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पूर्वांचल की जंग: यहां बाहुबलियों के इर्द-गिर्द ही घूमती है सत्ता!
यूपी में सत्ता किसी के पास भी हो लेकिन तूती तो बाहुबलियों की ही बोलती है, और पूर्वांचल के ज्यादातर क्षेत्रों में उनका और उनके रिश्तेदारों का ही दबदबा रहता है। फिर चाहे वो जेल में हों या फिर जेल के बाहर..
रवि शंकर दुबे
01 Mar 2022
BAHUBALI

पांच चरणों का मतदान होने के बाद अब बारी पूर्वांचल की है, उत्तर प्रदेश का पूर्वांचल ऐसा है जहां राजनीतिक दलों की दशा-दिशा यहां पनपने वाले बाहुबली करते हैं। उनके रिश्तेदार करते हैं। कहने का अर्थ ये है कि सत्ता किसी के पास भी हो लेकिन तूती तो बाहुबलियों की ही बोलती है, और पूर्वांचल के ज्यादातर क्षेत्रों में उनका और उनके रिश्तेदारों का ही दबदबा रहता है। फिर चाहे वो जेल में हों या फिर जेल के बाहर..

बाहुबली हरिशंकर तिवारी के बेटे भी चुनावी मैदान में

गोरखपुर के बाहुबली हरिशंकर तिवारी ने अपनी परंपरागत विधानसभा सीट चिल्लूपार से इस बार अपने बेटे विनय शंकर तिवारी को मैदान में उतारा है। इस सीट का एक समीकरण ये है कि यहां पिछले 37 सालों से ब्राह्मण ही विधायक बनता रहा है। ब्राह्मणों की नाराज़गी को देखते हुए समाजवादी पार्टी ने विनय शंकर तिवारी को सबसे बड़े ब्राह्मण चेहरे के रूप में पेश किया है। आपको बता दें कि बसपा से निष्कासित किए जाने के बाद विनय शंकर को सपा की ओर से टिकट दिया गया है।

मऊ में दांव पर मुख़्तार की विरासत 

हरिशंकर तिवारी के बाद बाहुबली मुख्तार अंसारी का पूर्वांचल में खूब दबदबा रहा है। पिछले 15 सालों से मुख्तार जेल में हैं इसके बावजूद वो ज़िले की सदर विधानसभा से चुनाव जीतते रहे हैं और इस सीट से पांच बार विधायक भी रहे हैं। लेकिन अब मुख्तार की विरासत को आगे बढ़ाने के लिए उनका बेटा अब्बास चुनावी मैदान में है। जिसे सपा गठबंधन में शामिल सुभासपा से टिकट दिया गया है। इससे पहले अब्बास ने बसपा के टिकट पर घोसी सीट से विधानसभा चुनाव लड़ा था, लेकिन भाजपा के फागू चौहान ने उन्हें हरा दिया था। इस बार भी अब्बास की टक्कर बसपा के प्रदेश अध्यक्ष भीम राजभर और भाजपा के अशोक कुमार सिंह से है। वहीं मोहम्मदाबाद सीट पर भी मुख्तार अंसारी का भतीजा मन्नू अंसारी सपा के टिकट पर चुनाव लड़ रहा है।

आज़मगढ़ से रमाकांत ने ठोकी ताल

पूर्वांचल के बाहुबलियों में एक नाम और आता है रमाकांत यादव का... हाल में आजमगढ़ में हुए शराब कांड के कारण रमाकांत यादव का नाम सुर्खियों में है। जिस सरकारी ठेके से शराब पीकर लोगों की जान गई वह सरकारी ठेका रंगेश यादव का था और रंगेश रमाकांत का करीबी रिश्तेदार है। रमाकांत फूलपुर पवई सीट से सपा के टिकट पर मैदान में हैं। इस सीट पर उनके बेटे अरुणकांत वर्तमान में भाजपा से विधायक हैं लेकिन बीजेपी ने इस बार चुनाव में रामसूरत को मैदान में उतारा है तो वहीं बसपा ने मुस्लिम कार्ड खेलते हुए शकील अहमद को मैदान में उतारा है।

जदयू के टिकट पर बाहुबली धनंजय

जौनपुर की मल्हनी सीट से बाहुबली धनंजय सिंह जनता दल यूनाइटेड के टिकट पर मैदान में हैं। धनंजय सिंह की पत्नी श्रीकला रेडी बीते पंचायत चुनाव में जिला पंचायत अध्यक्ष चुनी गईं। 2017 में धनंजय सिंह निषाद पार्टी के टिकट पर चुनाव लड़ा था हालांकि सपा के पारसनाथ यादव से हार गए थे। इस बार बीजेपी के साथ गठबंधन के चलते निषाद पार्टी ने दागी उम्मीदवारों से किनारा कर दिया इसलिए धनंजय सिंह को टिकट नहीं मिल पाया। मालमू हो कि एक मामले में आरोपित पूर्व सांसद धनंजय सिंह के खिलाफ 23 फरवरी को एसीजेएम तृतीय कोर्ट ने गिरफ्तारी वॉरंट जारी किया है।

भांजे के कंधों पर बाहुबली बृजेश सिंह की प्रतिष्ठा

वाराणसी की सेंट्रल जेल में सज़ा काट रहे पूर्वांचल के एक और बाहुबली बृजेश के आंतक से हर कोई वाकिफ है। इस बार भले ही वो चुनावी मैदान में खुद न हों लेकिन अपने भांजे सुशील सिंह को ज़रूर भाजपा से टिकट दिलवाकर चंदौली की सैयद राजा सीट से मैदान में उतार दिया है। वहीं सुशील सिंह का जीतना बृजेश सिंह की साख के लिए भी जरूरी है। सुशील पहली बार चंदौली के धानापुर से विधायक बने थे, इसके बाद सैयदराजा से भाजपा के विधायक हैं। अब चौथी बार मैदान में हैं, सैयदराजा सीट पर बसपा ने अमित कुमार यादव और सपा ने मनोज कुमार को मैदान में उतारा है।

एक बाहुबली जेल से ही लड़ेंगे चुनाव

भदोही की ज्ञानपुर सीट से विधायक विजय मिश्रा प्रगतिशील मानव समाज पार्टी के टिकट पर चुनावी मैदान में हैं, हालांकि वो जेल से ही चुनाव लड़ेंगे। विजय मिश्रा को निषाद पार्टी के विपुल दुबे, सपा के रामकिशोर बिंद और बसपा के उपेंद्र सिंह चुनौती देंगे। बता दें कि पिछले महीने विजय मिश्रा ने चुनाव के मद्देनजर जमानत अर्जी दाखिल की थी लेकिन सुप्रीम कोर्ट ने याचिका खारिज कर दी। विजय मिश्रा रिश्तेदार का मकान और फर्म कब्जा करने और युवती से दुष्कर्म के मामले में जेल में बंद है।

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