NewsClick

NewsClick
  • English
  • राजनीति
  • अर्थव्यवस्था
  • विज्ञान
  • संस्कृति
  • भारत
  • अंतरराष्ट्रीय
  • हमारे लेख
  • हमारे वीडियो
search
menu

सदस्यता लें, समर्थन करें

image/svg+xml
  • सारे लेख
  • न्यूज़क्लिक लेख
  • सारे वीडियो
  • न्यूज़क्लिक वीडियो
  • राजनीति
  • अर्थव्यवस्था
  • विज्ञान
  • संस्कृति
  • भारत
  • अंतरराष्ट्रीय
  • अफ्रीका
  • लैटिन अमेरिका
  • फिलिस्तीन
  • नेपाल
  • पाकिस्तान
  • श्री लंका
  • अमेरिका
  • एशिया के बाकी
हमारे बारे में
हमसे संपर्क करें
सब्सक्राइब करें
हमारा अनुसरण करो Facebook - Newsclick Twitter - Newsclick RSS - Newsclick
close menu
भारत
राजनीति
विपक्ष के भारी विरोध के बीच नागरिकता संशोधन विधेयक लोकसभा में पेश
संसद में गृहमंत्री अमित शाह द्वारा पेश किए गए नागरिकता संशोधन विधेयक के खिलाफ संसद परिसर, शहर के अन्य हिस्सों और देश के अलग-अलग हिस्सों में विरोध प्रदर्शन हो रहे हैं।
न्यूज़क्लिक रिपोर्ट
09 Dec 2019
parliament

नई दिल्ली: लोकसभा में सोमवार को नागरिकता संशोधन विधेयक पेश किया गया जिसमें अफगानिस्तान, बांग्लादेश और पाकिस्तान से धार्मिक प्रताड़ना के कारण भारत आए हिन्दू, सिख, बौद्ध, जैन, पारसी और ईसाई समुदायों के लोगों को भारतीय नागरिकता के लिए आवेदन करने का पात्र बनाने का प्रावधान है।

निचले सदन में विपक्षी सदस्यों के भारी विरोध के बीच गृह मंत्री अमित शाह ने यह विधेयक पेश किया।

विधेयक के उद्देश्यों एवं कारणों में कहा गया है कि ऐसे अवैध प्रवासियों को जिन्होंने 31 दिसंबर 2014 की निर्णायक तारीख तक भारत में प्रवेश कर लिया है, उन्हें अपनी नागरिकता संबंधी विषयों के लिए एक विशेष शासन व्यवस्था की जरूरत है।  

विधेयक में हिन्दू, सिख, बौद्ध, जैन, पारसी और ईसाई समुदायों के प्रवासियों को भारतीय नागरिकता के लिये आवेदन करने से नहीं वंचित करने की बात कही गई है ।

इसमें कहा गया है कि यदि कोई ऐसा व्यक्ति नागरिकता प्रदान करने की सभी शर्तो को पूरा करता है तब अधिनियम के अधीन निर्धारित किये जाने वाला सक्षम प्राधिकारी, अधिनियम की धारा 5 या धारा 6 के अधीन ऐसे व्यक्तियों के आवेदन पर विचार करते समय उनके विरूद्ध अवैध प्रवासी के रूप में उनकी परिस्थिति या उनकी नागरिकता संबंधी विषय पर विचार नहीं करेगा।

भारतीय मूल के बहुत से व्यक्ति जिनमें अफगानिस्तान, बांग्लादेश, पाकिस्तान के उक्त अल्पसंख्यक समुदायों के व्यक्ति भी शामिल हैं, वे नागरिकता अधिनियम 1955 की धारा 5 के अधीन नागरिकता के लिए आवेदन करते हैं। किंतु यदि वे अपने भारतीय मूल का सबूत देने में असमर्थ है, तो उन्हें उक्त अधिनियम की धारा 6 के तहत ‘देशीयकरण’ द्वारा नागरिकता के लिये आवेदन करने को कहा जाता है। यह उनको बहुत से अवसरों एवं लाभों से वंचित करता है।

इसमें कहा गया कि इसलिए अधिनियम की तीसरी अनुसूची का संशोधन करने का प्रस्ताव किया गया है जिसमें इन देशों के उक्त समुदायों के आवेदकों को ‘देशीयकरण द्वारा नागरिकता के लिये पात्र बनाया जा सके’। इसके लिए ऐसे लोगों मौजूदा 11 वर्ष के स्थान पर पांच वर्षो के लिए अपनी निवास की अवधि को प्रमाणित करना होगा।

इसमें वर्तमान में भारत के कार्डधारक विदेशी नागरिक के कार्ड को रद्दे करने से पूर्व उन्हें सुनवाई का अवसर प्रदान करने का प्रस्ताव किया गया है।  विधेयक में संविधान की छठी अनुसूची के अंतर्गत आने वाले पूर्वोत्तर राज्यों की स्थानीय आबादी को प्रदान की गई संवैधानिक गारंटी की संरक्षा करने और बंगाल पूर्वी सीमांत विनियम 1973 की ‘आंतरिक रेखा’ प्रणाली के अंतर्गत आने वाले क्षेत्रों को प्रदान किये गए कानूनी संरक्षण को बरकरार रखने के मकसद से है।

इसमें कहा गया है कि पाकिस्तान, अफगानिस्तान, पाकिस्तान से सीमापार लोगों का आना निरंतर होता रहा है। वर्ष 1947 में भारत का विभाजन होने के समय विभिन्न धर्मो से संबंध रखने वाले अविभाजित भारत के लाखों नागरिक पाकिस्तान सहित इन क्षेत्रों में ठहरे हुए थे। पाकिस्तान, अफगानिस्तान और बांग्लादेश के संविधान में राज्य धर्म का उपबंध किया गया है।

इसके परिणामस्वरूप हिन्दू, सिख, बौद्ध, जैन, पारसी और ईसाई समुदायों के बहुत से व्यक्तियों ने इन देशों में धर्म के आधार पर अत्याचार का सामना किया। बहुत से ऐसे व्यक्ति भारत में शरण के लिये घुसे और ठहरे हुए हैं, भले ही उनके यात्रा दस्तावेज समाप्त हो गए हों।

ऐसे लोगों को अवैध प्रवासी समझा जाता है और वे अधिनियम की धारा 5 और 6 के अधीन भारतीय नागरिकता के लिये आवेदन करने के लिये अपात्र हैं।

अर्थव्यवस्था से जुड़ी नाकामी को छिपाने के लिए लाए हैं नागरिकता विधेयक: कांग्रेस

नागरिकता संशोधन विधेयक लोकसभा में पेश किए जाने के बाद कांग्रेस ने सोमवार को आरोप लगाया कि एनआरसी और अर्थव्यवस्था के मुद्दे पर विफलता को छिपाने के लिए यह विधेयक लाया गया है। पार्टी नेता गौरव गोगोई ने यह दावा भी किया कि इस विधेयक से देश कमजोर होगा।

उन्होंने संसद परिसर में संवाददाताओं से कहा, 'इस विधेयक को पेश किए जाने के दौरान ही हमने विधेयक का विरोध किया। हमारे साथ कई और दलों ने भी विरोध दर्ज कराया। राज्यसभा के विभिन्न दलों के नेताओं के साथ बातचीत हुई और वहां भी विधेयक का विरोध होगा।"

उन्होंने कहा, "जिन आदर्शो पर स्वतंत्र भारत बना यह विधेयक उनके खिलाफ है। संवैधानिक मूल्यों और निष्ठा बनाए रखने के कारण यह देश शक्तिशाली देश माना जाता है। यह विधेयक भारत को कमजोर करने वाला है।" गोगोई ने आरोप लगाया कि एनआरसी और अर्थव्यवस्था के मुद्दे पर विफलता को छिपाने के लिए यह विधेयक लाया गया है।

दिल्ली और देश के अन्य हिस्सों में विरोध प्रदर्शन

संसद में गृहमंत्री अमित शाह द्वारा पेश किए गए नागरिकता संशोधन विधेयक के खिलाफ संसद परिसर, शहर के अन्य हिस्सों और देश के अलग-अलग हिस्सों में विरोध प्रदर्शन हो रहे हैं।

इंडियन यूनियन मुस्लिम लीग (आईयूएमएल) सांसदों ने संसद भवन परिसर में महात्मा गांधी की प्रतिमा के सामने प्रदर्शन किया। वहीं ऑल इंडिया यूनाइटेड डेमोक्रेटिक फ्रंट (एआईयूडीएफ) ने जंतर मंतर पर प्रदर्शन किया। उन्होंने हाथों में तख्तियां पकड़ी हुई थीं जिनपर लिखा था कि यह विधेयक भारत के सिद्धांत के खिलाफ है।

कैब के बारे में सवाल करने पर लोकसभा में असम के धुबरी से एआईयूडीएफ के सदस्य बदरुद्दीन अजमल ने कहा, ‘हम इस विधेयक का विरोध करते हैं। यह संविधान और हिन्दू-मुस्लिम एकता के खिलाफ है।’

इस विधेयक के लोकसभा में पेश होने पर देश के विभिन्न हिस्सों में प्रदर्शन हो रहा है। असम में इस विधेयक का व्यापक स्तर पर विरोध हो रहा है क्योंकि इससे असम समझौता 1985 के अधिनियम निष्प्रभावी हो जाएंगे। इस अधिनियम के तहत 24 मार्च, 1971 के बाद भारत आए अवैध प्रवासियों को प्रत्यर्पित किया जाना है और इसके लिए कोई धार्मिक आधार नहीं है।

विभिन्न संगठनों की ओर से बुलाए गए बंद के बाद असम के गुवाहाटी में ज्यादातर दुकानें बंद रहीं। इसके अलावा असम के सभी बड़े शहरों में प्रदर्शन हो रहा है। इस विधेयक के खिलाफ अगरतला और पश्चिम बंगाल में भी प्रदर्शन हुआ।

(समाचार एजेंसी भाषा के इनपुट के साथ) 

Citizenship Amendment Bill
नागरिकता संशोधन विधेयक
opposition parties
Amit Shah
lok sabha
Afganistan
Pakistan
Bangladesh
Religion Politics
minorities

Related Stories

बॉलीवुड को हथियार की तरह इस्तेमाल कर रही है बीजेपी !

भारत में संसदीय लोकतंत्र का लगातार पतन

बच्चों को कौन बता रहा है दलित और सवर्ण में अंतर?

कांग्रेस का संकट लोगों से जुड़ाव का नुक़सान भर नहीं, संगठनात्मक भी है

जम्मू-कश्मीर के भीतर आरक्षित सीटों का एक संक्षिप्त इतिहास

क्या हिंदी को लेकर हठ देश की विविधता के विपरीत है ?

मोदी-शाह राज में तीन राज्यों की पुलिस आपस मे भिड़ी!

चुनावी वादे पूरे नहीं करने की नाकामी को छिपाने के लिए शाह सीएए का मुद्दा उठा रहे हैं: माकपा

यूपी में संघ-भाजपा की बदलती रणनीति : लोकतांत्रिक ताकतों की बढ़ती चुनौती

जुलूस, लाउडस्पीकर और बुलडोज़र: एक कवि का बयान


बाकी खबरें

  • Privatisation
    अजय कुमार
    महाशय आप गलत हैं! सुधार का मतलब केवल प्राइवेटाइजेशन नहीं होता!
    12 Dec 2021
    भारत के नीतिगत संसार में सुधार का नाम आने पर प्राइवेटाइजेशन को खड़ा कर दिया जाता है। इसका नतीजा यह हुआ है कि भारत की बीहड़ परेशानियां प्राइवेटाइजेशन की वजह से खड़ी हुई गरीबी की वजह से जस की तस बनी…
  • god and man
    शंभूनाथ शुक्ल
    ईश्वर और इंसान: एक नाना और नाती की बातचीत
    12 Dec 2021
    मैंने अगला प्रश्न किया, कि क्या तुम मानते हो कि दुनिया में कोई ईश्वर है? अब वह थोड़ा झिझका और बोला, ‘कोई है तो जो हम सब को बनाता है’। मैंने एक जिज्ञासा उठाई, कि मनुष्य का पैदा होना एक बायोलॉजिकल…
  • unemployment
    रूबी सरकार
    ‘काम नहीं तो वोट नहीं’ के नारों के साथ शिक्षित युवा रोज़गार गारंटी बिल की उठाई मांग
    12 Dec 2021
    युवाओं का कहना है कि पढ़ाई पूरी करने के 3 माह के भीतर सरकार को नौकरी मुहैया कराना चाहिए अथवा जब तक शिक्षित को नौकरी न मिले, तब तक सरकार की ओर से स्किल्ड लेबर की न्यूनतम मजदूरी के बराबर करीब साढ़े नौ…
  • hafte ki baat
    न्यूज़क्लिक टीम
    खुशहाली की बजाय बेहाली,संविधान से उलट राजसत्ता और यूपी का रिकार्ड
    11 Dec 2021
    वैश्विक असमानता रिपोर्ट के नये तथ्य और आंकड़े भारत की सामाजिक आर्थिक स्थिति की भयावह तस्वीर पेश करते हैं. आखिर आजादी के इन चौहत्तर वर्षो में हमारे समाज में इस कदर असमानता और दुर्दशा क्यों बढ़ी है?…
  • kisan andolan
    राजेंद्र शर्मा
    कटाक्ष: किसानो, कुछ तो रहम करो...लिहाज करो!
    11 Dec 2021
    मनाएं, किसान अपनी जीत का जश्न। बस, सरकार को हराने का शोर नहीं मचाएं। इस शोर से दुनिया भर में छप्पन इंच की छाती वालों की बदनामी होगी सो होगी, देश में मजदूरों-वजदूरों और न जाने किस-किस को कैसा गलत…
  • Load More
सब्सक्राइब करें
हमसे जुडे
हमारे बारे में
हमसे संपर्क करें

CC BY-NC-ND This work is licensed under a Creative Commons Attribution-NonCommercial-NoDerivatives 4.0 International License