NewsClick

NewsClick
  • English
  • राजनीति
  • अर्थव्यवस्था
  • विज्ञान
  • संस्कृति
  • भारत
  • अंतरराष्ट्रीय
  • हमारे लेख
  • हमारे वीडियो
search
menu

सदस्यता लें, समर्थन करें

image/svg+xml
  • सारे लेख
  • न्यूज़क्लिक लेख
  • सारे वीडियो
  • न्यूज़क्लिक वीडियो
  • राजनीति
  • अर्थव्यवस्था
  • विज्ञान
  • संस्कृति
  • भारत
  • अंतरराष्ट्रीय
  • अफ्रीका
  • लैटिन अमेरिका
  • फिलिस्तीन
  • नेपाल
  • पाकिस्तान
  • श्री लंका
  • अमेरिका
  • एशिया के बाकी
हमारे बारे में
हमसे संपर्क करें
सब्सक्राइब करें
हमारा अनुसरण करो Facebook - Newsclick Twitter - Newsclick RSS - Newsclick
close menu
भारत
राजनीति
दादरी : एक और मौत
महेश कुमार
01 Oct 2015

हम किस समाज में रह रहे हैं? एक ऐसा समाज जहाँ एक शक की बिना पर एक आदमी की जान ले ली जाती है. जहां गाय को माता बुलाने वाली हिन्दुत्व की फ़ौज 80 वर्ष की बुजुर्ग महिला की छाती पर अपने पैरो से हमला करती है. उन्हें अपने जूतों के नीचे रौंदती है. उन्ही की आँखों के सामने उनकी जवान लड़कियों के साथ अश्लील हारकर की जाती है. और गौ रक्षा के नाम पर पूरे परिवार और गाँव की हज़ारों की भीड़ के सामने एक व्यक्ति को दिन-दहाड़े मौत के घाट उतार दिया जाता है. क्या हमारे देश में कानून नाम की कोई चीज़ है या नहीं? क्या हम एक सभ्य समाज में रह रहे हैं? ये सभी सवाल हर उस इंसान के दिल-ओ-दिमाग में कौंध रहे हैं जो एक बेहतर और सबके रहने लायक समाज की कल्पना को दिल में लिए जीते हैं. ऐसा नहीं कि ऐसी घटना पहली बार घटी है? ऐसी घटनाएं पहले भी घटती रही हैं लेकिन अब जैसे इस तरह की घटनाओं में जैसे बाढ़ सी आ गयी है. इसके कारण खोजने होंगे

दादरी की घटना एक बड़ी राजनैतिक योजना का हिस्सा है

हाल ही में द वायर नाम के एक वेब पोर्टल में सिद्धार्थ वरदराजन ने एक लेख में 2014 के लोकसभा चुनाव में मोदी द्वारा दिए गए दो भाषणों का जिक्र किया जिसमें एक भाषण पश्चिमी उत्तर प्रदेश और दूसरा भाषण बिहार में दिया था. यु.पी. के अपने भाषण में मोदी ने “गुलाबी क्रान्ति” के बारे में बड़े ही विस्तार से भाषण दिया. “अपने भाषणों में मोदी ने कहा कि कांग्रेस सरकार गावों को पशुओं से खाली कर रही है. कांग्रेस “वोट की राजनीती” के लिए “गुलाबी क्रांति” को बढ़ावा दे रही है. मोदी जी आगे कहते हैं कि हमने हरित क्रान्ति और स्वेत क्रांति के बारे में सूना था लेकिन “गुलाबी क्रांति” के बारे में कभी नहीं सूना? गुलाबी क्रान्ति का मतलब है पशुओं का वध. आपको मालूम है कि मटन का रंग गुलाबी होता है, और वे इसका निर्यात कर रहे हैं..और इसकी वजह से हमारे पशु धन का वध किया जा रहा है, गाय का वध किया जा रहा है...या फिर उनकी ह्त्या के लिए उन्हें विदेश भेजा दिया जाता है...और अब कांग्रेस कह रही है अगर आप हमें वोट दें तो हम आपको गाय वध करने की अनुमति दे देंगे”.

बिहार के अपने भाषण में मोदी ने कहा “यदुवंश के नेता जैसे मुलायम सिंह यादव और लालू यादव कैसे कांग्रेस के साथ जा सकते हैं? में उनसे पूछना चाहता हूँ वो ऐसे लोगो का समर्थन कैसे कर सकते हैं जो देश में “गुलाबी क्रांति” लाना चाहते हैं? जब किसी पशु को काटा जाता है तो उसके मीट का रंग गुलाबी होता है और उसे गुलाबी क्रांति कहा जाता है...गाँव-गाँव में पशु धन की ह्त्या की जा रही है, पशुओं की चोरी कर उन्हें बांग्लादेश भेजा जा रहा है...पूरे देश में बड़े-बड़े बुचडखाने खुल गए हैं....कांग्रेस किसानों को सब्सिडी नहीं देती है और न ही यादव को गाय पालने के लिए सहयता. लेकिन अगर कोई गायों को मारने के लिए बुचडखाना खोलता है तो सरकार उन्हें सब्सिडी देती है.”

मोदी जी के भाषण के उलट सच क्या है? जब से मोदी सरकार सत्ता में आई है तब से बीफ का निर्यात काफी बढ़ गया है. क्या अब मोदी जी भी “गुलाबी क्रांति” के पक्षधर हो गए हैं. हाँ एक बात और बता दूँ कि हमारे देश में जो 6 बसे बड़े बीफ निर्यातक हैं उनमें 4 हिन्दू हैं. यानी व्यापार का सवाल आये तो बीफ निर्यात में भी हिन्दू ज्यादा कमाए और जब खाने का सवाल आये हम बीफ खाने वाले मुसलामानों की गर्दन पर अपना पैर रख देंगे. यह सब क्या है भाई? यह तो वही काहावत हो गयी कि चिट भी मेरी पट भी मेरी और अंटा मेरे बाप का.

खैर अब मोदी के उपरोक्त दोनों भाषणों गौर करते हैं. उन्होंने अपने भाषणों के जरिए साम्प्रदायिक उन्माद की जड़ को लोकसभा चुनाव के दौरान ही डाल दी थी. और रही सही कसर भाजपा के पूर्ण बहुमत से सत्ता में आने से पूरी हो गयी. इन भाषणों का असर पश्चिमी उत्तर प्रदेश में अच्छा खासा देखने को मिला. मुजफ्फरनगर दंगो से लेकर कोई न कोई साम्प्रदायिक घटना इस पूरे क्षेत्र में घटती रहती है. दादरी भी पश्चिमी उत्तर प्रदेश का हिसा है. यानी कि एक सोची समझी साजिश के तहत उत्तर प्रदेश और बिहार में सांप्रदायिक विभाजन पैदा करने की कोशिश की जा रही है. संघ और भाजापा लव जिहाद, घर वापसी, राम जन्म भूमि, हिन्दुओ को ज्यादा बच्चे पैदा करने जैसे मुद्दों के आधार पर पूरे यु.पी. में सांप्रदायिक विभाजन पैदा करने की कोशिश करती रही है. भाजपा के सत्ता में आने के बाद तो जैसे हिन्दुत्ववादी संगठन खुले-आम धमकियां देने का काम कर रहे हैं. सेंकडों नहीं बल्कि हज़ारों घटनाए हुयी हैं जिनके जरिए सांप्रदायिक उन्माद फैलाने की कोशिश की गयी. यहाँ तक कि संघ से जुड़े हिन्दू संगठनों के कार्यकर्ताओ ने माहौल को खराब करने के लिए इबादातगाहों और पूजाघरों में मांस फैंका ताकि दंगे हो सके, लेकिन वे वक्त पर पकड़ लिए गए और बड़ी घटना होने से टल गयी. पूरे देश में इस तरह की घटनाओं में इजाफा हो रहा है लेकिन सरकार इस तरह की घटनाओं का सख्ती से संज्ञान लेने को तैयार नहीं है क्योंकि वह खुद इस विचारधारा को बढ़ावा दे रही है.

इंडियन एक्सप्रेस की एक खबर के अनुसार मृत मोहम्मद अखलाक के गाँव बिसार, दादरी के 10 किलोमीटर के दायरे में समाधान सेना नमाक एक संस्था लगातार पिछले चार महीने से सांप्रदायिक उन्माद को बढाने का काम कर रही है. इस सेना के कार्यकर्ता हिन्दू इलाकों में मुस्लिम दुकानों के होने का विरोध, मस्जिदों में लाउड स्पीकर के होने का विरोध और काल्पनिक गौ ह्त्या के बारे में दुष्प्रचार करते रहे हैं. इसका गठन तडीपार गोविन्द चौधुरी ने वीरापुर गाँव में किया था. बुद्धवार को यह व्यक्ति अपने घर से फरार पाया गया और समाधान सेना का कार्यालय भी बंद था. वीरापुर के प्रधान अमन कहते हैं कि चौधुरी इलाके के लिए एक दर्द बन गया है. गोविन्द चौधुरी आस-पास के सभी गावों में गौ ह्त्या और हिन्दुओ की घटती आबादी पर मीटिंग करता था और मुसलमान कौम कैसे हिन्दू कौम के लिए खतरा है इसका भी दुष्प्रचार करता था. समाधान सेना के इस दुष्प्रचार की वजह से पहली बार क्षेत्र के जारचा गाँव में पहली साम्प्रदायिक घटना घटी जिसमें एहसान के बेटे आदिल ने गाँव में पंखा मुरम्मत करने की एक दूकान खोली तो उस पर यह कहकर हमला कर दिया की जिस ज़मीन पर वह दूकान खोली है वह तो हिन्दूओ से सम्बंधित है. आदिल के पिता एहसान ने कहा कि गाँव में हिन्दू और मुस्लिम ज़मीन के क्या मायने हैं? बाद में पुलिस ने चौधुरी समेत अन्य लोगों को जो इस हमले में शामिल थे को गिरफ्तार कर लिया. दो महीने पहले ही दादरी के ही कैमराला गाँव में पशुओं की तस्करी के लगाए गए इलज़ाम में तीन मुस्लिम युवाओं आरिफ, अनस और नाजिम को भीड़ ने मार दिया. दो भेंसो को बहार निकालकर पूरी गाडी में आग के हवाले कर दिया था और तीनों को बेरहमी से मार दिया गया. हाल ही में बागपत प्रशासन ने गोविन्द चौधुरी को गूंडा एक्ट के कारण जिला से बाहर रहने का निकाला दे दिया है. यानी हिन्दुत्व की रक्षा में अपराधी, सामंत, ज़मींदार और संपन्न लोग शामिल हैं जो गावों में वैसे ही गरीबों का खून चूसने के लिए जाने जाते हैं. यह नापाक गठबंधन संघ और भाजपा के एजंडे को लागू करने वाली सेना है. और इनकी मार को को झेलनी वाली जनता की संख्या करोड़ों में है.

कुल मिलाकर निष्कर्ष यह है कि मोदी के सत्ता में आने के बाद पहले से मौजूद हिन्दुत्व वादी संगठन और रोज़ नए-नए पैदा हो रहे संगठन साम्प्रदायिक उन्माद को बढाने और समाज को धार्मिक ध्रुवीकरण की तरफ ले जाने की पूरी कोशिश कर रहे हैं जिससे कि इस ध्रुवीकरण का फायदा भाजपा और संघ को मिल सके. इसका जवाब कांग्रेस या समाजवादी पार्टियों के पास तो नहीं है अगर होता तो इस तरह की साम्प्रदायिक घटनाएं नहीं घटती. हमारे देश में ऐसी भी सरकारें रही हैं जिन्होंने किसी भी तरह की साम्प्रदायिक घटना नहीं होने दी. और न ही धर्म के नाम पर एक क़त्ल होने दिया. पश्चिम बंगाल, त्रिपुरा और केरल के वामपंथी सरकारें इसके लिए जानी जाती रही हैं क्योंकि उन्होंने साम्प्रदायिकता के विरुद्ध हमेशा वैचारिक लड़ाई लड़ी और उन्हें कभी हद से आगे नहीं बढ़ने दिया. हमें आज ऐसी मिसालों के साथ इन साम्प्रदायिक ताकतों के वैचारिक और शारीरिक हमलों के खिलाफ एकजुट होना होगा. ऐसी ताकतों के पीछे नहीं जो खुद ही साम्प्रदायिक मसलों पर ढुल-मुल रहते हैं बल्कि ऐसी ताकतों के साथ जो सत्ता के परवा किये बिना मजबूती से इनका मुकाबला करते हैं. करोड़ों जनता जो इनकी मार को झेल रही है उसे तो करवट लेनी पड़ेगी ताकि हम आराम से अपने घर में बैठ कर अपनी पसंद का खाना खा सके. सनद रहे ये धर्म के ठेकेदार अभी तक आपकी रसोई तक ही घुसे हैं इनकी कोशिश तो आपके बेडरूम में घुसने की है अगर आज इनके खिलाफ आवाज़ अनहि उठायी तो कर ये लोग सच आपके बेडरूम में घुस कर बैठ जायेंगे और आप कुछ नहीं कर पायेंगे.

 

डिस्क्लेमर:- उपर्युक्त लेख में वक्त किए गए विचार लेखक के व्यक्तिगत हैं, और आवश्यक तौर पर न्यूज़क्लिक के विचारों को नहीं दर्शाते ।

 

दादरी
गौमांस
भाजपा
नरेन्द्र मोदी
समाजवादी सरकार
मुलायम सिंह
अखिलेश यादव
साम्प्रदायिकता
धर्मनिरपेक्ष

Related Stories

#श्रमिकहड़ताल : शौक नहीं मज़बूरी है..

पेट्रोल और डीज़ल के बढ़ते दामों 10 सितम्बर को भारत बंद

आपकी चुप्पी बता रहा है कि आपके लिए राष्ट्र का मतलब जमीन का टुकड़ा है

अबकी बार, मॉबलिंचिग की सरकार; कितनी जाँच की दरकार!

आरक्षण खात्मे का षड्यंत्र: दलित-ओबीसी पर बड़ा प्रहार

झारखंड बंद: भूमि अधिग्रहण बिल में संशोधन के खिलाफ विपक्ष का संयुक्त विरोध

झारखण्ड भूमि अधिग्रहण संशोधन बिल, 2017: आदिवासी विरोधी भाजपा सरकार

यूपी: योगी सरकार में कई बीजेपी नेताओं पर भ्रष्टाचार के आरोप

मोदी के एक आदर्श गाँव की कहानी

क्या भाजपा शासित असम में भारतीय नागरिकों से छीनी जा रही है उनकी नागरिकता?


बाकी खबरें

  • Fab and Ceat
    सोनिया यादव
    विज्ञापनों की बदलती दुनिया और सांप्रदायिकता का चश्मा, आख़िर हम कहां जा रहे हैं?
    23 Oct 2021
    विकासवादी, प्रगतिशील सोच वाले इन विज्ञापनों से कंपनियों को कितना फायदा या नुकसान होगा पता नहीं, लेकिन इतना जरूर है कि ये समाज में सालों से चली आ रही दकियानुसी परंपराओं और रीति-रिवाजों के साथ-साथ…
  • Georgia
    एम. के. भद्रकुमार
    बाइडेन को रूस से संबंध का पूर्वानुमान
    23 Oct 2021
    रूसी और चीनी रणनीतियों में समानताएं हैं और संभवतः उनमें परस्पर एक समन्वय भी है। 
  • Baghjan Oilfield Fire
    अयस्कांत दास
    तेल एवं प्राकृतिक गैस की निकासी ‘खनन’ नहीं : वन्यजीव संरक्षण पैनल
    23 Oct 2021
    इस कदम से कुछ बेहद घने जंगलों और उसके आस-पास के क्षेत्रों में अनियंत्रित ढंग से हाइड्रोकार्बन के दोहन का मार्ग प्रशस्त होता है, जो तेल एवं प्राकृतिक गैस क्षेत्र में कॉर्पोरेट दिग्गजों के लिए संभावित…
  • Milton Cycle workers
    न्यूज़क्लिक टीम
    वेतन के बग़ैर मिल्टन साइकिल के कर्मचारी सड़क पर
    23 Oct 2021
    सोनीपत के मिल्टन साइकिल कंपनी के कर्मचारी पिछले छह महीने से अपनी तनख़्वाह का इंतज़ार कर रहे है। संपत्ति को लेकर हुए विवाद के बाद मिल्टन के मालिकों ने फ़ैक्ट्री बंद कर दी लेकिन कर्मचारियों का न वेतन…
  • COVID
    उज्जवल के चौधरी
    100 करोड़ वैक्सीन डोज़ : तस्वीर का दूसरा रुख़
    23 Oct 2021
    एक अरब वैक्सीन की ख़ुराक पूरी करने पर मीडिया का उत्सव मनाना बचकाना तो है साथ ही गलत भी है। अब तक भारत की केवल 30 प्रतिशत आबादी को ही पूरी तरह से टीका लगाया गया है, और इस आबादी में से एक बड़ी संख्या ने…
  • Load More
सब्सक्राइब करें
हमसे जुडे
हमारे बारे में
हमसे संपर्क करें

CC BY-NC-ND This work is licensed under a Creative Commons Attribution-NonCommercial-NoDerivatives 4.0 International License