NewsClick

NewsClick
  • English
  • राजनीति
  • अर्थव्यवस्था
  • विज्ञान
  • संस्कृति
  • भारत
  • अंतरराष्ट्रीय
  • हमारे लेख
  • हमारे वीडियो
search
menu

सदस्यता लें, समर्थन करें

image/svg+xml
  • सारे लेख
  • न्यूज़क्लिक लेख
  • सारे वीडियो
  • न्यूज़क्लिक वीडियो
  • राजनीति
  • अर्थव्यवस्था
  • विज्ञान
  • संस्कृति
  • भारत
  • अंतरराष्ट्रीय
  • अफ्रीका
  • लैटिन अमेरिका
  • फिलिस्तीन
  • नेपाल
  • पाकिस्तान
  • श्री लंका
  • अमेरिका
  • एशिया के बाकी
हमारे बारे में
हमसे संपर्क करें
सब्सक्राइब करें
हमारा अनुसरण करो Facebook - Newsclick Twitter - Newsclick RSS - Newsclick
close menu
विधानसभा चुनाव
भारत
राजनीति
CSDS पोस्ट पोल सर्वे: भाजपा का जातिगत गठबंधन समाजवादी पार्टी से ज़्यादा कामयाब
सीएसडीएस के उत्तर प्रदेश के सर्वे के मुताबिक भाजपा और भाजपा के सहयोगी दलों ने यादव और मुस्लिमों को छोड़कर प्रदेश की तकरीबन हर जाति से अच्छा खासा वोट हासिल किया है।
अजय कुमार
12 Mar 2022
Caste in UP elections
प्रतीकात्मक तस्वीर

सीएसडीएस का पोस्ट पोल सर्वे आया है। सीएसडीएस के निदेशक संजय सिंह के मुताबिक यह पोस्ट पोल सर्वे उत्तर प्रदेश के 280 इलाके में तकरीबन 7 से 8 हजार लोगों से बातचीत करके किया है। आप कहेंगे कि तकरीबन 22 करोड़ आबादी वाले उत्तर प्रदेश को समझने के लिए यह सैंपल बहुत छोटा है? तो इस संस्था के बारे में जान लीजिये। सीएसडीएस यानी सेंटर फॉर सोसाइटीज इन डेवलपमेंट स्टडीज। यह संस्था बहुत लंबे समय से समाज में होने वाले परिवर्तनों का वैज्ञानिक पद्धति के तहत अध्ययन करते आई है। अकादमिक और समाज परिवर्तन को भांपने के काम में लगे लोगों के बीच इस संस्था के सर्वे का उल्लेख बार - बार किया जाता है। इस संस्था के कामकाज की साख भारत में समाज विज्ञान की दुनिया में बहुत ज्यादा है।

सीएसडीएस के उत्तर प्रदेश के सर्वे के मुताबिक भाजपा और भाजपा के सहयोगी दलों ने यादव और मुस्लिमों को छोड़कर उत्तर प्रदेश के तकरीबन हर जाति से अच्छा खासा वोट हासिल किया है। उत्तर प्रदेश की ऊंची जातियों में उनकी पैठ पहले की ही तरह मजबूत बनी हुई है। 7 प्रतिशत ब्राह्मण समाज के बीच भाजपा ने तकरीबन 89 प्रतिशत वोट हासिल किया है। 7 प्रतिशत राजपूत /ठाकुर के बीच 87 प्रतिशत वोट हासिल किया है। यह वोट प्रतिशत साल 2017 में 70 प्रतिशत के आस पास था। 2 प्रतिशत वैश्य समाज के बीच भाजपा ने तकरीबन 83 प्रतिशत वोट हासिल किया।  अगर पिछड़ी और दलित जातियों की बात करे तो 11 प्रतिशत यादव समाज के बीच भाजपा ने तकरीबन 12 प्रतिशत वोट हासिल किया।

साभार : द हिन्दू 

यादव के आलावा दूसरी जातियों के बीच समाजवादी पार्टी से ज्यादा भाजपा ने  वोट ने हासिल किया।  5 प्रतिशत कुर्मी जाति की बीच 66 प्रतिशत वोट भाजपा को हासिल हुआ और केवल 25 प्रतिशत वोट समाजवादी पार्टी को मिला। कोइरी,मौर्या,सैनी और कुशवाहा से मिलकर बनी 4 प्रतिशत जातियों के बीच 64 प्रतिशत वोट भाजपा को मिला और केवल 22 प्रतिशत वोट समजवादी पार्टी के गठबंधन को मिला।  केवट, कश्यप, मल्लाह और निषाद जातियों से मिलकर  बने 4 प्रतिशत आबादी के बीच 63 प्रतिशत वोट भाजपा को मिला और महज 26 प्रतिशत  वोट समाजवादी पार्टी को मिला।  12 फीसदी जाटव के बीच 21 फीसदी वोट भाजपा गठबंधन को मिला।  केवल 9 प्रतिशत वोट सपा गठबंधन को मिला और 65 प्रतिशत वोट बहुजन समाजवादी पार्टी के खाते में गया। 19 प्रतिशत मुस्लिम आबादी के बीच के केवल 8 प्रतिशत वोट भाजपा को मिला और तकरीबन 80 प्रतिशत वोट समाजवादी पार्टी को मिला।

इन आंकड़ों से पता चलता है कि भाजपा ने अपने परम्परागत आधार को मजबूती से अपनी तरफ शामिल किया है। साथ में अन्य जातियों को दूसरी पार्टियों के मुकाबले अपने पीछे लाने में कामयाबी हासिल की है। समाजवादी पार्टी ने छोटी छोटी जातियों के साथ गठजोड़ तो किया लेकिन वोट समाजवादी पार्टी के खाते में वैसे नहीं गया जैसे भाजपा में गया। इसका मतलब यह भी है कि जिन नेताओं के साथ भाजपा ने छोटी - छोटी जातियों का गठजोड़ बनाया, वे छोटी - छोटी जातियों बीच अपना भरोसा जीतने में समाजवादी पार्टी के मुकाबले ज्यादा कामयाब रहे।

जातिगत आधार पर मिले इन वोटों का विश्लेषण कई तरीके से किया जा सकता है। जैसे एक राय यह हो सकती है कि ऊंची जातियां लगातार केवल भाजपा को वोट करते आई हैं और यह कभी नहीं बदलता तो जातियां कहाँ खत्म हुई? यह विश्लेषण भी ठीक है। 

इससे आगे बढ़कर कोई कह सकता है कि यह बात ठीक है कि ऊंची जातियां भाजपा को वोट करती हैं लेकिन भाजपा ने अपने झूठे सच्चे कामों से पिछड़ी और दलित जातियों के बीच भी अच्छी खासी पैठ बना ली है। यह विश्लेषण पहले वाले से ज्यादा ठीक है। लेकिन सबसे ज्यादा सटीक विश्लेषण यह होगा कि अगर चुनावी मंडी का सारा बजार नैरेटिव पर चल रहा है तो ऐसा नैरेटिव बनाना पड़ेगा जो अधिक से अधिक समवेशी है। भाजपा का एजेंडा और नैरेटिव अलगावादी है। लेकिन वह हिन्दू - मुस्लिम अलगाव पर जोर देता है। इसलिए अपने नफरती एजेंडे के बाद भी  भाजपा  हिन्दुओं के बीच एक अंतर्धारा बनाने में कामयाब हो पाती है।

जबकि भाजपा के अलावा समाजवादी पार्टी के लिए ऐसा माहौल बना दिया गया है जैसे वह जातियों की पार्टी है और भाजपा हिंदुओं की पार्टी। इसलिए ऐसे माहौल को तोड़ना सबसे ज्यादा जरूरी है।  भाजपा जैसी पार्टियों को चुनौती देना है तो समजवादी पार्टी या किसी भी दूसरे दल को ऐसा नैरेटिव बनाना होगा जो भाजपा से हर मायने में बढ़ा हो। ज्यादा समावेशी हो। सभी की हिस्सेदारी हो लेकिन ऐसा न लगे कि केवल सत्ता पाने के लिए सब ने हिस्सेदारी की है।

Uttar pradesh
UP Assembly Elections 2022
UP Election Result
BJP
SP
SAMAJWADI PARTY
CSDS Post Poll Survey
Caste and politics
UP Caste Alliance

Related Stories

हार्दिक पटेल का अगला राजनीतिक ठिकाना... भाजपा या AAP?

लोकसभा और विधानसभा उपचुनावों में औंधे मुंह गिरी भाजपा

ख़बरों के आगे-पीछे: गुजरात में मोदी के चुनावी प्रचार से लेकर यूपी में मायावती-भाजपा की दोस्ती पर..

हार के बाद सपा-बसपा में दिशाहीनता और कांग्रेस खोजे सहारा

विश्लेषण: विपक्षी दलों के वोटों में बिखराव से उत्तर प्रदेश में जीती भाजपा

‘’पोस्टल बैलेट में सपा को 304 सीटें’’। क्या रंग लाएगा अखिलेश का दावा?

विधानसभा चुनाव परिणाम: लोकतंत्र को गूंगा-बहरा बनाने की प्रक्रिया

पक्ष-प्रतिपक्ष: चुनाव नतीजे निराशाजनक ज़रूर हैं, पर निराशावाद का कोई कारण नहीं है

आर्थिक मोर्चे पर फ़ेल भाजपा को बार-बार क्यों मिल रहे हैं वोट? 

पांचों राज्य में मुंह के बल गिरी कांग्रेस अब कैसे उठेगी?


बाकी खबरें

  • modi ravidas mandir
    राज वाल्मीकि
    रैदास मनुष ना जुड़ सके जब तक जाति न जात
    16 Feb 2022
    कई जगह दलितों का वोट प्राप्त करने के लिए भाजपा के नेता भी आज रैदास मंदिर में नमन कर रहे हैं। इसे देखकर एक अम्बेडकरवादी होने के नाते मैं असहज हुआ।
  • Greta Acosta Reyes
    ट्राईकोंटिनेंटल : सामाजिक शोध संस्थान
    वामपंथ के पास संस्कृति है, लेकिन दुनिया अभी भी बैंकों की है
    16 Feb 2022
    'जब हमारे समय की महान सांस्कृतिक बहसों की बात आती है, इतिहास की सुई लगभग पूरी तरह से वामपंथ की ओर झुक जाती है।लेकिन आर्थिक व्यवस्था के मामले में दुनिया बैंकों की है'।
  • UNEMPLOYMENT
    प्रभात पटनायक
    क्यों पूंजीवादी सरकारें बेरोज़गारी की कम और मुद्रास्फीति की ज़्यादा चिंता करती हैं?
    16 Feb 2022
    सचाई यह है कि पूंजीवादी सरकारों को बेरोजगारी के मुकाबले में मुद्रास्फीति की ही ज्यादा चिंता होना, समकालीन पूंजीवाद में वित्तीय पूंजी के वर्चस्व को ही प्रतिबिंबित करता है।
  • punjab
    न्यूज़क्लिक टीम
    अमृतसर: व्यापार ठप, नौकरियाँ ख़त्म पर चुनावों में ग़ायब मुद्दा
    16 Feb 2022
    भारत और पाकिस्तान के बीच व्यापार ख़त्म होने के बाद अमृतसर, तरन तारन और गुरदासपुर के हज़ारों लोग बेरोज़गार हो गए. इस व्यापार ने हज़ारों ट्रक ड्राइवरों, कुलियों, ढाबों को आबाद किया लेकिन अब सभी…
  • Chhattisgarh
    रूबी सरकार
    छत्तीसगढ़: भूपेश सरकार से नाराज़ विस्थापित किसानों का सत्याग्रह, कांग्रेस-भाजपा दोनों से नहीं मिला न्याय
    16 Feb 2022
    ‘अपना हक़ लेके रहेंगे, अभी नहीं तो कभी नहीं’ नारे के साथ अन्नदाताओं का डेढ़ महीने से सत्याग्रह’ जारी है।
  • Load More
सब्सक्राइब करें
हमसे जुडे
हमारे बारे में
हमसे संपर्क करें

CC BY-NC-ND This work is licensed under a Creative Commons Attribution-NonCommercial-NoDerivatives 4.0 International License