NewsClick

NewsClick
  • English
  • राजनीति
  • अर्थव्यवस्था
  • विज्ञान
  • संस्कृति
  • भारत
  • अंतरराष्ट्रीय
  • हमारे लेख
  • हमारे वीडियो
search
menu

सदस्यता लें, समर्थन करें

image/svg+xml
  • सारे लेख
  • न्यूज़क्लिक लेख
  • सारे वीडियो
  • न्यूज़क्लिक वीडियो
  • राजनीति
  • अर्थव्यवस्था
  • विज्ञान
  • संस्कृति
  • भारत
  • अंतरराष्ट्रीय
  • अफ्रीका
  • लैटिन अमेरिका
  • फिलिस्तीन
  • नेपाल
  • पाकिस्तान
  • श्री लंका
  • अमेरिका
  • एशिया के बाकी
हमारे बारे में
हमसे संपर्क करें
सब्सक्राइब करें
हमारा अनुसरण करो Facebook - Newsclick Twitter - Newsclick RSS - Newsclick
close menu
भारत
राजनीति
बात बोलेगी: अच्छा है विनोद दुआ को दी राहत, पर एक नज़र इधर भी मीलॉर्ड
सुप्रीम कोर्ट जब वरिष्ठ पत्रकार विनोद दुआ के राजद्रोह के मामले को रद्द करते हुए फ़ैसला सुना रहा था, तब मुझे केरल के पत्रकार कप्पन सिद्दीक की याद आ रही थी, याद आ रही थी मणिपुर के पत्रकार किशोर चंद वांगखेम की...
भाषा सिंह
04 Jun 2021

सुप्रीम कोर्ट के फैसले से पत्रकार बिरादरी में थोड़ी चैन की सांस आई। सबको लगा, चलो देश की सर्वोच्च अदालत को याद तो है कि उसने 1962 में केदार नाथ सिंह मामले में साफ-साफ कहा था कि सरकार के खिलाफ बोलना, विचार व्यक्त करना राजद्रोह नहीं है। सरकार की आलोचना, चाहे वह कितनी ही तीखी क्यों न हो, राजद्रोह नहीं है।

सुप्रीम कोर्ट जब यह फैसला वरिष्ठ पत्रकार विनोद दुआ के खिलाफ हिमाचल प्रदेश की राजधानी शिमला में दर्ज राजद्रोह के मामले को रद्द करते हुए सुना रहा था, तब मुझे केरल के पत्रकार कप्पन सिद्दीक की वह तस्वीर याद आ रही थी, जिसमें वे भीषण दयनीय स्थिति में अस्पताल में भर्ती थे, उनके हाथ तक बांधे हुए थे, मुझे याद आ रहा था मणिपुर के पत्रकार किशोर चंद वांगखेम का वह सोशल मीडिया पोस्ट, जो उन पर राजद्रोह से लेकर खौफनाक धाराओं में केस लगाने का सबब बना।

अब सोचिए, देश की सर्वोच्च अदालत तक में गुहार लगाने के बावजूद केरल के पत्रकार कप्पन सिद्दीक अक्टूबर 2020 से उत्तर प्रदेश की जेल में यातना झेल रहे हैं। उनके ऊपर उत्तर प्रदेश की योगी सरकार ने यूएपीए जैसे खौफनाक कानून के मामला ठोंका और कहा कि वह हाथरस जाकर सांप्रदायिक तनाव पैदा करने की कोशिश करने वाले थे। अब चूंकि मामला अदालत में है, लिहाजा ज्यादा न कहते हुए, यह बात करने वाली है कि कप्पन बतौर पत्रकार 17 सितंबर को उत्तर प्रदेश के हाथरस में हुई दलित लड़की के साथ बर्बर सामूहिक बलात्कार की घटना के बाद हुई मौत पर खबर करने जा रहे थे। ठीक वैसे ही जैसे हम सब पत्रकार वहां गये। वह, हाथरस पहुंचे तक नहीं, ग्राउंड से रिपोर्ट भी नहीं की, लेकिन उन्हें हाथरस साजिश के मामले में गिरफ्तार कर लिया गया। हाथरस के बर्बर कांड ने भीषण आक्रोश पैदा किया था, विभिन्न समुदायों में खासतौर पर वाल्मीकि समाज में। पीड़िता इसी समुदाय से थीं। अब देखिए, सारा मामला किस शातिर ढंग से योगी और योगी प्रशासन ने एक साजिश में तब्दील कर दिया औऱ इस कांड में इंसाफ के लिए आवाज उठाने वालों को साजिशकर्ता बताने की साजिश शुरू कर दी। इसके शिकार पत्रकार कप्पन हुए और आज तक जेल में हैं। उनकी पत्नी बार-बार गुहार लगाती रहीं कि जिन संगठनों का हवाला देकर उनके पति को जेल में डाला गया है, वे संगठन भी प्रतिबंधित नहीं है। कप्पन को कोरोना हुआ, तबीयत खराब हुई, अस्पताल में हाथ-पांव बांध तक लेटाया गया, पेशाब करने के लिए एक बोतल लगा दी गई...और भी न जाने क्या-क्या, लेकिन कुछ नहीं हुआ। कौन है सुनने वाला यहां मीलॉर्ड!

इसी तरह से मणिपुर के पत्रकार किशोर चंद वांगखेम की गिरफ्तारी को देखा जा सकता है। उन्होंने एक सोशल मीडिया पोस्ट में भाजपा द्वारा राज्य में कोरोना के इलाज के लिए चलाए जा रहे गाय के गोबर और गोमूत्र अभियान पर सवाल उठाया, अपने अंदाज़ में व्यंग्य किया, भाजपा नेता की कोरोना मौत से इसे जोड़ा---अब यह राजद्रोह हो गया। इस तरह के अनगिनत मामले पसरे हुए हैं पूरे देश में। उत्तर प्रदेश तो जबर्दस्त प्रयोग स्थली बना हुआ है अभिव्यक्ति की आजादी को कुचलने का। पत्रकार अगर सरकारी नीतियों की खामियों को उजागर करते हैं, घोटालों का पर्दाफाश करते हैं तो उनके खिलाफ मामले दर्ज होते हैं। अगर पत्रकार यह दिखाते हैं कि स्कूलों में बच्चों को रोटी और नमक दिया जा रहा है, स्कूली बच्चों से टॉयलेट साफ करवाया जा रहा है, या भूख से भारतीय नागरिक घास खा रहे हैं—तो उन पर राजद्रोह का मुकदमा ठोंका जाना तो स्वाभाविक काम बन गया है।

ऐसे में अगर अब सुप्रीम कोर्ट को यह लगा है कि सरकार की आलोचना, तीखी आलोचना भर राजद्रोह का कारण नहीं हो सकती और यह बात तमाम पत्रकारों-नागरिकों पर लागू हो जाए, तो बहुत से पत्रकार-एक्टिविस्ट जेल से बाहर आ जाएं और अनगिनत मामले-केस खारिज हो जाए। क्या ये संभव है कि इस फैसले की बयार देश के कोने-कोने तक पहुंचे—कश्मीर से लेकर कन्याकुमारी तक, राजस्थान से लेकर उत्तर पूर्व तक—क्योंकि यहां निर्भीक और सच्चे पत्रकार को बर्दाश्त नहीं किया जाता। और सबसे बड़े दुख की बात है कि स्टार पत्रकार न हो, बड़ा पत्रकार न हो, तो उन पर सरकारी जुल्म खबर तक नहीं बनता। अदालतें भी खेमा बदलकर सत्ता के पास जाने वाले नेताओं, विधायकों ( आंध्र प्रदेश के मुख्यमंत्री जगन मोहन रेड्डी से बगावत करने वाले, भाजपा के साथ पींगे बढ़ा रहे, विधायक रघुराम कृष्णन राजू का मामला भी देखा जा सकता है, जिन्हें सुप्रीम कोर्ट ने आनन-फानन में जमानत दी) को राहत देने के लिए तुरंत सक्रिय हो जाती हैं, लेकिन 84 साल के स्टेन स्वामी को राहत देने-दिलाने के लिए कोई सक्रियता नहीं दिखाई देती। इस ओर भी नज़र डालिए, मीलॉर्ड, देश देख रहा है!

(भाषा सिंह वरिष्ठ पत्रकार हैं। विचार व्यक्तिगत हैं।)

Journalist Vinod Dua
Supreme Court
sedition CASE
Press freedom
journalism
journalist

Related Stories

ज्ञानवापी मस्जिद के ख़िलाफ़ दाख़िल सभी याचिकाएं एक दूसरे की कॉपी-पेस्ट!

डिजीपब पत्रकार और फ़ैक्ट चेकर ज़ुबैर के साथ आया, यूपी पुलिस की FIR की निंदा

आर्य समाज द्वारा जारी विवाह प्रमाणपत्र क़ानूनी मान्य नहीं: सुप्रीम कोर्ट

समलैंगिक साथ रहने के लिए 'आज़ाद’, केरल हाई कोर्ट का फैसला एक मिसाल

मायके और ससुराल दोनों घरों में महिलाओं को रहने का पूरा अधिकार

जब "आतंक" पर क्लीनचिट, तो उमर खालिद जेल में क्यों ?

विचार: सांप्रदायिकता से संघर्ष को स्थगित रखना घातक

सुप्रीम कोर्ट का ऐतिहासिक आदेश : सेक्स वर्कर्स भी सम्मान की हकदार, सेक्स वर्क भी एक पेशा

तेलंगाना एनकाउंटर की गुत्थी तो सुलझ गई लेकिन अब दोषियों पर कार्रवाई कब होगी?

मलियाना कांडः 72 मौतें, क्रूर व्यवस्था से न्याय की आस हारते 35 साल


बाकी खबरें

  • Kapur Commission Report and Savarkar's Role in Gandhi’s Assassination
    न्यूज़क्लिक टीम
    कपूर कमीशन रिपोर्ट और गाँधी की हत्या में सावरकर की भूमिका
    14 Nov 2021
    हाल ही में AIMIM नेता असदुद्दीन ओवैसी ने कहा कि सावरकर दरअसल गाँधी की हत्या का ज़िम्मेदार थाI इससे गाँधी की हत्या से जुड़े सवाल एक बार फिर बहस के केंद्र में आ गएI 'इतिहास के पन्ने' के इस अंक में…
  • elections
    न्यूज़क्लिक टीम
    पांच राज्यों में होने वाले विधानसभा चुनाव पर न्यूज़क्लिक का नया कार्यक्रम- चुनाव चक्र
    14 Nov 2021
    आज देश अहम मोड़ पर खड़ा है। इस मोड़ से आगे का रास्ता देश में अगले साल 2022 की शुरुआत में पांच राज्यों में होने जा रहे विधानसभा चुनावों से तय होगा। तय होगा कि 2024 के आम चुनाव में देश क्या फ़ैसला लेगा…
  • न्यूज़क्लिक डेस्क
    इतवार की कविता : जवाहरलाल नेहरू जन्मदिन विशेष
    14 Nov 2021
    भारत के पहले प्रधानमंत्री जवाहरलाल नेहरू के जन्मदिन और बाल दिवस के मौक़े पर पढ़िये उन पर लिखी 2 नज़्में... 1. जवाहरलाल नेहरू: अबरार किरतपुरी
  • malnutrition
    राज वाल्मीकि
    कुपोषित बच्चों के समक्ष स्वास्थ्य और शिक्षा की चुनौतियां
    14 Nov 2021
    सरकारी आंकड़ों के मुताबिक नवम्बर 2020 तक देश में 9.28 लाख से ज्यादा बच्चे गंभीर रूप से कुपोषित थे। इनमें सबसे ज्यादा उत्तर प्रदेश में और फिर बिहार में हैं।
  • साभार : सुमन सिंह के फेसबुक वाल से
    डॉ. मंजु प्रसाद
    पर्यावरण, समाज और परिवार: रंग और आकार से रचती महिला कलाकार
    14 Nov 2021
    ऐसा कलाकार जब प्रकृति को ठोस मेटलिक माध्यम द्वारा कठोर नुकीले घास के रूप में निर्मित करती हैं, यह अत्यंत गंभीर विषय है जो केवल पर्यावरण को ही नहीं वर्तमान मनुष्य जीवन को और उसके संकट को भी दर्शाता…
  • Load More
सब्सक्राइब करें
हमसे जुडे
हमारे बारे में
हमसे संपर्क करें

CC BY-NC-ND This work is licensed under a Creative Commons Attribution-NonCommercial-NoDerivatives 4.0 International License