अमेरिका
  • एशिया के बाकी
हमारे बारे में
हमसे संपर्क करें
सब्सक्राइब करें
हमारा अनुसरण करो Facebook - Newsclick Twitter - Newsclick RSS - Newsclick
close menu
भारत
राजनीति
योगी सरकार ने यूपी पुलिस को एनकाउंटर टूल बना दिया !
'उन वर्गों को भयभीत करने के लिए ऐसी हत्याओं का एक राजनीतिक हथियार के रूप में इस्तेमाल किया जा रहा है जो बीजेपी सरकार के साथ नहीं हैं।'
अब्दुल अलीम जाफ़री
04 Oct 2018
vivek tiwari

जब से आदित्यनाथ ने उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री का पद संभाला है तब से राज्य की पुलिस ने क़रीब 1500 एनकाउंटर किए हैं। इस दौरान 67 लोग मारे गए जिनमें चार पुलिसकर्मी शामिल हैं। हाल ही में, लखनऊ के पॉश इलाक़े गोमती नगर में एक एप्पल के अधिकारी को गोली मार दी गई जिसके चलते राज्य की क़ानून-व्यवस्था को लेकर काफ़ी हंगामा हुआ।

मार्च में जारी आंकड़ों के मुताबिक़, मेरठ में सबसे ज़्यादा एनकाउंटर (449) के मामले सामने आए हैं। इसके बाद आगरा ज़ोन का स्थान है जहां 210एनकाउंटर किए गए। सूची में तीसरे स्थान पर बरेली है जहां 196 एनकाउंटर किए गए थे और वहीं चमड़े के उद्योग के लिए मशहूर कानपुर से 91 मामले सामने आए। वहीं सीएम के क्षेत्र गोरखपुर में सबसे कम पुलिस 'एनकाउंटर' हुए हैं।

फ़्लैशबैक

जून 2017 के पहले सप्ताह में इंडिया टीवी पर 'आप की अदालत' में आदित्यनाथ ने कहा था, "अगर अपराध करेंगे, तो ठोक दिए जाएंगे"। उत्तर प्रदेश सरकार द्वारा जारी आंकड़ों के अनुसार, जनवरी 2018 तक, पुलिस ने 1,038 एनकाउंटर किया था। इनमें से 32 लोगों की मौत हो गई और 238 लोग घायल हो गए। चार पुलिस कर्मियों ने भी अपनी जान गंवा दी, और राष्ट्रीय सुरक्षा अधिनियम (एनएसए) के तहत 160 लोगों के ख़िलाफ़ कार्रवाई की गई। लेकिन हाल में हुएअलीगढ़ एनकाउंटर समेत विभिन्न मामलों में पीड़ितों के परिवारों ने 'एक्स्ट्रा ज्यूडिशियल किलिंग्स' का आरोप लगाया है। दुर्भाग्यवश, आदित्यनाथ सरकार ने सरकार के आदेश पर 'एनकाउंटर' करने के लिए पुलिस को एक उपकरण बना दिया है।

मेरठ में पुलिस की नैतिकता

सोशल मीडिया पर एक वीडियो वायरल हुआ है जिसमें देखा जा सकता है कि एक मुस्लिम लड़के से हिंदू लड़की की नज़दीकी होने के चलते वैन में पुलिस उस लड़की को मार रही है। इस वीडियो में, एक वर्दीधारी पुलिस हिंदू लड़के के बजाए मुस्लिम लड़के संबंध होने के चलते लड़की को मार रही है बार-बार उसे अपशब्द कह रही है।

यूपी पुलिस को 'खुली छूट'

न्यूज़़क्लिक से बात करते हुए पूर्व आईजी (यूपी पुलिस) एसआर दारापुरी ने कहा, "योगी सरकार का मानना है कि सख्त क़दम उठाने से अपराध को नियंत्रण में लाया जा सकता है और इसीलिए उन्होंने सरकार नीति के रूप में 'एनकाउंटर' को अपनाया है। आदित्यनाथ ने ख़ुद कहा था कि वे अपराधियों को गोली मार देंगे, लेकिन अब तक राज्य में एनकाउंटर और सरकार के अहंकार के परिणामस्वरूप क़ानून में कोई सुधार नहीं हुआ है। उधर सुप्रीम कोर्ट ने एक पीआईएल पर सुनवाई करते हुए यूपी सरकार को नोटिस जारी किया है, पीआईएल में आरोप लगाया गया है कि पिछले एक साल में राज्य में कई फ़र्ज़ी एनकाउंटर हुए थे। इसलिए, योगी की एनकाउंटर नीति भी गलत साबित हुई। विपक्ष को भयभीत करने के लिए, सरकार द्वारा विभिन्न क़ानूनों का भी दुरुपयोग किया जा रहा है।"

राष्ट्रीय सुरक्षा अधिनियम (एनएसए) के इस्तेमाल पर सवाल करते हुए दारापुरी ने कहा, "एनएसए के तहत 150 से अधिक लोगों पर मामला दर्ज किया गया था, उनमें से ज़्यादातर मुस्लिम थे..। इसके अलावा, अगर हम उन लोगों के आंकड़ों को देखते हैं जिनका 'एनकाउंटर' किया गया है, इसमें ज़्यादातर मुस्लिम हैं और इनके बाद दलित, ओबीसी और समाज के कमज़ोर वर्ग हैं, जबकि क्रूर अपराधियों को मारने की संख्या वास्तव में कम है। वे उन वर्गों को भी दबा रहे हैं जो सत्ताधारी पार्टी के साथ नहीं हैं। उत्तर प्रदेश में अल्पसंख्यक और दलित ख़ुद को भयभीत महसूस कर रहे हैं।"

व्यापक रूप से पूछे जाने वाले प्रश्न हैं: अगर अलीगढ़ एनकाउंटर सत्य था, तो पुलिस ने लाइव कवरेज के लिए मीडियाकर्मियों को क्यों बुलाया था? क्योंकि उन्हें पता था कि कोई क्रॉस-फायरिंग नहीं होगी।

यह स्पष्ट है कि इन सभी 'एनकाउंटर' का इस्तेमाल राजनीतिक हथियार के रूप में किया जा रहा है। जहां तक मुआवज़े की बात है तो आदित्यनाथ सरकार इसे राजनीतिक उपकरण के रूप में इस्तेमाल कर रही है जैसा कि विवेक तिवारी के मामले में देखा गया, जिसमें बड़ा मुआवजा देने की घोषणा की गई है,जबकि अलीगढ़ एनकाउंटर पीड़ितों के परिवारों को आवेदन करने की भी अनुमति नहीं दी गई है। दारापुरी ने कहा, यह कई मुस्लिम परिवारों के साथ हुआ है।

समाजवादी पार्टी के प्रवक्ता अब्दुल हफिज़ गांधी ने न्यूज़क्लिक को बताया, "योगी सरकार ने उत्तर प्रदेश में आतंक का क्षेत्र बना दिया है। क़ानून-व्यवस्था बनाए रखने के नाम पर फ़र्ज़ी मुठभेड़ किए जा रहे हैं। वर्तमान यूपी सरकार संवैधानिक प्रावधान का उल्लंघन करने का काम कर रही है। किसी भी सरकार को नागरिकों के बुनियादी मौलिक अधिकारों का उल्लंघन करने का अधिकार नहीं है। सीएम का 'ठोक दो' वाला दृष्टिकोण आतंक के इस शासन के लिए ज़िम्मेदार है। मीडिया के कैमरे के सामने फ़र्ज़ी एनकाउंटर किए जा रहे हैं। यह पहली सरकार है जिसे राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग ने पुलिस द्वारा हत्याओं के संबंध में सबसे ज़्यादा नोटिस जारी किया है।"

गांधी ने यूपी पुलिस की ग़ैरक़ानूनी तरीक़े की कामकाजी शैली की निंदा करते हुए कहा, "हम फ़र्ज़ी मुठभेड़ों और मानवाधिकारों के कई अन्य उल्लंघनों में निष्पक्ष और समयबद्ध जांच की मांग करते हैं...। आम लोगों पर अत्याचार और भय लोकतंत्र के लिए अच्छा नहीं है।"

ऊत्तर प्रदेश में भय का माहौल

एप्पल के अधिकारी की उत्तर प्रदेश पुलिस द्वारा गोली मारने को लेकर एक छोटी लड़की ने एक सशक्त अभियान शुरू किया, 'पुलिस अंकल, आग गाड़ी रोकेंगे तो पापा रूक जाएंगे, प्लीज़ गोली मत मारिएगा।'

वंचित समुदायों के ख़िलाफ़ फ़र्ज़ी एनकाउंटर, अत्याचारों और आतंकवादी मामलों में ग़लत तरीक़े से गिरफ्तार अल्पसंख्यक सदस्यों के मामलों को उठाने वाले एक लोकतांत्रिक ग्रुप रिहाई मंच के राजीव यादव ने कहा "यह कोई पहली बार नहीं है। राजनाथ सिंह सरकार के दौरान भी कई फ़र्ज़ी एनकाउंटर किए गए और मुख्य रूप से चंदौली और सोनभद्र ज़िले में कई दलितों और आदिवासियों के एनकाउंटर किए गए।"

उन्होंने कहा कि यूपी सरकार द्वारा महिलाओं की सुरक्षा के लिए बनाए गए एंटी-रोमियो स्क्वायड ने कपल्स को परेशान करना शुरू कर दिया है और पुलिस को 'निर्दोष नागरिक' को एनकाउंटर करने का लाइसेंस मिल गया। तब यह था कि यूपी पुलिस ने एक अलग रिवायत शुरू की थी। इसने एनएसए के तहत विभिन्न मुस्लिमों के ख़िलाफ़ राष्ट्रीय ध्वजारोहण को लेकर केस दर्ज किया गया है, जबकि दूसरी तरफ, उन्होंने उन हिंदुओं को खुली छूट दी है जिन्होंने भगवा झंडा फहराया था।"

अलीगढ़ एनकाउंटर पर चर्चा करते हुए अलीगढ़ मुस्लिम विश्वविद्यालय के छात्र संघ के अध्यक्ष माश्कूर अहमद उस्मानी ने कहा, "आज सभी को विवेक तिवारी का नाम पता है जिन्हें यूपी पुलिस ने मार दिया लेकिन कितने लोगों को हाल ही में" नौशाद "और" मुस्तकीम "की हत्या के बारे में जानकारी है जिन्हें अलीगढ़ फर्जी एनकाउंटर में मार दिया गया? उनके परिवार को एफआईआर दर्ज करने की भी अनुमति नहीं है। अलीगढ़ एनकाउंटर 'फिल्मी' और'स्क्रिप्टेड' थी।"

यह भी एक धारणा है कि राजनीतिक दल के नेता विवेक तिवारी के घर पर 'फोटो सेशन' के लिए गए थे, लेकिन किसी नेता ने अलीगढ़ एनकाउंटर पर एक भी शब्द नहीं कहा क्योंकि वे मुस्लिम हैं। मश्कूर ने न्यूज़क्लिक से कहा, "हम यूपी पुलिस द्वारा किए गए हर एनकाउंटर की न्यायिक जांच की मांग करते हैं।"

vivek tiwari
Utter pradesh
Fake encounter
UP police

Related Stories

ग्राउंड रिपोर्ट: चंदौली पुलिस की बर्बरता की शिकार निशा यादव की मौत का हिसाब मांग रहे जनवादी संगठन

हैदराबाद फर्जी एनकाउंटर, यौन हिंसा की आड़ में पुलिसिया बर्बरता पर रोक लगे

क्या वाकई 'यूपी पुलिस दबिश देने नहीं, बल्कि दबंगई दिखाने जाती है'?

तेलंगाना एनकाउंटर की गुत्थी तो सुलझ गई लेकिन अब दोषियों पर कार्रवाई कब होगी?

इप्टा की सांस्कृतिक यात्रा यूपी में: कबीर और भारतेंदु से लेकर बिस्मिल्लाह तक के आंगन से इकट्ठा की मिट्टी

चंदौली पहुंचे अखिलेश, बोले- निशा यादव का क़त्ल करने वाले ख़ाकी वालों पर कब चलेगा बुलडोज़र?

CAA आंदोलनकारियों को फिर निशाना बनाती यूपी सरकार, प्रदर्शनकारी बोले- बिना दोषी साबित हुए अपराधियों सा सुलूक किया जा रहा

चंदौली: कोतवाल पर युवती का क़त्ल कर सुसाइड केस बनाने का आरोप

प्रयागराज में फिर एक ही परिवार के पांच लोगों की नृशंस हत्या, दो साल की बच्ची को भी मौत के घाट उतारा

प्रयागराज: घर में सोते समय माता-पिता के साथ तीन बेटियों की निर्मम हत्या!


बाकी खबरें

  • fact check
    किंजल
    UP का वीडियो दिल्ली के सरकारी स्कूल में मदरसा चलाने के दावे के साथ वायरल
    30 Nov 2021
    वीडियो को गौर से देखने पर ऑल्ट न्यूज़ ने स्कूल के बोर्ड पर ‘प्राथमिक विद्यालय मिर्ज़ापुर’ लिखा हुआ पाया. प्राथमिक विद्यालय मिर्ज़ापुर, गाज़ियाबाद के विजयनगर इलाके में है. यानी, ये घटना उत्तर प्रदेश की है…
  • tripura
    संदीप चक्रवर्ती, शांतनु सरकार
    त्रिपुरा नगर निकाय चुनावों में ‘धांधली’ के चलते विपक्ष का निराशाजनक प्रदर्शन 
    30 Nov 2021
    यह पहली बार नहीं है जब राज्य को चुनाव पूर्व हिंसा और चुनाव के दिन ‘धांधली’ देखने को मिल रही है, ऐसा ही कुछ दो साल पहले पंचायत चुनावों के दौरान भी देखने में आया था।
  •  Pentagon
    सोनाली कोल्हटकर
    पेंटागन का भारी-भरकम बजट मीडिया की सुर्खियां क्यों नहीं बनता?
    30 Nov 2021
    पेंटागन का भारी-भरकम बजट आम अमेरिकियों के कल्याण के लिए मिलने वाले सरकारी लाभों से चुराया जा रहा है। लेकिन कॉरपोरेट मीडिया या नीति-निर्माता इसे मानने के लिए तैयार नहीं हैं, इस मुद्दे पर उनसे बहस की…
  • Rajya Sabha
    भाषा
    राज्यसभा की ऐतिहासिक सबसे बड़ी कार्रवाई में 12 सांसद निलंबित
    30 Nov 2021
    राज्यसभा के 12 सांसदों को वर्तमान शीत सत्र की शेष अवधि के लिए निलंबित कर दिया गया है। यह उच्च सदन के इतिहास में अब तक की सबसे बड़ी कार्रवाई है। इससे पहले 2020 में आठ सांसदों को निलंबित किया गया था,…
  • media
    अभिषेक पाठक
    कृषि कानून वापसी पर संसद की मुहर, लेकिन गोदी मीडिया का अनाप-शनाप प्रलाप जारी!
    30 Nov 2021
    आज के दौर में मोदी सरकार शोले फ़िल्म में अमिताभ बच्चन के उस सिक्के जैसी हो गई है जिसके दोनों ओर 'मास्टरस्ट्रोक' लिखा है। गोदी मीडिया के उन एंकरों पर तरस भी आता है जिन्होंने सालभर इस कानून और सरकार का…
  • Load More
सब्सक्राइब करें
हमसे जुडे
हमारे बारे में
हमसे संपर्क करें

CC BY-NC-ND This work is licensed under a Creative Commons Attribution-NonCommercial-NoDerivatives 4.0 International License