NewsClick

NewsClick
  • English
  • राजनीति
  • अर्थव्यवस्था
  • विज्ञान
  • संस्कृति
  • भारत
  • अंतरराष्ट्रीय
  • हमारे लेख
  • हमारे वीडियो
search
menu

सदस्यता लें, समर्थन करें

image/svg+xml
  • सारे लेख
  • न्यूज़क्लिक लेख
  • सारे वीडियो
  • न्यूज़क्लिक वीडियो
  • राजनीति
  • अर्थव्यवस्था
  • विज्ञान
  • संस्कृति
  • भारत
  • अंतरराष्ट्रीय
  • अफ्रीका
  • लैटिन अमेरिका
  • फिलिस्तीन
  • नेपाल
  • पाकिस्तान
  • श्री लंका
  • अमेरिका
  • एशिया के बाकी
हमारे बारे में
हमसे संपर्क करें
सब्सक्राइब करें
हमारा अनुसरण करो Facebook - Newsclick Twitter - Newsclick RSS - Newsclick
close menu
राजनीति
अंतरराष्ट्रीय
ज़ियोनिस्ट को बड़ा झटका, यूएस फेडरल जज ने बीडीएस-विरोधी क़ानून को संविधान-विरोधी बताया
स्वतंत्र पत्रकार और फ़िल्म निर्माता एबी मार्टिन द्वारा 2016 जॉर्जिया स्टेट लॉ के ख़िलाफ़ दायर एक याचिका पर ये फ़ैसला सुनाया गया। इस क़ानून ने इज़रायल के बहिष्कार के फ़िलिस्तीनियों के आह्वान या बीडीएस मूवमेंट की गतिविधियों को प्रतिबंधित कर दिया था।
पीपल्स डिस्पैच
25 May 2021
Abby Martin

अमेरिका में ज़ियोनिस्ट को बड़ा झटका देते हुए फेडरल जज ने आदेश दिया कि बायकॉट, डाइवेस्टमेंट एंड सैंक्शन मूवमेंट के खिलाफ कानून संवैधानिक विरोधी हैं। सोमवार 24 मई को यूएस डिस्ट्रिक्ट कोर्ट फॉर द नॉर्दर्न डिस्ट्रिक्ट ऑफ जॉर्जिया ने पत्रकार और फिल्म निर्माता एबी मार्टिन द्वारा दायर एक याचिका पर तब एक आदेश जारी किया जब उन्हें 2016 की जॉर्जिया स्टेट लॉ के अनुसार बीडीएस मूवमेंट से खुद को दूर नहीं करने के लिए एक विश्वविद्यालय में सभा में बोलने से रोक दिया गया था।

फरवरी 2020 में यूनिवर्सिटी सिस्टम ऑफ जॉर्जिया और जॉर्जियन स्टेट के खिलाफ मार्टिन ने काउंसिल ऑन अमेरिकन-इस्लामिक रिलेशंस (सीएआईआर), सीएआईआर लीगल डिफेंस फंड और पार्टनरशिप फॉर सिविल जस्टिस फंड (पीसीजेएफ) के साथ याचिका दायर की थी। बीडीएस मूवमेंट से दूरी बनाने पर उनकी असहमति के बाद यूनिवर्सिटी के साहित्यिक कार्यक्रम में जॉर्जिया साउदर्न यूनिवर्सिटी द्वारा रोके जाने के चलते मार्टिन ने ये याचिका दायर की थी।

जॉर्जिया स्टेट द्वारा 2016 में पारित कानून के अनुसार जॉर्जिया साउदर्न यूनिवर्सिटी जैसे राज्य-संचालित या राज्य-वित्त पोषित संस्थानों के इंडिपेंडेंट कॉन्ट्रैक्टर्स जो 1,000 अमेरिकी डॉलर और इससे अधिक के लेनदेन शामिल है उसको एक संकल्प पर हस्ताक्षर करना पड़ता है कि वे इजरायल के किसी भी बहिष्कार में भाग नहीं लेंगे।

मार्टिन को 28 फरवरी को 2020 इंटरनेशनल क्रिटिकल मीडिया लिटरेसी कॉन्फ्रेंस के लिए मुख्य संदेश बोलने के लिए आमंत्रित किया गया था और यूनिवर्सिटी द्वारा यात्रा और रहने के खर्च के साथ 1,000 अमेरिकी डॉलर के मानदेय का भुगतान किया जाना था।

ये आदेश देने वाले जज मार्क कोहेन ने 29-पृष्ठ के फैसले में कहा कि ये कानून "प्रथम संशोधन द्वारा संरक्षित स्वाभाविक रूप से भावनात्मक आचरण को प्रतिबंधित करता है, मार्टिन के बोलने की स्वतंत्र के अधिकार को दबाता है और संतोषजनक राज्य हित को आगे बढ़ाने के लिए न ही कुछ अनुकूल किया जाता है।"

मार्टिन का ये केस अमेरिका में बीडीएस विरोधी कानून के खिलाफ पहली कानूनी चुनौतियों में से एक था और इस फैसले से इसी तरह के अन्य प्रांतीय कानूनों पर प्रभाव पड़ने की उम्मीद है। यह फैसला ऐसे समय में आया है जब फिलिस्तीन के इजरायली उपनिवेशीकरण का दुनिया भर में व्यापक रूप से विरोध किया जा रहा है।

America
Abby Martin
Journalist Abby Martin
Anti-BDS laws
BDS Movement

Related Stories

और फिर अचानक कोई साम्राज्य नहीं बचा था

क्या दुनिया डॉलर की ग़ुलाम है?

यूक्रेन में छिड़े युद्ध और रूस पर लगे प्रतिबंध का मूल्यांकन

पड़ताल दुनिया भर कीः पाक में सत्ता पलट, श्रीलंका में भीषण संकट, अमेरिका और IMF का खेल?

यूक्रेन में चल रहे संघर्ष और युद्ध-विरोधी आंदोलन के परिपेक्ष्य

लखनऊ में नागरिक प्रदर्शन: रूस युद्ध रोके और नेटो-अमेरिका अपनी दख़लअंदाज़ी बंद करें

यूक्रेन पर रूस के हमले से जुड़ा अहम घटनाक्रम

यूक्रेन की बर्बादी का कारण रूस नहीं अमेरिका है!

कोविड -19 के टीके का उत्पादन, निर्यात और मुनाफ़ा

अमेरिका और चीन के राष्ट्रपति के बीच वार्ता का दांव और अफ़ग़ानिस्तान के बहाने शांति का दौर


बाकी खबरें

  • mayawati
    कृष्ण सिंह
    मुद्दा: सवाल बसपा की प्रासंगिकता का नहीं, दलित राजनीति की दशा-दिशा का है
    26 Feb 2022
    जहां तक बसपा की राजनीतिक प्रासंगिकता का प्रश्न है, तो दो या तीन चुनाव हारने से किसी भी पार्टी की प्रासंगिकता खत्म नहीं होती है। लेकिन असल प्रश्न यह है कि पार्टी की राजनीतिक दशा और दिशा क्या है? साथ…
  • cartoon
    न्यूज़क्लिक रिपोर्ट
    काश! अब तक सारे भारतीय छात्र सुरक्षित लौट आते
    26 Feb 2022
    बहुत सारे काश हैं, लेकिन क्या कीजिए...युद्धग्रस्त यूक्रेन में फिलहाल करीब 20,000 भारतीय फंसे हुए हैं जिनमें ज्यादातर छात्र हैं। भारत सरकार ने अब उनकी वापसी के प्रयास शुरू किए हैं। एयर इंडिया का विमान…
  • लाल बहादुर सिंह
    यूपी चुनाव, पांचवा चरण : ख़त्म हो सकती है भाजपा की चुनौती
    26 Feb 2022
    पांचवें चरण के मतदान के साथ यूपी चुनाव 2022 में भाजपा की चुनौती खत्म हो सकती है, क्योंकि इसके बाद पूर्वांचल के आखिरी दो चरणों में बदले सामाजिक समीकरणों के चलते भाजपा की संभावनाएं  क्षीण हो चुकी हैं।
  • Russia
    पीपल्स डिस्पैच
    हम यूक्रेन की निष्पक्षता पर बातचीत करने के लिए प्रतिनिधि मंडल भेजने को तैयार- रूस
    26 Feb 2022
    मीडिया रिपोर्टों के मुताबिक़ कीव और यूक्रेन के अन्य शहरों के आसपास लड़ाई चल रही है। संयुक्त राष्ट्रसंघ की शरणार्थी संस्था के मुताबिक़, इस युद्ध की वज़ह से फिलहाल 1 लाख लोग विस्थापित हो चुके हैं।
  • tomb
    तारिक़ अनवर
    अयोध्या: राजनीति के कारण उपेक्षा का शिकार धर्मनिरपेक्ष ऐतिहासिक इमारतें
    26 Feb 2022
    यह शहर सिर्फ़ मंदिरों ही नहीं मकबरों और स्मारकों से भी भरा हुआ है जो देश की गंगा-जमुनी तहज़ीब या हिंदू और मुस्लिम संस्कृतियों के आपसी मेल का प्रतीक है। 
  • Load More
सब्सक्राइब करें
हमसे जुडे
हमारे बारे में
हमसे संपर्क करें

CC BY-NC-ND This work is licensed under a Creative Commons Attribution-NonCommercial-NoDerivatives 4.0 International License