NewsClick

NewsClick
  • English
  • राजनीति
  • अर्थव्यवस्था
  • विज्ञान
  • संस्कृति
  • भारत
  • अंतरराष्ट्रीय
  • हमारे लेख
  • हमारे वीडियो
search
menu

सदस्यता लें, समर्थन करें

image/svg+xml
  • सारे लेख
  • न्यूज़क्लिक लेख
  • सारे वीडियो
  • न्यूज़क्लिक वीडियो
  • राजनीति
  • अर्थव्यवस्था
  • विज्ञान
  • संस्कृति
  • भारत
  • अंतरराष्ट्रीय
  • अफ्रीका
  • लैटिन अमेरिका
  • फिलिस्तीन
  • नेपाल
  • पाकिस्तान
  • श्री लंका
  • अमेरिका
  • एशिया के बाकी
हमारे बारे में
हमसे संपर्क करें
सब्सक्राइब करें
हमारा अनुसरण करो Facebook - Newsclick Twitter - Newsclick RSS - Newsclick
close menu
सोशल मीडिया
भारत
सोशल मीडिया पर सीएए-एनआरसी पर बहस ने तुड़वाई बचपन की दोस्ती
‘‘मैंने सपने में भी नहीं सोचा था कि मेरे दोस्त ऐसा करेंगे। एक को मेरा दोस्त होने, कॉलेज में मेरी मदद करने का अफसोस है। वह सोचती है कि मैं आतंकवादी हूं क्योंकि मैं उसकी राजनीतिक विचारधारा से सहमति नहीं जताती हूं।’’
भाषा
27 Dec 2019
social media
प्रतीकात्मक तस्वीर : साभार, सोशल मीडिया

दिल्ली: संशोधित नागरिकता कानून (सीएए) और राष्ट्रीय नागरिक पंजी (एनआरसी) के पक्ष-विपक्ष में सोशल मीडिया पर हो रही बहस लोगों की बचपन की दोस्ती, शिक्षक-छात्र संबंधों, स्कूलों और कालेजों के पूर्व छात्रों के व्हाट्सएप समूहों पर भारी पड़ रहा है। इस बहस के कारण दोस्ती टूट रही है, शिक्षकों-छात्रों के संबंध खराब हो रहे हैं और प्रतिष्ठित संस्थानों के पूर्व छात्र अपने-अपने संस्थानों के व्हाट्सएप समूह छोड़ रहे हैं।

सीएए और एनआरसी को लेकर पूरे देश में जारी विरोध प्रदर्शनों के दौरान हुई हिंसक घटनाओं में 20 लोग मारे गए हैं और तमाम लोग घायल हुए हैं। इसे लेकर फेसबुक, ट्विटर और व्हाट्सएप पर तीखी बहस और नोंकझोंक भी जारी है।

इलाहाबाद की रहने वाली 23 साल की रोशनी अहमद के लिए सीएए और एनआरसी पर बहस बहुत ही दुखदायी रही। वह उस वक्त सकते में आ गई जब उसके बचपन के दो मित्रों ने उसपर ‘‘आतंकवादी’’ का लेबल चस्पां कर दिया और कह दिया कि अगर वह सीएए और एनआरसी का समर्थन नहीं कर सकती है तो ‘‘उसे पाकिस्तान चले जाना चाहिए।’’

इलाहाबाद विश्वविद्यालय से स्नात्कोत्तर कर चुकी अहमद ने बताया कि दोनों ‘बहुत प्यारे’ दोस्त थे। स्कूल और कॉलेज में उनके साथ पढ़ाई की थी, अपना खाना बांटकर खाया था। लेकिन जब फेसबुक और व्हाट्सएप स्टेटस पर सीएए और एनआरसी को लेकर चिंता जतायी तो उनकी प्रतिक्रिया ने हमें सकते में डाल दिया।

अहमद ने पीटीआई को बताया, ‘‘मैंने सपने में भी नहीं सोचा था कि मेरे दोस्त ऐसा करेंगे। एक को मेरा दोस्त होने, कॉलेज में मेरी मदद करने का अफसोस है। वह सोचती है कि मैं आतंकवादी हूं क्योंकि मैं उसकी राजनीतिक विचारधारा से सहमति नहीं जताती हूं।’’

उन्होंने कहा, ‘‘यह बेहद अपमानजनक और तकलीफदेह है। मेरे पास उसे जवाब देने के लिए शब्द नहीं थे, इसलिए मैंने उसके संदेशों का उत्तर ही नहीं दिया।’’

यह पूछने पर कि क्या दोनों के बीच संबंध फिर से सामान्य हो सकेंगे, अहमद ने कहा, ‘‘मैंने उन्हें खो दिया है और उन्होंने मुझे। मुझे तो यह तक नहीं पता कि मेरे चले जाने से उन्हें कोई फर्क पड़ भी रहा है या नहीं।’’

दिल्ली की जामिया मिल्लिया इस्लामिया में पढ़ने वाली 20 साल की किसा जेहरा की कहानी भी कुछ ऐसी ही है। उनके विश्वविद्यालय में हिंसक प्रदर्शनों के बाद उसके गृहनगर के दोस्तों ने अब उन पर ‘‘पत्थरबाज’ का लेबल चिपकाना शुरू कर दिया है।

गणित ऑनर्स की अंतिम वर्ष की छात्रा कहती हैं, ‘‘उनके अनुसार यह प्रदर्शन करने का सही तरीका नहीं था... वे मुझे और मेरे विश्वविद्यालय को गालियां दे रहे हैं।’’

आईआईएम से 2014 में एक्जेक्यूटिव एमबीए प्रोग्राम करने वाले 37 वर्षीय फ़ैज़ रहमान ने बताया कि पढ़ाई खत्म होने के बाद उनके बैच के लोगों ने एक व्हाट्सएप समूह बनाया। उसका मुख्य लक्ष्य नेटवर्किंग और संसाधन साझा करना था।

वाराणसी निवासी और दिल्ली में नौकरी कर रहे रहमान कहते हैं, ‘‘वर्षों तक उस समूह में कोई राजनीतिक चर्चा नहीं होती थी, लेकिन पिछले कुछ दिनों में समूह के कुछ सदस्यों द्वारा वहां डाले गए पोस्ट बर्दाश्त करने के काबिल नहीं हैं। उन सभी में एक विशेष समुदाय को निशाना बनाया गया है, उसे गलत बताया गया है। शुरुआत में हिन्दुओं, सिखों, इसाइयों और मुसलमानों, सभी सदस्यों ने तथ्यों के आधार पर उनसे तर्क करने और फर्जी खबरों का पर्दाफाश करने का प्रयास किया, लेकिन यह समस्या इस हद तक बढ़ गई कि मैंने वह समूह ही छोड़ दिया।’’

हैदराबाद में एक बड़ी टेक कंपनी में काम कर रहे आदित्य शर्मा ने बताया कि वह फेसबुक पर अपने पुराने स्कूल शिक्षकों की पोस्ट देख कर बहुत दुखी हुए।

आईआईएम से पढ़े शर्मा कहते हैं, ‘‘मेरे कुछ शिक्षक सीएए और एनआरसी का समर्थन कर रहे हैं जबकि उन्हें इसके परिणामों का जरा भी अंदाजा नहीं है। (व्यंग्य करते हुए कहते हैं) यह जानकर अच्छा लगा कि हमारी शिक्षा प्रणाली में दिक्कत शुरुआत से ही है।’’

सहायक प्रोफेसर पद्मजा तामुली ने बताया कि उनकी अपनी दो दशक पुरानी दोस्त ने उनके ‘असमी मूल’ पर सवाल उठाया तो वह बेहद आहत हुईं। यह सब इसलिए हुआ क्योंकि वह दोस्त की राजनीतिक विचारधारा से इत्तेफाक नहीं रखती है।

असम में तिनसुकिया की रहने वाली तामुली कोलकाता में नौकरी करती हैं। उन्होंने पीटीआई-भाषा को बताया, ‘‘शुरुआत में मुझे भी प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी की नीतियों पर भरोसा था कि वह असम के लिए कुछ अच्छा करेंगे। लेकिन अब नहीं।’’

(इस खबर के कुछ नामों को बदल दिया गया है क्योंकि उन्होंने अपनी पहचान गुप्त रखने का अनुरोध किया था)

CAA
NRC
Debate on CAA
Social Media

Related Stories

अफ़्रीका : तानाशाह सोशल मीडिया का इस्तेमाल अपनी सत्ता बनाए रखने के लिए कर रहे हैं

मृतक को अपमानित करने वालों का गिरोह!

छत्तीसगढ़ की वीडियो की सच्चाई और पितृसत्ता की अश्लील हंसी

उच्च न्यायालय ने फेसबुक, व्हाट्सऐप को दिए सीसीआई के नोटिस पर रोक लगाने से किया इंकार

विश्लेषण : मोदी सरकार और सोशल मीडिया कॉरपोरेट्स के बीच ‘जंग’ के मायने

कैसे बना सोशल मीडिया राजनीति का अभिन्न अंग?

नए आईटी कानून: सरकार की नीयत और नीति में फ़र्क़ क्यों लगता है?

महामारी की दूसरी लहर राष्ट्रीय संकट, इंटरनेट पर मदद मांगने पर रोक न लगाई जाए : उच्चतम न्यायालय

फेसबुक ने घंटो तक बाधित रखा मोदी के इस्तीफे संबंधी हैशटैग, बाद में कहा गलती से हुआ बाधित

कपूर, लौंग, अजवाइन और नीलगिरी तेल ऑक्सीजन लेवल नहीं बढ़ाते, केन्द्रीय मंत्री ने शेयर किया ग़लत दावा


बाकी खबरें

  • Antony Blinken
    एम. के. भद्रकुमार
    रूस को अमेरिकी जवाब देने में ब्लिंकन देरी कर रहे हैं
    21 Jan 2022
    रूस की सुरक्षा गारंटी देने की मांगों पर औपचारिक प्रतिक्रिया देने की समय सीमा नजदीक आने के साथ ही अमेरिकी कूटनीति तेज हो गई है।
  • covid
    न्यूज़क्लिक रिपोर्ट
    कोरोना अपडेट: देश में 24 घंटों में कोरोना के क़रीब साढ़े तीन लाख नए मामले सामने आए
    21 Jan 2022
    देश में 24 घंटों में कोरोना के साढ़े तीन लाख के क़रीब यानी 3,47,254 नए मामले सामने आए हैं। देश में एक्टिव मामलों की संख्या बढ़कर 5.23 फ़ीसदी यानी 20 लाख 18 हज़ार 825 हो गयी है।
  • jute mill
    रबीन्द्र नाथ सिन्हा
    बंगाल : जूट मिल बंद होने से क़रीब एक लाख मज़दूर होंगे प्रभावित
    21 Jan 2022
    नौ प्रमुख ट्रेड यूनियनों ने केंद्रीय कपड़ा मंत्री पीयूष गोयल और मुख्यमंत्री ममता बनर्जी से हस्तक्षेप की मांग की है।
  • online education
    सतीश भारतीय
    ऑनलाइन शिक्षा में विभिन्न समस्याओं से जूझते विद्यार्थियों का बयान
    21 Jan 2022
    मध्यप्रदेश के विद्यार्थियों और शिक्षकों की प्रतिक्रियाओं से स्पष्ट ज्ञात हो रहा है कि इस वक्त ऑनलाइन शिक्षा एक औपचारिकता के रूप में विद्यमान है। सरकार ने धरातलीय हकीकत जाने बगैर ऑनलाइन शिक्षा कोरोना…
  • Ukraine
    न्यूज़क्लिक टीम
    पड़ताल दुनिया भर कीः यमन का ड्रोन हमला हो या यूक्रेन पर तनाव, कब्ज़ा और लालच है असल मकसद
    20 Jan 2022
    'पड़ताल दुनिया भर की' में वरिष्ठ पत्रकार भाषा सिंह ने यमन के हूती विद्रोहियों द्वारा संयुक्त अरब अमीरात की राजधानी अबु धाबी पर किये ड्रोन हमले की असल कहानी पर प्रकाश डाला न्यूज़क्लिक के प्रधान संपादक…
  • Load More
सब्सक्राइब करें
हमसे जुडे
हमारे बारे में
हमसे संपर्क करें

CC BY-NC-ND This work is licensed under a Creative Commons Attribution-NonCommercial-NoDerivatives 4.0 International License