NewsClick

NewsClick
  • English
  • राजनीति
  • अर्थव्यवस्था
  • विज्ञान
  • संस्कृति
  • भारत
  • अंतरराष्ट्रीय
  • हमारे लेख
  • हमारे वीडियो
search
menu

सदस्यता लें, समर्थन करें

image/svg+xml
  • सारे लेख
  • न्यूज़क्लिक लेख
  • सारे वीडियो
  • न्यूज़क्लिक वीडियो
  • राजनीति
  • अर्थव्यवस्था
  • विज्ञान
  • संस्कृति
  • भारत
  • अंतरराष्ट्रीय
  • अफ्रीका
  • लैटिन अमेरिका
  • फिलिस्तीन
  • नेपाल
  • पाकिस्तान
  • श्री लंका
  • अमेरिका
  • एशिया के बाकी
हमारे बारे में
हमसे संपर्क करें
सब्सक्राइब करें
हमारा अनुसरण करो Facebook - Newsclick Twitter - Newsclick RSS - Newsclick
close menu
भारत
राजनीति
लव जिहाद की हकीक़त
नेहा दीक्षित
18 Oct 2014

(यह लेख http://www.aljazeera.com/ में छपे लेख का विस्तृत और अनुवादित रूप है )

लव जिहाद की हकीक़त

एक इंटरव्यू में उत्तर भरत के मेरठ में “लव जिहाद” की शिकार ने यह बात स्वीकार की  कि उसने प्यार किया था और किस तरह उसका प्रयोग भारत में सांप्रदायिक बटवारे के लिए किया गया

तथाकथित "लव जिहाद" की शिकार के साथ हुए बातचीत  की रिकॉर्डिंग 

 

दो महीने पहले उत्तर भारत के मेरठ और हापुर जिले “लव जिहाद” की खबरों के कारण सुर्ख़ियों में छा गए थेI पर जिस लड़की के बारे में कहा गया था कि प्यार के नाम पर बहला के ज़बरदस्ती उसका धर्मान्तरण किया गया था, उसी लड़की ने हाल ही में पुलिस को बयान दिया है कि वह कलीम शेख से प्यार करती है और शादी करना चाहती हैI कलीम शेख तथाकथित लव जिहाद के पांच आरोपियों में से एक हैI

12 अक्टूबर की सुबह, “एस” मेरठ पुलिस अधीक्षक से मिलने के लिए घर से निकलीIउसे न्यायाधीश सत्य प्रकाश राय के सामने पुलिस द्वारा पेश किया गया जहाँ उसने गवाही दी कि उसे घरवालो ने ज़बरदस्ती नजरबंद कर रखा था क्योंकि वे कलीम के साथ उसके रिश्ते को लेकर खुश नहीं थेIउसने यह भी कहाँ कि जान का खतरा होने के कारण उसे पुलिस सुरक्षा मोहय्या कराई जाएI कोर्ट ने उसकी इस दरख्वास्त पर सुरक्षा प्रदान की हैI

हमने 30 अगस्त को “एस” से उसके घर पर मुलाकात कीI बातचीत के दौरान उसने यह बात कबूली कि उसके करीम के साथ सबंध तो है ही, साथ ही उसे अपने घर वालो और समुदाय के हांथो प्रतारणा झेलनी पड़ रही हैI उसे जान का खतरा भी महसूस हो रहा है और यह सब इसलिए क्योंकी कलीम एक मुस्लिम युवक हैI उसने यह भी बताया की कलीम को बेवजह फ़साने की कोशिश की जा रही हैIहमने लड़की की सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए इस बातचीत का खुलासा नहीं किया थाIपर अब लड़की की सुरक्षा की ज़िम्मेदारी कोर्ट ने ले ली हैIनीचे दो गई बातचीत का ऑडियो टेप हमारे पास हैI
 

अगस्त में उठाया गया लव जिहाद का मुद्दा

3 अगस्त को मेरठ और हापुर जिले की सीमा पर बसा गाँव सरावा “लव जिहाद” के नाम पर तब सुर्ख़ियों में आया जब एक लड़की ने बयान दिया कि एक मदरसे में उसके साथ दुराचार कर उसे इस्लाम कबूलने के लिए मजबूर किया गयाI उसके परिवार ने एफ.आई.आर दाखिल करते हुए यह आरोप लगाया कि उसका 23 जुलाई को गाँव प्रधान नवाब द्वारा अपहरण कर लिया गया था और उसी दिन नवाब ने 4 और लोगो के साथ मिलकर उसका बलात्कार किया’Iउन्होंने यह भी आरोप लगाया कि स्थानीय धार्मिक नेता सानुल्लाह भी वहां मौजूद थेI लड़की के पेट पर सर्जरी के निशान होने की भी बात कही गईI उसी दिन बजरंग दल, शिव सेना,हिन्दू जागरण मंच और भाजपा के कार्यकर्ताओं ने हज़ार से अधिक लोगो के साथ पुलिस स्टेशन पर प्रदर्शन किया और चार दिन के अन्दर सभी आरोपियों को गिरफ्तार किया गयाI लड़की ने बाद में यह कबूला कि ये निशान अस्थानिक गर्भवस्था को हटाने के लिए की गई थीIइस बीच उसके बयान लगातार बदलते रहेI

                                                                                                                        

हालकि पुलिस ने अब तक चार्जशीट दाखिल नहीं की है पर तब से भाजपा,आर.एस.एस और शिवसेना जैसी दक्षिणपंथी ताकतें “लव जिहाद” नामक हिन्दुत्व प्रोपगंडा को फैला कर धार्मिक उन्माद और सांप्रदायिक तनाव पैदा करने की कोशिश कर रही हैंIबिना किसी साफ़ परिभाषा के, हिन्दू दक्षिणपंथी ताकतें लगातार यह कह रहीं हैं कि मुस्लिम लड़के अपनी धार्मिक पहचान को छुपाये या बिना छुपाये, हिन्दू लड़कियों को बहला फुसला कर उनसे प्यार का नाटक कर शादी कर रहे हैं और फिर धर्मान्तरण के लिए मजबूर भीI  आर.एस.एस की महिला मोर्चा राष्ट्र सेविका समिति की मुखिया शांताकाका ने दिसंबर 2012 में आर.एस.एस के एक कैंप के दौरान पत्रकार को बताया था कि “मुस्लिम लड़को को हिन्दू लड़कियों के साथ भागने के लिए प्रोत्साहित किया जाता हैI और हिन्दू लड़की के साथ भागकर उससे शादी करने के लिए उन्हें जो पैसे दिए जाते हैं वह लड़की की जात के अनुसार निर्धारित होता हैI राजपूत लड़की के लिए 1 लाख और ब्राह्मण लड़की के लिए 2 लाख का पुरस्कार दिया जाता हैI” छोटी जाति की लड़कियों को उतना अच्छा “शिकार” नहीं माना जाताI

                                                                                                                             
 

हमें एक महीने पहले ”एस” द्वारा दिया गया बयान

“एस” छोटे कदकाठी की विश्वास से भरी हुई हठी लड़की है जिसकी उम्र 20 साल होगीI वह मानविकी में स्नातक हैI रिपोर्टर ने उससे उस दिन बात कि जब संघ प्रमुख मोहन भागवत महिलाओं के सशक्तिकरण और उत्थान के ऊपर आयोजित एक सभा को संबोधित करते हुए यह ज़ोर देकर बोल रहे थे कि, “ नई पीढ़ी की लड़कियों को ‘लव जिहाद’ के सही मायने समझाने चाहिए ताकि वे इस जाल से खुद को बचा सके”I यह “एस” के “जाल” में फसने के ठीक एक महीने बाद की बात हैI

“एस” ने अपने परिवार की, 15 साल की उम्र से पड़ोस के बच्चो को पढ़ा कर, आर्थिक रूप से मदद की हैIउसके पिता, “एन” जिनकी उम्र 50 साल है, दिल्ली के लाजपत नगर में रोड के किनारे बैगो की दूकान लगाते हैंI वे हिन्दुओं में त्यागी  हैंI सरावा में त्यागी समुदाय बहुसंख्यक हैI त्यागी उपनाम पुरे देश में दोनों,हिन्दुओं और मुसलमानों, द्वारा बराबर प्रयोग किया जाता हैI ये मानते हैं कि इनके पूर्वज ब्राहमण थे जो पूजा पाठ का काम छोड़ कर खेती या रक्षक का काम करने लगेI जिन्होंने बाद में इस्लाम कबूल कर लिया उन्हें स्थानीय तौर पेpar मुस्लिम त्यागी, या “मेसारा” या “मुरा त्यागी” भी कहा जाता हैI
खेती में ज्यादा मुनाफा न होने की वजह से वे दिल्ली आ गए थे और अब हर महीने घर जाते हैंI “दिल्ली में मकान ke किराए इतने अधिक हैं कि मुझे अपनी बहन के यहाँ रहना पड़ता है”I उनकी बीवी, “टी” अपने मध्य चालीस में हैंI वे “एस” के साथ-साथ  एक और लड़की, जिसने हाल ही में स्कूल की पढाई पूरी की है और एक बेटे की माँ हैं, जो अभी ग्यारहवी क्लास में हैI घटना के बाद से “एन” दिल्ली वापस नहीं गएI वे “टी” के अशिक्षित होने को इसकी वजह बताते हैं क्योंकि उनका मानना है कि अशिक्षित होने की वजह से ही “टी” एस को ‘काबू’ में नहीं रख पायी और न ही लगातार आने वाले आगंतुकों से समझदारी से बात कर सके I

स्नातक के अंतिम साल में “एस” ने सरावा के सुल्तानिया मदरसे में टीचर की नौकरी करने का फैसला कियाI उत्तर भारत में मदरसों में हिन्दू छात्र या अध्यापक   होना आम बात हैI दिल्ली में स्थित  इंस्टीटूट ऑफ़ पीस एंड कॉनफलिक्ट स्टडीज के अनुसार भारत में लगभग 35,000 मदरसे हैं जहाँ लगभग 15 लाख बच्चे  पढ़ रहे हैं, जिनमे हिन्दू और मुसलमान दोनों ही हैंI

पत्रकार से ‘टी’ की उपस्थिति में हुई प्राइवेट बातचीत के दौरान ‘एस’ ने बताया कि “मै हापुर के स्कूल में भी पढ़ा सकती थी पर गाँव से शहर के लिए साधन पाना थोड़ा मुश्किल हैI मेरी दोस्त ‘पी’ ने बताया कि यहाँ पद खाली है और इसीलिए मैंने इसे चुना”I
भारत के अन्य प्राइवेट स्कूलों की तरह ही, मदरसे में ‘एस’ को 1500 rupaye पगार देने की बात कह कर केवल 1200 rupaye ही दिया जाता थाI बचे हुए पैसे छुट्टी आदि के नाम पर काट लिए जाते थे I उसने वहां अप्रैल में अपने परीक्षा से पहले काम छोड़ते वक़्त आठ महीने तक पढाया थाI उसने कहा कि “वे मेरी परीक्षा के बीच में काफी अंतराल होने की वजह से छुट्टी नहीं दे रहे थे”I उसी समय के दौरान उसने उत्तर प्रदेश पुलिस में कांस्टेबल की भर्ती हेतु हुई लिखित परीक्षा पास कर ली थीI उसे जल्द ही फिजिकल टेस्ट देना था और इसीलिए वह ट्रेनिंग के तौर पर रोज़ दौड़ने के लिए जाती थीI उसी वक़्त मासिक धर्म के दौरान एस को आकस्मिक रक्तस्त्राव की शिकायत हुईI एस ने बताया कि, “ मैं कलीम को बताती रहती थी कि हर वक़्त मेरा जी मिचलाता है और मै भारी माहवारी से भी गुजर रही हूँI उसने कहा कि यह दौड़ने की वजह से ज़ोर पड़ने के कारण हो रहा होगा”I

23 वर्षीय कलीम शेख मेरठ के उल्धन गाँव का निवासी हैIयह सरावा से 10 किलोमीटर दूर हैI एस ने बताया की वह कलीम से अपनी सहेली पूजा के जरिये मिली थी, जो उसी मदरसे में पढ़ाती थीI कलीम ने उसे बताया था कि वह इस साल वाणिज्य में स्नातक की डिग्री प्राप्त कर लेगा और वह इस बात से काफी प्रभावित है कि एस एक अध्यापिका हैI इसी बात ने एस को भी आकर्षित कियाI उसने बताया कि, “मै जब उससे पहली बार मिली तो कलीम ने मुझे बताया कि वह मुझे पसंद करता है और मुझे दोस्ती करना चाहता हैI मैंने इसके बारे में सोचाI यह बात मुझे परेशान जरुर करती थी कि वह मुसलमान है पर कलीम इतना अच्छा, ध्यान रखने और मेरी इच्छाओं की तारीफ करने वाला इंसान था कि मै उससे और अधिक मिलने लगीI” इसी बीच पूजा की शादी उसके साथी शारिक के साथ हो गईI
एस ने पूजा के बारे में बताया कि, “ वह बेहद खुश है और उसने अपनी पढाई जारी रखी है”I

क्या उसने  इस्लाम कबूल कर लिया है?” मैंने पूछा

 “नहीं, वह अब भी मंदिर जाती है””

कुछ महीनो में कलीम और एस के बीच प्यार होगयाI “उसने मुझसे पूछा कि क्या तुम्हे नहीं लगता कि हमें अब ज़िन्दगी में आगे बढ़ना चाहिएI शायद शादी कर लेनी चाहिए?”

पूजा की तरह एस को भी धर्म, समुदाय और सामजिक रूढ़ीवाद के दुसरे तरफ एक ऐसी ज़िन्दगी दिखने लगी जिसमे लड़का उसकी फ़िक्र करता था और उसकी इच्छाओं का आदर भीI

“और उसके धर्म का क्या होगा?” मैंने पूछा

“अभी तक, उससे मुझे कुछ फर्क नहीं पड़ता हैI उसने मुझसे यह भी कहा था कि शादी के बाद भी मै हिन्दू रह सकती हूँ  और मंदिर जा सकती हूँI “ एस ने बताया, और उसकी माँ टी गुस्से में उसे देख रही थी

                                                                                                                             

जिस दिन एस ने भारी रक्तस्त्राव की बात कही, उसके घरवाले उसे डॉक्टर के पास ले गए और तभी उसके गर्भवती होने की बात सामने आईI
मैंने रिकॉर्ड के लिए पूछा, “तुम गर्भवती कैसे हुई?”

उसने जवाब दिया,”कलीम के साथ”I एस ने आगे बताया कि, “23 जुलाई को मैंने अपने घरवालों से बताया कि मुझे कॉलेज ट्रिप के लिए जाना हैI डॉक्टर ने मुझे बताया कि मुझे आकस्मिक गर्भधारण हुआ है और इसे हटाना होगाI हम केवल सरकारी अस्पताल का खर्चा उठा सकते थेI कलीम और मै, पति एवं पत्नी के नाम से पंजीकृत हुए और मेरा ऑपरेशन हुआ”I
“क्या उसने इस समय में तुम्हारा ध्यान रखा?” मैंने पूछा
एस ने जवाब दिया, “हाँ, और कलीम ने ही सारे खर्चे भी उठाए हैं”I
यह बताना जरुरी है कि राष्ट्रीय ग्रामीण स्वास्थ मिशन के  केन्द्रीय स्वास्थ प्रबंधन एवं सुचना निकाय के आखिरी सरकारी आकड़ों के 2008-2009 के अनुसार भारत में लगभग 11 करोड़ 6 लाख गर्भपात करवाए जाते हैंI इसमें शहर और ग्रामीण दोनों ही इलाके शामिल हैंI एस का किस्सा कोई अलग या अकेला किस्सा नहीं हैI और वास्तविकता में मुंबई के इंटरनेशनल इंस्टीटूट फॉर पापुलेशन साइंसेज (आईआईपीएस) द्वारा एकत्रित किए गए आकड़ों के अनुसार ग्रामीण क्षेत्र में 21% पुरुष और 4% महिलाओं ने शहर के 11 % पुरुष और 2 % महिलाओं के मुकाबले  शादी से पहले शारीरिक संबंध की बात स्वीकार की हैI

2013 की शुरुआत में, जस्टिस वर्मा कमिटी की सिफ़ारिशो को लागू करने के समय, भारतीय जनता पार्टी और तृणमूल कांग्रेस ने सहमति से शारीरिक सम्बन्ध बनाने की उम्र की सीमा को 18 से घटा कर 16 करने का विरोध किया थाI इन्होने विरोध की वजह बताई कि यह सिफारिश भारतीय समाज के “संकीर्ण आदर्शों” के खिलाफ हैI

एक वरिष्ट पार्टी सदस्य ने कहा कि, “पार्टी चाहती है की इस बिल को इसी सत्र में पारित कर दिया जाए पर सहमति से संबंध बनाने की उम्र को कम करने के प्रावधान को हटा देना चाहिए”I मुस्लिम संगठनो ने भी इस सिफारिश को सिरे से नकार दियाI आल इंडिया मुस्लिम पर्सनल लॉ बोर्ड के सहायक सचिव अब्दुल रहीम कुरैशी ने कहा कि, “ यह विडंबना ही है कि एक तरफ जब लड़कियों के लिए शादी करने की उम्र 18 साल तय की गई है, वहीँ सरकार शारीरिक संबंध बनाने की सीमा घटा कर 16 कर रही हैI शादी से पहले शारीरिक संबंध समाज के लिए हानिकारक सिद्ध होगा”I” 
एस और कलीम, दोनों ने हो धर्म की सोच को किनारे रखते हुए अपनी इच्छाओं को तलाशने की कोशिश कीI शायद यह सामाजिक नियमों और धार्मिक सदाचार को ठेंगा दिखाने के लिए सबसे प्रभावकारी साधन थेI

एस ऑपरेशन के चार दिन बाद 27 जुलाई को घर वापस आईI “मेरे माता-पिता घर से चार दिन बहार रहने के कारण मुझसे नाराज़ थेI मुझे डांटा और प्रताड़ित किया गयाI मुझसे कहा गया कि इसके लिए मुझे सबक सिखाया जायेगाI मैंने उन्हें ऑपरेशन के बारे में तब तक कुछ नहीं बताया थाI” एस की माँ ने जल्द ही शरीर पर टाँके देख लिए और यह बवाल उठ खड़ा हुआI
सरावा, उस मुज्ज़फ्फरनगर से मात्र 70 किलोमीटर दूर है जिसने एक साल पहले सांप्रदायिक हिंसा का वो विभत्स रूप देखा हैं जिसमे सैकड़ों लोगो ने अपनी जान गवाई और हजारों बेघर हो गएI इन दंगो की वजह, मुसलमान लड़कों से हिन्दू लड़कियों की इज्जत बचाना दी गईI  यह दंगे तब भड़के जब किसी मुसलमान लड़के द्वारा हिन्दू लड़की से छेड़छाड़ की बात सामने आईI आरोपी लड़के और लड़की के भाइयों की दो अलग अलग वारदातों में हत्या की गईI सामजिक पंचायतों ने महासभाओं का आयोजन किया जिसमे घृणा और नफ़रत की बीज बोने वाले अनेक दक्षिणपंथी नेताओं ने हिस्सा लियाI इनमे से एक पंचायत ने “बेटी बचाओ, बहु बचाओ” से लेकर” बेटी बचाओ, बहु बनाओ” के नारे दिएजिसका अर्थ था की हिन्दू बेटियों को बचाना है और साथ ही मुस्लिम लड़कियों को बहु बनाना होगाIपित्रसत्ता के इस नारे में, जिसमे एक पति का अपनी पत्नी के ऊपर बलपूर्वक पैठ ज़माना, सामने निकल कर आता है, कोई आश्चर्यजनक बात नहीं हैI हिन्दू और मुसलमान की बराबर जनसँख्या वाले क्षेत्र इन दंगो में सबसे ज्यादा प्रभावित हुएI

                                                                                                                      

स्थानीय लोग यह भी दावा करते हैं कि यह सरावा फ़िल्मी अभिनेता शाहरुख खान का गाँव हैIइस साल गाँव ने मुस्लिम प्रधान (नवाब) चुना है जबकि पिछली दो बार से यह पद हिन्दू त्यागीयों के हाँथ में थाIमुसलमानों और दलित के मतों ने साथ मिलकर नवाब की जीत सुनिश्चित की हैIपद सँभालने के बाद नवाब ने मस्जिद का दरवाज़ा बदलने मे मदद कीI स्थानीय निवासियों के अनुसार मस्जिद में जाने का रास्ता काफी छोटा था इसीलिए बड़ा दरवाज़ा लगाया गयाIइसे मुसलमानों द्वारा गाँव में अपने वर्चस्व के दावे के रूप में देखा गया जिसके कारण हिन्दू त्यागी नाराज़ हो गएIलोकसभा चुनावों में उत्तर प्रदेश ने साम्प्रदायिक और घृणा फ़ैलाने वाली राजनीति का एक अलग स्तर देखाIलोगो की नजर में मस्जिद का दरवाज़ा बड़ा ही होता गयाIऔरंगजेब को फिर अपशब्द कहे गए और त्यागीयों को सांप्रदायिक लकीरों के आधार पर बाँट दिया गयाI

जब एस ऑपरेशन के कारण घर में लगातार दिए जा रहे तानो से परेशान हो गई तो कलीम से शादी ही इसका इलाज थाI पर विशेष विवाह अधिनियम के दावपेंचो के कारण धार्मिक विवाह ही सबसे सरल उपाय मौजूद था, और धार्मिक विवाह का मतलब था कागज़ पर धर्म परिवर्तनI एस ने पत्रकार को बताया कि उसने एफ़ीडेविट पर हस्ताक्षर किए जिसमे यह लिखा था कि वह इस्लाम कबूल कर रही है और उसने अपना नाम बदल कर बुशरा जन्नत रख लिया है,उसने ऐसा केवल कलीम से शादी करने के लिए किया थाI पर परिवार को इसका पता शादी के पहले ही चल गयाI और तभी हिन्दू जागरण मंच,शिव सेना, आर.एस.एस. बजरंग दल के सदस्यों और अन्य नेताओं के साथ परिवार वाले पुलिस स्टेशन में “लव जिहाद” का केस दर्ज करने पहुँच गएIसाम्प्रदायिक ध्रुवीकरण से ग्रसित सरावा में इसके लिए समर्थन जुटाना मुश्किल काम नहीं थाI नए चुने गए प्रधान नवाब का नाम भी इस केस में डाला गया और वह तब से ही जेल में हैI
“कलीम अब कहाँ है?” मैं एस से जानना चाहती थीI

एस ने अपनी माँ की उपस्थिति में विश्वास के साथ जवाब दिया, “जेल मेंI पुलिस ने हमारे बीच फ़ोन पे हुई बातचीत का रिकॉर्ड निकाल कर उसे गिरफ्तार कर लियाI जब जेल में रोज़ पुलिस उसे मार रही है तो वह झूठ क्यों बोलेगा? अगर मुझसे प्यार करना उसकी गलती थी, तो यह गलती फिर मेरी भी हैI”
“अब तुम क्या चाहती हो?” मैंने पूछा

“मुझे न्याय चाहिएI मेरी ज़िन्दगी तो अब वैसे भी ख़त्म हो गई हैI इस पुरे वारदात को लेकर अब मुझे हमेशा ताने सुनने पड़ेंगेI अब तो वह कह ही रहे हैं कि मेरा शरीर और कोख, दोनों ही अशुद्ध हो गई हैI बाकी सबका अंदाज़ा खुद लगाया जा सकता हैIमै तो केवल यह जानना चाहती हूँ कि कलीम इसके बारे में क्या कहेगाIमै उसके साथ सीधे बात करके यह जानना चाहती हूँ कि वह क्या चाहता हैIमै यह नहीं चाहती कि उसको सज़ा मिलेI जब आप किसी से प्यार करते हैं तो आपकी भी बराबर  की ही ज़िम्मेदार होती हैंI अगर हम गलत हैं तो सज़ा हम दोनों को ही मिलनी चाहिएI मै बार-बार कह रही हूँ कि मुझे न्याय चाहिएI आखिर क्यों मै उसे ज़िन्दगी भर बिना किसी अपराध के सजा झेलने दूं? लोग कह रहे हैं कि मेरा चरित्र सही नहीं है और मै यह सब सरकार के पैसे के लिए कर रही हूँI मुझे रूपए नहीं चाहिएIमुझे न्याय चाहिएI न ही मुझे शादी करनी हैI मेरा परिवार मुझे ताने दे रहा है कि मै शारीरिक इच्छाओं के बस में आ गई हूँI उन्होने मुझे बेहद घृणित शब्दों से पुकारा हैIमै आपको वह सब बता भी नहीं सकतीI”

अब टी,एस की माँ, ने रोना शुरू कर दिया था
“क्या तुम्हे लगता है कि इतना सब होने के बाद भी कलीम तुमसे शादी करेगा?” मैंने पूछाI

उसने सोचते हुए कहा कि, “ दीदी, अगर वो नहीं करेगा तो कोई और भी नहीं करेगाI इस दुनिया में और कोई ऐसा दयालु इंसान नहीं है जो ये सब जानने के बाद मुझसे शादी करेगा”I
टी गुस्से में बिना पलक झपकाये उसे देख रही थीI
“अगर वह तुम्हे वापस चाहता है , तो क्या तुम जाओगी?” मैंने पूछा

“हांI धर्म मायने नहीं रखताI उसे मेरे हिन्दू रहने और मंदिर जाने से कोई समस्या नहीं थीI किसका धर्म ख़राब होता है?किसी का नहींI हमने इंसान को हिन्दू और मुसलमान में बाँट दिया है,जबकि हम सब एक ही हैं”I

लव जिहाद का सबसे बड़ा मिथ्य यह रहा है कि मुसलमान लड़के हिन्दू लड़कियों का धर्म बदलवा कर अपनी संख्या बढ़ाना चाहते हैंI पर एस के इस दावे ने कि कलीम को उसके धर्म से कोई दिक्कत नहीं है, ने इस मिथ्य की पोल खोल दी हैI

टी यह सुनकर उन्मत्त हो जाती हैI वह अपनी छाती पीट कर ज़ोर से रोने लगती हैI वह कहती है कि अगर, “ उसने मुसलमान से शादी की तो मैं और इसके पिता, दोनों अपनी जान दे देंगेI”

एस ने जवाब दिया, “रो मत, मै भी रोई थीI अगर मैंने पुलिस को उस दिन पुलिस को सब बताया नहीं होता तो यहाँ के लोग मुझे मार देतेI”

एस का संकेत पश्चिमी उत्तर प्रदेश और हरियाणा में खाप पंचायतों और जातिगत समूहों के आदेश पर हो रहे हॉनर किलिंग’ की तरफ थाI संयुक्त राष्ट्र के आकड़ों के अनुसार , हर वर्ष विश्व में हॉनर किलिंग के हर पांच वारदातों में एक वारदात हिन्दुस्तान में होती हैI

                                                                                                                      

टी ने एकाएक जवाब दिया, “ कोई अपनी बेटी को नहीं मारता हैI”

एसने ऊँगली उसकी तरफ दिखाते हुए कहा कि, “ न मैंने किसी के साथ भागकर शादी की और न ही मेरा इरादा तुम्हे बदनाम करने का थाI ये आप लोग थे जिन्होंने इस मुद्दे को प्रचारित कियाIआप ने मीडिया और नेताओं को बुलायाI मैंने किसी से भी एक शब्द नहीं कहाI मुझे बस यह कहना है कि अगर मै गलत हूँ तो मुझे सजा मिलनी चाहिएI बाकी फिर आप सोच लीजिये आपको क्या करना है

बातचीत को तीव्र और तेज़ होता देख एस के पिता अन्दर आते हैं, बातचीत को बीच में रोकते हुए वे एस और टी को अन्दर जाने के लिए बोलते हैंI

एस ने उनके तरफ मुड़ कर कहा, “लोग वैसे भी कह रहे हैं कि इस गाँव का कोई व्यक्ति या तो मुझे गोली मार देगा या पत्थर मार कार मेरी हत्या कर दी जाएगीI”ऐसा कह कर वह निकल जाती हैI

परिणाम

लोकसभा चुनावों के प्रचार के दौरान विश्व हिन्दू परिषद, मुज्ज़फ्फरनगर इकाई के प्रमुख ललित महेश्वरी ने इस पत्रकार के साथ हुए इंटरव्यू में कहा था कि, “जिन जवान लड़कियों के पास मोबाइल फ़ोन होता है, वही लड़कों से बात कर परिवार के लिए बदनामी को उपज देती हैंI माता-पिता को इसपर नजर रखनी चाहिएI” हालाकि महेश्वरी ने अनेक खाप पंचायतो की बात दोहरा दी है , जिन्होंने मोबाइल फ़ोन को स्वेच्छा से की शादी की वजह बताई हैI और यह कोई संयोग की बात नहीं कि इस घटना के बाद एस से उसका फ़ोन ले लिया गया और बाहरी दुनिया से जिसमे कलीम भी शामिल था, उसके संबंध काट दिए गएI

बढती हुई स्वेच्छा से की गई शादी और  जातिगत समूहों द्वारा की गई हॉनर किलिंग आज देश में अनुपातिक स्तिथि में हैI इससे समाज की, युवा लड़कियों द्वारा खुद लिए गए फैसलों के प्रति अनुदारता झलकती हैI संघ परिवार और उसके अन्य संगठन आसानी से इसका दोहन कर समाज में सांप्रदायिक तनाव की स्तिथि पैदा करने में कामयाब हुए हैंI
महेश्वरी ने कैमरा द्वारा रिकॉर्ड किए हुए इंटरव्यू में यह भी कहा है कि, “एक बार भाजपा सत्ता में आ जाए तो वे ऐसे कानून लायेंगे जिससे अंतर जातीय एवं अंतर धार्मिक शादियों पर रोक लगे जा सकेI” इस बात से जरा भी आश्चर्य नहीं होता है कि संघ परिवार के अनेक सदस्य संगठनो ने ऐसे ‘मोर्चे’ बना रखे हैं जिनका एकमात्र काम स्वेच्छा से की गई शादी जिसे उन्होंने लव जिहाद का नाम दिया है, को रोकना हैIसरावा आर.एस.एस. इकाई की बहन बेटी बचाओ संघर्ष समिति का गठन एस के मुद्दे के प्रचारित होने के बाद ही हुआ हैI इसी तरह दो हफ्ते बाद, संघ के छात्र संगठन ए.बी.वी.पी द्वारा मेरठ बचाओ मंच का गठन किया गयाIइसका काम हिन्दू लड़कियों को धर्मान्तरण के खिलाफ जागरूक करना थाI

दोनों ही उदेश्यों, जिसमे लड़कियों को जागरूक करने और बचाने की बात की गई है, लड़कियों की स्वायत्ता के ऊपर पुरुष प्रधान का हावी होना दिखाते हैं, साथ ही यह भी साफ़ झलकता है कि इस पितृसत्तात्मक व्यवस्था में लड़कियों के जीवन से जुड़े हर महत्वपूर्ण फैसले लेने का अधिकार केवल पुरुषों के पास हैI

ताजुब की बात यह है कि इस घटना के बाद किसी मुस्लिम संगठन ने कलीम की तरफ सहायता का हाँथ नहीं बढाया हैI इसके विपरीत एक महीने बाद, मुस्लिम धार्मिक नेताओं ने रिवर्स लव जिहाद या हिन्दू धर्मं युद्ध की बात कही , जिसमे उन्होंने आरोप लगाया कि हिन्दू लड़के मुस्लिम लड़कियों का जबरन उनसे शादी करने और धर्म परिवर्तन के लिए उकसा रहे हैंI
इसीलिए जब पत्रकार ने कलीम से मिलने की सिफारिश की तब, उसके वकील ने कलीम के परिवार के आदेश पर इसकी अनुमति नहीं दीI एक परिवार के सदस्य ने कहा कि, “हमारा उससे कुछ लेना देना नहीं है”I वह इसलिए नहीं कि उसपर हिन्दू कट्टरपंथियों द्वारा किसी तरह का काल्पनिक आरोप लगा है पर इसलिए कि मुस्लिम कट्टरपंथियों ने शादी से पहले शारीरिक संबंध और स्वेच्छा से शादी पर रोक लगाई हैI

सरावा गाँव के बीच में स्थित एक घर के दिवार पर की गई सफ़ेद चुने की पुताई नजर से ना बचने वाली हैIघर के बाहर  लक्ष्मी-गणेश का टाइल दर्शाता है कि यह किसी हिन्दू का घर हैI एक छोटा सा काला गेट घर को दो हिस्सों में बाटता हैIएक तरफ मोनू त्यागी टैक्सी सर्विस और उसका फ़ोन नंबर हरे रंग से लिखा हुआ हैI दीवार के दुसरे तरफ ‘मदरसा उर्दू मीडियम मेख्ताब, क्लास 1 से 8’ उसी रंग में लिखा है जो बेहद हल्का दिख रहा है क्योंकि उसे हाल ही में मिटा दिया गया हैI ‘लव जिहाद’ के मिथ्य ने 7000 आबादी वाले इस गाँव को जिसमे बराबर हिन्दू और मुसलमान रहते हैं, इसी तरह दो हिस्सों में बात दिया हैI

सामाजिक सुधार आन्दोलन की कमी के चलते पित्रसत्ता के खिलाफ लड़ाई कमजोर पड़ गई हैIइस पित्रसत्ता ने धर्म और राजनीति मेंअपनी जड़ों को मज़बूत करते हुए ,औरत के अधिकारों का हनन करने पर तुली हैI ऐसे हालात में एस जैसी लड़कियों के लिए,जो जाति और धर्म से परे उठ कर अपना जीवन स्वयं निर्धारित करना चाहती हैं, आगे की लड़ाई बेहद कठिन हैI

 

(अनुवाद- प्रांजल)

 

डिस्क्लेमर:- उपर्युक्त लेख मे व्यक्त किए गए विचार लेखक के व्यक्तिगत हैं, और आवश्यक तौर पर न्यूज़क्लिक के विचारो को नहीं दर्शाते ।

 

 

 

सांप्रदायिकता
लव जिहाद
भाजपा
आर.एस.एस
शिवसेना
हिन्दू जागरण मंच
मेरठ
मुज्ज़फ्फरनगर दंगे

Related Stories

महाराष्ट्र महापौर चुनाव: शिवसेना-कांग्रेस-एनसीपी की तिकड़ी के आगे भाजपा परास्त

#श्रमिकहड़ताल : शौक नहीं मज़बूरी है..

आपकी चुप्पी बता रहा है कि आपके लिए राष्ट्र का मतलब जमीन का टुकड़ा है

अबकी बार, मॉबलिंचिग की सरकार; कितनी जाँच की दरकार!

आरक्षण खात्मे का षड्यंत्र: दलित-ओबीसी पर बड़ा प्रहार

झारखंड बंद: भूमि अधिग्रहण बिल में संशोधन के खिलाफ विपक्ष का संयुक्त विरोध

झारखण्ड भूमि अधिग्रहण संशोधन बिल, 2017: आदिवासी विरोधी भाजपा सरकार

यूपी: योगी सरकार में कई बीजेपी नेताओं पर भ्रष्टाचार के आरोप

मोदी के एक आदर्श गाँव की कहानी

क्या भाजपा शासित असम में भारतीय नागरिकों से छीनी जा रही है उनकी नागरिकता?


बाकी खबरें

  • CARTOON
    आज का कार्टून
    प्रधानमंत्री जी... पक्का ये भाषण राजनीतिक नहीं था?
    27 Apr 2022
    मुख्यमंत्रियों संग संवाद करते हुए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने राज्य सरकारों से पेट्रोल-डीज़ल के दामों पर टैक्स कम करने की बात कही।
  • JAHANGEERPURI
    नाज़मा ख़ान
    जहांगीरपुरी— बुलडोज़र ने तो ज़िंदगी की पटरी ही ध्वस्त कर दी
    27 Apr 2022
    अकबरी को देने के लिए मेरे पास कुछ नहीं था न ही ये विश्वास कि सब ठीक हो जाएगा और न ही ये कि मैं उनको मुआवज़ा दिलाने की हैसियत रखती हूं। मुझे उनकी डबडबाई आँखों से नज़र चुरा कर चले जाना था।
  • बिहारः महिलाओं की बेहतर सुरक्षा के लिए वाहनों में वीएलटीडी व इमरजेंसी बटन की व्यवस्था
    न्यूज़क्लिक रिपोर्ट
    बिहारः महिलाओं की बेहतर सुरक्षा के लिए वाहनों में वीएलटीडी व इमरजेंसी बटन की व्यवस्था
    27 Apr 2022
    वाहनों में महिलाओं को बेहतर सुरक्षा देने के उद्देश्य से निर्भया सेफ्टी मॉडल तैयार किया गया है। इस ख़ास मॉडल से सार्वजनिक वाहनों से यात्रा करने वाली महिलाओं की सुरक्षा व्यवस्था बेहतर होगी।
  • श्रीलंका का आर्थिक संकट : असली दोषी कौन?
    प्रभात पटनायक
    श्रीलंका का आर्थिक संकट : असली दोषी कौन?
    27 Apr 2022
    श्रीलंका के संकट की सारी की सारी व्याख्याओं की समस्या यह है कि उनमें, श्रीलंका के संकट को भड़काने में नवउदारवाद की भूमिका को पूरी तरह से अनदेखा ही कर दिया जाता है।
  • israel
    एम के भद्रकुमार
    अमेरिका ने रूस के ख़िलाफ़ इज़राइल को किया तैनात
    27 Apr 2022
    रविवार को इज़राइली प्रधानमंत्री नफ्ताली बेनेट के साथ जो बाइडेन की फोन पर हुई बातचीत के गहरे मायने हैं।
  • Load More
सब्सक्राइब करें
हमसे जुडे
हमारे बारे में
हमसे संपर्क करें

CC BY-NC-ND This work is licensed under a Creative Commons Attribution-NonCommercial-NoDerivatives 4.0 International License