NewsClick

NewsClick
  • English
  • राजनीति
  • अर्थव्यवस्था
  • विज्ञान
  • संस्कृति
  • भारत
  • अंतरराष्ट्रीय
  • हमारे लेख
  • हमारे वीडियो
search
menu

सदस्यता लें, समर्थन करें

image/svg+xml
  • सारे लेख
  • न्यूज़क्लिक लेख
  • सारे वीडियो
  • न्यूज़क्लिक वीडियो
  • राजनीति
  • अर्थव्यवस्था
  • विज्ञान
  • संस्कृति
  • भारत
  • अंतरराष्ट्रीय
  • अफ्रीका
  • लैटिन अमेरिका
  • फिलिस्तीन
  • नेपाल
  • पाकिस्तान
  • श्री लंका
  • अमेरिका
  • एशिया के बाकी
हमारे बारे में
हमसे संपर्क करें
सब्सक्राइब करें
हमारा अनुसरण करो Facebook - Newsclick Twitter - Newsclick RSS - Newsclick
close menu
भारत
राजनीति
BJP सरकार को आलोचना बर्दाश्त नहीं, ख़िलाफ़ में लिखे गए पोस्ट के URL हो जाएंगे ब्लॉक
मीडिया रिपोर्ट के मुताबिक कुल 1,329 सोशल मीडिया यूआरएल (URL) को सरकार के इशारे पर नवंबर 2017 तक ब्लॉक कर दिया गया या हटा दिया गया। इस मामले में 2016की तुलना में 38% की वृद्धि हुई।
न्यूज़क्लिक रिपोर्ट
12 Mar 2018
Social Media

जब से बीजेपी के नेतृत्व एनडीए सरकार सत्ता में आई है तब से इसने खास तौर से सोशल मीडिया पर हमला करना शुरू कर दिया।

"आपत्तिजनक सामग्री" के कारण मोदी सरकार के निर्देश पर ब्लॉक किए गए या हटाए गए सोशल मीडिया यूआरएल की संख्या पर नज़र डालें तो स्पष्ट हो जाएगा कि सरकार आलोचना को बर्दाश्त करना नहीं चाहती है।

मीडिया रिपोर्ट के मुताबिक एक सरकारी कमेटी की सिफारिश पर नवंबर 2017 तक कुल 1,32 9 सोशल मीडिया यूआरएल को कथित तौर पर ब्लॉक कर दिया गया था या हटा दिया गया था।

वर्ष 2016 में इसकी संख्या 964 (वर्ष 2017 के पहले 11 महीनों में 38% की वृद्धि हुई) थी, जबकि 2015 में इसकी संख्या 587 थी। वहीं वर्ष 2014 में कुल 10 यूआरएल को ही ब्लॉक किया गया था या हटा दिया गया था।

वेब 2.0 की यह सेंसरशिप सूचना प्रौद्योगिकी (आईटी) अधिनियम 2000 की धारा 79 (3) (बी) के तहत इस्तेमाल की जा रही है।

फेसबुक पर वर्ष 2016 में 363 और वर्ष 2015 में 352 यूआरएल ब्लॉक किया गया वहीं नवंबर 2017 तक कुल 530 यूआरएल ब्लॉक किया गया।

वहीं अन्य सोशल मीडिया ट्विटर पर नवंबर 2017 तक 588 यूआरएल ब्लॉक किए गए। वर्ष 2016 में यूआरएल ब्लॉक करने की संख्या 196 थी जबकि वर्ष 2015 में कुल 27 यूआरएल को ब्लॉक कर दिया गया था। वहीं यूट्यूब पर 123 यूआरएल को नवंबर 2017 तक ब्लॉक किया गया जबकि 2016 में इसकी संख्या 3 थी और 2015 में 125 थी।

हालांकि, कंटेंट हटाने को लेकर सोशल मीडिय कंपनियों से किए गए सरकार की ओर से अनुरोध में इज़ाफा हुआ वहीं यूआरएल ब्लॉक करने के अदालत की तरफ से दिए गए आदेश में कमी दर्ज की गई।

हालांकि 432 यूआरएल 2014 में अदालत के आदेशों के बाद ब्लॉक कर दिया गया या हटा दिया गया। इसकी संख्या साल 2015 में 632 तक पहुंच गई। वर्ष 2016 में कुल 100 यूआरएल अदालत के आदेशों के बाद ब्लॉक कर दिए गए और यह संख्या नवंबर 2017 तक 83 तक पहुंच गई थी।

द हिंदू अख़बार के अनुसार इलेक्ट्रॉनिक्स एंड इन्फॉर्मेशन टेक्नोलॉजी मिनिस्ट्री की एक आंतरिक टिप्पणी में कहा गया कि, "यद्यपि सोशल मीडिया साइटें सूचना साझा करने और आदान-प्रदान करने का एक अच्छा माध्यम है लेकिन कुछ असामाजिक क़िस्म के तत्व अफवाहों को फैलाने और इस तरह की आपत्तिजनक सामग्री पोस्ट करने के लिए इस मंच का इस्तेमाल कर रहे हैं जिसके चलते समाज में बाधा उत्पन्न हो जाता है।"

सेंसरशिप को न्यायसंगत ठहराते हुए कहा कि, "यह देखा गया है कि दुर्भावनापूर्ण उद्देश्यों के लिए सोशल नेटवर्किंग साइटों का दुरुपयोग बढ़ रहा है। इन वेबसाइटों को शरारती लोगों द्वारा लक्षित उपयोगकर्ताओं या उपयोगकर्ताओं के समूह की व्यक्तिगत जानकारी हासिल करने के लिए इस्तेमाल किया जा रहा है।"

भारतीय इंटरनेट यूजर्स को मैलवेयर से बचाने के बजाए सामग्री को ब्लॉक या अक्षम करने के लिए सरकारी आदेशों में वृद्धि से लगता है कि सरकार बोलने की आज़ादी और नागरिकों के असंतोष के अधिकार पर अंकुश लगाना चाहती है। ज़्यादातर इंटरनेट यूजर्श सोशल मीडिया का इस्तेमाल सरकार की आलोचना करने और अपने राजनीतिक विचार साझा करने के लिए करते हैं।

उदाहरण स्वरूप 26 सितंबर, 2017 को फेसबुक ने मोहम्मद अनस नाम के एक पत्रकार के खाते को 30 दिनों तक के लिए ब्लॉक कर दिया। अनस ने गुजरात के एक व्यापारी के एक कैशमेमो की एक तस्वीर साझा किया था। इस कैशमेमो के नीचे लिखा था: "कमल का फूल हमारी भूल"।

ये बीजेपी की विनाशकारी आर्थिक नीतियों को लेकर गुजरात में व्यापारियों की निराशा को दिखा रहा था। ठीक जब ये कैशमेमो वायरल हो रहा था उसके कुछ समय बाद गुजरात में विधानसभा चुनाव होने वाले थे। इसको लेकर बीजेपी की चिंता बढ़ रही थी।

इसी प्रकार फेसबुक पर एक बेहद लोकप्रिय पेज "ह्यूमन्स ऑफ हिंदुत्व" के नाम से था जो खुले तौर पर व्यंग्यपूर्ण पोस्ट में बीजेपी सरकार और आरएसएस के हिंदू कट्टरपंथी विचारधारा की आलोचना की थी। इसे भी पिछले साल अस्थायी रूप से ब्लॉक कर दिया गया था।

बीजेपी शासन के अधीन देश में अल्पसंख्यक समुदाय के लोगों के साथ-साथ दलित लोगों के ख़िलाफ़ हमले हुए और कई लोगों को अपनी जान गंवानी पड़ी। इसके अलावा सांप्रदायिक ध्रुवीकरण आरएसएस-भाजपा की राजनीतिक रणनीति का हिस्सा है।

फेसबुक की "सरकारी अनुरोध रिपोर्ट" के मुताबिक़ 'भाजपा सरकार द्वारा किए गए आंकड़ों के अनुरोध भी लगातार बढ़ रहे हैं। वर्ष 2017 में जनवरी से जून के बीच भाजपा की अगुआई ने फेसबुक से आँकड़ों के लिए कुल 9, 853 अनुरोध किया था। वर्ष 2016 जुलाई और दिसंबर के बीच कुल 7,289 अनुरोध किए गए, जबकि 2016 के पहले छह महीनों में ऐसे अनुरोधों की संख्या 6,324 थी।

फेसबुक ने यह भी कहा कि वर्ष 2017 के पहले छमाही में "क़ानून तथा प्रसंस्करण एजेंसियों और इलेक्ट्रॉनिक्स तथा सूचना प्रौद्योगिकी मंत्रालय के तहत इंडिया कंप्यूटर इमरजेंसी रिस्पांस टीम" के कानूनी अनुरोधों पर भारत में 1,228 कंटेंट को प्रतिबंधित किया गया।

कंपनी ने आगे कहा कि "ज़्यादातर कंटेंट को धर्म और घृणात्मक टिप्पणी से संबंधित स्थानीय कानूनों का उल्लंघन करने के आरोप में प्रतिबंधित किया गया था।"

Social Media
BJP
BJP-RSS

Related Stories

भाजपा के इस्लामोफ़ोबिया ने भारत को कहां पहुंचा दिया?

कश्मीर में हिंसा का दौर: कुछ ज़रूरी सवाल

सम्राट पृथ्वीराज: संघ द्वारा इतिहास के साथ खिलवाड़ की एक और कोशिश

हैदराबाद : मर्सिडीज़ गैंगरेप को क्या राजनीतिक कारणों से दबाया जा रहा है?

ग्राउंड रिपोर्टः पीएम मोदी का ‘क्योटो’, जहां कब्रिस्तान में सिसक रहीं कई फटेहाल ज़िंदगियां

धारा 370 को हटाना : केंद्र की रणनीति हर बार उल्टी पड़ती रहती है

मोहन भागवत का बयान, कश्मीर में जारी हमले और आर्यन खान को क्लीनचिट

मंडल राजनीति का तीसरा अवतार जाति आधारित गणना, कमंडल की राजनीति पर लग सकती है लगाम 

बॉलीवुड को हथियार की तरह इस्तेमाल कर रही है बीजेपी !

गुजरात: भाजपा के हुए हार्दिक पटेल… पाटीदार किसके होंगे?


बाकी खबरें

  • jammu and kashmir
    अजय सिंह
    मुद्दा: कश्मीर में लाशों की गिनती जारी है
    13 Jan 2022
    वर्ष 2020 और वर्ष 2021 में सेना ने, अन्य सुरक्षा बलों के साथ मिलकर 197 मुठभेड़ अभियानों को अंजाम दिया। इनमें 400 से ज्यादा कश्मीरी नौजवान मारे गये।
  • Tilka Majhi
    जीतेंद्र मीना
    आज़ादी का पहला नायक आदिविद्रोही– तिलका मांझी
    13 Jan 2022
    ब्रिटिश साम्राज्य की स्थापना के बाद प्रथम प्रतिरोध के रूप में पहाड़िया आदिवासियों का यह उलगुलान राजमहल की पहाड़ियों और संथाल परगना में 1771 से लेकर 1791 तक ब्रिटिश हुकूमत, महाजन, जमींदार, जोतदार और…
  • marital rape
    सोनिया यादव
    मैरिटल रेप को लेकर दिल्ली हाईकोर्ट सख्त, क्या अब ख़त्म होगा महिलाओं का संघर्ष?
    13 Jan 2022
    गैर-सरकारी संगठनों द्वारा दाखिल याचिकाओं पर सुनवाई करते हुए अदालत ने कहा कि मैरिटल रेप के लिए भी सज़ा मिलनी चाहिए। विवाहिता हो या नहीं, हर महिला को असहमति से बनाए जाने वाले यौन संबंध को न कहने का हक़…
  • muslim women
    अनिल सिन्हा
    मुस्लिम महिलाओं की नीलामीः सिर्फ क़ानून से नहीं निकलेगा हल, बडे़ राजनीतिक संघर्ष की ज़रूरत हैं
    13 Jan 2022
    बुल्ली और सुल्ली डील का निशाना बनी औरतों की जितनी गहरी जानकारी इन अपराधियों के पास है, उससे यह साफ हो जाता है कि यह किसी अकेले व्यक्ति या छोटे समूह का काम नहीं है। कुछ लोगों को लगता है कि सख्त कानूनी…
  • up elections
    न्यूज़क्लिक रिपोर्ट
    यूपी चुनाव 2022: बीजेपी में भगदड़ ,3 दिन में हुए सात इस्तीफ़े
    13 Jan 2022
    सुहेलदेव भारतीय समाज पार्टी के अध्यक्ष और उत्तर प्रदेश के पूर्व कैबिनेट मंत्री ओमप्रकाश राजभर ने दावा किया है कि रोजाना राज्य की योगी आदित्यनाथ सरकार के एक-दो मंत्री इस्तीफा देंगे और 20 जनवरी तक यह…
  • Load More
सब्सक्राइब करें
हमसे जुडे
हमारे बारे में
हमसे संपर्क करें

CC BY-NC-ND This work is licensed under a Creative Commons Attribution-NonCommercial-NoDerivatives 4.0 International License