NewsClick

NewsClick
  • English
  • राजनीति
  • अर्थव्यवस्था
  • विज्ञान
  • संस्कृति
  • भारत
  • अंतरराष्ट्रीय
  • हमारे लेख
  • हमारे वीडियो
search
menu

सदस्यता लें, समर्थन करें

image/svg+xml
  • सारे लेख
  • न्यूज़क्लिक लेख
  • सारे वीडियो
  • न्यूज़क्लिक वीडियो
  • राजनीति
  • अर्थव्यवस्था
  • विज्ञान
  • संस्कृति
  • भारत
  • अंतरराष्ट्रीय
  • अफ्रीका
  • लैटिन अमेरिका
  • फिलिस्तीन
  • नेपाल
  • पाकिस्तान
  • श्री लंका
  • अमेरिका
  • एशिया के बाकी
हमारे बारे में
हमसे संपर्क करें
सब्सक्राइब करें
हमारा अनुसरण करो Facebook - Newsclick Twitter - Newsclick RSS - Newsclick
close menu
भारत
राजनीति
देश की न्याय-व्यवस्था के ख़स्ता हाल
देश के उच्च न्यायालयों पर बढ़ता मुकदमों का बोझ और न्यायाधीशों के खाली पड़े पदों को भरने में सरकार की दिलचस्पी नहींI
शारिब अहमद खान, हर्ष कुमार
20 Jun 2018
indian judiciary

हाल ही में न्यूज़क्लिक ने विधि और न्याय मंत्रालय में दाखिल आरटीआई से देश की न्याय प्रणाली की ख़स्ता हालत के बारे में एक खुलासा हुआI आरटीआई विभिन्न न्यायालयों में लंबित मामलों के सम्बन्ध में दायर की गयीI इससे पता चला कि देश के 14 उच्च न्यायालय (24 में से 14 उच्च न्यायालयों के ही आँकड़े आरटीआई के माध्यम से मिल पाए) में एक न्यायाधीश के ऊपर 11,015 लेकर 348 केसों तक का बोझ है। वहीं अगर 14 हाईकोर्ट में न्यायाधीशों के रिक्त पदों की बात करें तो इनमें स्वीकृत न्यायाधीशों की संख्या 568 है जिनमें से 219 पद अभी भी रिक्त हैI जिससे साफ़ ज़ाहिर है कि इससे न्याय प्रक्रिया पर कितना गंभीर प्रभाव पड़ेगाI वहीं इन हाईकोर्टों में कार्यरत न्यायाधीश और हाईकोर्ट के अधीन राज्यों की जनसंख्या का अनुपात देखा जाए तो 29,16,578 से लेकर 4,66,331 लोगों पर एक न्यायाधीश हैं। आइये प्रकाश डालते हैं हाइकोर्ट में विचाराधीन मामलों और जजों की संख्या और उनके अनुपात पर।

judiciary

indian judiciary

इन आँकड़ों के माध्यम से भारत में हाईकोर्ट की दशा और दुर्दशा साफ़ ज़ाहिर है। इनके बिनाह पर अंदाज़ा लगाया जा सकता है कि लोकतंत्र के तीसरे खंभे के क्या हालात है। जहाँ एक न्यायाधीश के ऊपर औसतन ग्यारह हज़ार से भी ज़्यादा मुकदमों का बोझ हो वहाँ हम समय पर न्याय की उम्मीद कैसे कर सकते हैं। आज के वक्त में न्यायालय के तराज़ू पर मुकदमों का बोझ दिन-प्रतिदिन बढ़ता ही जा रहा है। जिस न्याय के मंदिर से हम न्याय की उम्मीद लगाते हैं उसके साथ न्याय कौन करेगा। सवाल सरकार से है कि क्या 137 करोड़ की आबादी वाले इस देश में मौजूद उच्च न्यायालयों में मुकदमों का निपटारा करने वाले न्यायाधिशों की संख्या काफी है? सरकार को रिक्त पड़े पदों को भरने के लिए और कितना वक्त चाहिए? 
 

Indian judiciary
Indian justice system
number of cases
vacant seats

Related Stories

2019 में हुआ हैदराबाद का एनकाउंटर और पुलिसिया ताक़त की मनमानी

प्रधानमंत्री जी! पहले 4 करोड़ अंडरट्रायल कैदियों को न्याय जरूरी है! 

मुद्दा: हमारी न्यायपालिका की सख़्ती और उदारता की कसौटी क्या है?

अदालत ने वरवर राव की स्थायी जमानत दिए जाने संबंधी याचिका ख़ारिज की

जजों की भारी कमी के बीच भारतीय अदालतों में 4.5 करोड़ मामले लंबित, कैदियों से खचाखच भरी जेलें

न्याय वितरण प्रणाली का ‘भारतीयकरण’

लिव-इन रिश्तों पर न्यायपालिका की अलग-अलग राय

न्यायपालिका को बेख़ौफ़ सत्ता पर नज़र रखनी होगी

जेंडर के मुद्दे पर न्यायपालिका को संवेदनशील होने की ज़रूरत है!

बेंगलुरु गैंगरेप का भयावह वीडियो सिस्टम पर कई सवाल खड़े करता है!


बाकी खबरें

  • maliyana
    न्यूज़क्लिक टीम
    मलियाना कांडः 72 मौतें, क्रूर व्यवस्था से न्याय की आस हारते 35 साल
    23 May 2022
    ग्राउंड रिपोर्ट में वरिष्ठ पत्रकार भाषा सिंह न्यूज़क्लिक की टीम के साथ पहुंची उत्तर प्रदेश के मेरठ ज़िले के मलियाना इलाके में, जहां 35 साल पहले 72 से अधिक मुसलमानों को पीएसी और दंगाइयों ने मार डाला…
  • न्यूजक्लिक रिपोर्ट
    बनारस : गंगा में नाव पलटने से छह लोग डूबे, दो लापता, दो लोगों को बचाया गया
    23 May 2022
    अचानक नाव में छेद हो गया और उसमें पानी भरने लगा। इससे पहले कि लोग कुछ समझ पाते नाव अनियंत्रित होकर गंगा में पलट गई। नाविक ने किसी सैलानी को लाइफ जैकेट नहीं पहनाया था।
  • न्यूजक्लिक रिपोर्ट
    ज्ञानवापी अपडेटः जिला जज ने सुनवाई के बाद सुरक्षित रखा अपना फैसला, हिन्दू पक्ष देखना चाहता है वीडियो फुटेज
    23 May 2022
    सोमवार को अपराह्न दो बजे जनपद न्यायाधीश अजय विश्वेसा की कोर्ट ने सुनवाई पूरी कर ली। हिंदू और मुस्लिम पक्ष की चार याचिकाओं पर जिला जज ने दलीलें सुनी और फैसला सुरक्षित रख लिया।
  • अशोक कुमार पाण्डेय
    क्यों अराजकता की ओर बढ़ता नज़र आ रहा है कश्मीर?
    23 May 2022
    2019 के बाद से जो प्रक्रियाएं अपनाई जा रही हैं, उनसे ना तो कश्मीरियों को फ़ायदा हो रहा है ना ही पंडित समुदाय को, इससे सिर्फ़ बीजेपी को लाभ मिल रहा है। बल्कि अब तो पंडित समुदाय भी बेहद कठोर ढंग से…
  • राज वाल्मीकि
    सीवर कर्मचारियों के जीवन में सुधार के लिए ज़रूरी है ठेकेदारी प्रथा का ख़ात्मा
    23 May 2022
    सीवर, संघर्ष और आजीविक सीवर कर्मचारियों के मुद्दे पर कन्वेन्शन के इस नाम से एक कार्यक्रम 21 मई 2022 को नई दिल्ली के कॉन्स्टिट्यूशन क्लब ऑफ़ इंडिया मे हुआ।
  • Load More
सब्सक्राइब करें
हमसे जुडे
हमारे बारे में
हमसे संपर्क करें

CC BY-NC-ND This work is licensed under a Creative Commons Attribution-NonCommercial-NoDerivatives 4.0 International License