NewsClick

NewsClick
  • English
  • राजनीति
  • अर्थव्यवस्था
  • विज्ञान
  • संस्कृति
  • भारत
  • अंतरराष्ट्रीय
  • हमारे लेख
  • हमारे वीडियो
search
menu

सदस्यता लें, समर्थन करें

image/svg+xml
  • सारे लेख
  • न्यूज़क्लिक लेख
  • सारे वीडियो
  • न्यूज़क्लिक वीडियो
  • राजनीति
  • अर्थव्यवस्था
  • विज्ञान
  • संस्कृति
  • भारत
  • अंतरराष्ट्रीय
  • अफ्रीका
  • लैटिन अमेरिका
  • फिलिस्तीन
  • नेपाल
  • पाकिस्तान
  • श्री लंका
  • अमेरिका
  • एशिया के बाकी
हमारे बारे में
हमसे संपर्क करें
सब्सक्राइब करें
हमारा अनुसरण करो Facebook - Newsclick Twitter - Newsclick RSS - Newsclick
close menu
चुनाव 2022
विधानसभा चुनाव
भारत
राजनीति
तिरछी नज़र: धन भाग हमारे जो हमें ऐसे सरकार-जी मिले
हालांकि सरकार-जी का देश को मिलना देश का सौभाग्य है पर सरकार-जी का दुर्भाग्य है कि उन्हें यह कैसा देश मिला है। देश है कि सरकार-जी के सामने मुसीबत पर मुसीबत पैदा करता रहता है।
डॉ. द्रोण कुमार शर्मा
06 Mar 2022
तिरछी नज़र: धन भाग हमारे जो हमें ऐसे सरकार-जी मिले

मुझे तो अपने सरकार-जी बहुत ही पसंद हैं। इतने अच्छे, इतने कर्तव्यपरायण सरकार-जी आज तक हमारे देश को नहीं मिले हैं। यह देश का सौभाग्य है कि अब चाहे करीब सत्तर साल बाद ही सही, पर देश को ऐसे अच्छे सरकार-जी मिले हैं।

हालांकि सरकार-जी का देश को मिलना देश का सौभाग्य है पर सरकार-जी का दुर्भाग्य है कि उन्हें यह कैसा देश मिला है। देश है कि सरकार-जी के सामने मुसीबत पर मुसीबत पैदा करता रहता है। रोज नई मुसीबत। और मुसीबत भी कैसी-कैसी? अजीबोगरीब तरह की। ये पल पल में खड़ी हो जाने वाली मुसीबतें सरकार-जी को ढंग से चुनाव भी नहीं लड़ने देती हैं। अब यूक्रेन की लड़ाई की ही बात लो। इधर उत्तर प्रदेश में चुनाव चल ही रहे हैं और उधर यूक्रेन में युद्ध शुरू हो गया है। ये पुतिन भी है न, है तो सरकार-जी का जिगरी दोस्त, पर सरकार-जी का जरा भी ख्याल नहीं रखा। अगर सात मार्च के बाद ही लड़ाई कर लेते तो क्या हो जाता। तब सरकार-जी भी पूरा ध्यान लड़ाई में लगा लेते।

लड़ाई शुरू हुई तो बीस हजार छात्र छात्राएं यूक्रेन में ही फंस गए। सरकार-जी चुनाव में बिजी थे तो विदेश मंत्रालय को कहना ही भूल गए कि छात्रों को समय पर एडवाइजरी जारी कर दो। और सरकार का हाल ऐसा है कि सरकार-जी के कहे बिना, एडवाइजरी तो क्या जारी होती, पत्ता तक नहीं हिलता है। अब यूक्रेन में भारत का दूतावास भी सरकार का ही हिस्सा है। तो उसने भी एडवाइजरी जारी नहीं की और छात्र फंस गए। दूसरे देशों ने समय पर एडवाइजरी जारी कर दी थी क्योंकि वहां पर चुनाव नहीं थे। वैसे भी वहां के सरकार-जी ही पूरी सरकार नहीं हैं।

हमारे सरकार-जी माहिर हैं गलती दूसरों पर डालने में। तो सरकार-जी ने उन छात्रों को स्पष्ट रूप से बता दिया कि सारी की सारी गलती उन छात्रों की ही है। वे आखिर इतने छोटे देश में गए ही क्यों। और वह भी पढ़ाई जैसी बेकार की चीज के लिए। क्या पढ़ना इतना ही जरूरी है! तो अब खुद भुगतो। हमारे देश में तो पढ़ने लिखने की इतनी जरूरत है ही नहीं। अब तो गोबर बेचने का व्यवसाय भी शुरू होने वाला है। तो सरकार-जी ने शुरू में तो छात्रों को अपनी गलती खुद भुगतने के लिए ही छोड़ दिया।

लेकिन हमारे सरकार-जी ठहरे बहुत ही भावुक। किसी के जरा से भी दुख से दुखी हो जाते हैं। गाड़ी के नीचे पिल्ला भी आ जाता है तो उन्हें बुरा लगता है। सात सौ से ज्यादा किसान मर जाते हैं तो कानून वापस ले लेते हैं। जबकि सरकार-जी को पता था कि किसान उनके लिए नहीं मरे हैं। तो हमारे भावुक सरकार-जी को लगा कि बच्चे फंस गए हैं तो उनकी भी मदद करनी ही चाहिए।

सरकार-जी मदद करने के मामले में सबसे आगे रहते हैं। हमेशा देशवासियों की मदद करते रहते हैं। कोरोना काल में, पहले लॉकडाउन में, देशवासियों को पैदल चलने की कितनी प्रैक्टिस करवाई थी। लोग दिल्ली से ही बिहार, उड़ीसा तक पैदल चल पड़े थे। तो छात्रों से भी कहा कि तुम भी पैदल चलो। पैदल चल कर, बस या कैब से, ट्रेन से किसी भी तरह से युद्ध क्षेत्र से, यूक्रेन से बाहर निकल आओ तो सरकार-जी पोलैंड, हंगरी या रोमानिया से रेस्क्यू कर लेंगे। और सरकार-जी ने किया भी, रेस्क्यू किया। छात्रों को बाहर निकाला। यूक्रेन से नहीं, पोलैंड, हंगरी और रोमानिया से बाहर निकाला। पहले आत्मनिर्भर बनो, फिर सरकार-जी मदद करेंगे। यूक्रेन से स्वयं निकलो, पोलैंड, हंगरी या रोमानिया से सरकार-जी निकाल लेंगे।

सरकार-जी में एक और खासियत है। सरकार-जी जानते हैं कि घमंड करना व्यक्ति को नीचे गिराता है। घमंड चारित्रिक पतन की निशानी है। आपके मन में यह भावना आना कि यह काम मैंने किया, किसी चीज का श्रेय स्वयं अपने को देना, घमंड को जन्म देता है। और सरकार-जी नहीं चाहते हैं कि उनके नागरिक घमंड कर पतित हों, नर्क के भागी बनें। तो सरकार-जी सभी चीजों का श्रेय खुद ही ले लेते हैं। घमंड रूपी विष स्वयं पी अपने नागरिकों को इससे दूर ही रखते हैं। तो उन्होंने छात्रों को निकालने का श्रेय भी खुद ही ले लिया। उन्होंने 'ऑपरेशन गंगा' किया और छात्रों को बाहर निकाल लिया।

सरकार-जी में एक और खासियत है जिसकी वजह से वे अद्वितीय हैं। वह है, जीते जी मोक्ष प्राप्त कर लेना। कोई दुख उन्हें दुखी नहीं कर सकता है। ऐसा सरकार-जी ही कर सकते हैं कि उधर छात्र मदद की गुहार लगा रहे हों और इधर सरकार-जी वाराणसी में डमरू बजा रहे हों। ऐसा सरकार-जी ही कर सकते हैं कि आठ नवंबर को नोटबंदी की घोषणा करें और बारह नवंबर को जापान में अपने नागरिकों का ही मजाक उड़ायें। एक ओर सात सौ से अधिक किसानों की मृत्यु से दुखी न हों और दूसरी ओर चुनाव हारने के डर से कानून वापस ले लें। ऐसे सरकार-जी मिलने मुश्किल ही नहीं असंभव हैं, जो लॉकडाउन में करोड़ों मजदूरों और अब हजारों छात्रों की पीड़ा से भी द्रवित न हों।

यह हमारे लिए एक सौभाग्य की ही बात है कि हमारे देश को ऐसे सरकार-जी मिले हैं जो स्वयं तो सारे गुणों से भरपूर हैं ही, हमें भी अवगुणों से दूर रखते हैं। जो सारा घमंड खुद कर लेते हैं और हमें घमंड से दूर रखते हैं। जो सारा श्रेय स्वयं ले लेते हैं और हमें श्रेय से दूर रखते हैं। उन्हें जीते जी मोक्ष प्राप्त है। धन्य भाग्य हैं हमारे और सारे देशवासियों के जो हमें ऐसे सरकार-जी मिले।

(इस व्यंग्य स्तंभ के लेखक पेशे से चिकित्सक हैं।)

Narendra modi
yogi sarkar
varanasi
sarcasm

Related Stories

ख़बरों के आगे-पीछे: राष्ट्रीय पार्टी के दर्ज़े के पास पहुँची आप पार्टी से लेकर मोदी की ‘भगवा टोपी’ तक

ख़बरों के आगे-पीछे: केजरीवाल मॉडल ऑफ़ गवर्नेंस से लेकर पंजाब के नए राजनीतिक युग तक

यूपी चुनावः सत्ता की आखिरी जंग में बीजेपी पर भारी पड़ी समाजवादी पार्टी

यूपी का रण: आख़िरी चरण में भी नहीं दिखा उत्साह, मोदी का बनारस और अखिलेश का आज़मगढ़ रहे काफ़ी सुस्त

यूपी चुनाव आख़िरी चरण : ग़ायब हुईं सड़क, बिजली-पानी की बातें, अब डमरू बजाकर मांगे जा रहे वोट

यूपी चुनाव : काशी का माँझी समाज योगी-मोदी के खिलाफ

बनारस का रण: मोदी का ग्रैंड मेगा शो बनाम अखिलेश की विजय यात्रा, भीड़ के मामले में किसने मारी बाज़ी?

ग्राउंड रिपोर्ट: जंगीपुर-ज़हूराबाद में आवारा पशु, बेरोज़गारी खा गई मोदी-योगी का प्रचार

यूपी चुनावः बनारस के सियासी अखाड़े में दिग्गजों पर भारी पड़ीं ममता, भाजपा को दे गईं गहरी चोट

यूपी का रणः मोदी के खिलाफ बगावत पर उतरे बनारस के अधिवक्ता, किसानों ने भी खोल दिया मोर्चा


बाकी खबरें

  • शुभेंदु और ममता
    न्यूज़क्लिक रिपोर्ट/भाषा
    राजनीति: अभी थमा नहीं है बंगाल का घमासान, नंदीग्राम से शुभेंदु के निर्वाचन को चुनौती, जज भी बदलने की मांग
    18 Jun 2021
    मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने विपक्ष के नेता शुभेंदु अधिकारी के नंदीग्राम विधानसभा सीट से चुनाव को चुनौती दी है, जिसपर सुनवाई के लिए 24 जून की तारीख़ तय हुई है, लेकिन इसी बीच ममता के वकील ने इस मामले की…
  • daily
    न्यूज़क्लिक टीम
    पेट्रोल की लूट, ओएफ़बी निगमीकरण के ख़िलाफ़ कर्मचारी और अन्य ख़बरें
    18 Jun 2021
    न्यूज़क्लिक के डेली राउंडअप में आज हम बात करेंगे पेट्रोल की सरकारी लूट, ओएफ़बी निगमीकरण और अन्य ख़बरों के बारे में।
  • ...बाक़ी कुछ बचा तो महंगाई मार गई
    पुलकित कुमार शर्मा
    ...बाक़ी कुछ बचा तो महंगाई मार गई
    18 Jun 2021
    यूं तो इस कोरोना काल में कुछ कहने लायक बचा नहीं और जो बचा था उसे भी महंगाई मार गई। दाल, साग-सब्ज़ी, फ़ल, अंडा, मांस, मछली, खाद्य तेल, डीजल, पेट्रोल और रसोई गैस आदि सभी चीजें आम आदमी की पहुंच से बाहर…
  • गुजरात : महिला स्वास्थ्यकर्मियों के यौन शोषण का आरोप कार्यस्थल पर महिलाओं की स्थिति दर्शाता है!
    सोनिया यादव
    गुजरात : महिला स्वास्थ्यकर्मियों के यौन शोषण का आरोप कार्यस्थल पर महिलाओं की स्थिति दर्शाता है!
    18 Jun 2021
    गुरु गोबिंद सिंह सरकारी अस्पताल की कुछ महिलाकर्मियों ने यौन उत्पीड़न का गंभीर आरोप लगाया है। उनका कहना है कि सुपरवाइजरों ने उन्हें सेवा से इसलिए हटा दिया, क्योंकि उन्होंने यौन संबंध बनाने के प्रस्ताव…
  • कोविड-19 के चलते अनाथ हुए बच्चों की स्तब्ध करती तादाद
    श्रावस्ती दत्ता
    कोविड-19 के चलते अनाथ हुए बच्चों की स्तब्ध करती तादाद
    18 Jun 2021
    विशेषज्ञ कहते हैं कि यह बाल संरक्षण की आपातकालीन स्थिति है, जिससे विपदाग्रस्त बच्चों के मसले को व्यवस्थित तरीके से हल करने की सख्त ज़रूरत है। 
  • Load More
सब्सक्राइब करें
हमसे जुडे
हमारे बारे में
हमसे संपर्क करें

CC BY-NC-ND This work is licensed under a Creative Commons Attribution-NonCommercial-NoDerivatives 4.0 International License