NewsClick

NewsClick
  • English
  • राजनीति
  • अर्थव्यवस्था
  • विज्ञान
  • संस्कृति
  • भारत
  • अंतरराष्ट्रीय
  • हमारे लेख
  • हमारे वीडियो
search
menu

सदस्यता लें, समर्थन करें

image/svg+xml
  • सारे लेख
  • न्यूज़क्लिक लेख
  • सारे वीडियो
  • न्यूज़क्लिक वीडियो
  • राजनीति
  • अर्थव्यवस्था
  • विज्ञान
  • संस्कृति
  • भारत
  • अंतरराष्ट्रीय
  • अफ्रीका
  • लैटिन अमेरिका
  • फिलिस्तीन
  • नेपाल
  • पाकिस्तान
  • श्री लंका
  • अमेरिका
  • एशिया के बाकी
हमारे बारे में
हमसे संपर्क करें
सब्सक्राइब करें
हमारा अनुसरण करो Facebook - Newsclick Twitter - Newsclick RSS - Newsclick
close menu
भारत
राजनीति
अर्थव्यवस्था
उर्जित पटेल के इस्तीफे का मतलब.
अब सवाल यह उठता है कि उर्जित पटेल के इस्तीफे के बाद क्या होगा? क्या धारा 7 के तहत सरकार के इशारे पर अरबीआई चलेगा? आर्थिक मामलों के जानकार एम के वेणु कहते हैं कि अब से लेकर 2019 के चुनाव तक आरबीआई सरकार के इशारे पर ही चलेगा।
अजय कुमार
11 Dec 2018
उर्जित पटेल
साभार क्विंट

लोकतंत्र में जितनी अहमियत सरकार की होती है उससे कहीं ज्यादा अहमियत संस्थाओं की होती है। सरकारें आती और जाती रहती हैं लेकिन संस्थाओं की बदौलत लोकतंत्र चलता रहता है। इसलिए आज का दिन अगर पांच राज्यों के चुनाव के नतीजों के लिए अहमियत रखता है तो उर्जित पटेल का आरबीआई गवर्नर के पद से इस्तीफा देना भी एक अहम खबर है।

साल 1990 के बाद पहली बार ऐसा हुआ है कि अरबीआई गवर्नर को अपने कार्यकाल के बीच में इस्तीफा देना पड़ा है। उर्जित पटेल ने अपने त्यागपत्र में कहा कि “निजी कारणों की वजह से तुरंत ही मैंने इस्तीफ़ा लेने का फैसला किया है।” लेकिन सच्चाई सिर्फ़ इतनी ही नहीं है जितनी उर्जित पटेल द्वारा बताई जा रही है। इस सच्चाई के धागे पकड़ने हैं तो आज से तकरीबन एक महीने पीछे जाना होगा, जब देश के इतिहास में पहली बार सरकार द्वारा आरबीआई के खिलाफ आरबीआई की धारा 7 का इस्तेमाल किया गया था। धारा 7 का मतलब है कि आरबीआई को अपनी स्वायत्तता को सरकार के अधीन गिरवी रखना होगा और जिस तरह से सरकार सलाह देगी उस तरह से अरबीआई को काम करना पड़ेगा।

सरकार ने धारा 7 का इस्तेमाल अचानक नहीं किया था। धारा 7 का इस्तेमाल सरकार ने तब किया जब सरकार को यह लगा कि आरबीआई सरकार की बातें नहीं मान रहा है। वही आरबीआई जिसने नोटबंदी जैसे कदम पर चुप्पी साध ली थी, वही आरबीआई जिसने नोटबंदी से जुड़ी संसदीय रिपोर्ट पर बहुत दिनों तक  कुछ नहीं कहा था, वही आरबीआई जिसने मुख्य सुचना आयुक्त द्वारा आदेश दिए जाने के बाद भी उन लोगों का नाम जनता के सामने प्रस्तुत नहीं किया, जिनके नाम पर बैंकों के सबसे अधिक कर्जे बकाये थे। इन सारे मामलों के समय उर्जित पटेल ही आरबीआई के अध्यक्ष थे और इन सारे मामलों में चुप रहकर सरकार का सहयोग दे रहे थे। इसलिए कहने वाले यह भी कह रहे हैं कि उर्जित पटेल आरबीआई को बचाने के नाम पर शहीद नहीं हो रहे हैं बल्कि इसलिए अपने पद से इस्तीफ़ा दे रहे हैं क्योंकि मूल तौर पर एक अर्थशास्त्री के नाते उन्हें पता है कि जब सरकार के रहमों करम पर आरबीआई मौद्रिक नीति और बैंकों के रेगुलेशन का काम करेगी तो अर्थव्यवस्था की लुटिया डूब जायेगी और लुटिया डूबने की सारी जिम्मेदारी आरबीआई अध्यक्ष होने के नाते उर्जित पटेल पर आएगी। इसी वजह से सरकार के दबाव को कम करने के लिए उर्जित पटेल के इशारे पर आरबीआई के डिप्टी गवर्नर विमल आचार्य ने एक लेक्चर में वह सारी बातें कह डाली, जिसमें सरकार के अडंगा डालने की वजह से आरबीआई को परेशानी होने लगी थी, जैसे पब्लिक बैंकों की बढ़ते हुए डूबत कर्ज की जिम्मेदारी आरबीआई पर डालना जबकि सरकारी बैंकों का मालिकाना हक सरकार के पास होता है, बीमार बैंकों को बचाने के लिए आरबीआई, बीमार बैंकों के कामकाज पर कुछ प्रतिबन्ध लगाती है ताकि बीमार बैंकों को डूबने से बचाया जा सके जबकि सरकार चाहती है कि आरबीआई बैंकों से इन प्रतिबंधों को हटाये, इसके साथ सरकार आरबीआई पर दबाव डाल रही है कि आरबीआई अपने पास जमा नकद राशि (रिजर्व कैश) का इस्तेमाल करने का हक सरकार को दे। ऐसे बहुत सारी बातें थी, जिसपर विमल आचार्य ने खुलकर अपनी राय रखी।  

इस लेक्चर के बाद यह बात सार्वजनिक हो गयी आरबीआई और सरकार के बीच सबकुछ सही नहीं चल रहा है। विवाद गहरा हो चला है और इस विवाद के सामाधान के लिए नवम्बर 19 को आरबीआई और सरकार के बीच बातचीत होगी। लेकिन इस बातचीत में कुछ भी निकलकर सामने नहीं आया। जो भी निकलकर सामने आया, वह एक रणनीति के तहत 5 राज्यों के चुनावी नतीजों के एक दिन पहले आया, ताकि सरकार में सत्तारूढ़ दल चुनाव के नतीजों की आड़ में संस्थाओ की बर्बादी के खबर को बचा ले। और इस मुद्दे को जनमत का हिस्सा ना बनने दे।

इस सरकार ने अपनी वर्चस्ववादी राजनीतिक सोच की तरह आर्थिक क्षेत्र को भी चलाने की कोशिश की है, इसका सबसे बड़ा सबूत यह है कि आर्थिक क्षेत्र से जुड़े मुख्य पदों के लोगों ने ऐसे कारण बताकर इस्तीफे दिए है, जिसे पचा पाना मुश्किल है। जैसे मुख्य आर्थिक सलाहकार अरविन्द सुब्रह्मण्यम का निजी कारणों की वजह से दिया गया इस्तीफा और अभी सोमवार को ही नीति आयोग के सलाहकार सदस्य सुरजीत भल्ला द्वारा दिया गया इस्तीफ़ा।

अब सवाल यह उठता है कि उर्जित पटेल के इस्तीफे के बाद क्या होगा? क्या धारा 7 के तहत सरकार के इशारे पर अरबीआई चलेगा? आर्थिक मामलों के जानकार एम के वेणु कहते हैं कि अब से लेकर 2019 के चुनाव तक आरबीआई सरकार के इशारे पर ही चलेगा। इस दौरान वैश्विक बाजार का भारतीय अर्थव्यवस्था पर भरोसा कम होगा। ऐसा भी हो सकता विदेशी संस्थानात्मक निवेश (एफआईआई) में कमी आये अथवा ऐसा निवेश भारत से बाहर जाए। सरकार अगर आरबीआई के नकद जमा राशि का इस्तेमाल अपने फायदे के लिए करती है तो भारतीय बैंकों पर किया जाने वाले भरोसा पूरी तरह चरमरा जाएगा। ऐसे में विमल आचर्य की वह बात भी सटीक लगती है कि अर्जेंटीना की सरकार ने अपने रिज़र्व बैंक का पैसा इस्तेमाल किया और अर्जेंटीना की अर्थव्यवस्था पूरी तरह से चरमरा गयी। ठीक ऐसी ही हालत भारत की भी हो सकती है। वेणु कहते हैं कि आरबीआई भारत की अन्य संस्थाएं जैसे कि सीवीसी, सीबीआई, सीआईसी जैसी संस्थाओं से अलग है। इन संस्थाओं का प्रभाव केवल घरेलू स्तर तक रहता है लेकिन आरबीआई को बर्बाद करने का मतलब है कि विश्व स्तर पर भारतीय बाजार और निवेश की क्षमताओं को कम करना।

 

 

 

 

RBI
urjit patel
RBI Governor Urjit Patel
sec 7 of rbi
resiganation of urjit patel
NPA

Related Stories

लंबे समय के बाद RBI द्वारा की गई रेपो रेट में बढ़ोतरी का क्या मतलब है?

आम आदमी जाए तो कहाँ जाए!

महंगाई 17 महीने के सबसे ऊंचे स्तर पर, लगातार तीसरे महीने पार हुई RBI की ऊपरी सीमा

रिपोर्टर्स कलेक्टिव का खुलासा: कैसे उद्योगपतियों के फ़ायदे के लिए RBI के काम में हस्तक्षेप करती रही सरकार, बढ़ती गई महंगाई 

आज़ादी के बाद पहली बार RBI पर लगा दूसरे देशों को फायदा पहुंचाने का आरोप: रिपोर्टर्स कलेक्टिव

RBI कंज्यूमर कॉन्फिडेंस सर्वे: अर्थव्यवस्था से टूटता उपभोक्ताओं का भरोसा

बैंक निजीकरण का खेल

नोटबंदी: पांच साल में इस 'मास्टर स्ट्रोक’ ने अर्थव्यवस्था को तबाह कर दिया

तबाही मचाने वाली नोटबंदी के पांच साल बाद भी परेशान है जनता

नोटबंदी की मार


बाकी खबरें

  • bhasha singh
    भाषा सिंह
    बात बोलेगी: सावित्री बाई फुले को याद करना, मतलब बुल्ली बाई की विकृत सोच पर हमला बोलना
    03 Jan 2022
    सवाल यह है कि जिन लोगों ने, सावित्री बाई फुले के ऊपर कीचड़ डाला था, उनके ख़िलाफ गंदी-अश्लील टिप्पणी की थी, वे 2022 में कहां हैं। वे पहले से अधिक खूंखार हो गये हैं, पहले से ज्यादा बड़े अपराधी—जिन्हें…
  • stop
    सोनिया यादव
    ‘बुल्ली बाई’: महिलाओं ने ‘ट्रोल’ करने के ख़िलाफ़ खोला मोर्चा
    03 Jan 2022
    मुस्लिम महिलाओं को ‘ट्रोल’ करने की कोशिश के बीच विपक्ष के साथ-साथ महिला संगठनों और आम लोगों ने सोशल मीडिया पर इस मामले में सरकार और पुलिस की सक्रियता और कार्रवाई पर गंभीर सवाल उठाए हैं।
  • covid
    न्यूज़क्लिक रिपोर्ट
    पटनाः एनएमसीएच के 84 डॉक्टर कोरोना पॉज़िटिव, मरीज़ों में कोरोना चेन बनने का ख़तरा
    03 Jan 2022
    एनएमसीएच में डॉक्टरों समेत 194 लोगों का सैंपल लिया गया था। 84 डॉक्टरों की रिपोर्ट पॉजिटिव आने के बाद आशंका बढ़ गई है कि अस्पताल के कई मेडिकल स्टॉफ भी चपेट में आ सकते हैं।
  • jharkhand
    अनिल अंशुमन
    झारखंड : जारी है एचईसी मज़दूरों की हड़ताल, साथ आए सभी विपक्षी दल
    03 Jan 2022
    एचईसी के मज़दूरों के टूल डाउन और हड़ताल को एक महीना हो गया है और अभी भी वो जारी है, ऐसा एचईसी के इतिहास में पहली बार हुआ है।
  • covid
    ऋचा चिंतन
    नहीं पूरा हुआ वयस्कों के पूर्ण टीकाकरण का लक्ष्य, केवल 63% को लगा कोरोना टीका
    03 Jan 2022
    पहले केंद्र ने दिसंबर 2021 के अंत तक भारत में सभी वयस्क आबादी के पूर्ण टीकाकरण के लक्ष्य को हासिल कर लेने का लक्ष्य घोषित किया था। जबकि हकीकत यह है कि करीब 9.73 करोड़ वयस्कों को अभी भी दोनों खुराक दी…
  • Load More
सब्सक्राइब करें
हमसे जुडे
हमारे बारे में
हमसे संपर्क करें

CC BY-NC-ND This work is licensed under a Creative Commons Attribution-NonCommercial-NoDerivatives 4.0 International License