NewsClick

NewsClick
  • English
  • राजनीति
  • अर्थव्यवस्था
  • विज्ञान
  • संस्कृति
  • भारत
  • अंतरराष्ट्रीय
  • हमारे लेख
  • हमारे वीडियो
search
menu

सदस्यता लें, समर्थन करें

image/svg+xml
  • सारे लेख
  • न्यूज़क्लिक लेख
  • सारे वीडियो
  • न्यूज़क्लिक वीडियो
  • राजनीति
  • अर्थव्यवस्था
  • विज्ञान
  • संस्कृति
  • भारत
  • अंतरराष्ट्रीय
  • अफ्रीका
  • लैटिन अमेरिका
  • फिलिस्तीन
  • नेपाल
  • पाकिस्तान
  • श्री लंका
  • अमेरिका
  • एशिया के बाकी
हमारे बारे में
हमसे संपर्क करें
सब्सक्राइब करें
हमारा अनुसरण करो Facebook - Newsclick Twitter - Newsclick RSS - Newsclick
close menu
आंदोलन
मज़दूर-किसान
भारत
राजनीति
लखीमपुर हिंसा के बाद तराई में ढह सकता है भाजपा का क़िला
तराई के सात ज़िलों और आस-पास के ज़िलों के कुछ हिस्सों में, किसानों की हत्या और दोषियों को दंडित करने में ढिलाई से आने वाले यूपी विधानसभा चुनावों में भाजपा की संभावनाओं में सेंध लगने की आशंका पैदा हो गई है।
सुबोध वर्मा
11 Oct 2021
Translated by महेश कुमार
kisan
Image Courtesy: Kisan Ekta Morcha

लखीमपुर खीरी जिले के सुदूरवर्ती गांव में एक सप्ताह पूर्व भाजपा समर्थकों द्वारा सवार एसयूवी के काफिले द्वारा धूल भरी सड़क पर चल रहे किसानों को कुचलने की दिल दहलाने देने वाली घटना से लोगों में अब भी सदमे की लहर दौड़ रही है। हालांकि, आनन-फानन में उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने मृतक के परिजनों को अनुग्रह राशि और सरकारी नौकरियां देने की घोषणा की है, लेकिन बावजूद इन घोषणाओं के राजनीतिक परिदृश्य बदलने के हालत बनते जा रहे हैं। योगी सरकार के प्रशासन ने घटना के कुछ दिनों तक तो किसी भी विपक्षी दल के नेता को उस जगह का दौरा नहीं करने दिया और शोक संतप्त  परिवारों से मिलने की इजाजत नहीं दी थी, क्योंकि यह एक केंद्रीय मंत्री का बेटा था, जिस पर आरोप लगाया गया है कि वह उस वाहन में बैठा था जिससे किसानों को कुचला गया था, और यहां तक कि पिस्तौल से फायरिंग करके फरार हो गया था, और उसके तुरंत बाद केंद्रीय मंत्री और आरोपी के पिता, केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह से मिलने दिल्ली पहुंचे थे। आखिरकार शनिवार को मंत्री के बेटे को सामने आना पड़ा। 

उत्तर प्रदेश में अगले साल की शुरुआत में होने वाले विधानसभा चुनाव के मद्देनजर इस पूरे प्रकरण से काफी हलचल मच गई है। किसान समुदाय के बीच का भारी गुस्सा, सत्तारूढ़ भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के खिलाफ रुख कर सकता है। इसका अंदाज़ा इस बात से लगाया जा सकता है कि कितनी जल्दबाजी में मृतक किसान परिवारों को मुआवजे देने की घोषणा की गई थी।

यह इस ओर भी इशारा करता है कि क्यों नरेंद्र मोदी की मंत्रिपरिषद में उत्तर प्रदेश का एकमात्र ब्राह्मण चेहरा (केंद्रीय मंत्री अजय मिश्रा टेनी) अपने पद पर बना हुआ है, जबकि उनके बेटे की हत्या में उनके कथित हाथ से आम जनता में चौतरफा आक्रोश है। आदित्यनाथ और भाजपा एक तरफ जनाक्रोश और दूसरी तरफ अपने पसंदीदा जातिगत समीकरणों के बीच कड़ी रस्सा-कसी करने की कोशिश कर रहे हैं।

तराई में भाजपा की चुनावी संभावनाएं  

लेकिन क्या यह काम करेगा? तराई क्षेत्र में - हिमालय की शिवालिक तलहटी के दक्षिण में तराई की पट्टी है – इस पूरी पट्टी में इस घटना को लेकर गहरी नाराजगी और गुस्सा है। उत्तर प्रदेश के सात जिलों - पीलीभीत, लखीमपुर खीरी, बहराइच, श्रावस्त, बलरामपुर, सिद्धार्थनगर और महाराजगंज की यह पट्टी पश्चिम से पूर्व की ओर - राज्य के सबसे गरीब और सबसे पिछड़े क्षेत्रों में से एक है। पिछले कई सालों से तराई के 35 विधानसभा क्षेत्रों में बीजेपी का दबदबा रहा है, जिसने 2017 के पिछले विधानसभा चुनाव में इनमें से 31 सीटें जीती थीं। [चुनाव आयोग के आंकड़ों के आधार पर नीचे नक्शा देखें जो इंटरैक्टिव मोड पर उपलब्ध है...https://electionsviz.newsclick.in/ ]

2019 के आम चुनावों में, भाजपा ने यहां के सभी संसदीय क्षेत्रों में जीत हासिल की थी, हालांकि विधानसभा क्षेत्रों के मामले में, इसका हिस्सा घटकर 29 रह गया था जबकि बहुजन समाज पार्टी (बसपा) की संख्या बढ़कर पांच हो गई थी। हालाँकि, जो इससे भी अधिक प्रासंगिक है, वह यह है कि 2017 में, बीजेपी को लगभग 43 प्रतिशत वोट शेयर मिला था, जो 2019 में लगभग 54 प्रतिशत तक बढ़ गया था, जिसमें छोटी पार्टियों को 'अन्य' के तहत मिला दिया गया, साथ ही बसपा को भी हार का सामना करना पड़ा था। जाहिर है, तराई, जो कभी समाजवादी पार्टी (सपा) और बसपा के प्रभुत्व में थी, उनसे दूर हो गई थी और विशाल राज्य के अधिकांश क्षेत्रों की तरह इस इलाके ने भी भाजपा को गले लगा लिया था।

लेकिन इस बार चीजें बादल गई हैं और घटनाएं तेजी से आगे बढ़ रही हैं। साल भर चलने वाले किसान आंदोलन ने बीजेपी के जनाधार को काफी हद तक परेशान कर दिया है, जैसा कि पिछले महीनों में बिहार और पश्चिम बंगाल के चुनावों में देखा गया था। उत्तर प्रदेश में, यह प्रभाव पश्चिमी क्षेत्र में सबसे अधिक दिखाई देता है, लेकिन यह पूरे राज्य में नीचे ही नीचे उबल रहा है।

इलाका मोटे तौर पर कृषि प्रधान और बहुत गरीब है  

उपेक्षित और अदृश्य तराई पट्टी में भी वही असंतोष मौजूद था - लेकिन लखीमपुर की दहशत ने इसे सुर्खियों में ला दिया है। इस बेल्ट में मुख्य रूप से ग्रामीण संरचना के कारण किसानों का असंतोष अधिक तीव्रता से महसूस होने की संभावना है, जैसा कि यूपी सरकार के आंकड़ों के आधार पर नीचे दिए गए चार्ट में दिखाया गया है।

इस क्षेत्र में खेती पर कितनी उच्च निर्भरता उसकी पुष्टि यूपी सरकार के खुद के व्यावसायिक आंकड़ों से होती है, जो आंकड़े बताते हैं कि खेती के काम या कृषि श्रम में शामिल 70-80 प्रतिशत श्रमिक शामिल हैं। 

जबकि कुछ पश्चिमी जिलों, जैसे पीलीभीत और लखीमपुर में उल्लेखनीय गन्ना उत्पादन (निकटवर्ती पश्चिम यूपी बेल्ट के समान) है, पूर्वी हिस्से में प्रमुख चावल और गेहूं की फसलें होती हैं। तराई क्षेत्र की एक अन्य विशेषता अत्यंत खंडित और छोटी भूमि जोत है। सात जिलों में, छोटी और सीमांत भूमि जोत सभी भूमि जोत का 87 प्रतिशत से 96 प्रतिशत है।

पूरे डेटा को एक साथ रख के देखें तो आपको मुख्य रूप से खेती पर निर्वाह करने वाली तस्वीर मिल जाएगी। कृषि उत्पाद के बदले बेहतर आय की मांग, कीमतों में अधिक सरकारी समर्थन और ताकि लागत का खर्च निकाला जा सके, अधिक खरीद, अन्य और ऐसी कृषि संबंधी मांगें व्यापक रूप से मौजूद हैं। हालाँकि, इस क्षेत्र में मांगों के प्रति किसानों की कम लामबंदी बताई गई थी। 

लखीमपुर की घटना के साथ अब यह बदल गया है। कृषि कानूनों ने प्रतिरोध आंदोलन को प्रेरित कर दिया है, जो तराई जैसे बैकवाटर तक भी पहुंच गया है। लेकिन सत्ताधारी भाजपा के कार्यकर्ताओं द्वारा जानबूझकर किसानों को लुचलने ने आग को भड़का दिया है जो पूरे क्षेत्र में जल रही है, जैसा कि अन्य जगहों के किसानों के बीच हो रहा है। और मोदी और योगी जितना कानूनों या लखीमपुर के दोषियों को सज़ा दिलाने से मुकरते रहेंगे और किसानों के संघर्ष के "दबाव के आगे नहीं झुकेंगे" तो गुसा उतना ही तेजी से फैलेगा, जो अंततः अगले साल होने वाले विधानसभा चुनावों में दिखाई देगा।

अंग्रेजी में मूल रूप से लिखे लेख को पढ़ने के लिए नीचे दिए गए लिंक पर क्लिक करें

After Lakhimpur, BJP Stronghold in Terai May Crack

Lakhimpur Killings
farmers protest
UP Assembly Elections
terai Region
Farmer Killings
Ajay Mishra Son
ADITYANATH GOVT
BJP

Related Stories

मूसेवाला की हत्या को लेकर ग्रामीणों ने किया प्रदर्शन, कांग्रेस ने इसे ‘राजनीतिक हत्या’ बताया

बिहार : नीतीश सरकार के ‘बुलडोज़र राज’ के खिलाफ गरीबों ने खोला मोर्चा!   

आशा कार्यकर्ताओं को मिला 'ग्लोबल हेल्थ लीडर्स अवार्ड’  लेकिन उचित वेतन कब मिलेगा?

दिल्ली : पांच महीने से वेतन व पेंशन न मिलने से आर्थिक तंगी से जूझ रहे शिक्षकों ने किया प्रदर्शन

राम सेना और बजरंग दल को आतंकी संगठन घोषित करने की किसान संगठनों की मांग

आईपीओ लॉन्च के विरोध में एलआईसी कर्मचारियों ने की हड़ताल

जहाँगीरपुरी हिंसा : "हिंदुस्तान के भाईचारे पर बुलडोज़र" के ख़िलाफ़ वाम दलों का प्रदर्शन

दिल्ली: सांप्रदायिक और बुलडोजर राजनीति के ख़िलाफ़ वाम दलों का प्रदर्शन

आंगनवाड़ी महिलाकर्मियों ने क्यों कर रखा है आप और भाजपा की "नाक में दम”?

NEP भारत में सार्वजनिक शिक्षा को नष्ट करने के लिए भाजपा का बुलडोजर: वृंदा करात


बाकी खबरें

  • Gauri Lankesh pansare
    डॉ मेघा पानसरे
    वे दाभोलकर, पानसरे, कलबुर्गी या गौरी लंकेश को ख़ामोश नहीं कर सकते
    17 Feb 2022
    दाभोलकर, पानसरे, कलबुर्गी और गौरी को चाहे गोलियों से मार दिया गया हो, मगर उनके शब्द और उनके विचारों को कभी ख़ामोश नहीं किया जा सकता।
  • union budget
    टिकेंदर सिंह पंवार
    5,000 कस्बों और शहरों की समस्याओं का समाधान करने में केंद्रीय बजट फेल
    17 Feb 2022
    केंद्र सरकार लोगों को राहत देने की बजाय शहरीकरण के पिछले मॉडल को ही जारी रखना चाहती है।
  • covid
    न्यूज़क्लिक टीम
    कोरोना अपडेट: देश में आज फिर 30 हज़ार से ज़्यादा नए मामले, 541 मरीज़ों की मौत
    17 Feb 2022
    देश में 24 घंटों में कोरोना के 30,757 नए मामले सामने आए है | देश में कोरोना संक्रमण के मामलों की संख्या बढ़कर 4 करोड़ 27 लाख 54 हज़ार 315 हो गयी है।
  • yogi
    एम.ओबैद
    यूपी चुनावः बिजली बिल माफ़ करने की घोषणा करने वाली BJP का, 5 साल का रिपोर्ट कार्ड कुछ और ही कहता है
    17 Feb 2022
    "पूरे देश में सबसे ज्यादा महंगी बिजली उत्तर प्रदेश की है। पिछले महीने मुख्यमंत्री (योगी आदित्यनाथ) ने 50 प्रतिशत बिजली बिल कम करने का वादा किया था लेकिन अभी तक कुछ नहीं किया। ये बीजेपी के चुनावी वादे…
  • punjab
    रवि कौशल
    पंजाब चुनाव : पुलवामा के बाद भारत-पाक व्यापार के ठप हो जाने के संकट से जूझ रहे सीमावर्ती शहर  
    17 Feb 2022
    स्थानीय लोगों का कहना है कि पाकिस्तान के साथ व्यापार के ठप पड़ जाने से अमृतसर, गुरदासपुर और तरनतारन जैसे उन शहरों में बड़े पैमाने पर बेरोज़गारी पैदा हो गयी है, जहां पहले हज़ारों कामगार,बतौर ट्रक…
  • Load More
सब्सक्राइब करें
हमसे जुडे
हमारे बारे में
हमसे संपर्क करें

CC BY-NC-ND This work is licensed under a Creative Commons Attribution-NonCommercial-NoDerivatives 4.0 International License