NewsClick

NewsClick
  • English
  • राजनीति
  • अर्थव्यवस्था
  • विज्ञान
  • संस्कृति
  • भारत
  • अंतरराष्ट्रीय
  • हमारे लेख
  • हमारे वीडियो
search
menu

सदस्यता लें, समर्थन करें

image/svg+xml
  • सारे लेख
  • न्यूज़क्लिक लेख
  • सारे वीडियो
  • न्यूज़क्लिक वीडियो
  • राजनीति
  • अर्थव्यवस्था
  • विज्ञान
  • संस्कृति
  • भारत
  • अंतरराष्ट्रीय
  • अफ्रीका
  • लैटिन अमेरिका
  • फिलिस्तीन
  • नेपाल
  • पाकिस्तान
  • श्री लंका
  • अमेरिका
  • एशिया के बाकी
हमारे बारे में
हमसे संपर्क करें
सब्सक्राइब करें
हमारा अनुसरण करो Facebook - Newsclick Twitter - Newsclick RSS - Newsclick
close menu
कोविड-19
भारत
राजनीति
कोविड-19: क़स्बा वैक्सीन घोटाले के ख़िलाफ़ वाम मोर्चा का पश्चिम बंगाल भर में विरोध प्रदर्शन
कथित घोटाले में फर्जी कोविड-19 टीके और टीकाकरण शिविर शामिल थे, जो राज्य के क़स्बा और सोनारपुर क्षेत्र में आयोजित किये गये थे।
संदीप चक्रवर्ती
01 Jul 2021
कोविड-19: क़स्बा वैक्सीन घोटाले के ख़िलाफ़ वाम मोर्चा का पश्चिम बंगाल भर में विरोध प्रदर्शन

कोलकाता: संजुक्त मोर्चा, एसएफआई, डीवाईएफआई और ऐडवा ने मंगलवार को पश्चिम बंगाल में पुलिस थानों के बाहर क़स्बा वैक्सीन घोटाले के खिलाफ प्रदर्शन किया, जिसे कथित तौर पर टीएमसी नेताओं की मिलीभगत के साथ संपन्न किया गया था।

एक प्रेस विज्ञप्ति में, पश्चिम बंगाल वाम मोर्चे के अध्यक्ष बिमान बासु ने कहा कि संगठन ने मांग की है कि इस घोटाले की जांच को अदालत की निगरानी में चलाया जाए, क्योंकि इसमें कई प्रभावशाली नाम  बाहर आ रहे हैं। कठित घोटाले में फर्जी कोविड-19 वैक्सीन और टीकाकरण शिविर शामिल थे और जिन्हें राज्य के क़स्बा और सोनारपुर क्षेत्र में आयोजित किया गया था।

देबंजन देब नामक एक शख्स ने कथित तौर पर टीएमसी नेताओं के साथ मिलकर खुद को एक आईएएस अधिकारी के तौर पर पेश किया और मुफ्त टीकाकरण शिविर आयोजित किये, जहाँ पर कोविशील्ड के नाम पर लोगों को फर्जी कोविड-19 टीके लगाये गए। 1,000 से भी अधिक की संख्या में भोले-भाले नागरिकों को इस अपराध का भुक्तभोगी बनने के लिए मजबूर होना पड़ा है। यहाँ तक कि टीएमसी की महिला सांसद मिमी चक्रवर्ती तक को नकली टीका लगाया गया था, जिसके रासायनिक संयोजन के बारे में अभी भी कोई मालूमात हासिल नहीं हो सकी है।

स्थानीय टीएमसी नेतृत्व ने इन शिविरों के सूत्रधार के तौर पर काम किया है। क़स्बा पुलिस थाने से करीब 300 मीटर की दूरी पर इस ख़ास आयोजन को अंजाम दिया गया था। मामले के अपराधी के खिलाफ पहले से ही धोखाधड़ी का मामला दर्ज होने के बावजूद, पुलिस ने समय पर कार्यवाही करने से इंकार कर दिया था। देबंजन देब को कोलकाता नगर निगम के मुख्य प्रशासक फिरहाद हकीम एवं निगम से जुड़े अन्य टीएमसी नेताओं के साथ कई तस्वीरों में देखा गया था। 

सोमवार को भी विरोध प्रदर्शन हुए थे जब प्रदर्शनकारियों ने निगम कार्यालय के सामने बने पुलिस बैरिकेड्स तोड़ दिए, जिस पर प्रशासन ने हस्तक्षेप किया और महिलाओं सहित कई प्रदर्शनकारियों के साथ कथित तौर पर मारपीट की। प्रदर्शनकारियों को हिरासत में ले लिया गया लेकिन दो से तीन घंटों के बाद छोड़ दिया गया था।

सीपीआई(एम) राज्य सचिवालय सदस्य समिक लाहिड़ी, कोलकाता जिला सचिव कल्लोल मजूमदार, संजुक्त मोर्चा के एकमात्र विधायक नौशाद सिद्दीकी ने भी सोमवार के विरोध प्रदर्शन में हिस्सा लिया। राज्य स्वास्थ्य निदेशालय के समक्ष भी विरोध प्रदर्शन किया गया, जिसमें पुलिस पर आरोप है कि उसने निहत्थे तख्तियां लिए प्रदर्शनकारियों के साथ मारपीट की। प्रदर्शनकारी नारेबाजी कर रहे थे और हाथापाई के बाद पुलिस ने उन्हें हिरासत में ले लिया।

सीपीआई(एम) राज्य सचिव सूर्य कान्त मिश्रा ने पुलिस द्वारा की गई ज्यादती की निंदा की है।

बुधवार को भी विरोध प्रदर्शन जारी रहने की उम्मीद है। एक प्रेस विज्ञप्ति में मिश्रा ने कहा है कि टीएमसी ने पुलिस की मिलीभगत से महामारी के दौरान जालसाजी जैसे “जघन्य” अपराध को अंजाम दिया है और विरोध प्रदर्शनों को दबाने के लिए क्रूर बल का इस्तेमाल करने की कोशिश कर रही है। बुधवार को भी राज्य भर में यह विरोध प्रदर्शन जारी रहेगा। उन्होंने पार्टी कार्यकर्ताओं से भी अपील की है कि वे स्टूडेंट्स फेडरेशन ऑफ़ इंडिया, डेमोक्रेटिक यूथ फेडरेशन ऑफ़ इंडिया और आल इंडिया डेमोक्रेटिक विमेंस एसोसिएशन के आह्वान में शामिल हों। उन्होंने कहा कि क़स्बा में आयोजित किये गये फर्जी शिविर से साबित होता है कि कैसे आम लोगों को कोरोना महामारी के दौरान “जालसाजी” कर मूर्ख बनाया जा रहा है। 

उन्होंने कहा कि सरकार किसी भी असंतोष को दबाने के लिए अपने बाहुबल का इस्तेमाल कर रही है। उन्होंने चुटकी लेते हुए कहा कि जब सीएम इससे पहले सीबीआई से सामना हुआ, तब उस दौरान महामारी के लिए बनाये गए नियमों के तहत टीएमसी को सजा नहीं दी गई।

उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि टीएमसी सरकार ने हमेशा ही “घपलों और घपलेबाजों को” बचाने की कोशिश की है, जैसा कि चिट फण्ड घोटाले के दौरान उसने किया था और मुख्यमंत्री ममता बनर्जी के राज्य में इस प्रकार के अनेकों घोटाले हो चुके हैं।

अंग्रेज़ी में प्रकाशित मूल आलेख को पढ़ने के लिए नीचे दिये गये लिंक पर क्लिक करें।

COVID-19: Left Front Protests Against Kasba Vaccine Scam Across West Bengal

Kasba Vaccine Scam
West Bengal
kolkata
COVID-19
COVID Scam Bengal
mamata banerjee
TMC
SFI
DYFI
AIDWA

Related Stories

कोरोना अपडेट: देश में कोरोना ने फिर पकड़ी रफ़्तार, 24 घंटों में 4,518 दर्ज़ किए गए 

कोरोना अपडेट: देश में 24 घंटों में 3,962 नए मामले, 26 लोगों की मौत

कोरोना अपडेट: देश में 84 दिन बाद 4 हज़ार से ज़्यादा नए मामले दर्ज 

कोरोना अपडेट: देश में कोरोना के मामलों में 35 फ़ीसदी की बढ़ोतरी, 24 घंटों में दर्ज हुए 3,712 मामले 

कोरोना अपडेट: देश में नए मामलों में करीब 16 फ़ीसदी की गिरावट

कोरोना अपडेट: देश में 24 घंटों में कोरोना के 2,706 नए मामले, 25 लोगों की मौत

कोरोना अपडेट: देश में 24 घंटों में 2,685 नए मामले दर्ज

कोरोना अपडेट: देश में पिछले 24 घंटों में कोरोना के 2,710 नए मामले, 14 लोगों की मौत

कोरोना अपडेट: केरल, महाराष्ट्र और दिल्ली में फिर से बढ़ रहा कोरोना का ख़तरा

महामारी में लोग झेल रहे थे दर्द, बंपर कमाई करती रहीं- फार्मा, ऑयल और टेक्नोलोजी की कंपनियां


बाकी खबरें

  • JK
    अनीस ज़रगर
    कश्मीरः जेल में बंद पत्रकारों की रिहाई के लिए मीडिया अधिकार समूहों ने एलजी को लिखी चिट्ठी 
    16 Feb 2022
    मीडिया निकायों ने फहद की पत्रकारिता कार्य के विरुद्ध शुरू की गई सभी पुलिसिया जांच को वापस लेने का भी आह्वान किया। 
  • modi ravidas mandir
    राज वाल्मीकि
    रैदास मनुष ना जुड़ सके जब तक जाति न जात
    16 Feb 2022
    कई जगह दलितों का वोट प्राप्त करने के लिए भाजपा के नेता भी आज रैदास मंदिर में नमन कर रहे हैं। इसे देखकर एक अम्बेडकरवादी होने के नाते मैं असहज हुआ।
  • Greta Acosta Reyes
    ट्राईकोंटिनेंटल : सामाजिक शोध संस्थान
    वामपंथ के पास संस्कृति है, लेकिन दुनिया अभी भी बैंकों की है
    16 Feb 2022
    'जब हमारे समय की महान सांस्कृतिक बहसों की बात आती है, इतिहास की सुई लगभग पूरी तरह से वामपंथ की ओर झुक जाती है।लेकिन आर्थिक व्यवस्था के मामले में दुनिया बैंकों की है'।
  • UNEMPLOYMENT
    प्रभात पटनायक
    क्यों पूंजीवादी सरकारें बेरोज़गारी की कम और मुद्रास्फीति की ज़्यादा चिंता करती हैं?
    16 Feb 2022
    सचाई यह है कि पूंजीवादी सरकारों को बेरोजगारी के मुकाबले में मुद्रास्फीति की ही ज्यादा चिंता होना, समकालीन पूंजीवाद में वित्तीय पूंजी के वर्चस्व को ही प्रतिबिंबित करता है।
  • punjab
    न्यूज़क्लिक टीम
    अमृतसर: व्यापार ठप, नौकरियाँ ख़त्म पर चुनावों में ग़ायब मुद्दा
    16 Feb 2022
    भारत और पाकिस्तान के बीच व्यापार ख़त्म होने के बाद अमृतसर, तरन तारन और गुरदासपुर के हज़ारों लोग बेरोज़गार हो गए. इस व्यापार ने हज़ारों ट्रक ड्राइवरों, कुलियों, ढाबों को आबाद किया लेकिन अब सभी…
  • Load More
सब्सक्राइब करें
हमसे जुडे
हमारे बारे में
हमसे संपर्क करें

CC BY-NC-ND This work is licensed under a Creative Commons Attribution-NonCommercial-NoDerivatives 4.0 International License