NewsClick

NewsClick
  • English
  • राजनीति
  • अर्थव्यवस्था
  • विज्ञान
  • संस्कृति
  • भारत
  • अंतरराष्ट्रीय
  • हमारे लेख
  • हमारे वीडियो
search
menu

सदस्यता लें, समर्थन करें

image/svg+xml
  • सारे लेख
  • न्यूज़क्लिक लेख
  • सारे वीडियो
  • न्यूज़क्लिक वीडियो
  • राजनीति
  • अर्थव्यवस्था
  • विज्ञान
  • संस्कृति
  • भारत
  • अंतरराष्ट्रीय
  • अफ्रीका
  • लैटिन अमेरिका
  • फिलिस्तीन
  • नेपाल
  • पाकिस्तान
  • श्री लंका
  • अमेरिका
  • एशिया के बाकी
हमारे बारे में
हमसे संपर्क करें
सब्सक्राइब करें
हमारा अनुसरण करो Facebook - Newsclick Twitter - Newsclick RSS - Newsclick
close menu
भारत
राजनीति
कोलकाता व मुंबई के पत्रकार यूनियनों ने न्यूज़क्लिक पर ईडी के छापे की निंदा की
कोलकाता के डिजिटल मीडिया ऑर्गनाइजेशन ने कहा कि 'न्यूजक्लिक ने चल रहे किसानों के आंदोलन की गहनता से रिपोर्टिंग की है और ये छापेमारी स्पष्ट रूप से इसे डराने और अन्य ऑनलाइन पोर्टल्स को चेतावनी देने के लिए हैं जो सत्ता को सच बताने की हिम्मत करते हैं।'
न्यूज़क्लिक रिपोर्ट
13 Feb 2021
कोलकाता व मुंबई के पत्रकार यूनियनों ने न्यूज़क्लिक पर ईडी के छापे की निंदा की

कोलकाता के डिजिटल मीडिया संगठनों और बृहनमुंबई यूनियन ऑफ जर्नलिस्ट्स (बीयूजे) ने न्यूज़क्लिक पर प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) की छापेमारी की निंदा की है जबकि इसके प्रधान संपादक प्रबीर पुरकायस्थ के घर अभी शनिवार, 13 फ़रवरी को समाचार लिखे जाने तक छापेमारी जारी थी।

गुरुवार को जारी एक बयान में बीयूजे ने कहा कि वह इस घटनाक्रम से "हैरान" है। साथ ही कहा कि यह आवश्यक है कि "पत्रकार और इसके अलग-अलग संगठन तानाशाही की वास्तविकता के प्रति जाग जाएं जो हमारी आँखों के सामने तेजी से प्रकट हो रही है।"

संगठऩ ने कहा, “एक स्तर पर, भारत में हमें उस स्थिति का सामना करना पड़ रहा है जो किसी भी प्रकार के विरोधियों, पत्रकारों, सामाजिक कार्यकर्ताओं और विभिन्न मतों के राजनीतिक विरोधियों के प्रति नफ़रत करने वाला हो गया है जिसे 'देश के दुश्मन' के रूप में माना जाता है और हर तरह के झूठ, अपमान और उत्पीड़न के शिकार हैं। इस प्रक्रिया में, प्रवर्तन निदेशालय और सीबीआई आदि जैसी केंद्रीय एजेंसियों को ख़ौफ़ के कुटिल व पक्षधर अंगों तक सीमित कर दिया गया है। न्यूज़ पोर्टल न्यूज़क्लिक पर हाल ही में ईडी की छापेमारी इस दमनकारी और मनमाने तरीके का हिस्सा है।"

बीयूजे ने कहा कि पत्रकारों को लगातार गैर-कानूनी गतिविधि (रोकथाम) अधिनियम 1962 के तहत सलाखों के पीछे रखा जा रहा है और वरिष्ठ संपादकों पर राजद्रोह और सांप्रदायिक सद्भाव को बिगाड़ने के आरोप लगाए जा रहे हैं। बयान में आगे कहा गया है कि "भारत में जहां प्रक्रिया ही दंडात्मक है इस तरह की कार्रवाईयों का लंबे समय तक भयावह प्रभाव पड़ता है।"

बुधवार को जारी एक बयान में कोलकाता के डिजिटल समाचार संस्थानों ने पत्रकारों और मीडिया संस्थानों के खिलाफ केंद्र की कार्रवाई को "उत्पीड़न और डराने" वाला बताते हुए निंदा की।

बयान में कहा गया है कि "न्यूजक्लिक के कार्यालय और इसके निदेशकों व संपादक प्रबीर पुरकायस्थ के घरों पर प्रवर्तन निदेशालय के छापे कोई अलग-थलग और इक्का दुक्का घटना नहीं है, बल्कि बीजेपी सरकार का मीडिया घरानों, पत्रकारों और एक्टिविस्टों के विच हंट का हिस्सा है जो इसकी नीति का इंकार करते हैं। न्यूज़क्लिक ने चल रहे किसानों के आंदोलन की गंभीरता से रिपोर्टिंग की है और ये छापे स्पष्ट रूप से इसे डराने और अन्य ऑनलाइन पोर्टलों को चेतावनी के संकेत देने के लिए ही है जो सत्ता को सच कहने की हिम्मत करते हैं।”

इन संगठनों ने कहा है कि न्यूज़क्लिक पर ईडी की छापेमारी "सरकार और इसकी नीतियों की आलोचना करने वाली पत्रकारिता को कुचलने" का एक "स्पष्ट प्रयास" था। उन्होंने मांग की कि सरकार “न्यूज़क्लिक के खिलाफ ईडी की कार्रवाई को तुरंत रोक दे और बताए कि इसने छापेमारी क्यों किया। हम देशद्रोह के आरोप में और आतंकवाद विरोधी यूएपीए के तहत गिरफ्तार किए गए सभी पत्रकारों को तुरंत रिहा करने की मांग करते हैं।”

न्यूज़क्लिक ने शुक्रवार को जारी एक बयान में कहा है कि ईडी के वरिष्ठ अधिकारियों द्वारा कुछ समाचार संगठनों को "चयनात्मक बयान" को लेकर वह "परेशान" था। कहा गया कि “भ्रामक तथ्यों का चयनात्मक बयान न्यूज़क्लिक की छवि को केवल खराब करने वाला और हमारी पत्रकारिता को बदनाम करने का एक दुर्भावनापूर्ण प्रयास है। यह कानूनी और जांच प्रक्रिया की पवित्रता का उल्लंघन भी है।" बयान में यह उल्लेख किया गया कि इस संगठन ने ईडी अधिकारियों के साथ सहयोग किया है और ऐसा करना जारी रखेगा।

न्यूज़क्लिक कार्यालय पर मंगलवार की सुबह से शुरू हुई छापेमारी करीब 36 घंटे से अधिक समय तक चली, जबकि इसके प्रधान संपादक प्रबीर पुरकायस्थ के घर पर छापे की प्रक्रिया शनिवार सुबह समाचार लिखे जाने तक जारी है।

बुधवार को एक बयान में संगठन ने कहा था कि वह "भारत और दुनिया के अनसुने और अनदेखे लोगों की आवाज़ को उठाना और रिकॉर्ड करना जारी रखेगा जो बेहतर और गरिमामय जीवन बनाने के लिए संघर्ष कर रहे हैं। इन छापों जैसे प्रयास, विरोध प्रदर्शनों को दबाने के लिए और वास्तव में प्रगतिशील विचार के लिए ऐसे कोई भी प्रयास, न्याय की बात करने वाले लोगों को नहीं रोक सकेंगे।”

अंग्रेज़ी में प्रकाशित रिपोर्ट यहां नीचे क्लिक कर पढ़ी जा सकती है-

Journalists’ Unions from Kolkata, Mumbai, Condemn ED Raids on Newsclick

Newsclick
Newsclick ED Raid
Enforcement Directorate
BUJ
Press freedom
Censorship

Related Stories

ED के निशाने पर सोनिया-राहुल, राज्यसभा चुनावों से ऐन पहले क्यों!

ईडी ने कांग्रेस नेता सोनिया गांधी, राहुल गांधी को धन शोधन के मामले में तलब किया

ओटीटी से जगी थी आशा, लेकिन यह छोटे फिल्मकारों की उम्मीदों पर खरा नहीं उतरा: गिरीश कसारावल्ली

धनकुबेरों के हाथों में अख़बार और टीवी चैनल, वैकल्पिक मीडिया का गला घोंटती सरकार! 

दिल्ली : फ़िलिस्तीनी पत्रकार शिरीन की हत्या के ख़िलाफ़ ऑल इंडिया पीस एंड सॉलिडेरिटी ऑर्गेनाइज़ेशन का प्रदर्शन

भारत को मध्ययुग में ले जाने का राष्ट्रीय अभियान चल रहा है!

भारत में ‘वेंटिलेटर पर रखी प्रेस स्वतंत्रता’, क्या कहते हैं वैकल्पिक मीडिया के पत्रकार?

प्रेस स्वतंत्रता पर अंकुश को लेकर पश्चिम में भारत की छवि बिगड़ी

Press Freedom Index में 150वें नंबर पर भारत,अब तक का सबसे निचला स्तर

प्रेस फ्रीडम सूचकांक में भारत 150वे स्थान पर क्यों पहुंचा


बाकी खबरें

  • bihar
    अनिल अंशुमन
    बिहार शेल्टर होम कांड-2’: मामले को रफ़ा-दफ़ा करता प्रशासन, हाईकोर्ट ने लिया स्वतः संज्ञान
    05 Feb 2022
    गत 1 फ़रवरी को सोशल मीडिया में वायरल हुए एक वीडियो ने बिहार की राजनीति में खलबली मचाई हुई है, इस वीडियो पर हाईकोर्ट ने स्वतः संज्ञान ले लिया है। इस वीडियो में एक पीड़िता शेल्टर होम में होने वाली…
  • up elections
    रवि शंकर दुबे
    सत्ता में आते ही पाक साफ हो गए सीएम और डिप्टी सीएम, राजनीतिक दलों में ‘धन कुबेरों’ का बोलबाला
    05 Feb 2022
    राजनीतिक दल और नेता अपने वादे के मुताबिक भले ही जनता की गरीबी खत्म न कर सके हों लेकिन अपनी जेबें खूब भरी हैं, इसके अलावा किसानों के मुकदमे हटे हो न हटे हों लेकिन अपना रिकॉर्ड पूरी तरह से साफ कर लिया…
  • beijing
    चार्ल्स जू
    2022 बीजिंग शीतकालीन ओलंपिक के ‘राजनयिक बहिष्कार’ के पीछे का पाखंड
    05 Feb 2022
    राजनीति को खेलों से ऊपर रखने के लिए वो कौन सा मानवाधिकार का मुद्दा है जो काफ़ी अहम है? दशकों से अमेरिका और उसके यूरोपीय सहयोगियों ने अपनी सुविधा के मुताबिक इसका उत्तर तय किया है।
  • karnataka
    सोनिया यादव
    कर्नाटक: हिजाब पहना तो नहीं मिलेगी शिक्षा, कितना सही कितना गलत?
    05 Feb 2022
    हमारे देश में शिक्षा एक मौलिक अधिकार है, फिर भी लड़कियां बड़ी मेहनत और मुश्किलों से शिक्षा की दहलीज़ तक पहुंचती हैं। ऐसे में पहनावे के चलते लड़कियों को शिक्षा से दूर रखना बिल्कुल भी जायज नहीं है।
  • Hindutva
    सुभाष गाताडे
    एक काल्पनिक अतीत के लिए हिंदुत्व की अंतहीन खोज
    05 Feb 2022
    केंद्र सरकार आरएसएस के संस्थापक केबी हेडगेवार को समर्पित करने के लिए  सत्याग्रह पर एक संग्रहालय की योजना बना रही है। इतिहास को तोड़-मरोड़ कर पेश करने के उसके ऐसे प्रयासों का देश के लोगों को विरोध…
  • Load More
सब्सक्राइब करें
हमसे जुडे
हमारे बारे में
हमसे संपर्क करें

CC BY-NC-ND This work is licensed under a Creative Commons Attribution-NonCommercial-NoDerivatives 4.0 International License