NewsClick

NewsClick
  • English
  • राजनीति
  • अर्थव्यवस्था
  • विज्ञान
  • संस्कृति
  • भारत
  • अंतरराष्ट्रीय
  • हमारे लेख
  • हमारे वीडियो
search
menu

सदस्यता लें, समर्थन करें

image/svg+xml
  • सारे लेख
  • न्यूज़क्लिक लेख
  • सारे वीडियो
  • न्यूज़क्लिक वीडियो
  • राजनीति
  • अर्थव्यवस्था
  • विज्ञान
  • संस्कृति
  • भारत
  • अंतरराष्ट्रीय
  • अफ्रीका
  • लैटिन अमेरिका
  • फिलिस्तीन
  • नेपाल
  • पाकिस्तान
  • श्री लंका
  • अमेरिका
  • एशिया के बाकी
हमारे बारे में
हमसे संपर्क करें
सब्सक्राइब करें
हमारा अनुसरण करो Facebook - Newsclick Twitter - Newsclick RSS - Newsclick
close menu
स्वास्थ्य
भारत
राजनीति
हिमाचल: मज़दूरों को राशन न मिलने के विरोध में माकपा विधायक का धरना
हिमाचल में भी प्रवासी मज़दूर राशन न मिलने से परेशान हैं। इसी को लेकर माकपा विधायक राकेश सिंघा सोमवार 20 अप्रैल को एसडीएम शिमला शहरी के कार्यालय के बाहर धरने पर बैठ गए।
न्यूज़क्लिक रिपोर्ट
21 Apr 2020
हिमाचल

कोरोना लॉकडाउन के चलते प्रवासी दिहाड़ी मज़दूर अलग अलग राज्यों में फंसे हैं, जिनके सामने आज भोजन का संकट है। लगभग हर राज्य से इस तरह की ख़बरे आ रही हैं। हिमाचल में भी प्रवासी मज़दूर राशन न मिलने से परेशान हैं। मजदूरों को पर्याप्त राशन उपलब्ध करवाने की मांग को लेकर माकपा विधायक राकेश सिंघा सोमवार 20 अप्रैल से एसडीएम शिमला शहरी नीरज चांदला के कार्यालय के बाहर धरने पर बैठे है। सोमवार रात भी उनका धरना जारी रहा और उन्होंने पूरी रात एसडीएम ऑफिस के बहार सीढ़ियों पर ही बिताई। आज मंगलवार को भी उनका धरना जारी है।

सोमवार को धरने के दौरान सिंघा ने कहा कि प्रशासन के पास शहर में केवल 1200 मजदूरों की ही सूची है। जबकि शहर में जम्मू-कश्मीर, पंजाब, ओडिशा, राजस्थान और बिहार से आए लोग मजदूरी करते हैं। इनकी संख्या करीब 20 से 25 हज़ार है। उन्होंने बताया कि मज़दूरों को पर्याप्त खाना नहीं मिल रहा है और जब तक सभी मज़दूरों को प्रशासन पर्याप्त राशन उपलब्ध नहीं करवाता, तब तक  उनका संघर्ष जारी रहेगा।

himachal.jpg

मंगलवार को भी उन्होंने साफ किया की प्रदेश के मज़दूरों को राशन नहीं दिया जा रहा है, उनके पास लगातर फोन आ रहे हैं। कुछ कुछ जगह एनजीओ मदद कर रहे हैं लेकिन उनकी भी सीमा है। सरकार किसी को भी राशन नहीं दे रही। यही असुरक्षा का कारण है जो मज़दूर वापस जाना चाहता है। जबतक प्रशासन मज़दूरों को राशन, उनके भोजन की व्यवस्था नहीं करता तबतक वो धरने पे बैठे रहेंगे।

सिंघा ने जिला प्रशासन के अधिकारियों के सामने इन मज़दूरों की समस्याएं रखी और इसपर अधिकारी अपनी सफाई देते भी दिखे। इस दौरान सिंघा और एक अधिकारी के बीच गर्मागर्मी भी हुई लेकिन एएसडीएम ने बहस करने वाले अधकारी को वहां से जाने को कहा और सिंघा से मज़दूरों की सूची उन्हें देने को कही और कहा वो जाँच करकर इन मज़दूरों तक राशन पहुंचा देंगी।

हालाँकि वहां मौजूद अधिकारी कह रहे थे कि हम एनजीओ के साथ वहां राशन देने गए तो जामा मस्जिद के लोगों ने लेने से मना कर दिया। इस पर विधायक ने कहा आप झूठ बोल रही हैं, मुझे परसों वहां से राशन के लिए फोन आया और आप कह रही हैं कि वो मना कर रहे हैं। इसके बाद विधायक ने मज़दूरों से फोन कर कन्फर्म किया की राशन दिया गया था या नहीं। फोन पर मज़दूर ने कहा उन्हें कोई राशन नहीं दिया गया। इसके बाद प्रशासन ने यह भी बताया कि 1200 मजदूरों को राशन दिया जा रहा है। इस पर विधायक ने गुस्से में पूछा कि बताओ की शहर में घर बनाने से लेकर गैस तक मजदूर की पीठ पर लाई जाती है उनकी संख्या सिर्फ 1200 है। इस पर अधिकारीयों ने कहा उन्होंने लिस्ट सिर्फ़ इतनी ही बनाई हैं। विधायक ने गुस्से में कहा इस शहर को 25 हजार मज़दूर चलाते हैं। इनके खाने की व्यवस्था प्रशासन को करनी चाहिए। जो नहीं की जा रही है।

सिंघा ने कहा 'सरकार को सभी मज़दूरों को राशन देना चाहिए लेकिन उसने मज़दूरों को एनजीओ के भरोसे छोड़ दिया है, उसमे भी भेदभाव किया जा रहा है।'  उन्होंने आरोप लगाया कि ' राशन बांटने में भाषा और मज़हब देखा जा रहा है।'

पूरा मामला क्या है?

शिमला मिडिल बाज़ार के पास स्थित जामा मस्जिद में करीब 129 कश्मीरी मज़दूर फंसे हुए हैं। इनका आरोप है की लॉकडाउन-कर्फ़्यू के एक महीने हो जाने के बाद भी प्रशासन ने उनकी सुध नहीं ली। इस दौर में उनका काम धंधा भी बंद पड़ा हुआ है, जिससे उनके सामने रोटी का भी गंभीर संकट हैं। मज़दूरों का यह भी आरोप है कि प्रशासन ने मदद के बजाय उन्हें पुलिस द्वार धमकाया और सोशल डिस्टेंसिंग का पालन करने के लिए कहा लेकिन राशन के लिए पूछा तक नहीं। इसके बाद इन मज़दूरों ने मार्क्सवादी कम्युनिस्ट पार्टी (माकपा) के विधायक से संपर्क किया जिसके बाद वो इनसे मिलने पहुंचे और उसके बाद सिंघा ने प्रशासन को चेतावनी दी थी कि अगर सोमवार तक इन्हें राशन नहीं दिया गया तो वो धरने पर बैठ जाएंगे। जब कल सोमवार तक राशन नहीं पहुंचा तो सिंघा धरने पे बैठ गए।

धरने पर बैठे माकपा विधयाक से मिलने के लिए नेता प्रतिपक्ष मुकेश अग्निहोत्री भी पहुंचे और प्रशासन के रैवये पर गंभीर सवाल खड़ा करते हुए, सरकार से कहा कि सभी को राशन पहुंचाए।

मंगलवार सुबह शिमला के पूर्व मेयर और माकपा नेता संजय चौहान भी विधायक से मिलने पहुंचे। उन्होंने कहा कि शहर में मज़दूर व ज़रूरतमंद हैं, जिनको राशन की ज़रूरत है। लेकिन प्रशासन इनको राशन देने में विफल रहा है। पूरे शहर में आज मज़दूर भोजन के लिए दर दर भटक रहे हैं, सरकार को चाहिए की सभी मज़दूरों की लिस्ट बनकर उनतक भोजन पहुँचाया जाए। इन सभी को एक-एक माह का राशन देने के साथ ही इनमें से प्रत्येक को 7500 रुपये की आर्थिक मदद दी जानी चाहिए।

सिंघा अकेले विधायक हैं जिन्होंने कोरोना वायरस की इस जंग में अपने 11 महीने का वेतन दिया है।

हिमाचल प्रदेश में राकेश सिंघा माकपा के अकेले विधायक है और अभी ठियोग विधानसभा क्षेत्र का प्रतिनिधित्व करते हैं। उन्होंने कोरोना वायरस से बचाव में खर्च करने के लिए अपना फरवरी से दिसंबर तक का वेतन मुख्यमंत्री राहत कोष में दे दिया। उन्होंने मुख्यमंत्री जयराम ठाकुर को मुख्यमंत्री राहत कोष के लिए अप्रैल से दिसंबर तक के आगे की तारीख़ के (पोस्ट डेटेड) चेक दे दिए हैं। इससे पहले वे फरवरी और मार्च का वेतन सीएम राहत कोष में डाल चुके हैं। सिंघा ने प्रदेश व देश के नेताओं के लिए एक नज़ीर पेश की है जिसकी सभी ने तारीफ़ की है।

Himachal Pradesh
Lockdown
migrants
Migrant workers
CPI
Ration Distribution scam

Related Stories

उत्तराखंड: मानसिक सेहत गंभीर मामला लेकिन इलाज के लिए जाएं कहां?

कोरोना अपडेट: देश के 14 राज्यों में ओमिक्रॉन फैला, अब तक 220 लोग संक्रमित

ओमिक्रॉन से नहीं, पूंजी के लालच से है दुनिया को ख़तरा

ग्राउंड रिपोर्ट : बेपरवाह PM-CM, भारतीय नागरिकों को भूख से मरने के लिए बेसहारा छोड़ा

कोविड : लॉकडाउन के बाद की दुनिया!

भारत का स्वास्थ्य ढांचा वंचित नागरिकों की मदद करने में असमर्थ क्यों है?

कोविड-19: सरकारों ने महामारी के एक साल बाद भी कुछ नहीं सीखा

कोरोना संकट: अलग-अलग राज्यों में आशिंक तौर पर फिर लौट रहा है लॉकडाउन

क्या रोज़ी-रोटी के संकट से बढ़ गये हैं बिहार में एनीमिया और कुपोषण के मामले?

Covid-19 : मुश्किल दौर में मानसिक तनाव भी अब बन चुका है महामारी


बाकी खबरें

  • Gauri Lankesh pansare
    डॉ मेघा पानसरे
    वे दाभोलकर, पानसरे, कलबुर्गी या गौरी लंकेश को ख़ामोश नहीं कर सकते
    17 Feb 2022
    दाभोलकर, पानसरे, कलबुर्गी और गौरी को चाहे गोलियों से मार दिया गया हो, मगर उनके शब्द और उनके विचारों को कभी ख़ामोश नहीं किया जा सकता।
  • union budget
    टिकेंदर सिंह पंवार
    5,000 कस्बों और शहरों की समस्याओं का समाधान करने में केंद्रीय बजट फेल
    17 Feb 2022
    केंद्र सरकार लोगों को राहत देने की बजाय शहरीकरण के पिछले मॉडल को ही जारी रखना चाहती है।
  • covid
    न्यूज़क्लिक टीम
    कोरोना अपडेट: देश में आज फिर 30 हज़ार से ज़्यादा नए मामले, 541 मरीज़ों की मौत
    17 Feb 2022
    देश में 24 घंटों में कोरोना के 30,757 नए मामले सामने आए है | देश में कोरोना संक्रमण के मामलों की संख्या बढ़कर 4 करोड़ 27 लाख 54 हज़ार 315 हो गयी है।
  • yogi
    एम.ओबैद
    यूपी चुनावः बिजली बिल माफ़ करने की घोषणा करने वाली BJP का, 5 साल का रिपोर्ट कार्ड कुछ और ही कहता है
    17 Feb 2022
    "पूरे देश में सबसे ज्यादा महंगी बिजली उत्तर प्रदेश की है। पिछले महीने मुख्यमंत्री (योगी आदित्यनाथ) ने 50 प्रतिशत बिजली बिल कम करने का वादा किया था लेकिन अभी तक कुछ नहीं किया। ये बीजेपी के चुनावी वादे…
  • punjab
    रवि कौशल
    पंजाब चुनाव : पुलवामा के बाद भारत-पाक व्यापार के ठप हो जाने के संकट से जूझ रहे सीमावर्ती शहर  
    17 Feb 2022
    स्थानीय लोगों का कहना है कि पाकिस्तान के साथ व्यापार के ठप पड़ जाने से अमृतसर, गुरदासपुर और तरनतारन जैसे उन शहरों में बड़े पैमाने पर बेरोज़गारी पैदा हो गयी है, जहां पहले हज़ारों कामगार,बतौर ट्रक…
  • Load More
सब्सक्राइब करें
हमसे जुडे
हमारे बारे में
हमसे संपर्क करें

CC BY-NC-ND This work is licensed under a Creative Commons Attribution-NonCommercial-NoDerivatives 4.0 International License