NewsClick

NewsClick
  • English
  • राजनीति
  • अर्थव्यवस्था
  • विज्ञान
  • संस्कृति
  • भारत
  • अंतरराष्ट्रीय
  • हमारे लेख
  • हमारे वीडियो
search
menu

सदस्यता लें, समर्थन करें

image/svg+xml
  • सारे लेख
  • न्यूज़क्लिक लेख
  • सारे वीडियो
  • न्यूज़क्लिक वीडियो
  • राजनीति
  • अर्थव्यवस्था
  • विज्ञान
  • संस्कृति
  • भारत
  • अंतरराष्ट्रीय
  • अफ्रीका
  • लैटिन अमेरिका
  • फिलिस्तीन
  • नेपाल
  • पाकिस्तान
  • श्री लंका
  • अमेरिका
  • एशिया के बाकी
हमारे बारे में
हमसे संपर्क करें
सब्सक्राइब करें
हमारा अनुसरण करो Facebook - Newsclick Twitter - Newsclick RSS - Newsclick
close menu
कोविड-19
स्वास्थ्य
अंतरराष्ट्रीय
कोरोना संकट के बीच भूख से दम तोड़ते लोग
ऑक्सफैम द्वारा जारी नई रिपोर्ट द हंगर वायरस मल्टीप्लाई के अनुमान से ज्ञात होता है कि इस वक्त दुनिया भर में करीब 15.5 करोड़ लोग गंभीर खाद्य संकट का सामना कर रहे हैं जो कि पिछले वर्ष की तुलना में 2 करोड़ ज्यादा है, हर मिनट भूख के कारण औसतन 11 लोग दम तोड़ रहे हैं इसका कारण कोरोना महामारी और जलवायु परिवर्तन व बढ़ता पूंजीवाद भी माना जा रहा है। 
सतीश भारतीय
10 Oct 2021
World Hunger
'प्रतीकात्मक फ़ोटो'

भूख पर किसी अर्जमंद शख्स ने क्या खूब कहा है कि 'भूख से बड़ा कोई मजहब और रोटी से बड़ा ईश्वर हो तो बता देना मुझे भी धर्म बदलना है' कहने को तो एक छोटा सा शब्द है भूख जो दो अक्षरों पर अबलंबित है मगर भूख की आहट से किसी के पेट में चूहे कूदने लगते हैं तो किसी की नींद उड़ जाती है वैसे तो भूख अलग-अलग प्रकार की होती है किसी को सत्ता की भूख होती है तो किसी को पैसों की भूख होती है और किसी को मुख्तलिफ ख्वाहिशों की भूख होती है, मगर असली भूख तो रोटी की भूख होती है जिसके बिना इंसान जिंदा तो रह ही नहीं सकता है मगर यकीनन चैन से मर भी नहीं सकता है। 

इस धरती पर इंसान शारीरिक और मानसिक संताप तो सह सकता है, मगर भूख की प्रतीति होते ही वह सब कुछ बिसार कर खाने की ओर ध्यातव्य हो जाता है या कहीं भूख मिटाने के लिए रोटी ढूंढता है और तकरीबन विश्व की 50% अवाम खाने के लिए कमाती या कार्य करती है, इससे यकीनन यह कहा जा सकता है कि जिंदगी जीने के लिए खाना जरूरी है और खाने के लिए कमाना जरूरी है। 

आप को आगाह कर दें कि वह भूख ही है जिसके अस्बाब से एक पिता अपने बच्चों और परिवार से दूर रोटी की आश में गाँव से निकल कर शहर के पास आ जाता है, हमें मुफलिस लोग सड़क पर कबाड़ा बीनते दिखते हैं, तो कोई फूलों के गुच्छे लिए सड़क किनारे बैठा मिलता है, तो कोई दिन भर खून-पसीने से खेत सींचता रहता है यह सब महलों और मंहगी कारों व ऐश्वर्य के लिए नहीं अपितु दो वक्त की रोटी के लिए कमाते हैं तथा सच यह भी है कि किसी की सस्ती तो किसी की महंगी ही होती हैं रोटियां और किसी की मोटी तो किसी की पतली भी होतीं हैं रोटियां मगर पेट भरने के लिए काफी होती है रोटियां। 

अब जरा इस दौर की ओर रुख करते हैं, वैश्विक स्तर पर जब प्रारंभ में हमें कोरोना की आहट सुनाई दी तब दुनियाँ में उतनी हैरतअंगेज परेशानियां नहीं थीं मगर जब कोरोनावायरस ने समूचे विश्व से एक व्यापक जन समूह की सांसे छीन लीं तो दुनिया में सन्नाटा पसर गया। किसी के कोरोना काल में आजीविका चलाने के साधन चौपट हो गए तो कोई इस आलम में भूख से रोटी के लिए मोहताज हो गया तो वहीं किसी को कोरोना वायरस ही निगल गया।

ये भी पढ़ें: प्रधानमंत्री मोदी का डिजिटल हेल्थ मिशन क्या प्राइवेसी को खतरे में डाल सकता है? 

ऑक्सफैम द्वारा जारी नई रिपोर्ट द हंगर वायरस मल्टीप्लाई के अनुमान से ज्ञात होता है कि इस वक्त दुनिया भर में करीब 15.5 करोड़ लोग गंभीर खाद्य संकट का सामना कर रहे हैं जो कि पिछले वर्ष की तुलना में 2 करोड़ ज्यादा है, हर मिनट भूख के कारण औसतन 11 लोग दम तोड़ रहे हैं इसका कारण कोरोना महामारी और जलवायु परिवर्तन व बढ़ता पूंजीवाद भी माना जा रहा है। कोरोना महामारी शुरू होने के बाद यदि भुखमरी की दशा को लेकर बात की जाए तो 23 देशों में 10 करोड़ लोग खाद्य संकट का सामना करने को मजबूर हैं और भीषण अकाल से जून के मध्य तक के आंकड़ों में इथियोपिया, मेडागास्कर, दक्षिणी सूडान और यमन में दुर्भेद स्थिति का सामना करने वाले लोगों की संख्या 5 लाख से ज्यादा थी, जो पिछले वर्ष की तुलना में 500 फीसदी अधिक है अनुमान के मुताबिक कोरोना महामारी से गरीबी में 16 फीसदी का इजाफा हुआ है। 

आपको सचेत कर दें कि भारत की भी दशा अच्छी नहीं है और जी.एच.आई. की रिपोर्ट ने तो यह भी कह दिया था कि भारत में हर रोज 3000 बच्चे भूख से मर जाते हैं। 2020 के आंकड़ों को देखें तो इस वर्ष भारत में 19 करोड़ लोग कुपोषण के शिकार हुए थे, खाद्य पदार्थों जैस दाल की गिरावट 64 फीसदी दर्ज की गई तथा हरी सब्जियों में 73 फ़ीसदी की गिरावट आई थी और देश के 70 फीसदी लोगों ने यह माना है कि महामारी के पहले की तुलना में इनके भोजन में कमी आयी है, हैरान करने वाली बात यह भी है कि वैश्विक स्तर पर खाद्य कीमतों में 40 फीसदी का इजाफा हुआ है जो पिछले दशक की तुलना में सबसे ज्यादा है और 2 फरवरी 2021 को लोकसभा में पूछे गए एक सवाल के जवाब में खाद्य और सार्वजनिक वितरण मंत्रालय द्वारा यह भी बताया गया था कि भारतीय खाद्य निगम के गोदामों से वर्ष 2017 से 2020 के बीच 11,520 टन अनाज सड़ गया है जिसकी कुल कीमत 15 करोड़ बतायी गयी थी।

ये भी पढ़ें: भुखमरी से मुकाबला करने में हमारी नाकामयाबी की वजह क्या है?

हमारे देश में भुखमरी की दशा यह है कि कहीं कोई खाने के लिए भीख मांगता है तो कहीं कोई भूख की वजह से भीख में खाना मांगता है इनमें ज्यादातर बुजुर्ग, बच्चे व महिलाएं शामिल हैं लेकिन सत्य यह भी है कि हर मांगने वाला भिखारी नहीं होता है मगर फिर भी आपको वाकिफ़ करा दें साल 2018 में लोकसभा में पेश रिपोर्ट के मुताबिक भारत में उस वक्त 4 लाख 13 हजार भिखारी थे जिनमें तकरीबन 2 लाख 20 हजार से अधिक पुरुष व 1लाख 90 हजार से ज्यादा महिलाएँ शामिल थीं। 

एक अनुमान के मुताबिक हमारे देश में 5 वर्ष से कम उम्र के बच्चों की मृत्यु के मामले में सबसे ज्यादा 68 फीसदी कुपोषण का शिकार होते हैं कुपोषण की वजह से होने वाली बीमारी, मृत्यु और उत्पादकता में कमी से देश को प्रत्येक वर्ष 7400 करोड़ रुपये की क्षति होती है तो वहीं स्टेट ऑफ इंडियाज एनवायरनमेंट 2021 की रिपोर्ट हमें बता रही है कि कोविड-19 महामारी के कारण 0 से 14 वर्ष की आयु के 37.5 करोड़ भारतीय बच्चों पर लंबे वक्त तक बुरे प्रभाव का साया रहेगा। इन बच्चों को कुपोषण, अशिक्षा और अन्य कई समस्याओं का सामना करना पड़ सकता है। 

वहीं भारत में भुखमरी की बात करें तो ग्लोबर हंगर इंडेक्स 2020 में 107 देशों की सूची में भारत 94वें नंबर पर था और कुल 107 देशों में से केवल 13 देश भारत से निकृष्ट स्थिति में हैं। 

ये भी पढ़ें: बंपर उत्पादन के बावजूद भुखमरी- आज़ादी के 75 साल बाद भी त्रासदी जारी

मार्च 2021 में संयुक्त राष्ट्र द्वारा जारी ‘फूड वेस्ट इंडेक्स रिपोर्ट के मुताबिक भारत में प्रत्येक वर्ष तकरीबन 6.88 करोड़ टन भोजन बर्बाद कर दिया जाता है। यदि इसे प्रति व्यक्ति के हिसाब से देखें तो प्रत्येक व्यक्ति प्रत्येक वर्ष 50 किलोग्राम भोजन बर्बाद कर देता है और दशा यह है कि देश में 18.9 करोड़ लोगों को भोज्य पदार्थों की कमीं के कारण पर्याप्त पोषण नहीं मिल पाता है और आपको सचेत कर दें कि मॉनसून सत्र के दौरान देश में कुपोषित बच्चों को लेकर राज्यसभा में महिला एवं बाल विकास मंत्रालय की ओर से अहम सूचना दी गयी जिसमें बताया गया था कि 30 नवंबर, 2020 तक देश में 6 महीने से 6 वर्ष की उम्र के बीच के 9.3 लाख से ज्यादा 'गंभीर कुपोषित' बच्चों की पहचान की गई है इनमें सबसे निकृष्ट दशा उत्तर प्रदेश की है जहां 3, 98,359 बच्चें गंभीर रूप से कुपोषित हैं इसके पश्चात बिहार का स्थान है जहां, 2,79,427 बच्चें गंभीर कुपोषण का शिकार हैं। 

वहीं इस दौर में विचारणीय यह भी है कि पूजींवादी व्यवस्था की इस रंगीन दुनिया में समान संसाधनों की समानता तो पूर्व से ही कल्पनीय है मगर आदमियत के लिए बुनियादी जरूरतों की समानता भी संभव नहीं हो पा रही है जिसकी मूल वजहों में पूजींवादी व्यवस्था के वह लोग भी सम्मिलित हैं जिनके पेट पैसों से भरे है और वह सांप की भांति संम्पति पर कब्जा जमाये बैठे हैं तो वहीं मुफलिसी के आलम में जी रहे लोग दो वक्त की पेट भर रोटी को भी मोहताज हैं इसके अलावा अशिक्षा, भ्रष्टाचार और सरकारों की नाकामियां जैसे आदि कारण भी भूख से टूटतीं हुई सांसों के लिए जिम्मेदार है।

(सतीश भारतीय स्वतंत्र लेखक हैं, विचार निजी हैं) 

World Hunger
Hunger Crisis
COVID-19
Coronavirus
poverty
Global Hunger
Global Poverty
The Hunger Virus Multiply
oxfam report

Related Stories

कोरोना अपडेट: देश में कोरोना ने फिर पकड़ी रफ़्तार, 24 घंटों में 4,518 दर्ज़ किए गए 

कोरोना अपडेट: देश में 24 घंटों में 3,962 नए मामले, 26 लोगों की मौत

कोरोना अपडेट: देश में 84 दिन बाद 4 हज़ार से ज़्यादा नए मामले दर्ज 

कोरोना अपडेट: देश में कोरोना के मामलों में 35 फ़ीसदी की बढ़ोतरी, 24 घंटों में दर्ज हुए 3,712 मामले 

कोरोना अपडेट: देश में पिछले 24 घंटों में 2,745 नए मामले, 6 लोगों की मौत

कोरोना अपडेट: देश में नए मामलों में करीब 16 फ़ीसदी की गिरावट

कोरोना अपडेट: देश में 24 घंटों में कोरोना के 2,706 नए मामले, 25 लोगों की मौत

कोरोना अपडेट: देश में 24 घंटों में 2,685 नए मामले दर्ज

कोरोना अपडेट: देश में पिछले 24 घंटों में कोरोना के 2,710 नए मामले, 14 लोगों की मौत

कोरोना अपडेट: केरल, महाराष्ट्र और दिल्ली में फिर से बढ़ रहा कोरोना का ख़तरा


बाकी खबरें

  • bihar
    न्यूज़क्लिक रिपोर्ट
    बिहार में नवजात शिशुओं के लिए ख़तरनाक हुआ मां का दूध, शोध में पाया गया आर्सेनिक
    27 Feb 2022
    “बिहार के जिन 6 जिलों में मां के दूध में आर्सेनिक की मात्रा काफ़ी अधिक पाई गई है वहां की महिलाओं को इसके लिए अपने दूध की जांच कराना बहुत ज़रूरी है ताकि उनके बच्चे स्वस्थ और सुरक्षित रह सकें।”
  • inter faith
    काशिफ काकवी
    अंतर-धार्मिक विवाह: एक उच्च न्यायालय, दो एक जैसे मामले, लेकिन फ़ैसले अलग-अलग!
    27 Feb 2022
    एक मामले में जहाँ मध्य प्रदेश की अदालत पूरी तरह से एक अंतर-धार्मिक जोड़े के बचाव में आ गई, लेकिन इसी प्रकार के दूसरे मामले में, पूरा केस लड़की की भलाई पर एक पखवाड़े की रिपोर्ट के वास्ते लंबित है।
  • hafte ki baat
    न्यूज़क्लिक टीम
    यूपी में कौन आगे, कौन पीछे और यूक्रेन पर रूसी हमले का सच
    26 Feb 2022
    यूपी में मतदान के पांचवे चरण से ऐन पहले बडा सवाल है: चुनावी जंग में कौन आगे है और कौन पीछे? क्या होगा नतीजा? #HafteKiBaat के नये एपिसोड में यूक्रेन पर रूसी हमले का सच बता रहे हैं वरिष्ठ पत्रकार…
  • delhi violence
    मुकुंद झा
    दिल्ली दंगों के दो साल: इंसाफ़ के लिए भटकते पीड़ित, तारीख़ पर मिलती तारीख़
    26 Feb 2022
    जिनके घर के कमाने वाले इस दंगे में मारे गए वो आज भी अपने लिए इंसाफ ढूंढ रहे हैं। इसी के लिए आज यानी 26 फरवरी 2022 को दंगा पीड़ितों, नागरिक समाज के लोगों, सीपीआई(एम) की दिल्ली कमेटी के आह्वान पर बहुत…
  • ukraine
    एपी/भाषा
    रूस-यूक्रेन अपडेट: कीव में सड़कों पर घमासान,लोगों से शरण लेने की अपील
    26 Feb 2022
    रूसी सैनिकों ने शनिवार तड़के यूक्रेन की राजधानी कीव में प्रवेश किया और सड़कों पर घमासान शुरू हो गया है, जबकि स्थानीय अधिकारियों ने लोगों से छुप जाने की अपील की है। इस बीच यूक्रेन के राष्ट्रपति…
  • Load More
सब्सक्राइब करें
हमसे जुडे
हमारे बारे में
हमसे संपर्क करें

CC BY-NC-ND This work is licensed under a Creative Commons Attribution-NonCommercial-NoDerivatives 4.0 International License