'इतिहास के पन्ने' के इस अंक में वरिष्ठ पत्रकार और लेखक नीलांजन मुखोपाध्याय चर्चा कर रहे हैं आज़ादी की लड़ाई के दौरान हुए उन आंदोलनों की जिन्हें खड़े होने में एक स्थापित राजनीतिक नेतृत्व की ज़रूरत…
हफ्ते की बात के नये अंक में चार प्रमुख खबरों की समीक्षा: आखिर देश के प्रमुख विपक्षी दल किसान आंदोलन, रेल के किराये और तेल के दाम में आकाशचुंबी बढ़ोत्तरी जैसे बड़े मुद्दों पर उतने सक्रिय क्यों नहीं?…
दिल्ली की सरहदों समेत पूरे देश में किसान आंदोलन जारी है। “उन्हें मालूम था/ उनकी मुठभेड़/ ताक़त से है/ तब भी इंतज़ार है/ अच्छी ख़बर का”... वाकई अच्छी ख़बर का सबको इंतज़ार है। एक किसान से लेकर एक कवि तक…