NewsClick

NewsClick
  • English
  • राजनीति
  • अर्थव्यवस्था
  • विज्ञान
  • संस्कृति
  • भारत
  • अंतरराष्ट्रीय
  • हमारे लेख
  • हमारे वीडियो
search
menu

सदस्यता लें, समर्थन करें

image/svg+xml
  • सारे लेख
  • न्यूज़क्लिक लेख
  • सारे वीडियो
  • न्यूज़क्लिक वीडियो
  • राजनीति
  • अर्थव्यवस्था
  • विज्ञान
  • संस्कृति
  • भारत
  • अंतरराष्ट्रीय
  • अफ्रीका
  • लैटिन अमेरिका
  • फिलिस्तीन
  • नेपाल
  • पाकिस्तान
  • श्री लंका
  • अमेरिका
  • एशिया के बाकी
हमारे बारे में
हमसे संपर्क करें
सब्सक्राइब करें
हमारा अनुसरण करो Facebook - Newsclick Twitter - Newsclick RSS - Newsclick
close menu
भारत
राजनीति
आपराधिक प्रक्रिया (पहचान) विधेयक, 2022 के रहस्य को समझिये
आपराधिक प्रक्रिया (पहचान) विधेयक, 2022, केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह के नाम पर सूचीबद्ध है, लेकिन गृह राज्य मंत्री अजय मिश्रा टेनी ने सोमवार को इसे लोकसभा में पेश किया है।
सुहा रफी
31 Mar 2022
Translated by महेश कुमार
crime
'प्रतीकात्मक फ़ोटो'

बिल कार्यकारी अधिकारियों को बायोमेट्रिक माप इकट्ठा करने की अनुमति देता है, भले ही संबंधित व्यक्ति ने अपने नमूने देने से इनकार कर दिया हो, और उन व्यक्तियों के दायरे का विस्तार करता है जिनके माप लिए जा सकते हैं, जो प्रदर्शनकारी नागरिकों की पहचान और उन्हे जांच के दायरे में लाने के लिए पर्याप्त है। 

——-

केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह के नाम पर आपराधिक प्रक्रिया (पहचान) विधेयक, 2022 को सूचीबद्ध किया गया था, लेकिन सोमवार को इसे लोकसभा में गृह राज्य मंत्री, अजय मिश्रा टेनी ने कड़े विरोध के बीच पेश किया है। विधेयक पुलिस या जेल अधिकारियों को उन लोगों का बायोमेट्रिक 'माप' लेने के लिए अधिकृत करता है जिन्हें दोषी ठहराया गया है, गिरफ्तार किया गया है, हिरासत में लिया गया है, और कोई भी वह व्यक्ति यह माप ले सकता है जिसे न्यायिक या कार्यकारी मजिस्ट्रेट ने निर्देशित किया है। 

यह विधेयक किस बारे में है?

आपराधिक प्रक्रिया (पहचान) विधेयक, 2022 पुलिस को आईरिस और रेटिना स्कैन, तस्वीरें,  उंगलियों के निशान, हथेली के निशान, पैरों की चिन्ह, भौतिक और जैविक नमूने और उनका  विश्लेषण करने की अनुमति देने के मामले एमिन 'माप' को फिर से परिभाषित करता है। विधेयक पुलिस को हस्ताक्षर और लिखावट, या दंड प्रक्रिया संहिता, 1973 की धारा 53 या 53 ए के तहत संदर्भित किसी भी अन्य जांच सहित व्यवहार संबंधी विशेषताओं को एकत्र करने की अनुमति देता है।

इसके अलावा, पेश किए गए विधेयक में "व्यक्तियों के दायरे" को भी व्यापक बना दिया है,  मजिस्ट्रेट, जोकि उक्त माप लेने के लिए किसी भी व्यक्ति को शामिल करने का निर्देश दे सकता है, और पुलिस और जेल अधिकारियों को किसी भी व्यक्ति का माप लेने का अधिकार देता है, उनका भी जो माप देने का विरोध करते हैं। मापों को देने से इनकार करना भारतीय दंड संहिता (आईपीसी) की धारा 186 (सार्वजनिक कार्यों के निर्वहन में लोक सेवक को बाधित करना) के तहत अपराध माना जाएगा।

कैदियों की पहचान अधिनियम, 1920, जिसे इस विधेयक के ज़रीए निरस्त कर बदला जाना है, उसमें केवल सब इंस्पेक्टर या उससे ऊपर रैंक के पुलिस अधिकारियों को 'माप' लेने के लिए अधिकृत किया गया था। लेकिन इस बिल इसमें संशोधन करके माप लेने के लिए उस पुलिस अधिकारी को अधिकृत करता है, जो हेड कांस्टेबल और जेल अधिकारी से नीचे का न हो, जो हेड वार्डन के पद से नीचे का न हो।

आपराधिक प्रक्रिया (पहचान) विधेयक, 2022 पुलिस को आईरिस और रेटिना स्कैन, तस्वीरें, उंगलियों के निशान, हथेली के निशान, पदचिह्न छाप, भौतिक और जैविक नमूने और उनके विश्लेषण की अनुमति देने के लिए 'माप' को फिर से परिभाषित करता है। विधेयक पुलिस को हस्ताक्षर और लिखावट सहित व्यवहार संबंधी विशेषताओं को एकत्र करने की भी अनुमति देता है। इसके अलावा, यह पुलिस और जेल अधिकारियों को किसी भी व्यक्ति का माप लेने का अधिकार देता है जो माप देने का विरोध करता है। 

यह विधेयक भारत के राष्ट्रीय अपराध रिकॉर्ड ब्यूरो [एनसीआरबी] द्वारा किए जाने वाले रिकॉर्ड के साझाकरण, प्रसार, विनाश और निपटान के साथ-साथ माप के भंडारण और संरक्षण के लिए भी निर्देशित करता है। इन मापों को एनसीआरबी के डेटाबेस में कम से कम 75 वर्षों तक रखा जा सकता है।

सरकार ने इस विधेयक को क्यों पेश किया?

कैदियों की पहचान अधिनियम एक मजिस्ट्रेट के आदेश पर दोषियों और कुछ अन्य श्रेणियों के व्यक्तियों के केवल उंगलियों के निशान और पैरों के निशान को रिकॉर्ड करने के लिए अधिकृत करता है, जिस पर केंद्र का तर्क है कि इससे सीमित श्रेणी के व्यक्तियों और सीमित दायरे तक पहुंच मिलती है और कैप्चर करने योग्य डेटा को सीमित करता है। 

विधेयक के उद्देश्यों के बयान में यह तर्क दिया गया है कि प्रौद्योगिकी और आधुनिक तकनीकों के विकास के कारण, किसी भी अपराध में शामिल व्यक्ति की विशिष्ट पहचान के लिए शरीर के माप को कैप्चर करने और रिकॉर्ड करने का प्रावधान करना आवश्यक है, जिससे आपराधिक मामलों को सुलझाने में जांच एजेंसियां को अन्य "उन्नत देशों" के बराबर खड़ा कर देगा। 

टेनी ने लोकसभा में तर्क दिया कि विधेयक से आरोपी व्यक्तियों की पहचान आसान हो जाएगी और जांच अधिक कुशल और तेज हो जाएगी। उन्होंने आगे कहा कि इससे अदालतों में अभियोजन और दोष साबित करने की दर भी बढ़ेगी।

विधेयक के ऐसे कौन से प्रावधान हैं जो विवादास्पद हैं?

विपक्षी दलों और नागरिक समाज द्वारा विधेयक का विरोध मुख्य रूप से उन प्रावधानों के बारे में है जो अधिकारियों को उनके बायोमेट्रिक नमूने देने के लिए संबंधित व्यक्ति के इनकार की परवाह किए बिना माप एकत्र करने की अनुमति देते हैं, और उन व्यक्तियों के दायरे का विस्तार करने का प्रावधान है जिनके 'माप' लिए जा सकते हैं जो की पहचान और जांच के लिए नागरिक प्रदर्शनकारियों को शामिल करने के लिए काफी व्यापक प्रावधान है।

इसके अतिरिक्त, 'माप' लिए जाने के लिए, नया विधेयक इस जरूरत को भी समाप्त करता है कि इसके लिए अपराध में कम से कम एक वर्ष के कारावास की सजा होनी चाहिए।

विधेयक को निजता के मौलिक अधिकार का उल्लंघन माना जा रहा है, विशेष रूप से स्पष्टता की कमी के कारण, कि प्रशासन कैसे तय करेगा कि एकत्र किए गए डेटा के किसी भी हिस्से का दुरुपयोग नहीं किया जाएगा। 

विधेयक के विरोधियों के विचार क्या हैं?

लोकसभा में विपक्षी दल के सदस्यों ने तर्क दिया है कि विधेयक असंवैधानिक है क्योंकि यह नागरिकों के मौलिक अधिकारों का उल्लंघन करता है।

भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस के मनीष तिवारी ने कहा कि विधेयक संविधान के अनुच्छेद 20 (3) का पालन करने में विफल हो जाता है, जिसमें स्पष्ट रूप से कहा गया है कि किसी भी अपराध के आरोपी व्यक्ति को उसके खिलाफ गवाह बनने के लिए मजबूर नहीं किया जाएगा, और कि यह सदन की विधायी "क्षमता" से बाहर चला जाता है

उन्होंने आगे कहा कि बिल में माप लेने के लिए बल का निहित उपयोग सर्वोच्च न्यायालय के निर्णयों की श्रेणी में निर्धारित कैदियों के अधिकारों का उल्लंघन करता है, जैसे कि ए.के. गोपालन (1950), खड़क सिंह (1962), चार्ल्स शोभराज (1978), शीला बरसे (1983) और प्रमोद कुमार सक्सेना (2008), और संविधान के अनुच्छेद 21 के तहत जीवन के अधिकार में गारंटीकृत भूल जाने के अधिकार का भी उल्लंघन करते हैं, जैसा कि सुप्रीम कोर्ट के 2017 के पुट्टस्वामी फैसले में व्याख्या की गई है।

तिवारी ने जैविक नमूनों के विश्लेषण पर भी चिंता व्यक्त करते हुए दावा किया कि वे नार्को-विश्लेषण और मस्तिष्क मानचित्रण का कारण भी बन सकते हैं।

लोकसभा सांसद मनीष तिवारी के अनुसार, विधेयक में माप लेने के लिए बल का निहित उपयोग सर्वोच्च न्यायालय के निर्णयों की श्रेणी में निर्धारित कैदियों के अधिकारों का उल्लंघन करता है।

लोकसभा में कांग्रेस के नेता अधीर रंजन चौधरी के अनुसार, विधेयक पुलिस और अदालतों को उन लोगों का माप लेने का अधिकार देता है जो जांच के दायरे में हैं या केवल एक मामले में शामिल होने का उन पर संदेह है, यह अनुच्छेद 21 का उल्लंघन करता है जो अनुच्छेद जीवन और स्वतंत्रता के अधिकार की गारंटी देता है।

रिवोल्यूशनरी सोशलिस्ट पार्टी के एन.के. प्रेमचंद्रन ने वास्तविक मांग के साथ एक राजनीतिक प्रदर्शनकारी के जैविक नमूने एकत्र करने के लिए कार्यकारी को अत्यधिक अधिकार देने वाले विधेयक पर सवाल उठाया, जिसके खिलाफ प्रथम सूचना रिपोर्ट शुरू की गई हो सकती है।

आगे क्या छिपा है? यदि विधेयक अपने वर्तमान स्वरूप में अधिनियम बन जाता है तो उस पर चिंताएं क्या हैं?

जबकि विपक्ष की मतों के विभाजन की मांग के बाद विधेयक शुरूआत में हार गया, क्योंकि विधेयक को इसके प्रस्ताव के पक्ष में केवल 120 और विपक्ष में 58 मत मिले। 

चूंकि आधार (वित्तीय और अन्य सब्सिडी, लाभ और सेवाओं का लक्षित वितरण) अधिनियम की धारा 29 आपराधिक जांच के लिए एकत्रित बायोमेट्रिक डेटा को साझा करने पर रोक लगाता है, इसके लिए कानून प्रवर्तन के उद्देश्य के लिए एक विशिष्ट कानूनी अपवाद का मसौदा तैयार किया जाएगा और पेश किया जाएगा।

आपराधिक प्रक्रिया (पहचान) विधेयक, 2022 को एनसीआरबी डेटाबेस के व्यापक निर्माण और विकास के मद्देनजर पेश किया गया है, जैसे कि अपराध और आपराधिक ट्रैकिंग नेटवर्क सिस्टम [सीसीटीएनएस] में एकीकरण के लिए उंगलियों के निशान का डिजिटलीकरण करने का लक्ष्य है, जिसके तहत कानून प्रवर्तन के लिए बायोमेट्रिक डेटा हासिल करने के लिए अधिकारियों को सशक्त बनाना है।

विधेयक के लागू होने की स्थिति में, सीसीटीएनएस को न केवल सात साल से अधिक की सजा वाले दोषियों के विस्तृत बायोमेट्रिक माप के साथ एकीकृत किया जाएगा, बल्कि सभी दोषी व्यक्तियों, निवारक हिरासत में लिए गए और मजिस्ट्रेट द्वारा उनके 'माप' के लिए निर्देशित व्यक्तियों के साथ एकीकृत किया जाएगा, जिनके पास अधिकारियों को उनके माप प्रदान करने के अलावा कोई विकल्प नहीं होगा।

सौजन्य: द लीफ़लेट

अंग्रेजी में मूल रूप से लिखे लेख को पढ़ने के लिए नीचे दिए लिंक पर क्लिक करें

Decoding the Criminal Procedure (Identification) Bill, 2022

Criminal Procedure Identification Bill
Amit Shah
Indian Penal Code
Identification of Prisoners Act
lok sabha

Related Stories

बॉलीवुड को हथियार की तरह इस्तेमाल कर रही है बीजेपी !

भारत में संसदीय लोकतंत्र का लगातार पतन

मैरिटल रेप : दिल्ली हाई कोर्ट के बंटे हुए फ़ैसले को सुप्रीम कोर्ट में चुनौती, क्या अब ख़त्म होगा न्याय का इंतज़ार!

राजद्रोह कानून से मुक्ति मिलने की कितनी संभावना ?

क्या हिंदी को लेकर हठ देश की विविधता के विपरीत है ?

मोदी-शाह राज में तीन राज्यों की पुलिस आपस मे भिड़ी!

चुनावी वादे पूरे नहीं करने की नाकामी को छिपाने के लिए शाह सीएए का मुद्दा उठा रहे हैं: माकपा

यूपी में संघ-भाजपा की बदलती रणनीति : लोकतांत्रिक ताकतों की बढ़ती चुनौती

बिहार: नीतीश कुमार की पार्टी जदयू ने समान नागरिक संहिता का किया विरोध

लाल क़िले पर गुरु परब मनाने की मोदी नीति के पीछे की राजनीति क्या है? 


बाकी खबरें

  • spy stories
    रश्मि सहगल
    'जितनी जल्दी तालिबान को अफ़ग़ानिस्तान को स्थिर करने में मदद मिलेगी, भारत और पश्चिम के लिए उतना ही बेहतर- एड्रियन लेवी
    06 Oct 2021
    एड्रियन लेवी के साथ साक्षात्कार, जिन्होंने कैथी स्कॉट-क्लार्क के साथ मिलकर 'स्पाई स्टोरीज़: इनसाइड द सीक्रेट वर्ल्ड ऑफ़ द रॉ एंड द आईएसआई' लिखी है। यह किताब कई नयी और चौंकाने वाली जानकारियों से भरी…
  • corona
    न्यूज़क्लिक टीम
    कोरोना अपडेट: देश में 24 घंटों में 18,833 नए मामले, 278 मरीज़ों की मौत
    06 Oct 2021
    देश में कोरोना संक्रमण के मामलों की संख्या बढ़कर 3 करोड़ 38 लाख 71 हज़ार 881 हो गयी है।
  • Journalist Siddique Kappan with his wife Rihana
    ज़ाकिर अली त्यागी
    पत्रकार सिद्दीक़ कप्पन की गिरफ़्तारी का एक साल: आज भी इंसाफ़ के लिए भटक रही हैं पत्नी रिहाना
    05 Oct 2021
    एक साल से पत्रकार सिद्दीक़ कप्पन के परिवार पर क्या गुज़र रही है? आखिर उनका परिवार जेल में गुज़रे कप्पन के 365 दिनों को लेकर क्या सोचता है? सिद्दीक़ कप्पन को ज़मानत न मिलने को लेकर कानून विशेषज्ञ क्या…
  • daily
    न्यूज़क्लिक टीम
    लखीमपुर कांड का वीडियो वायरल, फरीदाबाद में मज़दूर बस्ती पर चला बुलडोज़र और अन्य ख़बरें
    05 Oct 2021
    न्यूज़क्लिक के डेली राउंडअप में आज हमारी नज़र रहेगी लखीमपुर खीरी हत्याकांड के अपडेट पर, फरीदाबाद में मज़दूर बस्ती पर बुलडोज़र चलने और अन्य ख़बरों पर।
  • Love jihad
    समीना दलवई
    "लव जिहाद" क़ानून : भारत लड़ रहा है संविधान को बचाने की लड़ाई
    05 Oct 2021
    इन क़ानूनों को "लव जिहाद" की समस्या  को हल करने के लिए लाया गया था। लव जिहाद एक षड्यंत्र अवधारणा है, जिसमें बीजेपी और दक्षिणपंथी विश्वास करते हैं।
  • Load More
सब्सक्राइब करें
हमसे जुडे
हमारे बारे में
हमसे संपर्क करें

CC BY-NC-ND This work is licensed under a Creative Commons Attribution-NonCommercial-NoDerivatives 4.0 International License