NewsClick

NewsClick
  • English
  • राजनीति
  • अर्थव्यवस्था
  • विज्ञान
  • संस्कृति
  • भारत
  • अंतरराष्ट्रीय
  • हमारे लेख
  • हमारे वीडियो
search
menu

सदस्यता लें, समर्थन करें

image/svg+xml
  • सारे लेख
  • न्यूज़क्लिक लेख
  • सारे वीडियो
  • न्यूज़क्लिक वीडियो
  • राजनीति
  • अर्थव्यवस्था
  • विज्ञान
  • संस्कृति
  • भारत
  • अंतरराष्ट्रीय
  • अफ्रीका
  • लैटिन अमेरिका
  • फिलिस्तीन
  • नेपाल
  • पाकिस्तान
  • श्री लंका
  • अमेरिका
  • एशिया के बाकी
हमारे बारे में
हमसे संपर्क करें
सब्सक्राइब करें
हमारा अनुसरण करो Facebook - Newsclick Twitter - Newsclick RSS - Newsclick
close menu
स्वास्थ्य
अंतरराष्ट्रीय
कोविड-19: मृत मरीजों के शवों के परीक्षण के दौरान उनमें प्रतिरोधक क्षमता की भारी कमी देखने को मिली है
हाल के अध्ययनों में पाया गया है कि मृतक मरीजों की तिल्ली और लसिका ग्रंथि में भ्रूणीय केंद्रों की कमी थी।
संदीपन तालुकदार
28 Aug 2020
COVID-19: Deceased Patients’ Autopsies Show Remarkable Immune Failure
छवि सौजन्य: द वीक

कोविड-19 में स्पर्शोन्मुख और हल्के लक्षणों से लेकर गंभीर बीमारी के लक्षण वाले मरीजों और अंततः मौतों के साथ इसके लक्षणों के प्रकट होने की एक पूरी रेंज देखने को मिलती है। यहाँ पर नैदानिक (क्लिनिकल) की गंभीरता में यदि कोई भिन्नता भी नजर आती है तो यह इसका सम्बंध न तो किसी विशिष्ट आबादी से ही है, और ना ही इसकी कोई भौगोलिक सीमा ही तय है, बल्कि इस प्रकार का पैटर्न हर जगह देखने को मिल रहा है।

विभिन्न लक्षणों की एक पूरी श्रृंखला की वजह क्या हो सकती है, यह अभी भी एक रहस्य ही बना हुआ है। इस बारे में कुलमिलाकर दो संभावनाओं पर विचार कर सकते हैं, जिसमें पहली तो बेशक इम्यून प्रतिक्रिया को ही ले सकते हैं और दूसरी स्वयं इस मायावी वायरस को लेकर सोचा जा सकता है।

इसके साथ ही हमने इम्यून सिस्टम को भी रहस्यमयी तरीकों से प्रतिक्रिया करते देखा है। इम्यून प्रतिक्रिया में यदि भिन्नता देखने को मिलती है तो इस बीच इसके दो अध्ययनों में एक बेहद रोचक और अति- महत्वपूर्ण पहलू देखने में आया है। इसमें से एक तो अभी हाल ही में सेल में प्रकाशित हुई है और दूसरी करेंट मेडिकल साइंस में प्रकाशित हुई थी।

इन दोनों ही अध्ययनों को उन लोगों पर संचालित किया गया था, जिनकी मौत कोरोनावायरस के चलते हुई थी और दोनों में ही मृतकों के शवों का परीक्षण किया गया था। इन दोनों ही अध्ययनों में पाया गया कि मृतक रोगियों में इम्यून सिस्टम उल्लेखनीय तौर पर फेल कर गया था।

इन अध्ययनों में पाया गया है कि मृत रोगियों की तिल्ली और लसिका ग्रंथि में भ्रूणीय केंद्रों की कमी बनी हुई थी। भ्रूणीय केंद्र असल में माध्यमिक लिम्फोइड अंगों के अंदरूनी जगहें होती हैं जैसे कि तिल्ली और लसिका ग्रंथि। इसमें परिपक्व बी कोशिकाएं तेजी से फल-फूल सकती हैं, और अपना कायापलट कर सकती हैं ताकि वे किसी जीवाणु के खिलाफ लंबे समय तक लड़ने के काबिल बन सकें।

दूसरे शब्दों में कहें तो हम प्लीहा और लसिका ग्रंथि में भ्रूणीय केंद्रों की भूमिका को किसी स्कूली कक्षा के तौर पर कल्पना कर सकते हैं जिसमें प्रतिरोधक कोशिकाएँ परिपक्व होती रहती हैं और किसी जीवाणु के खिलाफ प्रतिरक्षा के लिए एंटीबॉडी प्रतिक्रिया को लंबा खींचने की कला को सीखती हैं। यह आम तौर पर किसी संक्रमण के प्रति प्रतिरोधक प्रतिक्रिया के परिणामस्वरूप होता है।

बी कोशिकाएं किसी विषाणु को ध्यान में रखते हुए विशिष्ट एंटीबॉडी का उत्पादन करती हैं। वह इस विषाणु को तत्काल नष्ट करने के साथ-साथ इसे लंबे समय तक याद रखने का भी काम करती है ताकि उस विषाणु द्वारा भविष्य में किसी भी आक्रमण को तुरंत कुचला जा सके।

इस मामले में भ्रूणीय केंद्र महत्वपूर्ण प्रतिरोधक इलाके साबित होते हैं जहां बी कोशिकाएं एंटीबॉडी-उत्पादक जीन के कायापलट की एक प्रक्रिया को जन्म देने का काम करती हैं जिसे दैहिक अतिउत्परिवर्तन की प्रक्रिया के तौर पर जाना जाता है। दैहिक अतिउत्परिवर्तन की यह प्रक्रिया एंटीबॉडी प्रोटीन को किसी हमलावर जीवाणु से लड़ने और लंबे समय तक याद रखने के लिए अधिक ताकत मुहैय्या कराने का काम करती है।

एमआईटी प्रतिरक्षाविज्ञानी शिव पिल्लई की अगुवाई में सेल में प्रस्तुत शोधपत्र में शोधकर्ताओं ने कोविड-19 से मरने वाले 11 लोगों के तिल्ली और लसिका ग्रंथियों का विश्लेषण किया है, और उनकी तुलना किसी अन्य वजहों से मरने वाले छह अन्य लोगों के साथ की है। जो लोग कोविड-19 की वजह से मौत के मुँह में समा गए थे, उनकी तिल्ली और छाती में लसिका ग्रंथियाँ भ्रूणीय केंद्र विकसित नहीं कर सके थे।

इसी प्रकार एक अन्य अध्ययन में जिसे करंट मेडिकल साइंस में प्रकाशित किया गया है, जिसे चीन के हुआज्होंग यूनिवर्सिटी ऑफ़ साइंस एंड टेक्नोलॉजी, वुहान ने भी समान रूप से पाया है।  इसमें छह रोगियों की कोरोनावायरस से हुई मौतों की जाँच में भ्रूणीय केंद्रों की कमी की बात पाई गई है। इस शोधपत्र के लेखक यांग जियांग पिंग के शब्दों में: "इन दो स्वतंत्र अध्ययनों में कोविड-19 रोगियों की मृतक आबादी में [एंटीबॉडी] प्रतिक्रियाओं की गहन कमी की बात स्थापित होती है।"

पिल्लई की टीम ने भी कोविड-19 से मरने वाले लोगों के शवों में अन्य सामान्य मौतों की तुलना में ट्यूमर नेक्रोसिस फैक्टर अल्फा (TNF-α) नामक साइटोकिन की उच्च मात्रा पाई है। विषम इम्यून प्रतिक्रियाओं के बीच एक पहलू जिसपर व्यापक स्तर पर शोध और चर्चा इस बीच चली है तो उसका सम्बंध साइटोकिन तूफान को लेकर रहा है।

साइटोकिन्स वे जैव-रासायनिक हैं जो बी कोशिकाओं और अन्य इम्यून कोशिकाओं को जीवाणुओं की प्रतिक्रिया के तौर पर संकेत देते हैं। जब साइटोकिन तूफान अपना आकार ग्रहण करता है, तो इसमें भारी मात्रा में विभिन्न प्रकार के साइटोकिन्स जारी होते हैं, जिनसे लाभ की जगह ज्यादातर नुकसान ही पहुँचता है। साइटोकिन तूफान की वजह से फेफड़ों में गंभीर सूजन हो सकती है और यह गंभीर क्लिनिकल स्थितियों को उत्पन्न कर सकता है।

पिल्लई की टीम ने इस तथ्य का भी पता लगाया है कि जिन मृत देहों का पोस्टमार्टम किया गया था, उनमें एक विशेष प्रकार के टी सेल की कमी देखने को मिली है, जो कि भ्रूणीय केंद्रों के निर्माण में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। अपने निष्कर्षों में उनका दावा है कि साइटोकिन TNFα के अत्यधिक स्राव से प्रक्रिया यह प्रक्रिया अवरुद्ध हो जाती है।

यांग का भी मानना है कि साइटोकिन तूफान का संबंध भ्रूणीय केंद्रों की कमी से हो सकता है, जिसे लेकर उनका कहना है: "[एंटीबॉडी] प्रतिक्रिया में गड़बड़ी का कारण संभवतः बढ़ी हुई सूजन के साथ हो सकता है, जिसके बारे में अभी और पड़ताल की आवश्यकता है।"

बहरहाल ये निष्कर्ष वैक्सीन निर्माताओं को भी मदद पहुँचाने वाले साबित हो सकते हैं। आखिरकार इन वैक्सीन को बनाने का मकसद भी तो रोगाणु के खिलाफ एक टिकाऊ प्रतिरोधक प्रतिक्रिया को हासिल करने का ही है। हालाँकि जहाँ तक साइटोकिन तूफान और भ्रूणीय केंद्रों की अनुपस्थिति से इसके संबंधों का प्रश्न है तो इसके बारे में और अधिक विस्तार में जाकर जाँच-पड़ताल की आवश्यकता है।

अंग्रेज़ी में प्रकाशित मूल आलेख को पढ़ने के लिए नीचे दिये गये लिंक पर क्लिक करें:

COVID-19: Deceased Patients’ Autopsies Show Remarkable Immune Failure

Germinal Centres
Lymph Nodes
Lack of Germinal Centres in COVID19 Deaths
Cytokine Storm

Related Stories


बाकी खबरें

  • राज वाल्मीकि
    कैसे ख़त्म हो दलित-आदिवासी छात्र-छात्राओं के साथ शिक्षण संस्थानों में होने वाला भेदभाव
    25 Mar 2022
    दलित-आदिवासी छात्र-छात्राओं के साथ होने वाले भेदभाव को ख़त्म करने के विषय पर नई दिल्ली में एक कॉन्फ्रेंस का आयोजन  किया गया।
  • इरिका शेल्बी
    पुतिन को ‘दुष्ट' ठहराने के पश्चिमी दुराग्रह से किसी का भला नहीं होगा
    25 Mar 2022
    रूस की ओर उंगलियों उठाने से कुछ नहीं बदलेगा–दुनिया में स्थायी शांति के लिए यह रवैया बदलने की ज़रूरत है। 
  • ज़ो एलेक्जेंड्रा
    गिउलिअनो ब्रुनेटी: “नाटो के ख़िलाफ़ हमारा संघर्ष साम्राज्यवादी ताकतों के ख़िलाफ़ संघर्ष है”
    25 Mar 2022
    आक्रामक सैन्य गठबंधन हमेशा से ही यूक्रेन में चल रहे संघर्ष का केंद्र रहा है, जिसके चलते कई लोगों ने गठबंधन पर सवालिया निशान लगाकर पूछना शुरू कर दिया है कि इसका हिस्सा बने रहने का क्या मतलब है। पोटेरे…
  • भाषा
    दिल्ली के तीन नगर निगमों का एकीकरण संबंधी विधेयक लोकसभा में पेश
    25 Mar 2022
    सरकार ने दिल्ली के तीन नगर निगमों का एकीकरण करने संबंधी दिल्ली नगर निगम (संशोधन) विधेयक, 2022 को शुक्रवार को विपक्षी दलों के सदस्यों के विरोध के बीच लोकसभा में पेश किया। विपक्षी दलों ने इसका विरोध…
  • न्यूज़क्लिक डेस्क
    गणेश शंकर विद्यार्थी : वह क़लम अब खो गया है… छिन गया, गिरवी पड़ा है
    25 Mar 2022
    गोदी मीडिया के दौर में गणेश शंकर विद्यार्थी को याद करना एक अलग अनुभव, एक अलग चुनौती और एक अलग दायित्व है। आज़ादी के मतवाले क्रांतिकारी भगत सिंह, राजगुरु और सुखदेव की शहादत के दो दिन बाद 25 मार्च,…
  • Load More
सब्सक्राइब करें
हमसे जुडे
हमारे बारे में
हमसे संपर्क करें

CC BY-NC-ND This work is licensed under a Creative Commons Attribution-NonCommercial-NoDerivatives 4.0 International License