NewsClick

NewsClick
  • English
  • राजनीति
  • अर्थव्यवस्था
  • विज्ञान
  • संस्कृति
  • भारत
  • अंतरराष्ट्रीय
  • हमारे लेख
  • हमारे वीडियो
search
menu

सदस्यता लें, समर्थन करें

image/svg+xml
  • सारे लेख
  • न्यूज़क्लिक लेख
  • सारे वीडियो
  • न्यूज़क्लिक वीडियो
  • राजनीति
  • अर्थव्यवस्था
  • विज्ञान
  • संस्कृति
  • भारत
  • अंतरराष्ट्रीय
  • अफ्रीका
  • लैटिन अमेरिका
  • फिलिस्तीन
  • नेपाल
  • पाकिस्तान
  • श्री लंका
  • अमेरिका
  • एशिया के बाकी
हमारे बारे में
हमसे संपर्क करें
सब्सक्राइब करें
हमारा अनुसरण करो Facebook - Newsclick Twitter - Newsclick RSS - Newsclick
close menu
नज़रिया
भारत
राजनीति
लोकतंत्र में मज़ाक़ या लोकतंत्र का मज़ाक़!
राजनीति के इस दौर को हम भद्दे या क्रूर मज़ाक़ों का दौर कह सकते हैं।
सत्यम् तिवारी
06 May 2019
लोकतंत्र में मज़ाक़ या लोकतंत्र का मज़ाक़!
सांकेतिक तस्वीर

नरेंद्र मोदी ने एक  बार अपने एक ट्वीट में लिखा था कि हमें और व्यंग्य और मज़ाक़ की ज़रूरत है। मज़ाक़ सबसे बड़ी दवा है।

I think we need more satire and humour. Humour brings happiness in our lives. Humour is the best healer: PM @narendramodi

— PMO India (@PMOIndia) January 14, 2017

 

अगर पिछले पाँच सालों को देखा जाए तो पता चलता है कि नरेंद्र मोदी ने अपनी इस बात को खुद बहुत गंभीरता से ग्रहण किया है। और न केवल ग्रहण किया है, बल्कि इस पर बा-कायदगी से अमल भी किया है। अपने भाषणों से, अपनी नीतियों से मोदीजी ने देश ही को एक मज़ाक के तौर पर देखने का काम किया है।

भाषणों की बात करना यहाँ बेहद ज़रूरी है। जिस तरह की बातें हमारे प्रधानमंत्री ने की हैं, उन्हें सुनने से किसी को भी गुरेज होना लाज़मी है। सोनिया गांधी को "50 करोड़ की विधवा" कहना, डिस्लेक्सिया से पीड़ित बच्चों का मज़ाक उड़ाना, और भाषणों में लगातार विरोधी पार्टियों पर निजी हमले करना मोदीजी की यूएसपी रहा है। उनके द्वारा बोले गए झूठों की बात की जाए तो फ़ेहरिस्त लंबी हो जाएगी। अगर कोई इतिहासकार कई सालों के बाद भारत की राजनीति का इतिहास लिखेगा/लिखेगी और प्रधानमंत्री पद की गरिमा की बात करेगा तो उसमें नरेंद्र मोदी का दौर शायद इस पद की गरिमा कम करने के लिए याद किया जाए।

राजनीति के इस दौर को हम भद्दे या क्रूर मज़ाक़ों का दौर कह सकते हैं। 

चुनावों का लगभग आधा दौर बीत चुका है। इन चुनावों को हर कोई बहुत महत्वपूर्ण चुनाव का नाम दे रहा है, जिसकी वजह है पिछले पाँच साल की बीजेपी की सरकार। बीजेपी की सरकार की नीतियों की वजह से उनकी बेहद आलोचना होती रही है, और एक बड़ा वर्ग इस बार बीजेपी के विरोध में खड़ा दिखाई देता है। जाहिर तौर पर ये सरकार जिन मुद्दों के बल पर सत्ता में आई थी, उनको लागू करने में नाकाम रही है, बल्कि सिर्फ़ एक जुमलों की सरकार बन के रह गई है।

मोदीजी ने पूरे पाँच सालों में ऐसे हथकंडे अपनाए हैं जिनसे जनता को असली मुद्दों से गुमराह किया जा सके। और उनका ये स्व-प्रचार चुनावों के दौरान भी जारी है। पाँच साल तक एक भी प्रेस कॉन्फ्रेंस न करने वाले मोदीजी अब लगातार चैनलों को इंटरव्यू दे रहे हैं, और उनमें जिस तरह के सवाल पूछे जा रहे हैं वो बे-मानी हैं।

ये एक नीति के तहत चलता दिखाई देता है। जब मोदीजी अपने मनपसंद चैनल को इंटरव्यू दे कर ये साबित करने की कोशिश करते हैं कि वो जनता के सवालों को सुन रहे हैं, तब दरअसल वो इस फ़िराक में रहते हैं कि कुछ ऐसा कह दें जिससे कि सारा विपक्ष उस एक बात पर अपना सारा ध्यान लगा दे, और असली मुद्दों पर कोई सवाल न पूछे। उदाहरण के लिए मोदीजी का पकौड़े वाला बयान, ये बयान इतना हास्यास्पद था कि इसे सिरे से ख़ारिज कर देना चाहिए था, बेरोज़गारी की बढ़ती दर पर सवाल करने चाहिए थे, लेकिन सबने उनके एक भद्दे मज़ाक को और आगे बढ़ाया और उसे और भद्दा बनाने में लग गए।

अंग्रेज़ी में एक टर्म है "चीप पब्लिसिटी" यानी सस्ता प्रचार, हल्की बातें बोल के चर्चा में बने रहना। देखा गया है कि बीजेपी और मोदीजी इस विधा में माहिर हैं। जब विपक्ष उनके इस छोटे-छोटे जुमलों को चुटकुला बना कर पेश करता है, तो दरअसल वो उनके इस जाल में फँसता चला जाता है, और असली मुद्दों से भटक जाता है, जो कि सरकार का मक़सद है।

5 सालों से सरकार ने छोटे-छोटे जुमले लगातार फेंके हैं, और सारे विपक्ष को उसमें उलझाने का काम किया है। इससे हुआ ये है, कि बीजेपी की सरकार और मोदीजी नोटबंदी बचा ले गए, जीएसटी बचा ले गए, सारी हिंसा बचा ले गए, बेरोज़गारी बचा ले गए, और इसी तरह के हालात रहे तो जनता हित के सारे मुद्दों का चुटकुला बना कर 2019 का चुनाव भी बचा ले जाएंगे। 

इसलिए सरकार ख़ासकर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को ये समझने की ज़रूरत है कि लोकतंत्र में मज़ाक तो हो सकता है लेकिन लोकतंत्र का मज़ाक नहीं बनाया जा सकता। इसी के साथ विपक्ष को, सरकार विरोधियों और आलोचना करने वाले लोगों के एक बड़े हिस्से को भी ये समझने की ज़रूरत है कि जब सरकार से सवाल पूछने, उसकी नीतियों की आलोचना करने की बात आती है, तो उसे चुटकुलों में उड़ाया नहीं जा सकता। मुद्दों को चुटकुला समझने का काम इस सरकार ने ब-ख़ूबी किया है, अगर इसका मुक़ाबला करना है, तो संवेदनशीलता और गंभीरता से करना होगा। 

(ये लेखक के निजी विचार हैं।)

Narendra modi
Prime Minister Narendra Modi
opposition
Congress
humor in democracy
personal attacks on politicians

Related Stories

PM की इतनी बेअदबी क्यों कर रहे हैं CM? आख़िर कौन है ज़िम्मेदार?

ख़बरों के आगे-पीछे: मोदी और शी जिनपिंग के “निज़ी” रिश्तों से लेकर विदेशी कंपनियों के भारत छोड़ने तक

ख़बरों के आगे-पीछे: केजरीवाल के ‘गुजरात प्लान’ से लेकर रिजर्व बैंक तक

यूपी में संघ-भाजपा की बदलती रणनीति : लोकतांत्रिक ताकतों की बढ़ती चुनौती

बात बोलेगी: मुंह को लगा नफ़रत का ख़ून

ख़बरों के आगे-पीछे: क्या अब दोबारा आ गया है LIC बेचने का वक्त?

ख़बरों के आगे-पीछे: गुजरात में मोदी के चुनावी प्रचार से लेकर यूपी में मायावती-भाजपा की दोस्ती पर..

ख़बरों के आगे-पीछे: पंजाब में राघव चड्ढा की भूमिका से लेकर सोनिया गांधी की चुनौतियों तक..

ख़बरों के आगे-पीछे: राष्ट्रीय पार्टी के दर्ज़े के पास पहुँची आप पार्टी से लेकर मोदी की ‘भगवा टोपी’ तक

कश्मीर फाइल्स: आपके आंसू सेलेक्टिव हैं संघी महाराज, कभी बहते हैं, और अक्सर नहीं बहते


बाकी खबरें

  • 21-year-old Muslim youth hanged himself from one and a half feet high tap
    न्यूज़क्लिक रिपोर्ट
    डेढ़ फ़ीट ऊंचे नल से फांसी लगाई 21 साल के मुस्लिम युवक ने : उत्तर प्रदेश पुलिस का दावा
    11 Nov 2021
    उत्तर प्रदेश के कासगंज में पुलिस हिरासत में 21 साल के अल्ताफ़ की मौत हो गई। पुलिस का कहना है कि अल्ताफ़ ने शौचालय के नल से लटक कर फांसी लगा ली। मृतक के पिता का सीधा आरोप है कि उनके बेटे की हत्या हुई है…
  • UAPA
    अजय कुमार
    UAPA: भारत में कानून के राज को तोड़ने का सबसे धारदार हथियार
    11 Nov 2021
    अगर सरकार चाहें तो UAPA कानून के ज़रिये महज़ आरोप लगाकर लोगों को सालों साल जेल में रख सकती है, जानिए कैसे? 
  • ASHA Workers
    अब्दुल अलीम जाफ़री
    यूपी: शाहजहांपुर में प्रदर्शनकारी आशा कार्यकर्ताओं को पुलिस ने पीटा, यूनियन ने दी टीकाकरण अभियान के बहिष्कार की धमकी
    11 Nov 2021
    पुलिस के बयान के उलट आशा कार्यकर्ताओं का कहना था कि उन्हें उस समय हिरासत में लिया गया, जब वे उस रैली की ओर मार्च कर रही थीं, जहां मुख्यमंत्री सभा को सम्बोधित कर रहे थे और मुख्यमंत्री के दौरे के पूरा…
  • कितने जायज़ हैं फिल्म 'जय भीम' पर उठते सवाल
    न्यूज़क्लिक टीम
    कितने जायज़ हैं फिल्म 'जय भीम' पर उठते सवाल
    10 Nov 2021
    फिल्म निर्देशक टी जे ज्ञानवेल और सूर्या-ज्योतिका द्वारा निर्मित तमिल फिल्म 'जय भीम' की प्रोफेशनल और आर्थिक कामयाबी पर किसी को संदेह नहीं। यह फिल्म लोकप्रियता के रिकार्ड बना रही है. तमिल से लेकर…
  • पेक्सलोविड: Covid-19 के ख़िलाफ़ एक और दवाई और इसके मायने
    पेक्सलोविड: Covid-19 के ख़िलाफ़ एक और दवाई और इसके मायने
    10 Nov 2021
    आज हम डॉ. सत्यजीत के साथ फाइजर की एंटीवायरल दवा पेक्सलोविड के बारे में चर्चा करेंगे, यह भी समझने की कोशिश करेंगे कि कैसे यह Covid-19 ख़िलाफ़ एक सार्थक विकल्प हो सकता है।
  • Load More
सब्सक्राइब करें
हमसे जुडे
हमारे बारे में
हमसे संपर्क करें

CC BY-NC-ND This work is licensed under a Creative Commons Attribution-NonCommercial-NoDerivatives 4.0 International License