NewsClick

NewsClick
  • English
  • राजनीति
  • अर्थव्यवस्था
  • विज्ञान
  • संस्कृति
  • भारत
  • अंतरराष्ट्रीय
  • हमारे लेख
  • हमारे वीडियो
search
menu

सदस्यता लें, समर्थन करें

image/svg+xml
  • सारे लेख
  • न्यूज़क्लिक लेख
  • सारे वीडियो
  • न्यूज़क्लिक वीडियो
  • राजनीति
  • अर्थव्यवस्था
  • विज्ञान
  • संस्कृति
  • भारत
  • अंतरराष्ट्रीय
  • अफ्रीका
  • लैटिन अमेरिका
  • फिलिस्तीन
  • नेपाल
  • पाकिस्तान
  • श्री लंका
  • अमेरिका
  • एशिया के बाकी
हमारे बारे में
हमसे संपर्क करें
सब्सक्राइब करें
हमारा अनुसरण करो Facebook - Newsclick Twitter - Newsclick RSS - Newsclick
close menu
अपराध
भारत
राजनीति
बिहार में एसएसआर मामले पर सीबीआई जाँच झटपट हुई, लेकिन अपहृत लड़की पर सुनवाई क्यों नहीं?  
पिछले पाँच दिनों से मुजफ्फरपुर के अपने घर से कथित डकैतों द्वारा अपहृत एक नाबालिग लड़की के मामले में बिहार की पुलिस और प्रशासनिक महकमे को अभी तक कोई सुराग हाथ नहीं लग पाया है।
 
मोहम्मद इमरान खान
09 Sep 2020
n

पटना: बिहार के मुजफ्फरपुर जिले के एक गाँव में एक 17 वर्षीया लड़की को कथित तौर पर बन्दूक की नोक पर उसके घर से अगवा कर लेने के पाँच दिनों के बाद भी पुलिस इस मामले में कोई सुराग हाथ लगा पाने में नाकाम रही है।इस मामले में पुलिस की निष्क्रियता को देखते हुए गुस्साए ग्रामीणों के साथ-साथ भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी (मार्क्सवादी-लेनिनवादी) से जुड़े छात्रों और महिला संगठनों ने पिछले दो दिनों से विरोध प्रदर्शनों के क्रम को जारी रखा हुआ है।

यह भी एक अजीब विडंबना है कि यह सब एक ऐसे समय में हो रहा है जब एक शक्तिशाली वर्ग द्वारा अभिनेता सुशांत सिंह राजपूत के लिए न्याय की माँग को लेकर लगातार कोहराम मचाया जा रहा है, जो बिहार से थे और जिनकी जून माह में मुंबई में कथित खुदकशी के चलते मौत हो गई थी। जबकि यहाँ पर एक नाबालिग लड़की के अपहरण के मामले में लगभग पूरी तरह से चुप्पी छाई हुई है। 

इतना ही नहीं स्थानीय मीडिया तक में इक्का-दुक्का क्षेत्रीय अखबारों द्वारा इस खबर को मामूली न्यूज़ आइटम के तौर पर अन्दर के पेजों में जगह देने के अलावा इस विचलित कर देने वाले अपहरण के मामले को स्थानीय मीडिया ने पूरी तरह से दरकिनार कर दिया है। यहाँ तक कि बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार तक ने जिन्होंने आगामी विधानसभा चुनावों के मद्देनजर अपनी 7 सितंबर की पहली वर्चुअल रैली में इस बात का उल्लेख करने से नहीं चूके कि किस प्रकार से सुशांत के परिवार वालों के अनुरोध पर उनकी सरकार ने सीबीआई जाँच की सिफारिश की थी। लेकिन वहीँ दूसरी तरफ वे इस लापता लड़की की खोजखबर के बारे में किसी भी प्रकार की कार्यवाही किये जाने का जिक्र तक न कर सके।

यह विडंबना नहीं तो क्या है जिसमें एक ऐसे समय में मुख्यमंत्री बयानबाजी करते हैं कि कैसे उनके राज्य में कानून का राज कायम हो रखा है, जबकि वहीँ बिहार में पिछले कुछ दिनों में एक दर्जन से अधिक हत्याओं की रिपोर्ट दर्ज हुई हैं, जिसमें एक एसबीआई के बैंक प्रबंधक और एक व्यवसायी की हत्या की घटना भी शामिल है। एक अन्य घटना में जमुई जिले में एक 16 वर्षीय लड़के की हत्या इसलिए कर दी गई, क्योंकि उसके परिवार वाले अपहरणकर्ताओं द्वारा माँगी गई फिरौती की रकम को चुका पाने में असफल रहे। इतना ही नहीं तीन दिन पहले ही हथियारबंद शराब माफिया ने पटना में दिन-दहाड़े एक पुलिस अधिकारी पर हमला बोल दिया और घायल कर डाला था।
 
मुजफ्फरपुर पुलिस के मुताबिक लड़की को हथियारबंद डकैतों ने उसके निवास दिगहरा गाँव से जोकि सदर पुलस थाने के तहत आता है, से 3 और 4 सितंबर के बीच की दर्मियानी रात को अपहृत कर लिया था। पहले उन्होंने घर में रखे कीमती सामानों की लूट को अंजाम दिया और उसे भी जबरन साथ ले गए थे।  
अपहरण की इस घटना के एक दिन बाद गुस्साए ग्रामीणों ने इस घटना के विरोध में कई घंटों तक राष्ट्रीय राजमार्ग 28 को जाम करके रख दिया था। बाद में जाकर उन्होंने शनिवार और रविवार के दिन विरोध प्रदर्शन किये, जबकि आल इंडिया प्रोग्रेसिव विमेंस एसोसिएशन (ऐपवा) और आल इंडिया स्टूडेंट्स एसोसिएशन (आइसा) के कार्यकर्ताओं ने सोमवार के दिन इस मामले में विरोध प्रदर्शन आयोजित किया। 

अपहृत लड़की के पिता संभुनाथ पांडेय जो अपनी किराने की दुकान चलाते है ने न्यूज़क्लिक से अपनी बातचीत में कहा “अभी तक पुलिस ने इस मामले में कुछ भी नहीं किया है। सिर्फ आश्वासनों से कोई फर्क नहीं पड़ने वाला है।”पुलिस अधिकारियों का भी मानना है कि यह अपनेआप में एक दुर्लभ मामला है, क्योंकि डकैतों ने लूटपाट को अंजाम देने के साथ-साथ लड़की को अपह्रत किया है। 

मुजफ्फरपुर के वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक जयंत कांत के अनुसार पुलिस की टीमें अपहृत लड़की की तलाश में जुटी हुई हैं। इसके साथ ही जोड़ते हुए वे कहते हैं कि अपहरणकर्ताओं द्वारा इस मामले में फिरौती की माँग नहीं की गई है, और कहा “एक विशेष जाँच दल द्वारा तलाशी अभियान को तेज कर दिया गया है।”
पटना स्थित महिला अधिकार कार्यकर्त्ता कंचन बाला के अनुसार यह अत्यंत दुर्भाग्यपूर्ण है कि इस प्रकार की विचलित कर देने वाई घटना को शायद ही राष्ट्रीय मीडिया द्वारा कोई संज्ञान लिया जाता हो। “राष्ट्रीय और स्थानीय मीडिया तक के लिए इस समय एक अभिनेता की आत्महत्या ही एकमात्र मुद्दा बना हुआ है। राज्य से बाहर के लोगों को शायद ही पता हो कि बिहार में पिछले पांच दिनों पहले से एक लड़की को उसके घर से डकैतों ने अपहृत कर रखा है, और पुलिस अभी तक उसे बरामद नहीं कर पाई है। हम बेहद आहत और निराश हैं।”

इस बारे में स्थानीय ऐपवा नेत्री शारदा देवी कहती हैं कि अपहरण के इस मामले से यह साफ़ परिलक्षित होता है कि बिहार में लडकियाँ और महिलाएं किस कदर असुरक्षित हैं। “यदि किसी लड़की को उसके घर से ही अगवा कर लिया जा सकता है तो बताइये ऐसे में सुरक्षा और हिफाजत कहाँ है? नीतीश कुमार के तहत एनडीए शासन में बच्चियाँ सुरक्षित नहीं हैं। न्याय और सुशासन की बात पूरी तरह से बेमानी है, यहाँ पर पूरी तरह से जंगल राज चल रहा है। क्यों नहीं नीतीश कुमार ने अपनी पहली वर्चुअल रैली में 24 घंटे के भीतर इस अपह्रत लड़की की बरामदगी की घोषणा की?”

वहीँ सीपीआई (एमएल) नेता धीरेंद्र झा के अनुसार भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) और जनता दल- यूनाइटेड (जेडी-यू) की यह तथाकथित 'डबल इंजन' वाली सरकार अपराधों पर लगाम लगा पाने और शिकंजा कसने में पूरी तरह से विफल रही है, जिसके चलते आम लोगों की रातों की नींद हराम हो रखी है। उनके अनुसार “राज्य में पूरी तरह से अराजकता का माहौल व्याप्त है,  लोगों में भय व्याप्त है, जिसके चलते अपराधियों के लिए महिलाएं बेहद आसान शिकार बन गई हैं। लेकिन इस सबके बावजूद सरकार और उसका समूचा प्रशासनिक अमला इस बीच अक्टूबर-नवंबर में होने वाले चुनावों की तैयारियों में पूरी तरह से मशगूल है। इस सरकार का लोगों की सुरक्षा और हिफाजत के प्रति कोई सरोकार नहीं है। भाकपा (माले) अपहृत लड़की की तत्काल सुरक्षित बरामदगी की मांग करती है और जल्द ही यदि उसे बरामद नहीं किया जाता तो पार्टी जल्द ही राज्यव्यापी आंदोलन शुरू करने जा रही है।

इस बीच बिहार महिला आयोग की अध्यक्षा दिलमणि मिश्रा ने मुज़फ़्फ़रपुर एसएसपी को इस मामले में अबतक की गई कार्रवाई की रिपोर्ट सौंपने के संबंध में लिखा है।पूर्व मंत्री और जदयू नेता रामचंदर प्रसाद सिंह ने कहा है कि उन्होंने इस बारे में सीएम को पत्र लिखा था और अपहृत लड़की की बरामदगी के संबंध में डीजीपी और मुजफ्फरपुर एसएसपी से बात की है।

जबकि मुजफ्फरपुर के निवासियों को इस बात का भय है कि कहीं यह मामला भी जिले में कुछ साल पहले वाल्रे दूसरे मामले की तरह ही साबित न हो जाए। सन 2012 में मुजफ्फरपुर के एक पब्लिक स्कूल में पढ़ने वाली 7वीं कक्षा की नाबालिग छात्रा को उसके घर से अगवा कर लिया गया था। लेकिन इस मामले में विपक्ष की ओर से विरोध प्रदर्शन के बाद सीबीआई जाँच बिठाने के बावजूद आज इस बात को आठ साल बीत जाने के बाद भी उस लड़की का कोई सुराग नहीं मिल सका है।

इसके साथ ही दो वर्ष पूर्व मुजफ्फरपुर शेल्टर होम बलात्कार मामला तब राष्ट्रीय सुर्ख़ियों में आ सका, जब टाटा इंस्टीट्यूट ऑफ़ सोशल साइंसेज ने अपनी सोशल ऑडिट रिपोर्ट में इस मामले को सार्वजनिक किया था। इस शेल्टर होम की कम से कम 34 लड़कियों का यौन शोषण हुआ था। इसके बाद जाकर कहीं बिहार समाज कल्याण विभाग की ओर से पुलिस में शिकायत दर्ज कराई गई थी। इस मामले में मुख्य आरोपी ब्रजेश ठाकुर के एनजीओ द्वारा इस शेल्टर होम को संचालित किया जा रहा था। विपक्ष की ओर से चलाए गए निरंतर विरोध प्रदर्शनों के चलते ठाकुर की गिरफ्तारी संभव हो पाई थी और बिहार सरकार में समाज कल्याण मंत्री रहीं मंजू वर्मा को अपने पति के ठाकुर के साथ कथित घनिष्ठ संबंधों के आरोपों के चलते इस्तीफा देने के लिए मजबूर होना पड़ा था।

यह लेख अंग्रेजी के लेख का अनुवाद है.आप मूल लेख को इस लिंक की मदद से पढ़ सकते हैं -

https://www.newsclick.in/Nitish-Land-CBI-Probe-SSR-Action-Abducted-Girl


 

Bihar
Crime in Bihar
girl kidnapped in bihar
ssr case
cbi and bihar
nitish goernement
assembly polls

Related Stories

पिता के यौन शोषण का शिकार हुई बिटिया, शुरुआत में पुलिस ने नहीं की कोई मदद, ख़ुद बनाना पड़ा वीडियो

बिहार: आख़िर कब बंद होगा औरतों की अस्मिता की क़ीमत लगाने का सिलसिला?

बिहार: 8 साल की मासूम के साथ बलात्कार और हत्या, फिर उठे ‘सुशासन’ पर सवाल

चारा घोटाला: सीबीआई अदालत ने डोरंडा कोषागार मामले में लालू प्रसाद को दोषी ठहराया

बिहार: मुज़फ़्फ़रपुर कांड से लेकर गायघाट शेल्टर होम तक दिखती सिस्टम की 'लापरवाही'

बिहार शेल्टर होम कांड-2: युवती ने अधीक्षिका पर लगाए गंभीर आरोप, कहा- होता है गंदा काम

बिहारः पांच वर्ष की दलित बच्ची के साथ रेप, अस्पताल में भर्ती

बिहारः बंधक बनाकर नाबालिग लड़की से गोरखपुर में 1 महीने तक किया गैंगरेप

पत्रकार हत्याकांड- कैसे मेडिकल माफिया का अड्डा बन गया छोटा सा कस्बा बेनीपट्टी?

बिहारः ग़ैर-क़ानूनी निजी क्लिनिक का पर्दाफ़ाश करने वाले पत्रकार की हत्या


बाकी खबरें

  • Gauri Lankesh pansare
    डॉ मेघा पानसरे
    वे दाभोलकर, पानसरे, कलबुर्गी या गौरी लंकेश को ख़ामोश नहीं कर सकते
    17 Feb 2022
    दाभोलकर, पानसरे, कलबुर्गी और गौरी को चाहे गोलियों से मार दिया गया हो, मगर उनके शब्द और उनके विचारों को कभी ख़ामोश नहीं किया जा सकता।
  • union budget
    टिकेंदर सिंह पंवार
    5,000 कस्बों और शहरों की समस्याओं का समाधान करने में केंद्रीय बजट फेल
    17 Feb 2022
    केंद्र सरकार लोगों को राहत देने की बजाय शहरीकरण के पिछले मॉडल को ही जारी रखना चाहती है।
  • covid
    न्यूज़क्लिक टीम
    कोरोना अपडेट: देश में आज फिर 30 हज़ार से ज़्यादा नए मामले, 541 मरीज़ों की मौत
    17 Feb 2022
    देश में 24 घंटों में कोरोना के 30,757 नए मामले सामने आए है | देश में कोरोना संक्रमण के मामलों की संख्या बढ़कर 4 करोड़ 27 लाख 54 हज़ार 315 हो गयी है।
  • yogi
    एम.ओबैद
    यूपी चुनावः बिजली बिल माफ़ करने की घोषणा करने वाली BJP का, 5 साल का रिपोर्ट कार्ड कुछ और ही कहता है
    17 Feb 2022
    "पूरे देश में सबसे ज्यादा महंगी बिजली उत्तर प्रदेश की है। पिछले महीने मुख्यमंत्री (योगी आदित्यनाथ) ने 50 प्रतिशत बिजली बिल कम करने का वादा किया था लेकिन अभी तक कुछ नहीं किया। ये बीजेपी के चुनावी वादे…
  • punjab
    रवि कौशल
    पंजाब चुनाव : पुलवामा के बाद भारत-पाक व्यापार के ठप हो जाने के संकट से जूझ रहे सीमावर्ती शहर  
    17 Feb 2022
    स्थानीय लोगों का कहना है कि पाकिस्तान के साथ व्यापार के ठप पड़ जाने से अमृतसर, गुरदासपुर और तरनतारन जैसे उन शहरों में बड़े पैमाने पर बेरोज़गारी पैदा हो गयी है, जहां पहले हज़ारों कामगार,बतौर ट्रक…
  • Load More
सब्सक्राइब करें
हमसे जुडे
हमारे बारे में
हमसे संपर्क करें

CC BY-NC-ND This work is licensed under a Creative Commons Attribution-NonCommercial-NoDerivatives 4.0 International License