NewsClick

NewsClick
  • English
  • राजनीति
  • अर्थव्यवस्था
  • विज्ञान
  • संस्कृति
  • भारत
  • अंतरराष्ट्रीय
  • हमारे लेख
  • हमारे वीडियो
search
menu

सदस्यता लें, समर्थन करें

image/svg+xml
  • सारे लेख
  • न्यूज़क्लिक लेख
  • सारे वीडियो
  • न्यूज़क्लिक वीडियो
  • राजनीति
  • अर्थव्यवस्था
  • विज्ञान
  • संस्कृति
  • भारत
  • अंतरराष्ट्रीय
  • अफ्रीका
  • लैटिन अमेरिका
  • फिलिस्तीन
  • नेपाल
  • पाकिस्तान
  • श्री लंका
  • अमेरिका
  • एशिया के बाकी
हमारे बारे में
हमसे संपर्क करें
सब्सक्राइब करें
हमारा अनुसरण करो Facebook - Newsclick Twitter - Newsclick RSS - Newsclick
close menu
अपराध
आंदोलन
नज़रिया
भारत
राजनीति
यूपी में बढ़ती पुलिसिया हिंसा और हिरासत में मौत: क्या भारत में मानवाधिकार संगठन अब मृतप्राय: हैं?
नागरिक समाज बेहद असंगठित और बिखरा हुआ है। उसे अगर इस तरह की तमाम बढ़ती प्रवत्तियों पर लगाम लगाने के लिए सोचना है तो उसे परंपरागत तरीकों से अलग नए विकल्पों की तत्काल आवश्यकता है।
रविंद्र पटवाल
16 Oct 2019
पीड़ित परिवार
पिलखुआ, हापुड़ में प्रदीप तोमर का शोक संतप्त परिवार। फोटो साभार: indian express

उत्तर प्रदेश के हापुड़ के पिलखुआ थाना क्षेत्र में रविवार शाम पुलिस हिरासत में 35 वर्षीय सिक्योरिटी गार्ड प्रदीप तोमर की मौत हो गई। आरोप है कि प्रदीप तोमर की मौत पुलिसिया पिटाई और यातना से हुई।

बताया जा रहा है कि इस घटना के तार पिलखुआ थाना क्षेत्र के लाखन गाँव में 30 अगस्त को एक महिला के शव बरामद होने की पुलिस जांच से जुड़े हैं। इस मामले में अज्ञात के खिलाफ मुकदमा दर्ज किया गया था। मृतका, प्रदीप तोमर के साले की पत्नी थी और पुलिस को शक था कि इस हत्या के पीछे प्रदीप का भी हाथ है।

इस सिलसिले में पुलिस ने रविवार की शाम प्रदीप के छोटे भाई कुलदीप तोमर को फोन करके पिलखुआ बुलाया और उसे हिरासत में ले लिया। इसके बाद छिजारसी चौकी पुलिस ने कुलदीप तोमर से फोन कराकर प्रदीप को भी पुलिस चौकी बुलवा लिया। प्रदीप अपने 11 वर्षीय बेटे के साथ पुलिस चौकी पहुंचा, जिसके बाद उसे पुलिस हिरासत में ले लिया गया।

प्रदीप तोमर के 11 वर्षीय बेटे के अनुसार 10-11 पुलिस के लोग मेरे पिता को अंदर बुरी तरह पीटते रहे। शरीर के हर अंग पर सुआ चुभा रहे थे। थाने के भीतर पुलिस के लोग लगातार शराब पी रहे थे और जब मेरे पिता ने दर्द से छटपटाते हुए पानी माँगा तो वह उसे नसीब नहीं हुआ। अंदर से लगातार चीखें आ रही थीं।

परिवार का कहना है कि जब प्रदीप की हालत अधिक ख़राब होने लगी तो आनन फानन में उसे हापुड़ के स्थानीय निजी अस्पताल में भर्ती कराया गया, लेकिन जब हालत अधिक बिगड़ने लगी तो उसे मेरठ मेडिकल रेफर कर दिया लेकिन रास्ते में ही प्रदीप ने दम तोड़ दिया। सूचना मिलते ही परिजन और ग्रामीण मेरठ मेडिकल पहुंच गए और हंगामा किया।

इस मामले में एसपी डॉ. यशवीर सिंह ने पिलखुवा कोतवाली प्रभारी निरीक्षक योगेश बालियान, छिजारसी चौकी प्रभारी उप निरीक्षक अजब सिंह व आरक्षी मनीष कुमार को निलंबित कर दिया है। युवक की मौत के बाद ग्रामीण भड़क उठे और बवाल की आशंका को देखते हुए एहतियात के तौर पर सोमवार को दिन भर थाना पुलिस छावनी बना रहा।

उत्तर प्रदेश में यह कोई इक्का-दुक्का घटना नहीं है। यूपी पहले भी पुलिसिया ज्यादती और आम जन विरोधी घटनाओं के लिए मशहूर है। लेकिन योगी राज में अपराध नियंत्रण और कानून व्यवस्था के नाम पर जिस तरह पुलिस प्रशासन को मनमानी करने की खुली छूट मिली हुई है, वह पिछले सभी आंकड़ों को ध्वस्त करती दिखती है।

देश में विधायिका, कार्यपालिका और न्यायपालिका के अलावा जिस चीज की महती आवश्यकता है कि ये तीनों अंग सुचारू रूप से काम कर सकें, और उनपर समाज की निगरानी बनी रहे वह है स्वतंत्र प्रेस और साथ में जागरूक नागरिक समाज। बेहतर समाज के निर्माण के लिए जहाँ इन सभी नीति नियामक संस्थाओं को अपना अपना काम स्वतंत्र रूप से करना चाहिए और एक दूसरे के कार्यक्षेत्र में कम से कम अतिक्रमण करना चाहिए, वहीँ स्वतंत्र मीडिया की भूमिका ने भारतीय लोकतन्त्र को 70 के दशक के आपातकाल के दौरान भी पहचान दिलाई थी, लेकिन उस दौर में जो बात सबसे प्रमुखता से निकल कर आई वह थी नागरिक अधिकार आंदोलन के अपने एक स्वतंत्र पहचान के रूप में स्थापना की।

नागरिक अधिकार आंदोलन के रूप में दो नाम प्रमुखता से सामने आये PUCL और PUDR, 80 और 90 के दशक में इनकी भूमिका काफी महत्वपूर्ण रही। देश के तमाम रिटायर्ड न्यायविद, वकील, शिक्षाविद, पत्रकार जगत से जुडी सम्मानीय हस्तियाँ इनका हिस्सा बनीं, और लगा कि देश में नागरिक समाज की ओर से शासन में बैठे लोगों के कार्यकलापों पर ज़रूरी अंकुश उत्तरोत्तर बढ़ता जाएगा। इन संगठनों ने बेवजह की गई गिरफ्तारियों, न्यायिक हिरासत में हुई मौतों, फर्जी पुलिस एनकाउंटर सहित अभिव्यक्ति की आजादी पर नागरिकों पर होते हमलों की जांच की और सरकारी मशीनरी के दुरुपयोग को बड़े ही शानदार तरीके से अपनी जांच रिपोर्टों में दर्शाया, जिसके बेहद शानदार परिणाम देखने को मिले। इन संगठनों के जरिये आदिवासी, दलित और मुस्लिम अल्पसंख्यकों पर हो रहे हमलों को कई स्तर पर अंकुश लगाने में सफलता मिली, और देश को एक सूत्र में पिरोने की कोशिशों में उल्लेखनीय वृद्धि हुई।

लेकिन यह सब आज इतिहास हो चुका है। आज इनकी उपस्थिति बेहद कम है। थोड़ा बहुत जो कुछ होते दीखता है, वह सोशल मीडिया पर लोकतांत्रिक देश की चाहत रखने वाले कुछ व्यक्तियों, समूहों, बुद्धिजीवियों और पिछले कुछ वर्षों में विकसित हुए वैकल्पिक मीडिया पोर्टल के व्यक्तिगत और सामूहिक आवाज़ का नतीजा है।

एक समय था जब यूपीए 1 और यूपीए 2 के दिनों में भोजन का अधिकार, रोजगार के अधिकार, शिक्षा के अधिकार, सूचना का अधिकार और जमीन के अधिकार पर देश बहस कर रहा था। देश में लग रहा था कि हम नागरिक समाज के आंदोलन के जरिये एक पूर्ण लोकतान्त्रिक राज्य की ओर बढ़ रहे हैं।

लेकिन आज ये सब मुद्दे सिरे से गायब हैं। आज घृणा और नफ़रत के ख़िलाफ़ समूह बन रहे हैं। आज मुद्दे हैं कि किसी को लिंच करने का अधिकार न हो। देश के किसी नागरिक को देशद्रोही, घुसपैठिया घोषित करने का सर्टिफिकेट न दिया जाय।

जब राष्ट्रीय स्तर पर हमारे नागरिक अधिकार आंदोलन के सामने बड़ी मुश्किल है, तो देश के सबसे बड़ी आबादी वाले राज्य में योगी शासन में एक थाने में पुलिसिया दमन और हिरासत में पिता की 4-5 घंटे के भीतर मौत होते देख, एक बच्चे के रूप में हम कैसे भारत को बनते देख रहे हैं? यह बहुत सम्भव है कि जिस तरह पिछले कुछ वर्षों में पुलिसिया जांच, SIT गठन और उसकी रिपोर्ट एक के बाद एक कर निरपराध को अपराधी साबित करती जाती हैं, और मुद्दे एक के बाद एक ब्रेकिंग न्यूज़ की शक्ल में सिर्फ आपको कोई झटका नहीं बल्कि इस हिंसा, दमन की अभ्यस्त करती जाती हैं, उसमें एक समतामूलक, गैर बराबरी, और शोषण रहित समाज की कल्पना और सिविल सोसाइटी की कल्पना भूसे में सुई ढूंढने जैसा होने लगा है।

नागरिक समाज बेहद असंगठित और बिखरा हुआ है। उसे अगर इस तरह की तमाम बढ़ती प्रवत्तियों पर लगाम लगाने के लिए सोचना है तो उसे परंपरागत तरीकों से अलग नए विकल्पों की तत्काल आवश्यकता है।

(लेखक स्वतंत्र टिप्पणीकार हैं। यह उनके निजी विचार हैं।)
 

Uttar pradesh
human rights violation
civil rights activists
civil society
Death in custody
Hapur

Related Stories

यूपी : महिलाओं के ख़िलाफ़ बढ़ती हिंसा के विरोध में एकजुट हुए महिला संगठन

चंदौली: कोतवाल पर युवती का क़त्ल कर सुसाइड केस बनाने का आरोप

उत्तर प्रदेश: इंटर अंग्रेजी का प्रश्न पत्र लीक, परीक्षा निरस्त, जिला विद्यालय निरीक्षक निलंबित

यूपी: अयोध्या में चरमराई क़ानून व्यवस्था, कहीं मासूम से बलात्कार तो कहीं युवक की पीट-पीट कर हत्या

यूपी में मीडिया का दमन: 5 साल में पत्रकारों के उत्पीड़न के 138 मामले

यूपी: बुलंदशहर मामले में फिर पुलिस पर उठे सवाल, मामला दबाने का लगा आरोप!

पीएम को काले झंडे दिखाने वाली महिला पर फ़ायरिंग- किसने भेजे थे बदमाश?

यूपी: ललितपुर बलात्कार मामले में कई गिरफ्तार, लेकिन कानून व्यवस्था पर सवाल अब भी बरकरार!

यूपी: आज़मगढ़ में पीड़ित महिला ने आत्महत्या नहीं की, सिस्टम की लापरवाही ने उसकी जान ले ली!

यूपी में पत्रकार लगातार सरकार के निशाने पर, एक ख़बर को लेकर 3 मीडियाकर्मियों पर मुक़दमा


बाकी खबरें

  • indian student in ukraine
    मोहम्मद ताहिर
    यूक्रेन संकट : वतन वापसी की जद्दोजहद करते छात्र की आपबीती
    03 Mar 2022
    “हम 1 मार्च को सुबह 8:00 बजे उजहोड़ सिटी से बॉर्डर के लिए निकले थे। हमें लगभग 17 घंटे बॉर्डर क्रॉस करने में लगे। पैदल भी चलना पड़ा। जब हम मदद के लिए इंडियन एंबेसी में गए तो वहां कोई नहीं था और फोन…
  • MNREGA
    अजय कुमार
    बिहार मनरेगा: 393 करोड़ की वित्तीय अनियमितता, 11 करोड़ 79 लाख की चोरी और वसूली केवल 1593 रुपये
    03 Mar 2022
    बिहार सरकार के सामाजिक अंकेक्षण समिति ने बिहार के तकरीबन 30% ग्राम पंचायतों का अध्ययन कर बताया कि मनरेगा की योजना में 393 करोड रुपए की वित्तीय अनियमितता पाई गई और 11 करोड़ 90 लाख की चोरी हुई जबकि…
  • covid
    न्यूज़क्लिक टीम
    कोरोना अपडेट: देश में 24 घंटों में कोरोना के 6,561 नए मामले, 142 मरीज़ों की मौत
    03 Mar 2022
    देश में कोरोना से अब तक 5 लाख 14 हज़ार 388 लोगों अपनी जान गँवा चुके है।
  • Civil demonstration in Lucknow
    असद रिज़वी
    लखनऊ में नागरिक प्रदर्शन: रूस युद्ध रोके और नेटो-अमेरिका अपनी दख़लअंदाज़ी बंद करें
    03 Mar 2022
    युद्ध भले ही हज़ारों मील दूर यूक्रेन-रूस में चल रहा हो लेकिन शांति प्रिय लोग हर जगह इसका विरोध कर रहे हैं। लखनऊ के नागरिकों को भी यूक्रेन में फँसे भारतीय छात्रों के साथ युद्ध में मारे जा रहे लोगों के…
  • aaj ki baat
    न्यूज़क्लिक टीम
    यूपी चुनाव : पूर्वांचल में 'अपर-कास्ट हिन्दुत्व' की दरार, सिमटी BSP और पिछड़ों की बढ़ी एकता
    03 Mar 2022
    यूपी चुनाव के छठें चरण मे पूर्वांचल की 57 सीटों पर गुरुवार को मतदान होगे. पिछले चुनाव में यहां भाजपा ने प्रचंड बहुमत पाया था. लेकिन इस बार वह ज्यादा आश्वस्त नहीं नज़र आ रही है. भाजपा के साथ कमोबेश…
  • Load More
सब्सक्राइब करें
हमसे जुडे
हमारे बारे में
हमसे संपर्क करें

CC BY-NC-ND This work is licensed under a Creative Commons Attribution-NonCommercial-NoDerivatives 4.0 International License