NewsClick

NewsClick
  • English
  • राजनीति
  • अर्थव्यवस्था
  • विज्ञान
  • संस्कृति
  • भारत
  • अंतरराष्ट्रीय
  • हमारे लेख
  • हमारे वीडियो
search
menu

सदस्यता लें, समर्थन करें

image/svg+xml
  • सारे लेख
  • न्यूज़क्लिक लेख
  • सारे वीडियो
  • न्यूज़क्लिक वीडियो
  • राजनीति
  • अर्थव्यवस्था
  • विज्ञान
  • संस्कृति
  • भारत
  • अंतरराष्ट्रीय
  • अफ्रीका
  • लैटिन अमेरिका
  • फिलिस्तीन
  • नेपाल
  • पाकिस्तान
  • श्री लंका
  • अमेरिका
  • एशिया के बाकी
हमारे बारे में
हमसे संपर्क करें
सब्सक्राइब करें
हमारा अनुसरण करो Facebook - Newsclick Twitter - Newsclick RSS - Newsclick
close menu
भारत
राजनीति
भूख का खेल: नीति आयोग का मानना है कि भारत में भुखमरी बहुत गंभीर संकट नहीं है
मोदी सरकार के आधिकारिक चिन्तक वैश्विक भूख तालिका (ग्लोबल हंगर इंडेक्स) में 119 देशों में भारत के 100वें स्थान पर होने का विरोध कर रहे हैं.
पृथ्वीराज रूपावत
06 Dec 2017
Translated by महेश कुमार
NITI Aayog

निति आयोग के सदस्य वर्ष 2017 में जारी ग्लोबल हंगर इंडेक्स की लिस्ट में भारत का 119 देशों में से 100वें स्थान पर आने को भ्रामक बता रहे हैं, लगता है निति आयोग के सदस्य देश में भुखमरी की गंभीरता को भूल रहे हैं और या फिर यह उनकी सरकार को खुश करने की कोशिश है.

वैश्विक भूख सूचकांक (जी.एच.आई.) का मुख्य उद्देश्य, जिसे अंतर्राष्ट्रीय खाद्य नीति अनुसंधान संस्थान द्वारा डिजाइन किया गया है वह एक उपकरण है जो वैश्विक, क्षेत्रीय और राष्ट्रीय स्तर पर भूख को मापने और भूख को दूर करने और भूख को कम करने की दीर्घकालिक प्रगति को दिखाता है. वैश्विक स्तर पर जी.एच.आई. 2017 ने चार मुख्या संकेतकों के आधार पर औसत निकाला है, इनमें कुपोषण, कमज़ोर बच्चे, अविकसित बच्चे और बाल मृत्यु दर, इन चार संकेतों में से तीन संकेतो के आधार पर पांच साल से कम उम्र के बच्चों की स्थिति को दर्शाते हैं. इन संकेतों पर सवाल उठाते हुए, नीति आयोग के सदस्यों ने निष्कर्ष निकाला कि भूख सूचकांक बच्चों के पोषणरहित के प्रति "अत्यधिक पक्षपाती" है और दावा किया है कि वैश्विक भूख सूचकांक (जी.एच.आई.) "समग्र आबादी में भूख की स्थिति का सही प्रतिनिधित्व नहीं करता" है.

यह निराशाजनक है कि नीति आयोग के बुद्धिजीवियों ने जी.एच.आई. की गणना में इस्तेमाल विशिष्ट पद्धति को अपनाने के कई फायदे को भी नहीं माना है. सबसे पहले तो जी.एच.आई. में  कमज़ोर बच्चे और अविकसित बच्चे के संकेतकों को शामिल करना तीव्र रूप से पुरानी पोषणरहित बच्चों को प्रतिबिंबित करता है. दूसरे, चूंकि कमजोर बच्चे आबादी के सबसेट का निर्माण करते हैं, जिनके लिए आहार ऊर्जा, प्रोटीन, या सूक्ष्म पोषक तत्वों की कमी से बीमारी का खतरा अब्धता है और  गरीब तबके का शारीरिक और संज्ञानात्मक विकास रुक जाता हिया जिससे उनकी मृत्यु होने की स्थिति में इजाफा हो जाता है. या पद्धति न केवल बच्चों की पोषण स्थिति को दर्शाती है बल्कि पूरी आबादी की स्थिति को भी दर्शाती है. और तीसरा, स्वतंत्र रूप से मापक संकेतकों और सूचकांक के लिए एक से अधिक संयोजन से माप में होने वाली त्रुटियों के प्रभाव को कम करता है.

भारत में बाल स्वास्थ्य के संकेतकों के संदर्भ में भारत का स्थान खराब रहा है, खासकर कमज़ोर बच्चे के सम्बन्ध में, 119 देशों में से 117 वां स्थान, जो कि उन देशों से भी नीचे है जो, अकाल और युद्ध की वजह से पीछे है और बाल मृत्यु दर और बाल स्टंटिंग के मामले में, भारत क्रमशः 106 और 117 में स्थान पर है. राष्ट्रीय परिवार स्वास्थ्य सर्वेक्षण 2015-16 के अनुसार, अविकसित, कम वजन और कमज़ोर पांच साल से कम उम्र के बच्चों का प्रतिशत क्रमशः कम है, और वह क्रमश 38.4, 21.0 और वजन 35.7 है.

उन्होंने गणना में इस्तेमाल की गई बच्चे के लिए न्यूनतम ऊर्जा की आवश्यकता के लिए के तैयार कट-ऑफ को भी  "अनिर्णायक बहस" का दावा करते हुए सूचकांक की गणना में इस्तेमाल भुखमरी की घटनाओं सही नहीं माना. हालांकि उन्होंने कहा कि खाद्य और कृषि संगठन (एफएओ) के औसत से भारत के लिए (कट ऑफ) न्यूनतम ऊर्जा के पैमाने की आवश्यकता अलग है. उन्होंने यह भी संकेत दिया कि वैश्विक औसत से भारतीय औसत से अधिक है, और इसलिए उनके अनुसार भारत के खराब रैंक के लिए यह भी एक कारण है. लेकिन, वे इस तर्क का उल्लेख करना भूल गए कि प्रत्येक देश की अपनी गणना का पैमाना है, जो कि सभी देशों की जी.एच.आई. गणना का आधार है, और वह सब पर लागू होता है. आई.सी.एम.आर. और एन.आई.एन. की सिफारिशों के मुताबिक भारत में न्यूनतम आवश्यकता के अनुसार 2400 किलोग्राम केलोरी प्रति दिन (ग्रामीण निवासियों के लिए) और 2100 (शहरी निवासियों के लिए) के लिए उपयोग जरूरी है. यह एफ.ए.ओ. की वैश्विक औसत 1800 किलो केलोरी  से अधिक है. इसका कारण यह है कि भारत में, लोग पश्चिमी यूरोप या उत्तरी अमेरिका के लोगों की तुलना में ज्यादा कठिन शारीरिक श्रम करटे हैं. इसलिए कैलोरी की आवश्यकता अधिक है.

कई अन्य इंडेक्स हैं जहां भारत सबसे निचले पायदान पर आता हैं: जैसे शिशु मृत्यु दर सूचकांक (175/223), शिक्षा सूचकांक (145/197), वर्ल्ड ख़ुशी इंडेक्स (122/155) और सबसे व्यापक और विशाल के मामले में भारत, मानव विकास सूचकांक में (131 /188) है. इनके बारे में नीती आइए क्या करेंगा?

NITI Aayog
Global Hunger Index
FAO
Modi Govt
Hunger Crisis

Related Stories

कटाक्ष: मोदी जी का राज और कश्मीरी पंडित

भारत के निर्यात प्रतिबंध को लेकर चल रही राजनीति

सरकारी एजेंसियाँ सिर्फ विपक्ष पर हमलावर क्यों, मोदी जी?

भाजपा के लिए सिर्फ़ वोट बैंक है मुसलमान?... संसद भेजने से करती है परहेज़

भारत में संसदीय लोकतंत्र का लगातार पतन

जन-संगठनों और नागरिक समाज का उभरता प्रतिरोध लोकतन्त्र के लिये शुभ है

मोदी सरकार 'पंचतीर्थ' के बहाने अंबेडकर की विचारधारा पर हमला कर रही है

लोगों की बदहाली को दबाने का हथियार मंदिर-मस्जिद मुद्दा

ज्ञानवापी, ताज, क़ुतुब पर बहस? महंगाई-बेरोज़गारी से क्यों भटकाया जा रहा ?

तिरछी नज़र: ...ओह माई गॉड!


बाकी खबरें

  • aicctu
    मधुलिका
    इंडियन टेलिफ़ोन इंडस्ट्री : सार्वजनिक क्षेत्र के उपक्रमों के ख़राब नियोक्ताओं की चिर-परिचित कहानी
    22 Feb 2022
    महामारी ने इन कर्मचारियों की दिक़्क़तों को कई गुना तक बढ़ा दिया है।
  • hum bharat ke log
    डॉ. लेनिन रघुवंशी
    एक व्यापक बहुपक्षी और बहुआयामी दृष्टिकोण की आवश्यकता
    22 Feb 2022
    सभी 'टूटे हुए लोगों' और प्रगतिशील लोगों, की एकता दण्डहीनता की संस्कृति व वंचितिकरण के ख़िलाफ़ लड़ने का सबसे अच्छा तरीका है, क्योंकि यह परिवर्तन उन लोगों से ही नहीं आएगा, जो इस प्रणाली से लाभ उठाते…
  • MGNREGA
    रबीन्द्र नाथ सिन्हा
    ग्रामीण संकट को देखते हुए भारतीय कॉरपोरेट का मनरेगा में भारी धन आवंटन का आह्वान 
    22 Feb 2022
    ऐसा करते हुए कॉरपोरेट क्षेत्र ने सरकार को औद्योगिक गतिविधियों के तेजी से पटरी पर आने की उसकी उम्मीद के खिलाफ आगाह किया है क्योंकि खपत की मांग में कमी से उद्योग की क्षमता निष्क्रिय पड़ी हुई है। 
  • Ethiopia
    मारिया गर्थ
    इथियोपिया 30 साल में सबसे ख़राब सूखे से जूझ रहा है
    22 Feb 2022
    इथियोपिया के सूखा प्रभावित क्षेत्रों में लगभग 70 लाख लोगों को तत्काल मदद की ज़रूरत है क्योंकि लगातार तीसरी बार बरसात न होने की वजह से देहाती समुदाय तबाही झेल रहे हैं।
  • Pinarayi Vijayan
    भाषा
    किसी मुख्यमंत्री के लिए दो राज्यों की तुलना करना उचित नहीं है : विजयन
    22 Feb 2022
    विजयन ने राज्य विधानसभा में कहा, ‘‘केरल विभिन्न क्षेत्रों में कहीं आगे है और राज्य ने जो वृद्धि हासिल की है वह अद्वितीय है। उनकी टिप्पणियों को राजनीतिक हितों के साथ की गयी अनुचित टिप्पणियों के तौर पर…
  • Load More
सब्सक्राइब करें
हमसे जुडे
हमारे बारे में
हमसे संपर्क करें

CC BY-NC-ND This work is licensed under a Creative Commons Attribution-NonCommercial-NoDerivatives 4.0 International License