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बिना सुरक्षा उपकरण के टैंक में भेजे जाने से एक बार फिर दो सफाई कर्मचारियों की मौत
सभी सफाई कर्मचरी संगठनों की लंबे समय से यह मांग रही है कि ऐसी घटना अनजाने में नहीं होती बल्कि जब मालिक जानबूझकर कुछ चंद पैसे बचाने के लिए मज़दूरों को बिना सुरक्षा के टैंक में उतारते हैं, तो उनकी मौत हो जाती है। इसे हत्या का मामला क्यों न माना जाए?
15 Apr 2019
manual scavenging

बिना किसी सुरक्षा उपकरण के टैंक में भेजे जाने से एकबार फिर रविवार को नरसिंहपुर में एक ऑटोमोबाइल कंपनी में सेप्टिक टैंक की सफाई के दौरान जहरीले धुएं के कारण दो श्रमिकों की मौत हो गई।मृतक,पश्चिम बंगाल के 33 वर्षीय असलम और 35 वर्षीय शिव कुमार, बिहार के संविदा कर्मचारी थे। टाइम्स ऑफ इंडिया के अनुसार, एक तीसरा कार्यकर्ता वर्तमान में गंभीर स्थिति में है और उसका इलाज चल रहा है। 

अन्य मज़दूर, जो वहां मौजूद थे, उनके अनुसार, शिव कुमार पहले सनबीम ऑटो प्राइवेट लिमिटेड कंपनी में सेप्टिक टैंक में शाम करीब 4.30 बजे उतरे और काम करते हुए थकने के बाद सुरक्षित लौट आए। इसके बाद,असलम नीचे चला गया लेकिन जहरीले धुएं के गुबार से बेहोश हो गया। जब असलम वापस नहीं आया, तो 

शिव कुमार टैंक में गया, दोनों को बेहोशी की अवस्था में बाहर निकला गया। बाद में दोनों को साथी श्रमिकों ने बचा लिया और कथूरिया अस्पताल ले जाया गया जहां डॉक्टर ने उन्हें मृत घोषित कर दिया।

सफाई मज़दूरों की मौत का कोई यह पहला मामला नहींI चंद रूपये बचाने के लिए मज़दूरों को बिना किसी सुरक्षा के इतने गहरे टैंको में उतरा जाता है और कई बार उनकी मौत जाती हैI इससे पहले भी कई बार हमने सफाई मज़दूरों की मौत की खबर सुनी है कभी किसी सीवर में कभी पैट्रॉल पंप के टैंक में  तो कभी निजी कम्पनियो के टैंक की सफाई करते हुए |  इन सभी मौतो का अधिकतर एक ही कारण होता है सुरक्षा उपकरण का न होना| 

यह सेप्टिक  टैंक बहुत ही गहरे होते हैं, इसमें ऐसे ही बिना किसी सुरक्षा गार्ड के उतरना जोखिम से खाली नहीं हो सकता है | परन्तु कई बार तो स्थिति  इतनी बदत्तर रहती है कि  जिस टैंक में मास्क के साथ भी जाना मुशिकल है, उस टैंक में दोनों कर्मचारियों को बिना मास्क और बिना ऑक्सीजन सिलेंडर के नीचे उतार दिया जाता है और मज़दूर की मौत हो जाती है |

-टैंक में जाने के लिए ज़रूरी सुरक्षा इन्तज़ाम क्या होना चाहिए?

-टैंक में उतरने के लिए मज़दूरों को क्या–क्या सुरक्षा के इंतज़ाम होने चाहिएI इसको लेकर कुछ तय मानक है लेकिन मुश्किल से ही कोई इसका पालन होता  है 

- ऐसे टैंक की सफाई के लिए जिन लोगो को भेजा जाए वो एक ट्रेंड कर्मचारी होने  चाहिए   

 -पहले टैंक का Decontamination करना चाहिएI इसका अर्थ है कि जहाँ मज़दूरों को सफाई करने जाना है, वहाँ के वातावरण को कम से कम साँस लेने लायक बनाया जाएI क्योंकि ऐसे टैंको में कोई न कोई ऐसी गैस रह जाती है जिससे साँस लेने में परेशानी होती हैI जिससे कर्मचारी की मौत हो सकती है। 

-जब मज़दूर टैंक में सफाई के लिए उतरे उससे पूर्व उसके लिए ऑक्सीजन सप्लाई की व्यवस्था होनी चाहिए | मज़दूरों को ऑक्सीजन मास्क भी लगा होना चाहिएI -

-  बाहर  से कुछ लोगों का सुपरविजन करने के लिए रहना चाहिए, अंदर क्या हो रहा है इसकी जानकारी मिलती रहेI  इस तरह की पूरी तैयारी के साथ कम से कम दो अन्य लोगों को बैकअप के लिए रखे, अगर कोई अंदर दुर्घटना हो तो तुरंत अंदर जा कर उनकी मदद कर सकेI

ये सबसे बुनियादी जरूरतें है, जिसके बिना किसी को ऐसे टैंक में भेजना उसकी जान से खिलवाड़ है | इसको लेकर जब हमने कई सफाई  कर्मचारी जो ऐसे टैंको की सफाई करते है उनसे बात की तो उन्होंने बतया कि  इनमें से किसी भी तरह की कोई भी सुरक्षा बंदोबस्त के बिना ही मज़दूरों को टैंको और सीवर में उतार दिया जाता है और वही उनके मौत का कारण बनता हैI 

सभी सफाई कर्मचरी संगठनों  का लंबे समय से मांग रही है  कि ऐसी घटना अनजाने में नहीं होती, बल्कि ये मालिक जानबूझकर कुछ चंद पैसे बचने के लिए  मज़दूरों को बिना सुरक्षा के टैंक में उतारते हैं, जिसकी वजह से  उनकी मौत हो जाती है , तो फिर इसे हत्या का मामला क्यों न माना जाए? 

आगामी लोकसभा चुनाव से पहले सफ़ाई कर्मचारी आंदोलन (एसकेए) जो कि मैनुअल स्केवेंजिंग (हाथ से मैला ढोने की प्रथा) को ख़त्म करने के लिए संघर्ष करता आ रहा है, ने सफ़ाई कर्मचारियों के घोषणापत्र जारी किये । ये सफ़ाई कर्मचारियों का पहला घोषणापत्र है। इसमें इन्होने जिस तरह से लगतार कर्मचारियों की मौत हो रही उसे रोकने के लिए उपकरण के साथ हाथो से सफाई  करने की प्रथा का  विरोध किया | 

 

Gurugram
Haryana
Contractual Workers
manual scavenging
Safai Karamchari

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