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2021 के मध्य तक यमन के अधिकांश लोग खाद्य असुरक्षा का सामना करेंगेः यूएन
संयुक्त राष्ट्र की इस एजेंसी ने इस बात पर जोर दिया है कि सऊदी नेतृत्व वाले युद्ध का अंत ही देश में खाद्य असुरक्षा को समाप्त करने का एकमात्र स्थायी तरीका है।
पीपल्स डिस्पैच
04 Dec 2020
यमन

वर्ल्ड फूड प्रोग्राम, यूनिसेफ और फूड एंड एग्रीकल्चर (एफएओ) द्वारा गुरुवार 3 दिसंबर को जारी संयुक्त बयान में कहा गया कि अंतराराष्ट्रीय समुदाय द्वारा यमन में युद्ध समाप्त करने और मानवीय सहायता प्रदान करने के लिए जल्द कोई क़दम नहीं उठाता है तो अगले साल के मध्य तक यमन की आधी से अधिक आबादी को अलग तरह की भुखमरी और खाद्य असुरक्षा का सामना करना पड़ेगा।

संयुक्त राष्ट्र के इंटिग्रेटेड फूड सिक्योरिटी फेज क्लासिफिकेशन (आईपीसी) के अनुसार, अधिक खाद्य असुरक्षा से पीड़ित लोगों की संख्या यमनी आबादी का 45% है। अगले वर्ष के मध्य तक यह संख्या बढ़कर 54% या 16.2 मिलियन लोगों तक पहुंचने की उम्मीद है।

इस रिपोर्ट के अनुसार 16, 500 लोग वर्तमान में यमन में अकाल जैसी स्थिति से जूझ रहे हैं और अगर खाद्य सहायता तुरंत नहीं बढ़ाई गई तो अगले साल के मध्य तक यह संख्या बढ़कर 45,000 से अधिक लोगों तक पहुंच सकती है। खाद्य असुरक्षा के "आपातकालीन चरण" का सामना करने के लिए तैयार यमनियों की कुल संख्या इसी अवधि में वर्तमान में 3.6 मिलियन से बढ़कर 5 मिलियन हो जाने की उम्मीद है।

एफएओ के महानिदेशक क्यूयू डोंग्यू ने इस रिपोर्ट पर टिप्पणी करते हुए कहा, हालांकि खाद्य सामग्री के प्रवाह को बनाए रखना अत्यावश्यक है फिर भी “यह चक्र जारी नहीं रह सकता है। यमन को संघर्ष की समाप्ति की आवश्यकता है जो इस देश में खाद्य असुरक्षा का पहला कारण है”।

यमन में युद्ध साल 2015 में उस समय शुरू हुआ था जब सऊदी अरब के नेतृत्व वाली गठबंधन सेनाओं ने देश में हवाई हमले किए और अब्द रब्बू मसुर हादी के नेतृत्व वाली सरकार के समर्थन में सख्त ज़मीनी और समुद्री नाकेबंदी लागू की जिन्हें उनके भ्रष्टाचार सरकार के खिलाफ अंसार अल्लाह या हौथी के नेतृत्व वाले विद्रोही द्वारा देश से भागने के लिए मजबूर किया गया। हवाई हमले और जमीनी तथा समुद्री नाकाबंदी ने देश के बुनियादी ढांचे को बड़े पैमाने पर नष्ट कर दिया और भोजन तथा दवा की आपूर्ति के प्रवाह को रोक दिया। अपने पांचवें वर्ष में जारी इस युद्ध ने हजारों लोगों की जान ले ली है और लाखों यमनियों को भुखमरी के कगार पर धकेल दिया है। इसको लेकर संयुक्त राष्ट्र का कहना है कि यह "दुनिया का सबसे बड़ा मानवीय संकट" है।

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poverty
Hunger Crisis
WHO

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