NewsClick

NewsClick
  • English
  • राजनीति
  • अर्थव्यवस्था
  • विज्ञान
  • संस्कृति
  • भारत
  • अंतरराष्ट्रीय
  • हमारे लेख
  • हमारे वीडियो
search
menu

सदस्यता लें, समर्थन करें

image/svg+xml
  • सारे लेख
  • न्यूज़क्लिक लेख
  • सारे वीडियो
  • न्यूज़क्लिक वीडियो
  • राजनीति
  • अर्थव्यवस्था
  • विज्ञान
  • संस्कृति
  • भारत
  • अंतरराष्ट्रीय
  • अफ्रीका
  • लैटिन अमेरिका
  • फिलिस्तीन
  • नेपाल
  • पाकिस्तान
  • श्री लंका
  • अमेरिका
  • एशिया के बाकी
हमारे बारे में
हमसे संपर्क करें
सब्सक्राइब करें
हमारा अनुसरण करो Facebook - Newsclick Twitter - Newsclick RSS - Newsclick
close menu
भारत
राजनीति
निजी बैंकों के कुछ राज़
PNB बैंक घोटाले के बाद बहुत से लोग बैंकों के निजीकरण की बात कर रहे हैं , जबकी RBI के आंकडे बताते हैं कि ये करना कितना खतरनाक हो सकता है I
सुबोध वर्मा
21 Feb 2018
Translated by ऋतांश आज़ाद
bank

भारतीय कई वजहों से अब भी सार्वजनिक बैंकों में विश्वास करते हैं I भारतीय बैंकिंग सिस्टम में कुल 111 लाख करोड़ रुपये जमा है जिसमें से 81 लाख या 73% पैसा सार्वजनिक बैंकों में जमा है I ये सरकार द्वारा समर्थित होते हैं और इनकी पहुँच दूर दराज़ के गावों तक है और वह जितने भी अप्रभावी हों पर आज भी वह भारत में कर्ज़ लेने और देने की मुख्य संस्था है I

पर हीरा व्यापारी नीरव मोदी द्वारा पंजाब नैशनल बैंक के अधिकारियों की मौन सहमती के द्वारा किये गए घोटाले के बाद काफी सारे अर्थशास्त्रियों और अर्थव्यवस्था पर लिखने वालों ने कहना शुरू कर दिया है कि भारत को अब सार्वजनिक बैंकों का निजीकरण कर देना चाहिए I

वैसे इस बेवकूफाना माँग पर ध्यान न देने की काफी सारी वजहें हैं पर एक वजह जिसके बारे में बहुत कम लोग जानते हैं , है कि निजी और अंतरराष्ट्रीय बैंकों के पास बहुत सी गुप्त देनदारियाँ हैं I इन देनदारियों को कनटिनजेंट लायबिलिटी कहा जाता है या सामान्य भाषा में ऑफ बैलेंसशीट लायबिलिटी I उन्हें बैलेंसशीट में नहीं दिखाया जाता (पर कई बार फुटनोट्स में लिखा जाता है) क्योंकि उनकी वास्तविक कीमत का पता नहीं होता I

भारतीय रिज़र्व बैंक ने बताया है कि वित्ततीय वर्ष 2016-17 में भारत के बैंकों के पास कितनी कनटिनजेंट लायबिलिटी थी I ये आंकडे आपको डरा देंगे I

chart

RBI ने समझाया है कि ऑफ बैलेंसशीट लायबिलिटी में डेरिवेटिव उत्पाद (जिसका अर्थ है वो उत्पाद जिनकी कीमत भविष्य की संभावनाओं पर निरभर हैं), दी गयी गारंटीयाँ, स्वीकृतियां, पुष्ठियाँ आदि शामिल हैं I इसके आलावा बैंकों पर दावे जिन्हें ऋण के रूप में स्वीकार नहीं किया गया, आंशिक रूप से भुगतान किये गए निवेशों के रूप में देनदारियाँ, पुनह भुनाए गए बिल और- अपनी साँसे रोक लीजिये - साख पत्र भी शामिल हैं I

इन अजीब लेनदारियों में से ज़्यादातर डेरिवेटिव ही होते हैं , यानी वो सेक्योरिटी जिसकी कीमत अंतर्निहित परिसंपत्तियों से तय की जाती हैं I साधारण भाषा में समझाया जाए तो ये एक तरह का जुआ है I इस तरह की चीज़ों में बहुत अनिश्चित्ता होती है I इस तरह की शर्तें किसी भी चीज़ पर लगायी जा सकती हैं चाहे वह चीज़ों की कीमत हो या मौसम I डेरिवेटिव विभिन्न प्रकार के होते हैं जैसे मुद्रा दरें , ब्याज दरें , गिरवी दरें आदि I यही डेरिवेटिव खासकर गिरवी रक्खी गयी सम्पत्तियाँ थीं जिनकी वजह से 2007-08 में आर्थिक मंदी हुई थी I

भारतीय निजी बैंक और अंतराष्ट्रीय बैंक बड़ी मात्रा में इसी तरह से पैसा कमाते हैं, न कि पैसा जमा करने या कर्ज़ देने से I यही वजह है कि भारतीय बैंकों की कुल सम्पत्ति का 27% उनके पास है I

अगर इस डेरिवेटिव की दुनिया में कुछ भी उथल पुथल होती है तो इससे ये बैंक डूब सकते हैं I उनका एक्सपोज़र बहुत बड़ा है और वह अपने ग्राहकों को इस तरह बहुत बड़े खतरे में डाल रहे हैं I

तो निजीकरण की इस बात को हमें उसके अंजामों को नज़र में रखते हुए समझना चाहिए I वह आम भारतीयों की महनत के बजाये मुनाफा कमाने के लालच से चलते हैं I

PNB बैंक
नीरव मोदी
निजी बैंक
सार्वजनिक बैंक
RBI

Related Stories

लंबे समय के बाद RBI द्वारा की गई रेपो रेट में बढ़ोतरी का क्या मतलब है?

आम आदमी जाए तो कहाँ जाए!

महंगाई 17 महीने के सबसे ऊंचे स्तर पर, लगातार तीसरे महीने पार हुई RBI की ऊपरी सीमा

रिपोर्टर्स कलेक्टिव का खुलासा: कैसे उद्योगपतियों के फ़ायदे के लिए RBI के काम में हस्तक्षेप करती रही सरकार, बढ़ती गई महंगाई 

आज़ादी के बाद पहली बार RBI पर लगा दूसरे देशों को फायदा पहुंचाने का आरोप: रिपोर्टर्स कलेक्टिव

RBI कंज्यूमर कॉन्फिडेंस सर्वे: अर्थव्यवस्था से टूटता उपभोक्ताओं का भरोसा

नोटबंदी: पांच साल में इस 'मास्टर स्ट्रोक’ ने अर्थव्यवस्था को तबाह कर दिया

तबाही मचाने वाली नोटबंदी के पांच साल बाद भी परेशान है जनता

नोटबंदी की मार

तत्काल क़र्ज़ मुहैया कराने वाले ऐप्स के जाल में फ़ंसते नौजवान, छोटे शहर और गाँव बने टार्गेट


बाकी खबरें

  • covid
    न्यूज़क्लिक टीम
    कोरोना अपडेट: देश में 24 घंटे में 11,451 नए मामले, 266 मरीज़ों की मौत
    08 Nov 2021
    देश में एक्टिव मामलों की संख्या घटकर 1 लाख 42 हज़ार 826 हो गयी है।
  •  Stubble Burning
    इंद्र शेखर सिंह
    पराली जलाने की समस्या आख़िर दूर होने का नाम क्यों नहीं ले रही?
    08 Nov 2021
    पराली जलाने की समस्या की जड़ में एक ऐसी सरकार है, जो इस समस्या का ख़्याल रखे बिना नीतियां बनाती है।
  • Muhammad Ali Jinnah
    न्यूज़क्लिक टीम
    मोहम्मद अली जिन्ना: सफ़ेद और स्याह के परे
    07 Nov 2021
    हाल ही में समाजवादी पार्टी के नेता अखिलेश यादव ने मोहम्मद अली जिन्ना को गाँधी, नेहरू व भारत की आज़ादी के लिए लड़ने वाले अन्य लोगों के समान रखा जिससे तमाम राजनीतिक दलों, खासतौर से दक्षिणपंथ, की ओर से…
  • cycle rally
    मुकुंद झा
    दिल्ली: बढ़ती महंगाई के ख़िलाफ़ मज़दूर, महिला, छात्र, नौजवान, शिक्षक, रंगकर्मी एंव प्रोफेशनल ने निकाली साईकिल रैली
    07 Nov 2021
    देश में लगातार बढ़ती महंगाई के ख़िलाफ़ दिल्ली में मज़दूर, महिला, छात्र, नौजवान, शिक्षक, कलाकार, रंगकर्मी, प्रोफेशनल व अन्य जन संगठनों ने संयुक्त रूप से रविवार को एक साईकिल रैली निकली। यह रैली दिल्ली…
  • diwali
    न्यूज़क्लिक डेस्क
    इतवार की कविता: इस साल भी !
    07 Nov 2021
    ‘इतवार की कविता’ में पढ़ते हैं कवि-पत्रकार उपेंद्र चौधरी की एक नई कविता...जिसमें वे दीन-दुनिया के मामूल का ज़िक्र करते हुए बता रहे हैं कि कैसे “इस साल भी…, जलता रहा दीया, दरकती रही छाती”।
  • Load More
सब्सक्राइब करें
हमसे जुडे
हमारे बारे में
हमसे संपर्क करें

CC BY-NC-ND This work is licensed under a Creative Commons Attribution-NonCommercial-NoDerivatives 4.0 International License