NewsClick

NewsClick
  • English
  • राजनीति
  • अर्थव्यवस्था
  • विज्ञान
  • संस्कृति
  • भारत
  • अंतरराष्ट्रीय
  • हमारे लेख
  • हमारे वीडियो
search
menu

सदस्यता लें, समर्थन करें

image/svg+xml
  • सारे लेख
  • न्यूज़क्लिक लेख
  • सारे वीडियो
  • न्यूज़क्लिक वीडियो
  • राजनीति
  • अर्थव्यवस्था
  • विज्ञान
  • संस्कृति
  • भारत
  • अंतरराष्ट्रीय
  • अफ्रीका
  • लैटिन अमेरिका
  • फिलिस्तीन
  • नेपाल
  • पाकिस्तान
  • श्री लंका
  • अमेरिका
  • एशिया के बाकी
हमारे बारे में
हमसे संपर्क करें
सब्सक्राइब करें
हमारा अनुसरण करो Facebook - Newsclick Twitter - Newsclick RSS - Newsclick
close menu
भारत
राजनीति
भाजपा की सदस्य संख्या
वीरेन्द्र जैन
04 Apr 2015
देश में सत्तारूढ भारतीय जनता पार्टी जब अपनी ऎतिहासिक विजय के बाद बहुत तेजी से अलोकप्रिय हुयी है और प्रतिष्ठापूर्ण दिल्ली विधानसभा का चुनाव बुरी तरह हार चुकी है, तब उसने दावा किया है कि वह पूरे दक्षिण एशिया की सबसे बड़ा पार्टी बन गयी है। उनका दावा है कि पिछले दिनों चले सदस्यता अभियान के बाद उसके दस करोड़ के लक्ष्य के समक्ष आठ करोड़ बयासी लाख सदस्य हो चुके हैं और हर रोज तेरह से चौदह लाख नये सदस्य बन रहे हैं। किसी भी दल की सही सदस्य संख्या का पता लगाने वाली कोई संस्था कार्यरत नहीं है और चुनाव आयोग भी मान्यता का स्तर तय करने के लिए दल को मिले मतों को आधार बनाती है। रोचक यह है कि दूसरा कोई भी राजनीतिक दल अपने सदस्यों की संख्या में गिरावट नहीं महसूस कर रहा है जिसका मतलब हुआ कि उनके सदस्यों की संख्या में वृद्धि का आधार या तो नये मतदाता होंगे या वे लोग होंगे जो अभी तक किसी दल के सदस्य नहीं थे।
 
राजनीतिक विश्लेषकों के अनुसार मार्क्सवादी कम्युनिष्ट पार्टी को छोड़ कर किसी भी दूसरे दल में पार्टी लेवी की नियमितता उसकी सदस्यता की शर्त नहीं है इसलिए उनकी सदस्य संख्या पुष्टि का कोई तरीका नहीं है। माकपा में आय के अनुरूप जो लेवी व्यवस्था है वह बहुत आदर्श व्यवस्था है और उसे दल के रजिस्ट्रेशन के लिए सभी दलों में अपनाये जाने की स्थितियां बनायी जाना चाहिए। इस दल में कम आय वालों को कम दर से व अधिक आय वालों से अधिक दर पर लेवी ली जाती है। यह व्यवस्था पार्टी को दौलत वालों के कब्जे से बचाती और अपने सदस्यों की संख्या के साथ साथ उनकी आय पर निगाह भी रखती है। यदि सारे दल इस व्यवस्था को अपना लें तो किसी को भी बड़े बड़े पूंजीपतियों के पास चन्दा माँगने नहीं जाना पड़ेगा और उनकी पार्टी सदस्यों के योगदान से ही चल सकेगी। राजनीतिक दल तभी राजनीतिक दलों की तरह चल पाते हैं जब सदस्य स्वयं उनके पास सदस्यता का अनुरोध करते हुए आयें व पार्टी के लक्ष्य में सहयोगी होने की इच्छा बताते हुए उसके अनुशासन के पालन के लिए सहमति दें।
 
भाजपा और उसके पर्यवेक्षक अगर चाहे तो कुछ ही बातों से अपनी सदस्यता की असलियत को परख सकते हैं। अभी हाल ही में देश के प्रधानमंत्री ने लोगों से गैस अनुदान त्यागने की अपील की है और भाजपा अपने   सदस्यों से गैस अनुदान त्यागने का अनुरोध कर सकती है। यदि इस आवाहन के बाद उसे सफलता मिल जाती है तो उसकी सदस्यता की पुष्टि हो जायेगी। भाजपा चाहे तो अपने सभी सदस्यों से दोपहिया वाहन चलाते समय किसी रंग विशेष का हेल्मेट पहिनने का अनुरोध कर सकती है और इससे किसी भी क्षेत्र विशेष में उसके सदस्यों के अनुपात और अनुशासन प्रियता का पता चल सकेगा। उल्लेखनीय है कि आम आदमी पार्टी ने लाखों लोगों को सफेद टोपी पहिनवा कर दिल्ली में अपने समर्थन का संकेत दे दिया था जिसके जबाब में भाजपा ने अपनी परम्परा से हटकर भगवा टोपियां  धारण कर ली थीं और काँग्रेस के लोग भी तिरंगी टोपी में दिखने लगे थे। स्मरणीय है कि प्रजा सोशलिस्ट और सोशलिस्ट पार्टी की लाल टोपी दिखना बन्द होने के बहुत बाद गले में भगवा दुपट्टा डालने की परम्परा भाजपा ने ही शुरू की थी। प्रधानमंत्री के स्वच्छ भारत के आवाहन पर यदि भाजपा के दस करोड़ लोग अपने परिवेश को स्वच्छ करने के लिए कोई भी सामूहिक कदम उठा लें तो कम से कम देश का पूरा पश्चिमी हिस्सा गन्दगी से मुक्त हो सकता है, व सदस्यता के पुष्टि हो सकती है।  
                                                                                                                        
 
भाजपा द्वारा घोषित संख्याएं पहले भी गलत साबित होती रही हैं। उल्लेखनीय है कि आम चुनावों के समय उन्होंने सभी नागरिकों के खातों में पन्द्रह लाख रुपये जमा करने का वादा किया था किंतु बाद में उसे चुनावी जुमला कह कर लाखों लोगों के भरोसे को ठेस पहुँचायी है। ट्विटर पर नकली फालोअर बनवा कर भ्रम पैदा करा चुकी इस पार्टी के आंकड़ों का अक्टूबर 2013 में लन्दन की एक कम्पनी ने पर्दाफाश करते हुए गड़बड़ी पकड़ी थी और बताया था कि मोदी के दस लाख फालोअर्स का दावा करने वाली साइट के आधे से अधिक फालोअर्स नकली हैं। सोशल साइट पर भाजपा के पक्ष में लिखने और भाजपा के कामों की उचित समीक्षा करने वालों को गाली देने के लिए हजारों की संख्या में नकली फेस बुक ट्वीटर एकाउंट भी बनाये गये थे। अभी भी गाली गलौज की भाषा में लिखने वाले नकली देशभक्तों की जाँच की जाये तो इनके प्रचारतंत्र का खेल समझ में आ सकता है। कश्मीर में सैकड़ों मन्दिरों के टूटने का सच और 1989 में अयोध्या में सैकड़ों लोगों के मारे जाने की अफवाह की सच्चाई वी जी वर्गीज और दूसरे लोगों की जाँच रिपोर्ट में सामने आ चुकी हैं।
 
अगर भाजपा की सदस्य संख्या सचमुच में उतनी ही है जितनी बतायी जा रही है तो इस प्रबन्धन का लाभ उनके कार्यक्रमों को मिलना चाहिए। वे नानाजी देशमुख की तरह भले ही देह्दान के लिए लोगों को प्रेरित न कर सकें तो भी नेत्रदान, रक्तदान समेत सम्पूर्ण साक्षरता और टीकाकरण आदि से तो सदस्यों को जोड़ा ही जा सकता है। सत्तासुख की जगह अगर कर्तव्यों से यह संख्या बल जुड़ सके तो उनकी राजनीति सफल रहेगी और सदस्यों में ज्यादा जोगी मठ उजाड़ जैसी नौबत नहीं आयेगी।
 

डिस्क्लेमर:- उपर्युक्त लेख मे व्यक्त किए गए विचार लेखक के व्यक्तिगत हैं, और आवश्यक तौर पर न्यूज़क्लिक के विचारो को नहीं दर्शाते ।

 

 

भाजपा
राजनीति
लेवी प्रणाली
सदस्यता अभियान

Related Stories

#श्रमिकहड़ताल : शौक नहीं मज़बूरी है..

आपकी चुप्पी बता रहा है कि आपके लिए राष्ट्र का मतलब जमीन का टुकड़ा है

अबकी बार, मॉबलिंचिग की सरकार; कितनी जाँच की दरकार!

आरक्षण खात्मे का षड्यंत्र: दलित-ओबीसी पर बड़ा प्रहार

झारखंड बंद: भूमि अधिग्रहण बिल में संशोधन के खिलाफ विपक्ष का संयुक्त विरोध

झारखण्ड भूमि अधिग्रहण संशोधन बिल, 2017: आदिवासी विरोधी भाजपा सरकार

यूपी: योगी सरकार में कई बीजेपी नेताओं पर भ्रष्टाचार के आरोप

मोदी के एक आदर्श गाँव की कहानी

क्या भाजपा शासित असम में भारतीय नागरिकों से छीनी जा रही है उनकी नागरिकता?

बिहार: सामूहिक बलत्कार के मामले में पुलिस के रैवये पर गंभीर सवाल उठे!


बाकी खबरें

  • न्यूज़क्लिक रिपोर्ट
    केरल: RSS और PFI की दुश्मनी के चलते पिछले 6 महीने में 5 लोगों ने गंवाई जान
    23 Apr 2022
    केरल के मुख्यमंत्री पिनराई विजयन ने हत्याओं और राज्य में सामाजिक सौहार्द्र को खराब करने की कोशिशों की निंदा की है। उन्होंने जनता से उन ताकतों को "अलग-थलग करने की अपील की है, जिन्होंने सांप्रदायिक…
  • राजेंद्र शर्मा
    फ़ैज़, कबीर, मीरा, मुक्तिबोध, फ़िराक़ को कोर्स-निकाला!
    23 Apr 2022
    कटाक्ष: इन विरोधियों को तो मोदी राज बुलडोज़र चलाए, तो आपत्ति है। कोर्स से कवियों को हटाए तब भी आपत्ति। तेल का दाम बढ़ाए, तब भी आपत्ति। पुराने भारत के उद्योगों को बेच-बेचकर खाए तो भी आपत्ति है…
  • न्यूज़क्लिक रिपोर्ट
    लापरवाही की खुराकः बिहार में अलग-अलग जगह पर सैकड़ों बच्चे हुए बीमार
    23 Apr 2022
    बच्चों को दवा की खुराक देने में लापरवाही के चलते बीमार होने की खबरें बिहार के भागलपुर समेत अन्य जगहों से आई हैं जिसमें मुंगेर, बेगूसराय और सीवन शामिल हैं।
  • डेविड वोरहोल्ट
    विंबलडन: रूसी खिलाड़ियों पर प्रतिबंध ग़लत व्यक्तियों को युद्ध की सज़ा देने जैसा है! 
    23 Apr 2022
    विंबलडन ने घोषणा की है कि रूस और बेलारूस के खिलाड़ियों को इस साल खेल से बाहर रखा जाएगा। 
  • डॉ. राजू पाण्डेय
    प्रशांत किशोर को लेकर मच रहा शोर और उसकी हक़ीक़त
    23 Apr 2022
    एक ऐसे वक्त जबकि देश संवैधानिक मूल्यों, बहुलवाद और अपने सेकुलर चरित्र की रक्षा के लिए जूझ रहा है तब कांग्रेस पार्टी को अपनी विरासत का स्मरण करते हुए देश की मूल तासीर को अक्षुण्ण बनाए रखने के लिए…
  • Load More
सब्सक्राइब करें
हमसे जुडे
हमारे बारे में
हमसे संपर्क करें

CC BY-NC-ND This work is licensed under a Creative Commons Attribution-NonCommercial-NoDerivatives 4.0 International License