NewsClick

NewsClick
  • English
  • राजनीति
  • अर्थव्यवस्था
  • विज्ञान
  • संस्कृति
  • भारत
  • अंतरराष्ट्रीय
  • हमारे लेख
  • हमारे वीडियो
search
menu

सदस्यता लें, समर्थन करें

image/svg+xml
  • सारे लेख
  • न्यूज़क्लिक लेख
  • सारे वीडियो
  • न्यूज़क्लिक वीडियो
  • राजनीति
  • अर्थव्यवस्था
  • विज्ञान
  • संस्कृति
  • भारत
  • अंतरराष्ट्रीय
  • अफ्रीका
  • लैटिन अमेरिका
  • फिलिस्तीन
  • नेपाल
  • पाकिस्तान
  • श्री लंका
  • अमेरिका
  • एशिया के बाकी
हमारे बारे में
हमसे संपर्क करें
सब्सक्राइब करें
हमारा अनुसरण करो Facebook - Newsclick Twitter - Newsclick RSS - Newsclick
close menu
SC ST OBC
आंदोलन
भारत
राजनीति
दिल्ली: दलित शोषण मुक्ति मंच का दलितों पर बढ़ते अत्याचार और नौदीप कौर की रिहाई की मांग को लेकर प्रदर्शन
प्रदर्शन में शामिल नेताओं और कार्यकर्ताओ ने नौदीप कौर के उत्पीड़न की निंदा की। डीएसएमएम ने उन्हें तुरंत रिहा करने की मांग की
न्यूज़क्लिक रिपोर्ट
20 Feb 2021
दिल्ली: दलित शोषण मुक्ति मंच का दलितों पर बढ़ते अत्याचार और नौदीप कौर की रिहाई की मांग को लेकर प्रदर्शन

देश में लगातार दलितों पर बढ़ते अत्याचार और दलित मज़दूर नेता नौदीप कौर की रिहाई की मांग को लेकर दिल्ली के जंतर मंतर पर प्रदर्शन किया गया। इस विरोध प्रदर्शन का आह्वान दलित शोषित मुक्ति मंच (डीएसएमएम) की दिल्ली इकाई द्वारा किया गया था। प्रदर्शन में शामिल नेताओं और कार्यकर्ताओं ने नौदीप कौर के उत्पीड़न की निंदा की। डीएसएमएम ने उन्हें तुरंत रिहा करने की मांग की और हिरासत में लेने वाले और उसके साथ मारपीट करने वाले पुलिस कर्मियों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की मांग।

नौदीप का पूरा मामला क्या है?

मजदूर अधिकार संगठन (एमएएस) की नेता एवं दलित मजदूर कार्यकर्ता नौदीप कौर को 12 जनवरी के दिन सिंघु बॉर्डर के पास चल रहे प्रदर्शन स्थल से गिरफ्तार कर लिया गया था। तब से अभी तक इस ट्रेड यूनियन नेता की दो मामलों में जमानत भी हो चुकी है। इसके बाद भी वो जेल में है। आपको बता दें कि उनकी बहन और परिवार के बाकी लोगों की ओर से हिरासत के दौरान नौदीप के साथ पुलिसिया बर्बरता और यौन उत्पीड़न जैसे गंभीर आरोप लगाए गए है ।

नौदीप आईपीसी की धारा 307 (हत्या करने के प्रयास) सहित कई आरोप लगाए गए हैं। उनके खिलाफ कुल तीन एफआईआर दर्ज की गई हैं, जिनमें उनपर घातक हथियार के साथ दंगा करने, गैरक़ानूनी जमावड़े, आपराधिक धमकी, सरकारी कर्मचारी पर हमला करने, जबरन वसूली, अवैध अतिक्रमण, छिनैती और आपराधिक बल प्रयोग करने जैसे आरोप लगाए गए हैं।

  15 फरवरी को नौदीप कौर को उनके खिलाफ दर्ज एक मामले में जमानत दे दी गई। उनके वकील ने यह जानकारी दी थी। हालांकि, 23 वर्षीय कार्यकर्ता को फिलहाल करनाल जेल में रहना होगा, क्योंकि 12 जनवरी को दर्ज एक अन्य मामले में उनकी जमानत याचिका एक सत्र अदालत द्वारा खारिज कर दी गई है।

कौर पर तीन मामले चल रहे हैं जिनमें हत्या का प्रयास और जबरन वसूली के प्रयास के आरोप शामिल हैं। वह मजदूर अधिकार संगठन की सदस्य है और पंजाब के मुक्तसर जिले के गियादढ़ गांव की निवासी है।

हरियाणा पुलिस ने पहले कहा था कि उसने 12 जनवरी को सोनीपत जिले में एक औद्योगिक इकाई को कथित रूप से घेराव करने और कंपनी से पैसे की मांग करने के लिए उन्हें अन्य लोगों के साथ गिरफ्तार किया था। कौर के खिलाफ जबरन वसूली के दो अलग-अलग मामले दर्ज हैं।

नौदीप के साथ ही देश में दलितों पर हो रहे है हमले को लेकर भी नाराज़ प्रदर्शनकारी

विरोध प्रदर्शन में शामिल नेताओ ने नौदीप कौर के साथ ही उत्तर प्रदेश में लगातर दलितों पर होते हमले और ख़ासकर महिलाओं के साथ हो रही हिंसा का भी सवाल उठाया। कहा कि उत्तर प्रदेश वंचित वर्गों विशेषकर दलितों के लिए एक असुरक्षित स्थान बन गया है। नेताओं ने उन्नाव की घटना का जिक्र किया जहां दो दलित लड़कियों की संदिग्ध परिस्थितयों में मौत हो गई है और तीसरी लड़की गंभीर हालत में अस्पताल में भर्ती है। वक्ताओं के मुताबिक यह जातिगत अत्याचारों की एक श्रृंखला में नवीनतम अध्याय है। डीएसएमएम,  दिल्ली के अध्यक्ष, ब्रह्मजीत सिंह ने यूपी प्रशासन द्वारा दलितों के ख़िलाफ़ अन्याय और उपेक्षा पर बोलते हुए कहा, “उन्नाव में परिवार के साथ-साथ लोगों को सिर्फ एफआईआर दर्ज करने के लिए पूरी रात धरने पर बैठना पड़ा। अब आप सभी समझ सकते हैं कि ऐसे परिदृश्य में दलितों की स्थिति क्या है? हाथरस में भी यही स्थिति थी।’’ उन्होंने आगे कहा कि अब पुलिस से जांच करने और सच पता लगाने की उम्मीद नहीं है।

प्रदर्शनकारियों को संबोधित करते हुए मज़दूर संगठन सीटू की दिल्ली राज्य की नेता कमला ने कहा, "अपराधियों के हौसले इसलिए बुलंद है क्योंकि उन्हें सत्ता का सरंक्षण प्राप्त है।" उन्होंने कहा कि इनसे लड़ने के लिए निरंतर संघर्ष ही एकमात्र विकल्प है।

प्रदर्शन में शामिल लोगों ने लगातार आंदोलन कर रहे किसानों के प्रति भी एकजुटता व्यक्त की, जो किसान विरोधी कानूनों को निरस्त करने की मांग कर रहे हैं। विरोध प्रदर्शन को समर्थन देने के लिए अखिल भारतीय किसान सभा के महासचिव और संयुक्त मोर्चा के नेता हन्नान मोल्ला भी पहुंचे। उन्होंने इन कृषि कानूनों के किसानों पर होने वाले हानिकारक प्रभावों को लेकर प्रदर्शनकारियों को संबोधित किया। उन्होंने कहा यह तीन कानून सिर्फ किसानों ही नहीं बल्कि देश की बड़ी आबदी जो वंचित है उनके लिए हानिकारक हैं। उन्होंने कहा देश में हर घंटे में दो किसानो की मौत हो रही है लेकिन इसपर कोई बात नहीं करता है।  

इसे भी पढ़ें :दलित-श्रमिक कार्यकर्ता नौदीप की रिहाई को लेकर सड़क से सोशल मीडिया तक संघर्ष जारी

Unnao Rape Case
Unnao Dalit Rape
Caste Atrocity
Violence against Dalits
farmers protest
Hannan Mollah
Nodeep Kaur

Related Stories

राम सेना और बजरंग दल को आतंकी संगठन घोषित करने की किसान संगठनों की मांग

मध्य प्रदेश : धमकियों के बावजूद बारात में घोड़ी पर आए दलित दूल्हे

मिशन यूपी: मुज़फ़्फ़रनगर किसान महापंचायत का संदर्भ और आगे का रास्ता

आंदोलन के 200 दिन पूरे; किसानों ने कहा मोदी नहीं, जनता ही जनार्दन है

छत्तीसगढ़: किसान आंदोलन के समर्थन में आए आदिवासी, बस्तर से शुरू हुईं पंचायतें

ख़ास मुलाक़ात: बिना लड़े हमें कुछ नहीं मिल सकता - नौदीप कौर

सुप्रीम कोर्ट के निर्णयों पर बार बार उठते सवाल

पंजाब के दलित कैसे किसान आन्दोलन का हिस्सा बन गए?


बाकी खबरें

  • सोनिया यादव
    बलात्कार को लेकर राजनेताओं में संवेदनशीलता कब नज़र आएगी?
    13 Apr 2022
    अक्सर राजनेताओं के बयान कभी महिलाओं की बॉडी शेमिंग करते नज़र आते हैं तो कभी बलात्कार जैसे गंभीर अपराध को मामूली बताने या पीड़ित को प्रताड़ित करने की कोशिश। बार-बार राजनीति से महिला विरोधी बयान अब…
  • underprivileged
    भारत डोगरा
    कमज़ोर वर्गों के लिए बनाई गईं योजनाएं क्यों भारी कटौती की शिकार हो जाती हैं
    13 Apr 2022
    क्या कोविड-19 से उत्पन्न संकट ने सरकार के बजट को बुरी तरह से निचोड़ दिया है, या यह उसकी तरफ से समाज के सबसे कमज़ोर वर्गों के अधिकारों की सरासर उपेक्षा है? इनके कुछ आंकड़े खुद ही सब कुछ बयां करते हैं।
  • ramnovmi
    अजय सिंह
    मुस्लिम जेनोसाइड का ख़तरा और रामनवमी
    13 Apr 2022
    एक बात साफ़ हो चली है, वह यह कि भारत में मुसलमानों के क़त्लेआम या जनसंहार (जेनोसाइड) की आशंका व ख़तरा काल्पनिक नहीं, वास्तविक है। इस मंडराते ख़तरे को नज़रअंदाज़ नहीं किया जाना चाहिए।
  • srilanka
    पार्थ एस घोष
    श्रीलंका का संकट सभी दक्षिण एशियाई देशों के लिए चेतावनी
    13 Apr 2022
    निर्ल्लज तरीके के निजीकरण और सिंहली अति-राष्ट्रवाद पर अंकुश लगाने के लिए अधिकाधिक राजकीय हस्तक्षेप पर श्रीलंका में चल रही बहस, सभी दक्षिण एशियाई देशों के लिए चेतावनी है कि ऐसी गलतियां दोबारा न दोहराई…
  • रवि कौशल
    बैठक में नहीं पहुंचे अधिकारी, छात्र बोले- जेएनयू प्रशासन का रवैया पक्षपात भरा है
    13 Apr 2022
    जेएनयू छात्र संघ के पदाधिकारियों ने कहा कि मंगलवार को वे उप कुलपति से उनके कार्यालय में नहीं मिल सके। यह लोग जेएनयू में हुई हिंसा की स्वतंत्र जांच कराए जाने की मांग कर रहे हैं।
  • Load More
सब्सक्राइब करें
हमसे जुडे
हमारे बारे में
हमसे संपर्क करें

CC BY-NC-ND This work is licensed under a Creative Commons Attribution-NonCommercial-NoDerivatives 4.0 International License