NewsClick

NewsClick
  • English
  • राजनीति
  • अर्थव्यवस्था
  • विज्ञान
  • संस्कृति
  • भारत
  • अंतरराष्ट्रीय
  • हमारे लेख
  • हमारे वीडियो
search
menu

सदस्यता लें, समर्थन करें

image/svg+xml
  • सारे लेख
  • न्यूज़क्लिक लेख
  • सारे वीडियो
  • न्यूज़क्लिक वीडियो
  • राजनीति
  • अर्थव्यवस्था
  • विज्ञान
  • संस्कृति
  • भारत
  • अंतरराष्ट्रीय
  • अफ्रीका
  • लैटिन अमेरिका
  • फिलिस्तीन
  • नेपाल
  • पाकिस्तान
  • श्री लंका
  • अमेरिका
  • एशिया के बाकी
हमारे बारे में
हमसे संपर्क करें
सब्सक्राइब करें
हमारा अनुसरण करो Facebook - Newsclick Twitter - Newsclick RSS - Newsclick
close menu
नज़रिया
भारत
राजनीति
क्या अक्षय कुमार का प्रधानमंत्री मोदी का इंटरव्यू पेड न्यूज़ नहीं है?
भारत के प्रधानमंत्री को बताना चाहिए कि यह इंटरव्यू किसका था। ज़ी न्यूज़ का या एएनआई का। क्या सारे चैनलों ने एएनआई से पूछा कि इसे किसने शूट किया है? क्या ज़ी न्यूज़ प्रोपेगैंडा शूट कर, एडिट कर, सारे चैनलों को बांटेगा और सारे चैनल इसे चलाएंगे?
रवीश कुमार
27 Apr 2019
जी मीडिया की सीनियर टेक्निकल टीम के साथ पीएम मोदी और अक्षय कुमार
Image Courtesy: Quint Hindi

अक्षय कुमार ने प्रधानमंत्री का इंटरव्यू लिया। लेकिन इंटरव्यू के लिए कैमरा किसका था? तकनीकी सहयोग किसका था? क्या इंटरव्यू के अंत में किसी प्रोडक्शन कंपनी का क्रेडिट रोल आपने देखा? इन सवालों पर बात नहीं हो रही है। क्योंकि इन पर बात होगी तो जवाबदेही तय होगी। सोचिए ग़ैर राजनीति के नाम आप दर्शकों के भरोसे के साथ इतनी बड़ी राजनीति हो गई।

क्विंट वेबसाइट ने सूत्रों के आधार पर लिखा है कि अक्षय कुमार के प्रधानमंत्री मोदी के ग़ैर-राजनीतिक इंटरव्यू की तैयारी ज़ी न्यूज़ की संपादकीय टीम ने कराई। ज़ी की टीम ने शूट किया और पोस्ट प्रोडक्शन किया यानी एडिटिंग की।

जब सामग्री तैयार हो गई तो न्यूज़ एजेंसी ANI ने जारी कर दिया जिसे सारे चैनलों पर दिखाया गया। क्विंट की स्टोरी में ज़ी और ANI का पक्ष नहीं है।

यह सीधा सीधा पोलिटिकल प्रोपेगैंडा है। ज़ी न्यूज़ के तैयार कंटेंट को ANI से जारी करवा कर सारे चैनलों पर चलवाया गया। क्या सारे चैनलों को नहीं बताना था कि यह कटेंट किसका है? क्या एएनआई का है जो इसे जारी कर रहा है?

अगर आप मीडिया के इतिहास से वाक़िफ़ हैं तो इन बातों से सतर्क हो जाना चाहिए। प्रधानमंत्री मोदी के घोर समर्थक हैं, तब तो आपको और भी सतर्क होना चाहिए। क्या आप मोदी का सपोर्ट इसलिए करते हैं कि मीडिया आपकी आंखों में धूल झोंके। सपोर्ट आप करते हैं, मीडिया क्यों खेल करता है।

इस देश में दूरदर्शन की काबिल टीम है। उसने क्यों नहीं शूट किया और एडिट किया? प्रधानमंत्री को सरकारी संस्थानों में भरोसा नहीं है? वैसे एक पेशेवर के नाते बताना चाहूंगा कि अक्षय कुमार का बाल नरेंद्र का वीडियो वर्जन बहुत ही ख़राब शूट हुआ था। प्रधानमंत्री जहां बैठे हैं, उनके पीछे शीशे में टेक्निकल स्टाफ की छाया आ रही थी। बीच में कभी किसी का सर तो कभी किसी का हाथ आ जाता था। इससे अच्छा तो दूरदर्शन के कैमरामैन शूट कर देते।

कोई पूछने वाला नहीं है। विपक्ष में नैतिक बल नहीं है। डरपोक और कामचोर विपक्ष है। इस इंटरव्यू से संबंधित मूल सवाल उठने चाहिए थे।

क्या वाकई इसे ज़ी न्यूज़ की टीम ने शूट किया और इसकी एडिटिंग की? तो फिर यह ज़ी का प्रोग्राम हुआ। फिर यह बात क्यों नहीं ज़ाहिर की गई। क्या अंधेरे में रखकर सारे चैनलों को ज़ी न्यूज़ के बनाए कटेंट को दिखाने के लिए मजबूर किया गया? क्या अब आगे भी सबको ज़ी न्यूज़ ही कटेंट सप्लाई करेगा?

क्या यह इंटरव्यू पेड न्यूज़ के दायरे में नहीं आता है? ज़ी न्यूज़ के कई बिजनेस हैं। वह क्यों सारे चैनलों के लिए फ्री में कटेंट तैयार करेगा? क्या चुनाव बाद इसका लाभ मिलेगा?

अक्षय कुमार अपनी टीम लेकर आते तो कोई बात नहीं थी। क्विंट की साइट पर ज़ी न्यूज़ की टीम की तस्वीर है। एक प्राइवेट चैनल के साथ मिलकर शूटिंग प्लान किया गया और एक दूसरी एजेंसी से सारे चैनलों के लिए जारी किया गया मेरे हिसाब से यह अपराध है। नैतिक अपराध है।

भारत के प्रधानमंत्री को बताना चाहिए कि यह इंटरव्यू किसका था। ज़ी न्यूज़ का या एएनआई का। क्या सारे चैनलों ने एएनआई से पूछा कि इसे किसने शूट किया है? क्या ज़ी न्यूज़ प्रोपेगैंडा शूट कर, एडिट कर, सारे चैनलों को बांटेगा और सारे चैनल इसे चलाएंगे? क्या चैनलों में इतने भोले लोग काम करते हैं?

चुनाव आयोग स्वायत्त और निर्भीक संस्था की तरह काम नहीं कर रहा है। इस आयोग से उम्मीद बेकार है। वर्ना पेड न्यूज़ का यह मामला बनता है। प्रेस काउंसिल ऑफ इंडिया और संपादकों का समूह चुप है। निंदा ही करता है। ब्राडकास्ट एसोसिएशन का संगठन(NBSA) है। उससे शिकायत कीजिए। वहां भी कुछ नहीं होगा।

भारत की बड़ी समाचार एजेंसी एएनआई (ANI) का थॉम्पसन रॉयटर से करार है। सेना के अलग-अलग अंगों से रिटायर हुए अफसरों ने रॉयटर को पत्र लिखा है। बताया है कि उनकी भारतीय सहयोगी ANI ने सेना के राजनीतिकरण के खिलाफ़ बोलने की उनकी मंशा को बदनाम करने का प्रयास किया है। उन्होंने लिखा है कि हम मानते हैं कि ANI ने भारत की सत्ताधारी पार्टी की तरफ से उनके बयानों को गलत संदर्भ में पेश किया है। ANI ने इन आरोपों को आधारहीन बताया है।

12 अप्रैल को 150 से अधिक सेना के अफसरों ने राष्ट्रपति को पत्र लिखा था। कहा था कि लोकसभा के चुनाव में सेना का राजनीतिकरण हो रहा है। उस दिन ANI ने कहा कि इस पर हस्ताक्षर करने वाले दो पूर्व अफसर पूर्व सेनाध्यक्ष जनरल सुनीथ फ्रांसिस रोड्रिग्स और पूर्व वायु सेनाध्यक्ष एन सी सूरी ने दस्तख़त से इंकार किया है और कहा है कि उनकी सहमति नहीं ली गई। यह ख़बर हर जगह छपी है और दिखाई गई।

थाम्पसन से पूछा गया है कि वह अपने साझीदार के संपादकीय आचरणों का मूल्यांकन कैसे करेंगे। स्क्रॉल पर इस न्यूज़ को विस्तार से पढ़ सकते हैं।

मीडिया में जो हो रहा है उसे आप भाजपा समर्थक या विरोधी के नाते ख़ारिज़ मत कीजिए। मीडिया मोदी को चुनाव जीतवाने में ही मदद नहीं कर रहा बल्कि चुनाव के बाद आपकी हार का इंतज़ाम कर रहा है। मीडिया और अपने राजनीतिक समर्थन को अलग रखिए। आपकी आंखों के सामने जो बर्बाद हो रहा है, उस चमन को आखिरी बार ठीक से देख लो यारों। यह इतना भी मुश्किल सवाल नहीं कि आप पूछ न सकें। आपका यह डर भारत की जनता की हार है।

(रवीश कुमार वरिष्ठ पत्रकार और मशहूर टीवी एंकर हैं। उनकी यह टिप्पणी उनके आधिकारिक फेसबुक पेज से साभार ली गई है।)

ravish kumar
modi-akshay kumar
Modi's Interview
2019 आम चुनाव
2019 Lok Sabha elections
MODEL CODE OF CONDUCT
election commission of India

Related Stories

क्या नेहरू युवा केंद्र के 300 प्रोग्राम कोर्डिनेटर निकाले जा रहे हैं?

झारखंड : ‘अदृश्य’ चुनावी लहर कर न सकी आदिवासी मुद्दों को बेअसर!

विपक्ष की 100 ग़लतियों से आगे 101वीं बात

लोकसभा चुनाव के स्तर में इतनी गिरावट का जिम्मेदार कौन?

लेखक-कलाकारों की फ़ासीवाद-विरोधी सक्रियता के लिए भी याद रखा जाएगा ये चुनाव

वाह, मोदी जी वाह...! भक्ति की भक्ति, राजनीति की राजनीति

क्या ये एक चुनाव का मामला है? न...आप ग़लतफ़हमी में हैं

मायावती ने मोदी लहर को दबा दिया

जटिल चुनावी परिदृश्य में छिपी चिंताएं

चुनाव 2019; उत्तर प्रदेश : न ‘मोदी शोर’, न ‘मोदी लहर’


बाकी खबरें

  • bhasha singh
    भाषा सिंह
    बात बोलेगी: सावित्री बाई फुले को याद करना, मतलब बुल्ली बाई की विकृत सोच पर हमला बोलना
    03 Jan 2022
    सवाल यह है कि जिन लोगों ने, सावित्री बाई फुले के ऊपर कीचड़ डाला था, उनके ख़िलाफ गंदी-अश्लील टिप्पणी की थी, वे 2022 में कहां हैं। वे पहले से अधिक खूंखार हो गये हैं, पहले से ज्यादा बड़े अपराधी—जिन्हें…
  • stop
    सोनिया यादव
    ‘बुल्ली बाई’: महिलाओं ने ‘ट्रोल’ करने के ख़िलाफ़ खोला मोर्चा
    03 Jan 2022
    मुस्लिम महिलाओं को ‘ट्रोल’ करने की कोशिश के बीच विपक्ष के साथ-साथ महिला संगठनों और आम लोगों ने सोशल मीडिया पर इस मामले में सरकार और पुलिस की सक्रियता और कार्रवाई पर गंभीर सवाल उठाए हैं।
  • covid
    न्यूज़क्लिक रिपोर्ट
    पटनाः एनएमसीएच के 84 डॉक्टर कोरोना पॉज़िटिव, मरीज़ों में कोरोना चेन बनने का ख़तरा
    03 Jan 2022
    एनएमसीएच में डॉक्टरों समेत 194 लोगों का सैंपल लिया गया था। 84 डॉक्टरों की रिपोर्ट पॉजिटिव आने के बाद आशंका बढ़ गई है कि अस्पताल के कई मेडिकल स्टॉफ भी चपेट में आ सकते हैं।
  • jharkhand
    अनिल अंशुमन
    झारखंड : जारी है एचईसी मज़दूरों की हड़ताल, साथ आए सभी विपक्षी दल
    03 Jan 2022
    एचईसी के मज़दूरों के टूल डाउन और हड़ताल को एक महीना हो गया है और अभी भी वो जारी है, ऐसा एचईसी के इतिहास में पहली बार हुआ है।
  • covid
    ऋचा चिंतन
    नहीं पूरा हुआ वयस्कों के पूर्ण टीकाकरण का लक्ष्य, केवल 63% को लगा कोरोना टीका
    03 Jan 2022
    पहले केंद्र ने दिसंबर 2021 के अंत तक भारत में सभी वयस्क आबादी के पूर्ण टीकाकरण के लक्ष्य को हासिल कर लेने का लक्ष्य घोषित किया था। जबकि हकीकत यह है कि करीब 9.73 करोड़ वयस्कों को अभी भी दोनों खुराक दी…
  • Load More
सब्सक्राइब करें
हमसे जुडे
हमारे बारे में
हमसे संपर्क करें

CC BY-NC-ND This work is licensed under a Creative Commons Attribution-NonCommercial-NoDerivatives 4.0 International License