NewsClick

NewsClick
  • English
  • राजनीति
  • अर्थव्यवस्था
  • विज्ञान
  • संस्कृति
  • भारत
  • अंतरराष्ट्रीय
  • हमारे लेख
  • हमारे वीडियो
search
menu

सदस्यता लें, समर्थन करें

image/svg+xml
  • सारे लेख
  • न्यूज़क्लिक लेख
  • सारे वीडियो
  • न्यूज़क्लिक वीडियो
  • राजनीति
  • अर्थव्यवस्था
  • विज्ञान
  • संस्कृति
  • भारत
  • अंतरराष्ट्रीय
  • अफ्रीका
  • लैटिन अमेरिका
  • फिलिस्तीन
  • नेपाल
  • पाकिस्तान
  • श्री लंका
  • अमेरिका
  • एशिया के बाकी
हमारे बारे में
हमसे संपर्क करें
सब्सक्राइब करें
हमारा अनुसरण करो Facebook - Newsclick Twitter - Newsclick RSS - Newsclick
close menu
स्वास्थ्य
भारत
राजनीति
एनएमसी विधेयक के खिलाफ रेजिडेंट डॉक्टरों का विरोध लगातार दूसरे दिन जारी 
चिकित्सकों ने विधेयक के संबंध में उनकी चिंताओं को दूर नहीं किए जाने की स्थिति में हड़ताल को अनिश्चितकाल के लिए जारी रखने की धमकी दी है।
न्यूजक्लिक रिपोर्ट
02 Aug 2019
NMC bill

नेशनल मेडिकल कमीशन (एनएमसी) विधेयक के खिलाफ रेजिडेंट डॉक्टरों ने शुक्रवार को लगातार दूसरे दिन भी हड़ताल जारी रखी और इमरजेंसी सेवाओं सहित सभी सेवाओं को बंद कर दिया जिसके कारण कई सरकारी अस्पतालों में स्वास्थ्य सेवाएं प्रभावित हुईं।

चिकित्सकों ने विधेयक के संबंध में उनकी चिंताओं को दूर नहीं किए जाने की स्थिति में हड़ताल को अनिश्चितकाल के लिए जारी रखने की धमकी दी। एम्स, सफदरजंग, आरएमएल के रेजिडेंट डाक्टरों के संघ और फोर्डा एवं यूआरडीए से संबंधित डॉक्टरों ने राज्यसभा में एनएमसी विधेयक पारित होने के बाद बृहस्पतिवार देर रात बैठकों के बाद हड़ताल जारी रखने का फैसला किया। 

केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्री हर्षवर्धन और विभिन्न अस्पतालों के रेजिडेंट डॉक्टरों के प्रतिनिधिमंडल के बीच बैठक चल रही है।

इससे पहले गुरुवार को राज्‍यसभा में केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्री हर्षवर्धन ने नेशनल मेडिकल कमीशन बिल-2019 पेश किया, जिसे सदन द्वारा मंजूरी दे दी गई। हालांकि, दो नये संशोधनों के कारण अब इसे फिर से लोकसभा में भेजकर मंजूरी ली जायेगी। इस बिल में चिकित्सा क्षेत्र एवं चिकित्सा शिक्षा क्षेत्र के नियमन के लिये भारतीय चिकित्सा परिषद की जगह एनएमसी के गठन का प्रस्ताव है।

इस बिल के विरोध में एम्स, आरएमलएल अस्पताल, सफदरजंग अस्पताल और एलएनजेपी अस्पताल समेत कई सरकारी अस्पतालों के सैकड़ों चिकित्सकों ने काम का बहिष्कार किया, मार्च निकाले और विधेयक के खिलाफ नारे लगाए।

एम्स और सफदरजंग अस्पतालों के रेजिडेंट डॉक्टरों और स्नातक की पढ़ाई कर रहे छात्रों के विरोध प्रदर्शनों के कारण बृहस्पतिवार सुबह रिंग रोड पर यातायात बाधित हो गया। पुलिस ने उन्हें संसद की ओर मार्च करने से रोक दिया। प्रदर्शनकारी डॉक्टरों को हिरासत में ले लिया गया और उन्हें बाद में रिहा कर दिया गया।  

फेडरेशन ऑफ रेजिडेंट डॉक्टर्स एसोसिएशन (फोर्डा) से जुड़े डॉक्टरों के एक अन्य समूह ने आरएमएल अस्पताल से संसद तक मार्च करने की योजना बनाई थी। फोर्डा के महासचिव डॉ. सुनील अरोड़ा ने दावा किया कि डॉक्टरों को संसद की ओर जाने से रोक दिया गया।

मरीजों को हड़ताल के बारे में जानकारी नहीं थी जिसके कारण कुछ मरीज घर लौट गए और कुछ ने काफी समय तक इंतजार किया।

लोकनायक जयप्रकाश अस्पताल, बी आर अंबेडकर मेडिकल कॉलेज और अस्पताल, डीडीयू अस्तपाल तथा संजय गांधी मेमोरियल अस्पताल के रेजिडेंट डॉक्टरों ने भी काम का बहिष्कार किया और हड़ताल में शामिल हो गए।

राष्ट्रीय राजधानी के अस्पतालों में नियमित सेवाएं बाधित होने के कारण आकस्मिक योजनाएं लागू की गई हैं। कई अस्पतालों में आपात विभाग और आईसीयू में फैकल्टी सदस्यों, प्रायोजित रेजिडेंट्स, पूल अधिकारी, अन्य चिकित्सा या सर्जिकल विभाग के डॉक्टरों को बुलाया गया जबकि ओपीडी, रेडियो-डायग्नोसिस और लैबोरेटरी डायग्नोसिस सेवाएं कई स्थानों पर बंद रहीं।

प्राधिकारियों ने बताया कि नियमित ऑपरेशन रद्द कर दिए गए हैं और कई अस्पतालों में केवल आपात मामले ही देखे जा रहे हैं।

चिकित्सा जगत ने यह कहते हुए विधेयक का विरोध किया कि विधेयक ‘गरीब विरोधी, छात्र विरोधी और अलोकतांत्रिक’ है।

भारतीय चिकित्सा संघ (आईएमए) ने भी विधेयक की कई धाराओं पर आपत्ति जताई है। आईएमए ने बुधवार को 24 घंटे के लिए गैर जरूरी सेवाओं को बंद करने का आह्वान किया था। एम्स आरडीए, फोर्डा और यूनाइटेड आरडीए ने संयुक्त बयान में कहा था कि इस विधेयक के प्रावधान कठोर हैं।

गौरतलब है कि ये विधेयक 29 जुलाई को लोकसभा में पारित हुआ था। देश के डॉक्टरों एवं चिकित्सा छात्रों को इस विधेयक के कई प्रावधानों पर आपत्ति है। जिसमें विधेयक की धारा 32 और 15 (1) का मुख्य तौर पर विरोध हो रहा है। धारा 32 में 3.5 लाख गैर चिकित्सकीय लोगों या सामुदायिक स्वास्थ्य प्रदाताओं को लाइसेंस देने की बात की गई है। जबकि 15(1) में छात्रों के प्रैक्टिस करने से पहले और स्नातकोत्तर चिकित्सकीय पाठ्यक्रमों में दाखिले आदि के लिए ‘नेक्स्ट’की परीक्षा उत्तीर्ण करने का प्रस्ताव रखा है। 

(समाचार एजेंसी भाषा के इनपुट के साथ)

NMC Bill
NMC Act
National Medical Commission Bill 2019
Federation of Resident Doctors Association
Dr. Harshvardhan

Related Stories

सुनिए स्वास्थ्य मंत्री जी, आपका जवाब सामान्य शिष्टाचार के भी विपरीत है!

दिल्ली: हिन्दूराव अस्पताल ने डॉक्टर को किया बर्ख़ास्त, डॉक्टरों के संगठन ने जताया विरोध!

क्या कोरोना का वायरस तीसरे स्टेज में पहुंच चुका है?

कोरोना वायरस से उत्पन्न हालात से निपटने के लिए रोजाना निगरानी की जा रही है : हर्षवर्धन

आख़िर क्यों विरोध हो रहा है सेरोगेसी बिल का?

क्या WHO प्राथमिक स्वास्थ्य के बुनियादी ढांचे को मुनाफाखोरों के हाथ सौंपने का समर्थक है?

2018 में बढ़े 16 प्रतिशत मामले, 2025 तक कैसे टीबी हारेगा और देश जीतेगा?

एनएमसी बिल में आखिर ऐसा क्या है जिसके खिलाफ देश भर के डॉक्टर सड़क पर उतर रहे हैं?

एनएमसी विधेयक के विरोध में डॉक्टरों, छात्रों ने किया प्रदर्शन

मुजफ्फरपुर में प्रशासनिक लापरवाही के चलते हुई बड़ी संख्या में बच्चों की मौत!


बाकी खबरें

  • न्यूज़क्लिक रिपोर्ट
    पटना : जीएनएम विरोध को लेकर दो नर्सों का तबादला, हॉस्टल ख़ाली करने के आदेश
    06 May 2022
    तीन वर्षीय जीएनएम डिप्लोमा कोर्स में वर्तमान में 198 छात्राएं हैं। उनका कहना है कि पीएमसीएच कैंपस में विभिन्न विभागों में और वार्डों में बड़े पैमाने पर क्लिनिकल प्रशिक्षण की सुविधा है।
  • विजय विनीत
    अब विवाद और तनाव का नया केंद्र ज्ञानवापी: कोर्ट कमिश्नर के नेतृत्व में मस्जिद का सर्वे और वीडियोग्राफी शुरू, आरएएफ तैनात
    06 May 2022
    सर्वे का काम तीन दिन चल सकता है। शाम पांच बजे के बाद काशी विश्वनाथ मंदिर और ज्ञानवापी मस्जिद के एक किमी के दायरे को कानून व्यवस्था के लिहाज से खाली करा लिया गया। मौके पर दंगा नियंत्रक उपकरणों के साथ…
  • Press Freedom Index
    न्यूज़क्लिक टीम
    Press Freedom Index में 150वें नंबर पर भारत,अब तक का सबसे निचला स्तर
    06 May 2022
    World Press Freedom Index को किस तरह से पढ़ा जाना चाहिए? डिजिटल की दुनिया में अभिव्यक्ति की स्वत्नत्रता के प्लेटफॉर्म बढे है तो क्या अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता भी बढ़ी है? आबादी के लिहाज़ से दुनिया के…
  • abhisar
    न्यूज़क्लिक टीम
    मोदी-शाह राज में तीन राज्यों की पुलिस आपस मे भिड़ी!
    06 May 2022
    बोल के लब आज़ाद हैं तेरे के इस एपिसोड में अभिसार बात कर रहे हैं तेजिंदर पाल सिंह बग्गा के गिरफ़्तारी और पूरे मामले की।
  • भाषा
    चुनावी वादे पूरे नहीं करने की नाकामी को छिपाने के लिए शाह सीएए का मुद्दा उठा रहे हैं: माकपा
    06 May 2022
    माकपा की केंद्रीय समिति के सदस्य सुजान चक्रवर्ती ने कहा कि शाह का यह कहना कि सीएए को पश्चिम बंगाल में लागू किया जाएगा, इस तथ्य को छिपाने का एक प्रयास है कि 2021 के विधानसभा चुनाव से पहले इस मुद्दे पर…
  • Load More
सब्सक्राइब करें
हमसे जुडे
हमारे बारे में
हमसे संपर्क करें

CC BY-NC-ND This work is licensed under a Creative Commons Attribution-NonCommercial-NoDerivatives 4.0 International License