NewsClick

NewsClick
  • English
  • राजनीति
  • अर्थव्यवस्था
  • विज्ञान
  • संस्कृति
  • भारत
  • अंतरराष्ट्रीय
  • हमारे लेख
  • हमारे वीडियो
search
menu

सदस्यता लें, समर्थन करें

image/svg+xml
  • सारे लेख
  • न्यूज़क्लिक लेख
  • सारे वीडियो
  • न्यूज़क्लिक वीडियो
  • राजनीति
  • अर्थव्यवस्था
  • विज्ञान
  • संस्कृति
  • भारत
  • अंतरराष्ट्रीय
  • अफ्रीका
  • लैटिन अमेरिका
  • फिलिस्तीन
  • नेपाल
  • पाकिस्तान
  • श्री लंका
  • अमेरिका
  • एशिया के बाकी
हमारे बारे में
हमसे संपर्क करें
सब्सक्राइब करें
हमारा अनुसरण करो Facebook - Newsclick Twitter - Newsclick RSS - Newsclick
close menu
भारत
राजनीति
6 से 9 जून तक भोपाल में होगी 17वीं अखिल भारतीय जन विज्ञान कांग्रेस
“भारत का विचार : वैज्ञानिक स्वभाव, आत्मनिर्भरता और विकास“ के साथ-साथ देश की वर्तमान चुनौतियों पर मंथन एवं संवाद के लिए 600 से अधिक जन विज्ञान कार्यकर्ता एवं वैज्ञानिक शिरकत करेंगे।
राजु कुमार
02 May 2022
All India Public Science Network

वैज्ञानिक चेतना एवं जन के लिए विज्ञान की अवधारणा के साथ गठित अखिल भारतीय जन विज्ञान नेटवर्क हर दो साल में राष्ट्रीय कांग्रेस का आयोजन करता है। 2020 में होने वाली 17वीं कांग्रेस का आयोजन कोविड-19 के कारण अब 2022 में 6 से 9 जून तक भोपाल में किया जाएगा। वर्तमान समय में जन विज्ञान कांग्रेस पहले से ज्यादा प्रासंगिक है क्योंकि देश की वर्तमान परिस्थितियां वैज्ञानिक दृष्टिकोण के विपरीत दिखाई दे रही हैं, देश में विविधता एवं बहुलतावादी संस्कृति के खिलाफ माहौल बनाया जा रहा है और अंधविश्वास एवं अवैज्ञानिकता को बढ़ावा दिया जा रहा है।

जन विज्ञान कांग्रेस में वैज्ञानिक, बुद्धिजीवी एवं जन विज्ञान कार्यकर्ता “भारत का विचार : वैज्ञानिक स्वभाव, आत्मनिर्भरता और विकास“ के साथ-साथ देश की वर्तमान चुनौतियों पर मंथन एवं संवाद करते हुए उन विकल्पों की तलाश करेंगे, जिसके माध्यम से देश में अवैज्ञानिकता के विस्तार को रोका जा सके और संवैधानिक मूल्यों की रक्षा की जा सके।

भोपाल में होने वाले आयोजन के संदर्भ में अखिल भारतीय जन विज्ञान नेटवर्क के अध्यक्ष सब्यसाची चटर्जी ने बताया कि शिक्षा, स्वास्थ्य एवं कृषि जैसे क्षेत्र के हालात खराब हुए हैं। आम जन पर कोविड-19 के प्रतिकूल प्रभाव पड़ा है। ऐसे समय में मुद्दों को वैज्ञानिक तरीके से समझने और उसका हल करने की जरूरत है। लेकिन हम देख रहे हैं कि इन मुद्दों पर चर्चा करने के बजाय समाज से वैज्ञानिक चेतना खत्म करने का प्रयास किया जा रहा है। देश के विकास में वैज्ञानिक दृष्टिकोण की अहम भूमिका है, जिसका जिक्र संविधान में भी किया गया है, लेकिन इसके विपरीत अंधविश्वासों को बढ़ावा दिया जा रहा है। ऐसे में जन विज्ञान कांग्रेस का व्यापक महत्व है।

अभी हाल ही में भोपाल में एक बैठक कर इसके लिए आयोजन समिति का गठन किया गया। आयोजन समिति में संरक्षक के रूप में आई.आई.एस.ई.आर. के निदेशक डॉ. उमापति, वरिष्ठ कवि राजेश जोशी, मायाराम सुरजन फाउंडेशन के पलाश सुरजन, मध्यप्रदेश के पूर्व मुख्य सचिव शरद चंद्र बेहार एवं वरिष्ठ पत्रकार राकेश दीवान को शामिल किया गया। आयोजन समिति के अध्यक्ष डॉ. ज्ञानेन्द्र सिंह, कार्यकारी अध्यक्ष राजेन्द्र कोठारी, उपाध्यक्ष प्रो. श्याम बोहरे, प्रो. राजेश, प्रो. पी.के. विश्वास व रश्मि पालीवाल, संयोजक आशा मिश्रा, कोषाध्यक्ष एस.आर. आजाद और संयुक्त संयोजक सुभाष शर्मा, मनोज निगम, पवन पवार व शिल्पा जैन को बनाया गया। इन पदाधिकारियों के अलावा लगभग 50 संस्थाओ एवं संगठनों को इस आयोजन समिति के सदस्य के रूप में मनोनीत किया गया है। आयोजन को लेकर दो पोस्टर एवं वेबसाइट का लोकार्पण किया गया। इसके वेबसाइट का लिंक है, जिसपर लगातार अपडेट जारी किया जाएगा।

आयोजन समिति की संयोजक एवं भारत ज्ञान विज्ञान समिति की सुश्री आशा मिश्रा ने बताया कि कोविड-19 के बाद जन विज्ञानियों का यह पहला बड़ा आयोजन होगा। कोरोना काल के पहले भोपाल में आयोजित जन उत्सव में देश भर के जन विज्ञानी, राजनीतिक, सामाजिक एवं सांस्कृतिक कार्यकर्ताओं ने शिरकत की थी। भोपाल के लिए यह दूसरा अवसर है, जब यहां अखिल भारतीय जन विज्ञान कांग्रेस का आयोजन किया जा रहा है। उन्होंने बताया कि कार्यक्रम में देश के 26 राज्यों के 600 से अधिक लोग हिस्सेदारी करेंगे और स्थानीय स्तर पर भी लगभग इतने लोग इसमें शामिल होंगे। डॉ. सब्यसाची चटर्जी, डॉ. डी. रघुनंदन, डॉ. प्रज्वल शास्त्री, डॉ. सत्यजीत रथ, डॉ. दिनेश अब्रोल, डॉ. विवेक मोंटेरियो, डॉ. अनिता रामपाल, डॉ. सी. रामकृष्णन, टी. गंगाधरण, डॉ. कमला मेनन, डॉ. टी. सुंदररमण, डॉ. कुलदीप सिंह तंवर, डॉ. इंद्रनील मुखोपध्याय, डॉ. गर्गेय, एन.बी. सरोजिनी, डॉ. वंदना प्रसाद, प्रबीर पुरकायस्थ सहित देश के कई नामचीन वैज्ञानिक एवं जन विज्ञानी आयोजन में अपने विचार रखेंगे। आयोजन स्थल को डॉ. अमित सेनगुप्ता परिसर नाम दिया जाएगा। डॉ. अमित जन विज्ञान आंदोलन के वरिष्ठ साथी रहे हैं।

इस दौरान “भारत का विचार : वैज्ञानिक स्वभाव, आत्मनिर्भरता और विकास“ (“द आइडिया ऑफ इंडिया”) विषय पर 4 दिन तक सेमिनार, गोष्ठी, कार्यशाला और सांस्कृतिक कार्यक्रम आयोजित किए जाएंगे। अखिल भारतीय जन विज्ञान कांग्रेस में विज्ञान लोकप्रियता, तर्कसंगतता और वैज्ञानिक स्वभाव, उभरती हुई प्रौद्योगिकियां और चुनौतियां, शिक्षा, स्वास्थ्य, लैंगिकता और सामाजिक बहिष्कार, कृषि, जल और खाद्य सुरक्षा, ग्रामीण आजीविका, आत्मनिर्भरता, विकास, पर्यावरण और जलवायु परिवर्तन और समाज पर कोविड - 19 का प्रभाव, समन्वय व राहत प्रदान करने की रणनीतियां विषयों पर चर्चा की जाएगी। अखिल भारतीय जन विज्ञान कांग्रेस में अनुभवों को साझा करने, दूसरों से सीखने और समन्वित कार्यक्रमों के लिए योजना विकसित करने का एक अवसर मिलता है।

कार्यक्रम के पहले दिन 6 जून को साधारण सभा की बैठक होगी और शाम को स्वतंत्रता के 75 साल एवं भारत के विचार पर केंद्रित सांस्कृतिक कार्यक्रम एवं वक्तव्य के साथ कांग्रेस की औपचारिक शुरुआत की जाएगी। 7 एवं 8 जून को तय विषयों पर कुल 8 तकनीकी सत्र का आयोजन किया जाएगा। इन्हीं दो दिनों में 30 से 40 समानांतर कार्यशालाओं का आयोजन किया जाएगा। चौथे दिन 9 जून को संगठनात्मक सत्र होगा और दोपहर बाद समापन सत्र का आयोजन किया जाएगा। आयोजन में सबका देश-हमारा देश सहित विभिन्न विज्ञान विषयों पर प्रदर्शनियां लगाई जाएगी। ‘‘हम भारत के लोग’’ विषय पर चित्र एवं पेंटिंग की प्रदर्शनी लगाई जाएंगी। 3 दिनों तक शाम को विभिन्न राज्यों की सांस्कृतिक प्रस्तुतियां दी जाएंगी। युवाओं के साथ एक विशेष संवाद सत्र का आयोजन किया जाएगा। नाटक एवं फिल्मों का भी प्रदर्शन किया जाएगा। एक कॉर्नर को ‘‘अपना विचार साझा करें’’ के लिए आरक्षित रखा जाएगा।

उल्लेखनीय है कि 1984 में हुई भोपाल गैस त्रासदी ने देश के विभिन्न समूहों को एकजुट करने और देश के विभिन्न हिस्सों में अन्य समूहों की स्थापना में एक चिंगारी के रूप में काम किया था। पहले राष्ट्रव्यापी विज्ञान संचार कार्यक्रम के आयोजन में किये गये प्रयासों की परिणति भारत जन विज्ञान जत्था के रूप में हुई और 1988 में केरल में ऑल इंडिया पीपल्स साइंस नेटवर्क की स्थापना हुई। तब इसमें 28 संगठन एक समान दृष्टिकोण के साथ एक नेटवर्क बनाने के लिए एक साथ आए। आज इस नेटवर्क में 38 से अधिक संगठन हैं, जो वैज्ञानिक सोच को बढ़ावा देने का काम अपने अपने स्तर पर कर रहे हैं।

आयोजन समिति के कार्यकारी अध्यक्ष राजेन्द्र कोठारी का कहना है कि भोपाल में पहले भी ऐसे आयोजन होते आए हैं। इस आयोजन की सफलता इस बात में होगी, कि यहां जो भी चर्चा हो, उसकी गूंज पूरे भारत में हो और देश में वैज्ञानिक चेतना का विस्तार हो।

All India Public Science Network
All India People's Science Congress
National Congress
Indian National Congress

Related Stories

कांग्रेस का उदयपुर चिंतन शिविर: क्या सुधरेगी कांग्रेस?

हार के बाद सपा-बसपा में दिशाहीनता और कांग्रेस खोजे सहारा

मुद्दा: …तो क्या ख़त्म हो जाएगी कांग्रेस?

चुनाव नतीजों के बाद भाजपा के 'मास्टर स्ट्रोक’ से बचने की तैयारी में जुटी कांग्रेस

कांग्रेस के खिलाफ दुष्प्रचार में उतरा मीडिया

कांग्रेस: तमिलनाडु में एक चुकी हुई ताक़त ?

फारूक अब्दुल्ला की हिरासत के मुद्दे पर लोकसभा में विपक्ष का हंगामा

क्या वाकई कांग्रेस अपने सबसे बुरे दौर से गुजर रही है?

भारतीय उदारवादियों की पहेली 

कर्नाटक में लोकसभा चुनाव में निराशाजनक प्रदर्शन के बाद कांग्रेस ने प्रदेश समिति को भंग किया


बाकी खबरें

  • सोनिया यादव
    इतनी औरतों की जान लेने वाला दहेज, नर्सिंग की किताब में फायदेमंद कैसे हो सकता है?
    06 Apr 2022
    हमारे देश में दहेज लेना या देना कानूनन अपराध है, बावजूद इसके दहेज के लिए हिंसा के मामले हमारे देश में कम नहीं हैं। लालच में अंधे लोग कई बार शोषण-उत्पीड़न से आगे बढ़कर लड़की की जान तक ले लेते हैं।
  • पटनाः डीजल-पेट्रोल से चलने वाले ऑटो पर प्रतिबंध के ख़िलाफ़ ऑटो चालकों की हड़ताल
    न्यूज़क्लिक रिपोर्ट
    पटनाः डीजल-पेट्रोल से चलने वाले ऑटो पर प्रतिबंध के ख़िलाफ़ ऑटो चालकों की हड़ताल
    06 Apr 2022
    डीजल और पेट्रोल से चलने वाले ऑटो पर प्रतिबंध के बाद ऑटो चालकों ने दो दिनों की हड़ताल शुरु कर दी है। वे बिहार सरकार से फिलहाल प्रतिबंध हटाने की मांग कर रहे हैं।
  • medicine
    ऋचा चिंतन
    दवा के दामों में वृद्धि लोगों को बुरी तरह आहत करेगी – दवा मूल्य निर्धारण एवं उत्पादन नीति को पुनर्निर्देशित करने की आवश्यता है
    06 Apr 2022
    आवश्यक दवाओं के अधिकतम मूल्य में 10.8% की वृद्धि आम लोगों पर प्रतिकूल असर डालेगी। कार्यकर्ताओं ने इन बढ़ी हुई कीमतों को वापस लेने और सार्वजनिक क्षेत्र के दवा उद्योग को सुदृढ़ बनाने और एक तर्कसंगत मूल्य…
  • wildfire
    स्टुअर्ट ब्राउन
    आईपीसीसी: 2030 तक दुनिया को उत्सर्जन को कम करना होगा
    06 Apr 2022
    संयुक्त राष्ट्र की नवीनतम जलवायु रिपोर्ट कहती है कि यदि​ ​हम​​ विनाशकारी ग्लोबल वार्मिंग को टालना चाहते हैं, तो हमें स्थायी रूप से कम कार्बन का उत्सर्जन करने वाले ऊर्जा-विकल्पों की तरफ तेजी से बढ़ना…
  • Irfan
    आज का कार्टून
    कार्टून क्लिक में भाजपा का इतिहास: मीठा-मीठा मोदी का, खारा-खारा मुग़लों का..
    06 Apr 2022
    भाजपा ने भाजपा को जानिए प्रोग्राम शुरू किया है। लेकिन भाजपा के इतिहास को कैसे जानना है उसकी टेक्निक थोड़ी अलग है गुरु..
  • Load More
सब्सक्राइब करें
हमसे जुडे
हमारे बारे में
हमसे संपर्क करें

CC BY-NC-ND This work is licensed under a Creative Commons Attribution-NonCommercial-NoDerivatives 4.0 International License