NewsClick

NewsClick
  • English
  • राजनीति
  • अर्थव्यवस्था
  • विज्ञान
  • संस्कृति
  • भारत
  • अंतरराष्ट्रीय
  • हमारे लेख
  • हमारे वीडियो
search
menu

सदस्यता लें, समर्थन करें

image/svg+xml
  • सारे लेख
  • न्यूज़क्लिक लेख
  • सारे वीडियो
  • न्यूज़क्लिक वीडियो
  • राजनीति
  • अर्थव्यवस्था
  • विज्ञान
  • संस्कृति
  • भारत
  • अंतरराष्ट्रीय
  • अफ्रीका
  • लैटिन अमेरिका
  • फिलिस्तीन
  • नेपाल
  • पाकिस्तान
  • श्री लंका
  • अमेरिका
  • एशिया के बाकी
हमारे बारे में
हमसे संपर्क करें
सब्सक्राइब करें
हमारा अनुसरण करो Facebook - Newsclick Twitter - Newsclick RSS - Newsclick
close menu
मज़दूर-किसान
भारत
राजनीति
बिना सुरक्षा उपकरण के टैंक में भेजे जाने से एक बार फिर दो सफाई कर्मचारियों की मौत
सभी सफाई कर्मचरी संगठनों की लंबे समय से यह मांग रही है कि ऐसी घटना अनजाने में नहीं होती बल्कि जब मालिक जानबूझकर कुछ चंद पैसे बचाने के लिए मज़दूरों को बिना सुरक्षा के टैंक में उतारते हैं, तो उनकी मौत हो जाती है। इसे हत्या का मामला क्यों न माना जाए?
15 Apr 2019
manual scavenging

बिना किसी सुरक्षा उपकरण के टैंक में भेजे जाने से एकबार फिर रविवार को नरसिंहपुर में एक ऑटोमोबाइल कंपनी में सेप्टिक टैंक की सफाई के दौरान जहरीले धुएं के कारण दो श्रमिकों की मौत हो गई।मृतक,पश्चिम बंगाल के 33 वर्षीय असलम और 35 वर्षीय शिव कुमार, बिहार के संविदा कर्मचारी थे। टाइम्स ऑफ इंडिया के अनुसार, एक तीसरा कार्यकर्ता वर्तमान में गंभीर स्थिति में है और उसका इलाज चल रहा है। 

अन्य मज़दूर, जो वहां मौजूद थे, उनके अनुसार, शिव कुमार पहले सनबीम ऑटो प्राइवेट लिमिटेड कंपनी में सेप्टिक टैंक में शाम करीब 4.30 बजे उतरे और काम करते हुए थकने के बाद सुरक्षित लौट आए। इसके बाद,असलम नीचे चला गया लेकिन जहरीले धुएं के गुबार से बेहोश हो गया। जब असलम वापस नहीं आया, तो 

शिव कुमार टैंक में गया, दोनों को बेहोशी की अवस्था में बाहर निकला गया। बाद में दोनों को साथी श्रमिकों ने बचा लिया और कथूरिया अस्पताल ले जाया गया जहां डॉक्टर ने उन्हें मृत घोषित कर दिया।

सफाई मज़दूरों की मौत का कोई यह पहला मामला नहींI चंद रूपये बचाने के लिए मज़दूरों को बिना किसी सुरक्षा के इतने गहरे टैंको में उतरा जाता है और कई बार उनकी मौत जाती हैI इससे पहले भी कई बार हमने सफाई मज़दूरों की मौत की खबर सुनी है कभी किसी सीवर में कभी पैट्रॉल पंप के टैंक में  तो कभी निजी कम्पनियो के टैंक की सफाई करते हुए |  इन सभी मौतो का अधिकतर एक ही कारण होता है सुरक्षा उपकरण का न होना| 

यह सेप्टिक  टैंक बहुत ही गहरे होते हैं, इसमें ऐसे ही बिना किसी सुरक्षा गार्ड के उतरना जोखिम से खाली नहीं हो सकता है | परन्तु कई बार तो स्थिति  इतनी बदत्तर रहती है कि  जिस टैंक में मास्क के साथ भी जाना मुशिकल है, उस टैंक में दोनों कर्मचारियों को बिना मास्क और बिना ऑक्सीजन सिलेंडर के नीचे उतार दिया जाता है और मज़दूर की मौत हो जाती है |

-टैंक में जाने के लिए ज़रूरी सुरक्षा इन्तज़ाम क्या होना चाहिए?

-टैंक में उतरने के लिए मज़दूरों को क्या–क्या सुरक्षा के इंतज़ाम होने चाहिएI इसको लेकर कुछ तय मानक है लेकिन मुश्किल से ही कोई इसका पालन होता  है 

- ऐसे टैंक की सफाई के लिए जिन लोगो को भेजा जाए वो एक ट्रेंड कर्मचारी होने  चाहिए   

 -पहले टैंक का Decontamination करना चाहिएI इसका अर्थ है कि जहाँ मज़दूरों को सफाई करने जाना है, वहाँ के वातावरण को कम से कम साँस लेने लायक बनाया जाएI क्योंकि ऐसे टैंको में कोई न कोई ऐसी गैस रह जाती है जिससे साँस लेने में परेशानी होती हैI जिससे कर्मचारी की मौत हो सकती है। 

-जब मज़दूर टैंक में सफाई के लिए उतरे उससे पूर्व उसके लिए ऑक्सीजन सप्लाई की व्यवस्था होनी चाहिए | मज़दूरों को ऑक्सीजन मास्क भी लगा होना चाहिएI -

-  बाहर  से कुछ लोगों का सुपरविजन करने के लिए रहना चाहिए, अंदर क्या हो रहा है इसकी जानकारी मिलती रहेI  इस तरह की पूरी तैयारी के साथ कम से कम दो अन्य लोगों को बैकअप के लिए रखे, अगर कोई अंदर दुर्घटना हो तो तुरंत अंदर जा कर उनकी मदद कर सकेI

ये सबसे बुनियादी जरूरतें है, जिसके बिना किसी को ऐसे टैंक में भेजना उसकी जान से खिलवाड़ है | इसको लेकर जब हमने कई सफाई  कर्मचारी जो ऐसे टैंको की सफाई करते है उनसे बात की तो उन्होंने बतया कि  इनमें से किसी भी तरह की कोई भी सुरक्षा बंदोबस्त के बिना ही मज़दूरों को टैंको और सीवर में उतार दिया जाता है और वही उनके मौत का कारण बनता हैI 

सभी सफाई कर्मचरी संगठनों  का लंबे समय से मांग रही है  कि ऐसी घटना अनजाने में नहीं होती, बल्कि ये मालिक जानबूझकर कुछ चंद पैसे बचने के लिए  मज़दूरों को बिना सुरक्षा के टैंक में उतारते हैं, जिसकी वजह से  उनकी मौत हो जाती है , तो फिर इसे हत्या का मामला क्यों न माना जाए? 

आगामी लोकसभा चुनाव से पहले सफ़ाई कर्मचारी आंदोलन (एसकेए) जो कि मैनुअल स्केवेंजिंग (हाथ से मैला ढोने की प्रथा) को ख़त्म करने के लिए संघर्ष करता आ रहा है, ने सफ़ाई कर्मचारियों के घोषणापत्र जारी किये । ये सफ़ाई कर्मचारियों का पहला घोषणापत्र है। इसमें इन्होने जिस तरह से लगतार कर्मचारियों की मौत हो रही उसे रोकने के लिए उपकरण के साथ हाथो से सफाई  करने की प्रथा का  विरोध किया | 

 

Gurugram
Haryana
Contractual Workers
manual scavenging
Safai Karamchari

Related Stories

हिसारः फसल के नुक़सान के मुआवज़े को लेकर किसानों का धरना

MSP की कानूनी गारंटी ही यूपी के किसानों के लिए ठोस उपलब्धि हो सकती है

हरियाणा के किसानों ने किया हिसार, दिल्ली की सीमाओं पर व्यापक प्रदर्शन का ऐलान

गुड़गांव पंचायत: औद्योगिक मज़दूर एंव किसानों ने लेबर कोड्स और कृषि कानूनों का विरोध

गुड़गांव पंचायत : औद्योगिक मज़दूर, किसान आए एक साथ, कहा दुश्मन सांझा तो संघर्ष भी होगा सांझा!

हांसी में डटे किसान, चेताया सरकार परीक्षा न ले

लखीमपुर खीरी कांड के बाद हरियाणा में प्रदर्शनकारी महिला किसानों को ट्रक ने कुचला, तीन की मौत

लखीमपुर के बाद अंबाला में भी भाजपा नेता पर लगे किसानों को गाड़ी से कुचलने का आरोप

किसानों पर लाठीचार्ज के विरोध में करनाल में महापंचायत, अधिकारियों का घेराव

करनाल पुलिसिया हिंसा: एक किसान की मौत, खट्टर सरकार पर उठ रहे सवाल


बाकी खबरें

  • श्याम मीरा सिंह
    यूक्रेन में फंसे बच्चों के नाम पर PM कर रहे चुनावी प्रचार, वरुण गांधी बोले- हर आपदा में ‘अवसर’ नहीं खोजना चाहिए
    28 Feb 2022
    एक तरफ़ प्रधानमंत्री चुनावी रैलियों में यूक्रेन में फंसे कुछ सौ बच्चों को रेस्क्यू करने के नाम पर वोट मांग रहे हैं। दूसरी तरफ़ यूक्रेन में अभी हज़ारों बच्चे फंसे हैं और सरकार से मदद की गुहार लगा रहे…
  • karnataka
    शुभम शर्मा
    हिजाब को गलत क्यों मानते हैं हिंदुत्व और पितृसत्ता? 
    28 Feb 2022
    यह विडम्बना ही है कि हिजाब का विरोध हिंदुत्ववादी ताकतों की ओर से होता है, जो खुद हर तरह की सामाजिक रूढ़ियों और संकीर्णता से चिपकी रहती हैं।
  • Chiraigaon
    विजय विनीत
    बनारस की जंग—चिरईगांव का रंज : चुनाव में कहां गुम हो गया किसानों-बाग़बानों की आय दोगुना करने का भाजपाई एजेंडा!
    28 Feb 2022
    उत्तर प्रदेश के बनारस में चिरईगांव के बाग़बानों का जो रंज पांच दशक पहले था, वही आज भी है। सिर्फ चुनाव के समय ही इनका हाल-चाल लेने नेता आते हैं या फिर आम-अमरूद से लकदक बगीचों में फल खाने। आमदनी दोगुना…
  • pop and putin
    एम. के. भद्रकुमार
    पोप, पुतिन और संकटग्रस्त यूक्रेन
    28 Feb 2022
    भू-राजनीति को लेकर फ़्रांसिस की दिलचस्पी, रूसी विदेश नीति के प्रति उनकी सहानुभूति और पश्चिम की उनकी आलोचना को देखते हुए रूसी दूतावास का उनका यह दौरा एक ग़ैरमामूली प्रतीक बन जाता है।
  • MANIPUR
    शशि शेखर
    मुद्दा: महिला सशक्तिकरण मॉडल की पोल खोलता मणिपुर विधानसभा चुनाव
    28 Feb 2022
    मणिपुर की महिलाएं अपने परिवार के सामाजिक-आर्थिक शक्ति की धुरी रही हैं। खेती-किसानी से ले कर अन्य आर्थिक गतिविधियों तक में वे अपने परिवार के पुरुष सदस्य से कहीं आगे नज़र आती हैं, लेकिन राजनीति में…
  • Load More
सब्सक्राइब करें
हमसे जुडे
हमारे बारे में
हमसे संपर्क करें

CC BY-NC-ND This work is licensed under a Creative Commons Attribution-NonCommercial-NoDerivatives 4.0 International License