2017 में मैला उठाने वाले 300 मज़दूरों की मौत हुई। इस काम के लिए ना ही कोई सुविधा होती है और ना ही सुरक्षा। क़ानूनी तौर पर प्रतिबंधित यह अमानवीय काम व्यवहारिक तौर पर भी बंद होना चाहिए।
जिस वक़्त भारत “विश्वशक्ति” बनने की राह में आगे बढ़ रहा हो, अर्थव्यवस्था तेजी से आगे बढ़ रही हो। उस चमक में आज भी हाथ से मैला उठाने को मजबूर है इस देश का मज़दूर। 2017 में मैला उठाने वाले 300 मज़दूरों की मौत हुई। इस काम के लिए ना ही कोई सुविधा होती है और ना ही सुरक्षा। क़ानूनी तौर पर प्रतिबंधित यह अमानवीय काम व्यवहारिक तौर पर भी बंद होना चाहिए।