NewsClick

NewsClick
  • English
  • राजनीति
  • अर्थव्यवस्था
  • विज्ञान
  • संस्कृति
  • भारत
  • अंतरराष्ट्रीय
  • हमारे लेख
  • हमारे वीडियो
search
menu

सदस्यता लें, समर्थन करें

image/svg+xml
  • सारे लेख
  • न्यूज़क्लिक लेख
  • सारे वीडियो
  • न्यूज़क्लिक वीडियो
  • राजनीति
  • अर्थव्यवस्था
  • विज्ञान
  • संस्कृति
  • भारत
  • अंतरराष्ट्रीय
  • अफ्रीका
  • लैटिन अमेरिका
  • फिलिस्तीन
  • नेपाल
  • पाकिस्तान
  • श्री लंका
  • अमेरिका
  • एशिया के बाकी
हमारे बारे में
हमसे संपर्क करें
सब्सक्राइब करें
हमारा अनुसरण करो Facebook - Newsclick Twitter - Newsclick RSS - Newsclick
close menu
भारत
राजनीति
जीतनराम माँझी के नाम खुला खत
वीरेन्द्र जैन
17 Sep 2015
प्रिय जीतनराम जी
पूर्व मुख्यमंत्री बिहार
पटना
 
आशा है कि इस समय तक आप एनडीए से आपके दल को मिली सीटों पर चुनाव में जुट गये होगे।
 
मुझे आपका वह भविष्य दिख रहा है जो सम्भवतः आपको नहीं दिख रहा, इसलिए मुझे आप से सहानिभूति है। जो लोग इतिहास नहीं पढ पाते वे दूसरों की भूलों से सबक नहीं सीखते अपितु स्वयं अनुभव करके ही सीखते हैं। लगता है आप उसी प्रक्रिया में हैं। यही कारण है कि यह पत्र आपके किसी काम का नहीं पर इसके बहाने अगर दूसरे साक्षर लोग कुछ विचार कर सकें तो अच्छा होगा।
       
आँख द्वारा देखने के कुछ नियम होते हैं। आँखों के बहुत निकट किसी वस्तु के आ जाने पर भी वस्तु दिखायी नहीं देती, और बहुत दूर चले जाने पर भी यही हाल होता है। यही कारण है कि चुनावी राजनीति करने वाले, और चुनाव लड़ कर जमानत जब्त कराने वाले, सभी उम्मीदवार, डमी या ‘वोट कटउआ’ नहीं होते। उनमें से कुछ तो सचमुच इस भ्रम में रहते हैं कि वे जीत जाएंगे जबकि उनके अलावा शेष सब जानते हैं कि उनकी जमानत जब्त होने वाली है, और वह होती भी है। प्रत्येक चुनाव में ऐसे कई हजार उम्मीदवार उतरते हैं और अपनी कमाई झौंकते हैं।
                                                                                                                          
 
उम्मीद है कि आगामी बिहार विधानसभा चुनाव में अगर भाजपा ने चाहा तो आप और आपके कथित दल के दो-चार लोग चुनाव जीत सकते हैं। [ मैं आपके दल का नाम जानता हूं किंतु कथित दल इसलिए कह रहा हूं कि उस नाम का कोई मतलब नहीं व यह भी जानता हूं कि वह क्या है और क्यों बना] यह तय है कि अगर भाजपा चुनाव जीतने की स्थिति में होगी तो वह आपको चुनाव हरा कर आपकी राजनीति को हमेशा के लिए समाप्त करना चाहेगी जिससे आपकी जाति का वोट और विधायक उनमें समाहित हो सकें। इसकी शुरुआत तो उन्होंने इस योजना से ही कर दी है कि आपकी पार्टी के पाँच उम्मीदवार उनके टिकिट पर चुनाव लड़ें, जिसे आपने झुक कर स्वीकार कर लिया है। इस स्वीकार से उन्हें आपकी रीढ की लोच का पता लग गया है। किसी शायर ने कहा है कि ‘नाज है उनको बहुत सब्र मुहब्बत में किया, पूछिए सब्र न करते तो और क्या करते’। आपके पास उनकी हर बात मानने के अलावा दूसरा कोई उपाय भी तो नहीं है।
 
सच तो यह है कि आपकी आज की हैसियत नितीश कुमार की एक गलत चाल का परिणाम है। जब मोदी का विरोध करके नितीश ने भाजपा को गठबन्धन से बाहर किया तो उन्हें उम्मीद थी कि मुस्लिम वोटों के समर्थन से वे बिहार में लोकसभा चुनाव जीत जाएंगे, किंतु पाँसा उल्टा पड़ा। भाजपा के चुनावी प्रबन्धकों द्वारा बहाये गये धन, गठबन्धन और दलबदलुओं की दम पर भाजपा ने चुनाव जीत लिया। हार के बाद अपनी छवि के लिए नितीश ने आपको अस्थायी मुख्यमंत्री पद सौंप कर समझा था कि आप उनकी खड़ाऊँ से शासन करेंगे, और उपकृत होंगे। कुछ महीनों तक आपने यह किया भी किंतु आपको यह कुर्सी और मुख्यमंत्री निवास के आम व लीची ऐसी भा गयी कि आप भाजपा की चाल में फँस गये और यह समझ बैठे कि अब तक आपको पानी पी पी कर कोसने वाली पार्टी आपको मुख्यमंत्री बनाये रखना चाहती है। काश आपने भाजपा के इतिहास को ठीक से जाना होता कि प्रत्येक संविद या संयुक्त मोर्चा सरकार में आगे बढ कर सम्मिलित होने वाली इस पार्टी के जन्मदाताओं का अपना एजेंडा है व उसने हमेशा ही अपने सहयोगियों को सीड़ी बनाया है और उनको कुतर कुतर कर हजम किया है। देश की पहली गैर काँग्रेस सरकार उनकी इसी हरकत के कारण टूटी थी। उनका आज जो अस्तित्व है वह उनकी इसी कूटनीति के कारण है। देश में दलबदल का खेल उन्होंने ही शुरू किया और बढाया है। देश में जो भी दलितों के उत्थान के विरोधी हैं, वे सभी इस पार्टी के समर्थक हैं, इससे इसका चरित्र प्रकट होता है।
 
क्या भाजपा द्वारा मुख्यमंत्री के रूप में आपको समर्थन देना विचित्र नहीं लगा था! हो सकता है आपको नहीं लगा हो किंतु पूरे देश के लोगों को आपकी समझ के स्तर और भाजपा के कुतर्क समझ में आ रहे थे। आपके खिलाफ आये अविश्वास प्रस्ताव के समय जो महादलित का तर्क दे रहे थे उन्हें चुनाव के समय महादलित का तर्क याद नहीं आया और आपको मुख्यमंत्री प्रत्याशी घोषित करने की बात नहीं की। दूसरी ओर एनडीए के अन्य सारे घटकों को आपसे अधिक सीटें देकर उन्होंने बता दिया कि वे आपका कद कितना आँकते हैं। उन्हीं की पार्टी के वरिष्ठ सांसद शत्रुघ्न सिन्हा आपके प्रतिद्वन्दी रामविलास पासवान को सर्वोत्तम मुख्यमंत्री उम्मीदवार मान रहे हैं।
 
जीतनराम जी जातिवादी बिहार में आप विधान सभा की दो चार सीटें जीत कर मंत्री पद पा लेने वाले व्यक्ति तो हो सकते थे किंतु कभी भी मुख्यमंत्री मटेरियल न थे, और न हो सकते हैं। दुखद यह है आपको जिस संगठन ने किसी रणनीति की तरह मौका दिया था आपने उसी को धोखा दिया। इससे आपकी जाति के मतदाताओं को कुछ समय के लिए आप पर गर्व जरूर हुआ होगा किंतु दूसरे मतदाताओं के बीच आपकी छवि अच्छी नहीं बनी है। आपकी निर्भरता आपको बनाने वालों पर रही इसलिए भी आप ऐसा कुछ नहीं कर सके जिससे आपके व्यक्तित्व का कोई गुण उभर कर सामने आ पाता। अब आप और आपकी जाति के लोगों का समर्थन भाजपा के लिए है, पर भाजपा आपके व्यक्तित्व में कुछ भी जोड़ने नहीं जा रही है। भविष्य में आप कहीं दया और कहीं हँसी के पात्र समझे जाने वाले हैं।
पुरानी कहावत है – आधी छोड़ सारी खों धावै,  आधी मिलै, न सारी पावै । सनद रहे तथा वक्त जरूरत काम आवै।
 
डिस्क्लेमर:- उपर्युक्त लेख में वक्त किए गए विचार लेखक के व्यक्तिगत हैं, और आवश्यक तौर पर न्यूज़क्लिक के विचारों को नहीं दर्शाते ।
जीतनराम माँझी
नितीश कुमार
बिहार चुनाव
भाजपा
नरेन्द्र मोदी

Related Stories

#श्रमिकहड़ताल : शौक नहीं मज़बूरी है..

पेट्रोल और डीज़ल के बढ़ते दामों 10 सितम्बर को भारत बंद

आपकी चुप्पी बता रहा है कि आपके लिए राष्ट्र का मतलब जमीन का टुकड़ा है

अबकी बार, मॉबलिंचिग की सरकार; कितनी जाँच की दरकार!

आरक्षण खात्मे का षड्यंत्र: दलित-ओबीसी पर बड़ा प्रहार

झारखंड बंद: भूमि अधिग्रहण बिल में संशोधन के खिलाफ विपक्ष का संयुक्त विरोध

झारखण्ड भूमि अधिग्रहण संशोधन बिल, 2017: आदिवासी विरोधी भाजपा सरकार

यूपी: योगी सरकार में कई बीजेपी नेताओं पर भ्रष्टाचार के आरोप

मोदी के एक आदर्श गाँव की कहानी

क्या भाजपा शासित असम में भारतीय नागरिकों से छीनी जा रही है उनकी नागरिकता?


बाकी खबरें

  • लव पुरी
    क्या यही समय है असली कश्मीर फाइल को सबके सामने लाने का?
    04 Apr 2022
    कश्मीर के संदर्भ से जुडी हुई कई बारीकियों को समझना पिछले तीस वर्षों की उथल-पुथल को समझने का सही तरीका है।
  • लाल बहादुर सिंह
    मुद्दा: क्या विपक्ष सत्तारूढ़ दल का वैचारिक-राजनीतिक पर्दाफ़ाश करते हुए काउंटर नैरेटिव खड़ा कर पाएगा
    04 Apr 2022
    आज यक्ष-प्रश्न यही है कि विधानसभा चुनाव में उभरी अपनी कमजोरियों से उबरते हुए क्या विपक्ष जनता की बेहतरी और बदलाव की आकांक्षा को स्वर दे पाएगा और अगले राउंड में बाजी पलट पायेगा?
  • अनिल अंशुमन
    बिहार: विधानसभा स्पीकर और नीतीश सरकार की मनमानी के ख़िलाफ़ भाकपा माले का राज्यव्यापी विरोध
    04 Apr 2022
    भाकपा माले विधायकों को सदन से मार्शल आउट कराये जाने तथा राज्य में गिरती कानून व्यवस्था और बढ़ते अपराधों के विरोध में 3 अप्रैल को माले ने राज्यव्यापी प्रतिवाद अभियान चलाया
  • न्यूज़क्लिक रिपोर्ट
    कोरोना अपडेट: देश में एक हज़ार से भी कम नए मामले, 13 मरीज़ों की मौत
    04 Apr 2022
    देश में एक्टिव मामलों की संख्या घटकर 0.03 फ़ीसदी यानी 12 हज़ार 597 हो गयी है।
  • भाषा
    श्रीलंका के कैबिनेट मंत्रियों ने तत्काल प्रभाव से इस्तीफा दिया
    04 Apr 2022
    राजनीतिक विशेषज्ञों ने कहा कि विदेशी मुद्रा भंडार में कमी के कारण पैदा हुए आर्थिक संकट से सरकार द्वारा कथित रूप से ‘‘गलत तरीके से निपटे जाने’’ को लेकर मंत्रियों पर जनता का भारी दबाव था।
  • Load More
सब्सक्राइब करें
हमसे जुडे
हमारे बारे में
हमसे संपर्क करें

CC BY-NC-ND This work is licensed under a Creative Commons Attribution-NonCommercial-NoDerivatives 4.0 International License