NewsClick

NewsClick
  • English
  • राजनीति
  • अर्थव्यवस्था
  • विज्ञान
  • संस्कृति
  • भारत
  • अंतरराष्ट्रीय
  • हमारे लेख
  • हमारे वीडियो
search
menu

सदस्यता लें, समर्थन करें

image/svg+xml
  • सारे लेख
  • न्यूज़क्लिक लेख
  • सारे वीडियो
  • न्यूज़क्लिक वीडियो
  • राजनीति
  • अर्थव्यवस्था
  • विज्ञान
  • संस्कृति
  • भारत
  • अंतरराष्ट्रीय
  • अफ्रीका
  • लैटिन अमेरिका
  • फिलिस्तीन
  • नेपाल
  • पाकिस्तान
  • श्री लंका
  • अमेरिका
  • एशिया के बाकी
हमारे बारे में
हमसे संपर्क करें
सब्सक्राइब करें
हमारा अनुसरण करो Facebook - Newsclick Twitter - Newsclick RSS - Newsclick
close menu
राजनीति
अंतरराष्ट्रीय
अमेरिका
एक साल पहले हुए कैपिटॉल दंगे ने अमेरिका को किस तरह बदला या बदलने में नाकाम रहा
सत्ता के शांतिपूर्ण हस्तांतरण को अमेरिकी लोकतंत्र की एक शानदार मिसाल के तौर पर देखा जाता रहा है। लेकिन, यह व्यापक धारणा 6 जनवरी, 2021 को अपनी बुनियाद के साथ हिल गयी थी।
जॉन मार्शल
07 Jan 2022
US
कैपिटॉल हमले का प्रतीक बन चुका 'क़ानन शमन'

दो शताब्दियों से ज़्यादा समय से अमेरिकी राष्ट्रपति के चुनाव में कांग्रेस के वोटों का प्रमाणीकरण आम तौर पर एक प्रक्रियात्मक औपचारिकता रही थी। लेकिन, 6 जनवरी, 2021 को यह फ़ैसले का एक ऐसा पल, ख़तरे की एक ऐसी घंटी, और एक ऐसी घटना बन गया, जो कई पर्यवेक्षकों के लिए अमेरिका के लोकतंत्र की बुनियाद को हिलाकर रख देने वाला जैसा दिखा।

जैसे ही अमेरिकी सांसदों ने जो बाइडेन की जीत को प्रमाणित करने को लेकर बैठक की, वैसे ही तत्कालीन राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प ने एक भीड़ को संबोधित करते हुए वही बातें कीं, जिन्हें हफ़्तों से दक्षिणपंथी मीडिया की ओर से "बड़े झूठ" की तरह परोसा जा रहा था औऱ वह यह था,जिसका, क़ानन जैसे ऑनलाइन षड्यंत्र सिद्धांत वाले आंदोलनों और प्राउड बॉयज़ जैसे नव-फ़ासीवादी गुट दावा करते थे कि बाइडेन ने 2020 के अमेरिकी राष्ट्रपति चुनाव में सेंधमारी करते हुए अपने हक़ में कर लिया है।

उस "सेंधमारी को रोकने" की कोशिश में ट्रम्प के वफ़ादारों की भीड़ ने कैपिटॉल में क़हर बरपा दिया और बाइडेन की जीत के प्रमाणीकरण में अड़ंगा डालने का प्रयास किया।

वाशिंगटन की डीसी में हुए उस दंगे में चार ट्रम्प प्रदर्शनकारियों और एक कैपिटल पुलिस अधिकारी की मौत हो गयी और 140 अधिकारी घायल हो गये। इसकी कडी निंदा की गयी और इस तरह की एक दुर्लभ, संयुक्त प्रतिक्रिया अमेरिकी राजनीतिक परिदृश्य के दोनों तरफ़ से आयी।

सेंटर फ़ॉर स्ट्रेटेजिक एंड इंटरनेशनल स्टडीज़ में डिफेंडिंग डेमोक्रेटिक इंस्टीट्यूशंस प्रोजेक्ट के निदेशक सुजैन स्पाउल्डिंग ने उस हमले के बाद कांग्रेस में रिपब्लिकनों के बीच उनकी मुराद के बारे में बात करते हुए कहा,"हो सकता है कि एक भावना रही हो, 'ठीक है, लेकिन यह अस्वीकार्य है, यह बहुत दूर चले जाने जैसा है। ट्रम्प अपनी हद से बहुत आगे निकल गये हैं।" 

दंगों में कैपिटॉल पुलिस अधिकारी ब्रायन सिकनिक की मौत हो गयी थी

रिपब्लिकन को ट्रंप की लंबी छाया का डर

उस समय तक ट्रम्प पर महाभियोग चलाया जा चुका था और बाद में उन्हें दंगा भड़काने से बरी कर दिया गया था, हालांकि, उस "बड़े झूठ" के ख़िलाफ़ एकजुट आक्रोश पार्टी लाइनों के साथ बंट गया था।

स्पाउल्डिंग ने कहा कि पूर्व राष्ट्रपति ने उन रिपब्लिकन राजनेताओं को भी धमकाया, जिन्होंने ख़ुद को उनसे दूरी बना ली थी।उन्होंने आगे कहा, "मुझे लगता है कि (रिपब्लिकन) ने हफ़्तों और महीनों में जो देखा, वह यह है कि (ट्रम्प) का रिपब्लिकन पार्टी पर नियंत्रण बना रहा।"

ट्रम्प ने 6 जनवरी, 2021 को रैली में जो भाषण दिया,उसे कई लोग एक भड़काऊ भाषण मानते रहे हैं

उस विद्रोह में भूमिका निभाने को लेकर ट्रम्प और उनके विशेष समूह के कई लोग अब भी जांच के दायरे में हैं। लेकिन, जनमत की अदालत में सोशल और मेनस्ट्रीम मीडिया दोनों में जिस तरह बहुत ज़्यादा ग़लत सूचनायें और झूठ परोसे गये,उससे कई लोगों के लिए पूर्व राष्ट्रपति के वे कार्य वैध प्रतीत होते हैं।

जून,2021 में मॉनमाउथ यूनिवर्सिटी के कराये गये जनमत सर्वेक्षण के मुताबिक़,तक़रीबन आधे रिपब्लिकन मतदाताओं का यही मानना है कि वे दंगे क़ानूनन विरोध थे।

ग़ौरतलब है कि उस चुनाव की सेंधमारी को लेकर जो झूठ फ़ैलाया गया था और इसके लिए जो साज़िशें की गयी थीं, ट्रंप की उस रैली में शामिल होने के लिए देश भर से आये बहुत सारे लोग उस पर यक़ीन करते थे। उनमें से कुछ लोगों को अपनी हरक़तों के क़ानूनी अंजाम का सामना करना पड़ा, और बाक़ियों को मुकदमे का इंतज़ार है।

'क़ानन शमन' के नाम से भी ज्ञात जैकब चांसले को 41 महीने जेल की सजा सुनायी गयी

इंसाफ़ की राह

एफ़बीआई ने निगरानी कैमरों, यूट्यूब वीडियो और सेल फ़ोन फुटेज से उपलब्ध कराये गये सबूतों का इस्तेमाल करते हुए 727 लोगों के ख़िलाफ़ आरोप बनाया है। उनके ख़िलाफ़ लगाये गये आरोपों में आधिकारिक कार्यवाही में बाधा डालना, ख़तरनाक हथियारों का उपयोग और हमला करना शामिल है।

दोषी ठहराये जा चुके लोगों में से कुछ लोगों को संपत्ति को नष्ट करने के लिए 500 डॉलर (440 पाउंड) का मामूली जुर्माना देना पड़ा;वहीं बाक़ियों को एक पुलिस अधिकारी पर हमला करने के लिए पांच साल से ज़्यादा की जेल की सज़ा काटनी है। 

संचार का टूटना

संयुक्त राज्य में सोशल और मेनस्ट्रीम मीडिया की भूमिका तेज़ी से ध्रुवीकृत और विभाजित हो रही है और तथ्यों पर जिस तरह से बहस हो रही है और उसे तोड़ा-मरोड़ा जा रहा है,उस पर लोगों की निग़ाहें हैं।

यूनिवर्सिटी ऑफ़ ऑरेगन स्कूल ऑफ़ जर्नलिज़्म एंड कम्युनिकेशन में एसोसिएट डीन रेजिना लॉरेंस ने कहा, सोशल मीडिया एल्गोरिदम के चलते “लोगों के सामने जो चीज़ें पहले ही परोसी जा चुकी हैं,उन चीज़ों के ज़्यादा  से ज़्यादा चरम तक के संस्करण परोसे जा रहे हैं।"

फ़ैसबुक व्हिसलब्लोअर फ़्रांसिस हॉगेन, जिन्होंने लोगों के बीच विभाजन पैदा करने वाली सामग्री फैलाने को लेकर फ़ेसबुक की आलोचना की थी

जहां तक इस क्षरण के कारण बनते मुख्यधारा के मीडिया के साथ संवाद की बात है, तो लॉरेंस का कहना है कि वह चाहती हैं कि राजनीतिक संस्थान यह यक़ीन करते हुए 6 जनवरी की घटनाओं को और ज़्यादा आक्रामक तरीक़े से देखें ताकि मीडिया उस संकेत का अनुसरण करे।

मीडिया के अलावा संचार के ऐसे सरल रूप भी हैं, जो इस  विभाजन को पाटने में मदद कर सकते हैं और 6 जनवरी को हुई उन घटनाओं और उसके लिए किसे जवाबदेह ठहराया जाये,उन पर बेहतर सार्वजनिक सहमति बना सकते हैं।

लॉरेंस का कहना है, "यह बताना अच्छा रिसर्च है कि ऐसा करना जितना मुश्किल हो सकता है, वास्तव में उतना ही मुश्किल उन लोगों को सुनना भी हो सकता है, जो उन ज़्यादा से ज़्यादा चरम की चीज़ों में यक़ीन रखते हैं और असल में उन कारणों को समझते हैं कि वे उन चीज़ों में वे क्यों यक़ीन रखते हैं, इसे समझ पाना वास्तव में मददगार हो सकता है।"

साभार: डीडब्ल्यू

अंग्रेज़ी में प्रकाशित मूल आलेख को पढ़ने के लिए नीचे दिये गये लिंक पर क्लिक करें

A Year Later: How the January 6 Capitol Riots Changed, or Didn't Change, the US

Donald Trump
Joe Biden
democracy
QAnon
Capitol riot

Related Stories

बाइडेन ने यूक्रेन पर अपने नैरेटिव में किया बदलाव

भारत में संसदीय लोकतंत्र का लगातार पतन

जन-संगठनों और नागरिक समाज का उभरता प्रतिरोध लोकतन्त्र के लिये शुभ है

सऊदी अरब के साथ अमेरिका की ज़ोर-ज़बरदस्ती की कूटनीति

Press Freedom Index में 150वें नंबर पर भारत,अब तक का सबसे निचला स्तर

यूपी में संघ-भाजपा की बदलती रणनीति : लोकतांत्रिक ताकतों की बढ़ती चुनौती

गर्भपात प्रतिबंध पर सुप्रीम कोर्ट के लीक हुए ड्राफ़्ट से अमेरिका में आया भूचाल

ढहता लोकतंत्र : राजनीति का अपराधीकरण, लोकतंत्र में दाग़ियों को आरक्षण!

लोकतंत्र और परिवारवाद का रिश्ता बेहद जटिल है

अब ट्यूनीशिया के लोकतंत्र को कौन बचाएगा?


बाकी खबरें

  • Purvanchal in protest against Lakhimpur incident
    विजय विनीत
    लखीमपुर कांड के विरोध में पश्चिमी से लेकर पूर्वांचल तक आंदोलन, धरना-प्रदर्शन
    04 Oct 2021
    पीएम नरेंद्र मोदी के संसदीय क्षेत्र वाराणसी में संयुक्त किसान मोर्चा जमकर प्रदर्शन किया। किसानों को उपद्रवी करार देने पर बनारस से निकलने वाले अखबार की प्रतियां भी फूंकी। मोदी के गोद लिए गांव नागेपुर…
  • Abhisar
    न्यूज़क्लिक टीम
    किसानों में आक्रोश, प्रियंका अखिलेश का हल्लाबोल
    04 Oct 2021
    'न्यूज चक्र' के इस एपिसोड में वरिष्ठ पत्रकार अभिसार शर्मा, लखीमपुर खीरी में हुई 4 किसानों की हत्या पर बात कर रहे हैं, साथ ही बीजेपी के नेताओं के द्वारा किसानों के प्रति हिंसा के लिए उकसाए जाने और…
  • Analysing India’s Climate Change Policy
    सिद्धार्थ चतुर्वेदी
    भारत की जलवायु परिवर्तन नीति का विश्लेषण
    04 Oct 2021
    भारत की जलवायु परिवर्तन नीति की शुरुआत 2008 से मानी जा सकती है, जब जलवायु परिवर्तन पर प्रधानमंत्री की परिषद (परिषद) द्वारा जलवायु परिवर्तन के लिए राष्ट्रीय कार्य योजना (एनएपीसीसी) की घोषणा की गई थी। 
  • Rakesh Tikait
    असद रिज़वी
    लखीमपुर कांड: किसानों के साथ विपक्ष भी उतरा सड़कों पर, सरकार बैकफुट पर आई, न्यायिक जांच और एफआईआर की शर्त पर समझौता
    04 Oct 2021
    कई घंटे चली बातचीत के बाद किसान नेता राकेश टिकैत की मौजूदगी में सरकार और किसानों के बीच समझौता हो गया है। प्रत्येक मृतक के परिवार को 45 लाख के मुआवजे के अलावा घटना की “न्यायिक जांच” और 8 दिन में…
  • resident doctors' strike
    सोनिया यादव
    महाराष्ट्र: रेज़िडेंट डॉक्टर्स की हड़ताल और सरकार की अनदेखी के बीच जूझते आम लोग
    04 Oct 2021
    महाराष्ट्र में लगभग सभी मेडिकल कॉलेज के करीब 5 हजार से अधिक रेसिडेंट डॉक्टर्स हड़ताल पर हैं। उनका दावा है कि वे पिछले छह महीने से सरकार तक अपनी मांगों को पहुंचाने में लगे हैं। लेकिन सरकार उनकी बातों…
  • Load More
सब्सक्राइब करें
हमसे जुडे
हमारे बारे में
हमसे संपर्क करें

CC BY-NC-ND This work is licensed under a Creative Commons Attribution-NonCommercial-NoDerivatives 4.0 International License